हिंडनबर्ग रिपोर्ट: सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच से इस सवाल के जवाब का है इंतज़ार

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट दावा करती है कि सेबी की अध्यक्ष माधवी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की अदानी समूह से जुड़ी ऑफ़शोर कंपनियों में ‘हिस्सेदारी’ थी.

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इमेज कैप्शन, हिंडनबर्ग की रिपोर्ट दावा करती है कि सेबी की अध्यक्ष माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की अदानी समूह से जुड़ी ऑफ़शोर कंपनियों में ‘हिस्सेदारी’ थी.
    • Author, कीर्ति दुबे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

अमेरिका की शॉर्ट सेलिंग कंपनी हिंडनबर्ग ने शनिवार को एक रिपोर्ट जारी की.

इस रिपोर्ट में कहा गया कि शेयर बाज़ार के कारोबार पर नज़र रखने वाली संस्था सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया यानी सेबी की अध्यक्ष माधवी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की अदानी समूह से जुड़ी ऑफ़शोर कंपनियों में ‘हिस्सेदारी’ थी, इन कंपनियों के ज़रिए बाज़ार में हेरफेर की गई.

जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अदानी समूह ने ‘कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे बड़ा धोखा किया. टैक्स हैवन देशों (ऐसे देश जहाँ से निवेश करने पर टैक्स नहीं देना पड़ता या बहुत कम टैक्स देना पड़ता है) में कंपनियां बनाई गईं और इनके ज़रिए अदानी के शेयरों के दाम ग़लत तरीके से बढ़ाए गए.

हिंडनबर्ग की इस रिपोर्ट के बाद अदानी समूह की कंपनियों के शेयर मुंह के बल गिरे और अदानी समूह को भी बड़ा नुकसान हुआ. अदानी समूह के चेयरमैन गौतम अदानी ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी फ़र्म अदानी समूह को “दुर्भावना से प्रेरित हो कर निशाना बना रही है. इन आरोपों को अदानी ग्रुप ने ख़ारिज” किया है.

सुप्रीम कोर्ट के पैनल को सेबी का जवाब

इस साल मई में इस पैनल ने कोर्ट को दी गई रिपोर्ट में कहा कि बाजार नियामक सेबी अदानी मामले में कोई भी गड़बड़ी पता नहीं लगा सका.

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इमेज कैप्शन, इस साल मई में इस पैनल ने कोर्ट को दी गई रिपोर्ट में कहा कि बाजार नियामक सेबी अदानी मामले में कोई भी गड़बड़ी पता नहीं लगा सका.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई और कोर्ट ने छह लोगों का पैनल गठित किया. पैनल को निर्देश दिया गया कि वो इस मामले पर रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे.

इस साल मई में इस पैनल ने कोर्ट को दी गई रिपोर्ट में कहा कि बाजार नियामक सेबी अदानी मामले में कोई भी गड़बड़ी पता नहीं लगा सका.

173 पेज की रिपोर्ट में पैनल ने बताया कि सेबी का मानना है कि विदेशी निवेशकों के पोर्टफोलियों में ‘संदिग्ध रूप से कुछ गड़बड़ियां’ थीं लेकिन क्या और कैसे उल्लंघन हुआ इसका पता नहीं लग सका.

अब लगभग दो महीने बाद शनिवार को हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट आई है जो दावा करती है कि सेबी जिसे अदानी मामले में जांच करनी थी उसकी अध्यक्ष और उनके पति के अतीत में अदानी ग्रुप से जुड़ी ऑफशोर कंपनी में शेयर थे.

शॉर्ट सेलर फ़र्म का कहना है कि सेबी का “अदानी समूह में संदिग्ध विदेशी शेयरधारकों के ख़िलाफ़ सार्थक कार्रवाई करने में इच्छा की कमी का एक कारण ये भी हो सकता है."

माधबी बुच और उनके पति धवल बुच ने इस आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि सेबी के सामने ज़रूरत पड़ने पर हर तरह से डिस्कोलज़र दिए गए हैं.

एक जवाब का इंतज़ार

नई हिंडनबर्ग रिपोर्ट में लगे आरोपों पर अदानी ग्रुप ने दिया ये जवाब दिया है

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हिंडनबर्ग की ताज़ा रिपोर्ट के बाद जो सबसे बड़ा सवाल माधबी बुच से पूछा जा रहा है वो ये कि क्या अदानी ग्रुप मामले में जांच कर रही सेबी की टीम का हिस्सा थीं या नहीं?

