छत्तीसगढ़ में कांग्रेस जीती तो कौन बनेगा सीएम, क्या कहते हैं भूपेश बघेल?

- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इस पर वो स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कह सकते. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि चुनाव उन्हीं के चेहरे पर लड़ा गया है.
चुनावी नतीजों के चंद दिनों पहले भूपेश बघेल दिल्ली में कांग्रेस पार्टी की एक बैठक में शामिल होने आए थे.
कांग्रेस की जीत होने पर मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस बात पर पार्टी की ओर से खुलकर कुछ न बोले जाने के सवाल पर भूपेश बघेल ने कहा ये हाईकमान का अधिकार क्षेत्र है और वही इस पर नतीजों के बाद फ़ैसला लेगा.
चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री के चेहरे के सवाल पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि इसका फ़ैसला विधायक और हाई कमान लेंगे.
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का चुनाव प्रचार 'भूपेश हैं तो भरोसा है' के नारे से शुरू हुआ था, लेकिन बाद में ये नारा 'कांग्रेस है तो भरोसा है' में बदल गया.
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बीबीसी के दिल्ली स्टूडियो में हमसे बातचीत करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि चुनाव तो उनके चेहरे को सामने रखकर लड़ा गया है. उन्होंने कहा कि 'भूपेश हैं तो भरोसा है' का नारा जनता का था.
पूरे चुनाव प्रचार में भूपेश बघेल को लेकर 'कक्का अभी ज़िंदा' के नारे लगते रहे.
लेकिन भूपेश बघेल का कहना था कि वो पार्टी के केवल एक कार्यकर्ता हैं और ख़ुद से किस तरह से पूछ सकते हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा या नहीं.
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के एक अन्य शीर्ष नेता टीएस सिंहदेव ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा है कि मुख्यमंत्री के पद के लिए जब नाम सामने आएगा, तो भूपेश बघेल पंक्ति में सबसे पहले खड़े होंगे.
टीएस सिंहदेव और भूपेश बघेल के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान की ख़बरें बार-बार सामने आती रही हैं.
छत्तीसगढ़ में सात और 17 नवंबर को दो चरणों में मतदान हुआ है और मतगणना तीन दिसंबर को होगी.

ईडी और छापों पर क्या बोले?
बीबीसी से बातचीत में सीएम बघेल ने क़रीबी लोगों पर ईडी और इनकम टैक्स के छापों को लेकर कहा है कि उन्हें लगता है कि ये सिलसिला लोकसभा चुनावों तक जारी रहेगा.
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लोगों को मन से ईडी का डर समाप्त हो गया है.
चुनाव प्रचार के बीच ही ईडी ने प्रेस रिलीज़ जारी करके कहा था कि एजेंसी ने दो लोगों को पकड़ा है, जिनसे पूछताछ और एक के ईमेल की जाँच के बाद बड़े पैमाने पर पैसों के लेन-देन की बात सामने आई है.
ईडी ने ये बात सट्टे से जुड़े ऐप महादेव को लेकर कही. ये भी आरोप लगाया गया कि लगता है कि ऐप चलाने वाली कंपनी ने मुख्यमंत्री बघेल को 502 करोड़ दिए हैं.
भूपेश बघेल ने सवाल किया कि केंद्र सरकार महादेव ऐप पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगा रही है?
उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि कंपनी और उन लोगों के बीच किसी तरह की साँठ-गाँठ है.
17 नवंबर को राज्य में दूसरे चरण के मतदान की समाप्ति के बाद मुख्यमंत्री ने क्या-क्या किया, इस सवाल पर भूपेश बघेल का कहना था कि पहले तो उन्होंने महीनों की बची हुई नींद ली, फिर कुछ समय परिवार और मित्रों को साथ बिताया.
ये पूछे जाने पर कि क्या वो कहीं घूमने गए, उनका कहना था कि वो राजस्थान और छत्तीसगगढ़ के चुनावी दौरे पर गए थे. दोनों सूबों को लेकर उनका दावा है कि वहाँ कांग्रेस की सरकार बनेगी.

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'राजनीतिक साजिश था झीरम घाटी हमला'
झीरम घाटी नक्सली हमले के संदर्भ में भूपेश बघेल ने कहा कि उन्हें केंद्रीय जाँच एजेंसी एनआईए पर बिल्कुल भरोसा नहीं है.
दरअसल 2013 में बस्तर में चुनावी यात्रा में शामिल होकर लौट रहे एक क़ाफ़िले पर हमला हुआ था, जिसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हो गई थी.
भूपेश बघेल झीरम घाटी हमले को 'राजनीतिक साज़िश' कहते हैं.
हमने मुख्यमंत्री बघेल से पूछा कि आख़िर 10 साल पुराने नक्सली हमले को वो राजनीतिक साज़िश क्यों कह रहे हैं? और, क्या वजह है कि झीरम घाटी हमले की जाँच को लेकर राज्य और केंद्र सरकार में तनाव इस क़दर बढ़ गया है कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया?
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ़्ते एनआईए की ओर से दाख़िल एक याचिका को ख़ारिज कर दिया.
याचिका में छत्तीसगढ़ पुलिस को साज़िश के एंगल से जाँच करने से रोकने की बात कही गई थी.
एनआईए का तर्क था कि जब इसकी जाँच केंद्रीय एजेंसी कर रही है, तो साज़िश के दृष्टिकोण की छानबीन भी उसे ही करनी चाहिए.
वहीं छत्तीसगढ़ सरकार के वकील का कहना था कि शासन ने साज़िश वाले पहलू की जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी से करने की बात कही थी, लेकिन उसने इससे इनकार कर दिया था.

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बीबीसी से बातचीत में भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि हमले में जिस तरह कांग्रेसी नेताओं का एक-एक कर नाम पूछा गया और फिर उन्हें क़त्ल किया गया, वो नक्सलियों की कार्यशैली से बिल्कुल मेल नहीं खाता.
झीरम घाटी के हमले में राज्य कांग्रेस ईकाई के तत्कालीन अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व विपक्षी नेता महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत अन्य लोगों की मौत हो गई थी.
मुख्यमंत्री बघेल का कहना था कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की हत्या के बाद गोलीबारी भी बंद हो गई. उन्होंने कहा कि ये सारी बातें एक राजनीतिक षड्यंत्र की तरफ़ इशारा करती हैं इसलिए इस पहलू की जाँच की जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि अगर नतीजों के बाद राज्य में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनती है, तो वो झीरम घाटी हमले में राजनीतिक साज़िश के पहलू की जाँच को आगे बढ़ाएँगे.
घटना के समय राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी और रमन सिंह मुख्यमंत्री थे. हालाँकि केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह की सरकार सत्ता में थी.
तभी हमले की जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी को सौंपी गई थी.
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना था कि बाद में केंद्र में सरकार बदल गई और जाँच में उस तरह प्रगति नहीं हुई जिस तरह से होना चाहिए था.
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