इस सवाल का जवाब अब तक सेबी या माधबी बुच की ओर से साफ़-साफ़ नहीं दिया गया है.

हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सेबी प्रमुख माधबी बुच ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित छह सदस्यों के पैनल को अदानी मामले की जांच का ब्रीफ़ किया था. अगर ये सही है तो माधबी बुच बतौर सेबी प्रमुख जांच का हिस्सा थीं.

एक वरिष्ठ पत्रकार नाम ना ज़ाहिर करने की शर्त पर कहते हैं, “इस पूरे मामले के दो पहलू हैं- पहला ये कि माधबी बुच और धवल बुच ने एक निजी तौर पर एक कंपनी में निवेश किया जो वो खुद मान रहे हैं. दूसरा है सवाल जिसका जवाब नहीं मिल पा रहा है वो ये है कि क्या माधबी बुच ने अदानी मामले में जांच से खुद को अलग रखा था या नहीं. ”

जानकार मानते हैं कि अगर उन्हें पता था कि जिन कंपनी पर सवाल उठ रहे हैं उनमें अतीत में उनका निवेश था तो उन्हें इस सूरत में ख़ुद को जाँच से अलग रखना चाहिए. हालाँकि इस सवाल का साफ़ जवाब अब तक सामने नहीं आया है.

जानकार एक सवाल ये भी उठा रहे हैं कि जब बीते साल हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट सामने आई तो क्या उसके बाद सेबी प्रमुख की ओर से कोई डिस्कोलज़र दिया गया, क्योंकि इन विदेशी कंपनियों के ज़रिए मार्केट को मैनीपुलेट किया गया ये दावा हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में किया गया था.

हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट में क्या है?

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हिंडनबर्ग रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 में एक नॉन प्रॉफिट अदानी वॉच की एक रिपोर्ट में दावा था कि टैक्स हैवन देश बरमुडा की कंपनी ग्लोबल डायनामिक्स अपॉरच्यूनिटी फ़ंड उन कंपनियों में से एक है जिसके मालिक गौतम अदानी के भाई विनोद अदानी हैं.

कथित तौर पर इस कंपनी के ज़रिए स्टॉक मार्केट को कृत्रिम तरीके से तेज़ी लाने के लिए इस्तेमाल किया गया और अदानी ग्रुप के शेयरों की क़ीमत बढ़ाई गई.

ग्लोबल डायनामिक्स अपॉरच्यूनिटी फ़ंड ने मॉरीशस की कंपनी आईपीई प्लस में निवेश किया और इसके ज़रिए भारतीय स्टॉक बाजार में पैसे लगाए गए.

हिंडनबर्ग का आरोप है कि सेबी ने मॉरीशस और बरमुडा में अदानी ग्रुप से जुड़ी इन कंपनियों की जांच करने के मामले में ज्यादा रूचि नहीं दिखाई.

हिंडनबर्ग ने एक व्हिसिलब्लोअर के हवाले से हासिल किए गए दस्तावेज़ों के आधार पर दावा किया है, “सेबी की अध्यक्ष माधबी बुच और उनके पति धवल बुच के इन विदेशी कंपनी में शेयर थे. जिसका इस्तेमाल अदानी ग्रुप के शेयरों को खरीदने और बाजार को मैनीपुलेट करने में किया गया."

"जून 2015 में माधबी और धवल बुच ने आईपीई प्लस में पहली बार निवेश किया. ये साल 2017 में माधवी बुच के सेबी का सदस्य नियुक्त किए जाने के पहले किया गया था.”

लेकिन पत्नी माधबी की सेबी में नियुक्ति से ठीक पहले धवल बुच ने मॉरीशस की कंपनी के शेयर अपने नाम पर ट्रांसफर करवा लिए.

माधबी बुच ने क्या कहा?

शनिवार को हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में आरोप लगने के बाद बुच दंपति ने बयान जारी कर कहा कि ये निवेश उन्होंने सिंगापुर में प्राइवेट सिटीजन रहने हए किया था.

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इमेज कैप्शन, शनिवार को हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में आरोप लगने के बाद बुच दंपति ने बयान जारी कर कहा कि ये निवेश उन्होंने सिंगापुर में प्राइवेट सिटीजन रहने हए किया था.

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2018 में माधवी बुच ने अपने निजी जीमेल अकाउंट से मेल किया कि जीडीओफ़ में उनके पति की जो भी शेयरहोल्डिंग है उसे रिडीम किया जाए जानी बेच दिया जाए.

शनिवार को हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में आरोप लगने के बाद बुच दंपति ने बयान जारी कर कहा कि ये निवेश उन्होंने सिंगापुर में प्राइवेट सिटीजन रहते हुए किया था. उन्होंने इन कंपनियों में निवेश करने का फ़ैसला लिया क्योंकि धवल बुच के दोस्त अनिल आहूजा इन कंनियों के मुख्य निवेश अधिकारी थे.

अनिल आहूजा को लेकर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि वह साल 2017 तक अदानी इंटरप्राइजेज के डायरेक्टर थे. वह अदानी पावर के भी डायरेक्टर रह चुके हैं.

कुल मिलाकर हिंडनबर्ग रिपोर्ट में जो आरोप माधबी बुच पर लगाए गए हैं उनसे उन्होंने अपने बयान में इनकार नहीं किया है.

सेबी का बयान

सेबी ने हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट पर एक बयान जारी कर अपनी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है.

सेबी ने कहा है कि निवेशकों को शांति बनाए रखनी चाहिए और ऐसी रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देने से पहले उस जानकारी का सही से आकलन कर लेना चाहिए.

सेबी के मुताबिक़, “निवेशकों को पता होना चाहिए कि हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट में एक डिस्क्लेमर शामिल है, जिसमें कहा गया है कि कंपनी जिन बॉन्ड्स की चर्चा कर रही है, उनमें शॉर्ट पोज़िशन रख सकती है.”

सेबी ने कहा है कि अदानी समूह के मामले में सेबी ने 24 में से 23 जांचों को पूरा कर लिया है और आखिरी जांच भी लगभग पूरी होने वाली है.

सेबी के अनुसार उसने अदानी समूह को 100 से ज़्यादा समन लगभग 1,100 पत्र और ईमेल जारी किए हैं. इसके अलावा सेबी ने घरेलू और विदेशी नियामकों से 300 से ज़्यादा बार बातचीत की गई है. साथ ही 12,000 पन्नों के दस्तावेज़ों की समीक्षा भी की गई है.

विपक्ष हमलावर

राहुल गांधी

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इमेज कैप्शन, इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट से स्वतः सज्ञान लेने की बात कही है.

इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि हाल के वक्त में अधिक से अधिक लोग भारतीय शेयर मार्केट में अपनी कमाई लगा रहे हैं, और विपक्ष के नेता के तौर पर मेरी ये ज़िम्मेदारी है कि मैं उनके निवेश करने के जोखिम के मुद्दे को उठाऊं.

उन्होंने कहा, "ऐसा इसलिए क्योंकि स्टॉक मार्केट का नियमन करने वाली भारत की संस्था सेबी पर आरोप लग रहे हैं. लाखों लोगों की जमापूंजी ख़तरे में है इसलिए इस मामले की जांच की जानी चाहिए."

“इससे तीन बड़े सवाल उठते हैं. पहले ये कि आरोप लगने के बाद भी माधबी पुरी ने इस्तीफ़ा क्यों नहीं दिया."

"दूसरा, ईश्वर न करे अगर बाज़ार में कुछ गड़बड़ हुई और निवेशकों को अपना पैसा खोना पड़े तो इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा, सेबी चीफ़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर अदानी."

"तीसरा, ये मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट में है, अब गंभीर आरोप लगने के बाद क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले में भी स्वत: संज्ञान लेगा."

"अब से साफ़ हो रहा है कि पीएम मोदी इस पूरे मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराने को लेकर क्यों डर रहे हैं."

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि '' सेबी के चेयरपर्सन का अदानी समूह में निवेशक होना सेबी के लिए टकराव और सेबी पर कब्ज़ा दोनों है. कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि सेबी को भेजी गई सारी शिकायतें अनसुनी हो जाती हैं.''

महुआ मोइत्रा ने अपने एक और ट्वीट में लिखा है कि “इस चेयरपर्सन के नेतृत्व में सेबी की ओर से अदानी पर की जा रही किसी भी जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. यह सूचना सार्वजनिक होने के बाद सुप्रीम कोर्ट को अपने निर्णय पर दोबारा विचार करना चाहिए.”

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