हिंडनबर्ग क्या है और क्यों इसकी रिपोर्ट से मचती है बिज़नेस की दुनिया में उथल-पुथल

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इमेज कैप्शन, हिंडनबर्ग रिसर्च के संस्थापक नेट एंडरसन (फ़ाइल फ़ोटो)

अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में भारत में सिक्योरिटी मार्केट रेगुलटर (नियामक) सेबी की मौजूदा चेयरमैन माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया है.

पिछले 18 महीने में भारत के कारोबारी और वित्तीय बाज़ार में कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर जारी की गई उसकी ये दूसरी रिपोर्ट है.

इससे पहले जनवरी 2023 में इसने भारत के प्रमुख औद्योगिक घराने अदानी समूह पर रिपोर्ट जारी कर हलचल मचा दी थी.

आइए जानते हैं हिंडनबर्ग रिसर्च क्या है और ये क्या काम करती है और इससे अदानी समूह को कितना नुक़सान पहुंचा था.

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हिंडनबर्ग रिसर्च अमेरिकी रिसर्च कंपनी है. इसे नेट एंडरसन नाम के अमेरिकी नागरिक ने शुरू किया था.

कंपनी फॉरेंसिक फाइनेंस रिसर्च, वित्तीय अनियमितताओं की जांच और विश्लेषण.. अनैतिक कारोबारी तरीकों और गुप्त वित्तीय मामलों और लेनदेन की जांच करती है.

कंपनी का काम और उसका दावा

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इमेज कैप्शन, कंपनी के फाउंडर नेट एंडरसन खुद को एक एक्टिविस्ट शॉर्ट सेलर बताते हैं

कंपनी का एक प्रमुख काम शॉर्ट सेलिंग भी है. ये कंपनियों पर अपनी रिपोर्ट के ज़रिये उनमें अपनी पोजीशन बनाती है. इससे पता चल सकता है कि क्या कुछ कंपनियों के बाज़ार मूल्य में गिरावट आ सकती है.

कंपनी के फाउंडर नेट एंडरसन खुद को एक एक्टिविस्ट शॉर्ट सेलर बताते हैं.

हिंडनबर्ग रिसर्च 2017 से काम कर रही है और उसका दावा है कि उसने अब तक 16 ऐसी रिपोर्ट्स जारी की हैं, जिनमें अमेरिका की सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन के अलावा देश-विदेश की कंपनियों में गैरकानूनी लेनदेन और वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया गया है.

हिंडनबर्ग रिसर्च अफिरिया, परशिंग गोल्ड, निकोला और कुछ दूसरी नामी-गिरामी कंपनियों में वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करने का दावा करती है.

भारत में मचाई हलचल

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इमेज कैप्शन, 2023 में हिंडनबर्ग ने अदानी समूह के ख़िलाफ़ रिपोर्ट जारी की थी

भारत में ये तब चर्चा में आई जब इसने 24 जनवरी 2023 को देश के प्रमुख औद्योगिक घराने अदानी समूह के ख़िलाफ़ रिपोर्ट जारी की.

रिपोर्ट में कहा गया था कि अदानी समूह के मालिक गौतम अदानी ने 2020 से ही अपनी सात लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में हेरफेर के ज़रिये 100 अरब डॉलर कमा लिए हैं.

रिपोर्ट में गौतम अदानी के भाई विनोद अदानी पर भी गंभीर आरोप लगाए गए थे और कहा गया था कि वो 37 शैल कंपनियां चलाते हैं, जिनका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है.

अदानी समूह को कैसे पहुंचाया नुक़सान

अदानी समूह

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इमेज कैप्शन, हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से अदानी समूह की नेटवर्थ में 6.63 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई थी
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इस रिपोर्ट के बाद अदानी समूह की कंपनियों को 150 अरब डॉलर का नुक़सान हो गया था.

रिपोर्ट आने के एक ही महीने के भीतर अदानी की नेटवर्थ में 80 बिलियन डॉलर यानी 6.63 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की गिरावट आई थी.

हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के दस दिनों के भीतर वो रईसों की टॉप 20 लिस्ट से भी बाहर हो गए थे.

इसके अलावा गौतम अदानी को कंपनी के 20 हज़ार करोड़ रुपये के एफ़पीओ को भी रद्द करना पड़ा था. कंपनी भारी नुक़सान में चली गई थी.

इस रिपोर्ट ने भारत में राजनीतिक तूफान मचा दिया था. कंपनी की कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर संसद में सवाल पूछे गए. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.

3 जनवरी, 2024 को भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने अदानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के अनुरोधों को खारिज कर दिया.

कोर्ट ने पूंजी बाज़ार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) पर भरोसा जताया.

फैसले के बाद अदानी समूह के चेयरमैन गौतम अदानी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया था, "...सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पता चलता है कि सत्य की जीत हुई है... मैं उन लोगों का आभारी हूं जो हमारे साथ खड़े रहे. भारत की विकास गाथा में हमारा विनम्र योगदान जारी रहेगा."

हिंडनबर्ग अपने बारे में क्या कहती है?

बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, हिंडनबर्ग का दावा है कि हिंडनबर्ग रिसर्च कंपनी अपनी रिपोर्ट्स और दूसरी तरह की कार्रवाइयों से पहले भी कई कंपनियों के शेयर्स गिरा चुकी है.

अदानी से पहले हिंडनबर्ग का नाम जिस बड़ी कंपनी के साथ जुड़ा था वो थी- ट्रक कंपनी निकोला. ये मामला जब अदालत तक पहुंचा था, तब निकोला कंपनी के फाउंडर को दोषी पाया गया था.

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, हिंडनबर्ग ने साल 2020 के बाद से 30 कंपनियों की रिसर्च रिपोर्ट उजागर की है और रिपोर्ट रिलीज़ होने के अगले ही दिन उस कंपनी के शेयर औसतन 15 फ़ीसदी तक टूट गए.

रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले छह महीने में इन कंपनियों के शेयरों में औसतन 26 फ़ीसदी से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई.

हिंडनबर्ग नाम कहां से आया?

हिंडनबर्ग हादसे की तस्वीर

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बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी का नाम हिंडनबर्ग कहां से आया.

साल 1937. जर्मनी में हिटलर का राज था. इस दौर में एक एयरशिप था. नाम था- हिंडनबर्ग एयरशिप.

एयरशिप के पीछे नाज़ी दौर की गवाही देता स्वास्तिक बना हुआ था. अमेरिका के न्यूजर्सी में इस एयरशिप को ज़मीन से जो लोग देख रहे थे, उन्हें तभी कुछ असामान्य दिखा.

एक तेज़ धमाका हुआ और आसमान में दिख रहे हिंडनबर्ग एयरशिप में आग लग गई. लोगों के चीखने की आवाज़ें सुनाई देने लगीं. एयरशिप ज़मीन पर गिर गया. 30 सेकेंड से कम वक़्त में सब तबाह हो चुका था.

वहां मौजूद लोगों को बचाने के लिए कुछ लोग आगे बढ़े. कुछ लोगों को बचाया जा सका और कुछ को बचाने के लिए काफी देर हो चुकी थी.

जलते एयरशिप के धुएं ने आसमान को काला कर दिया था. अब जो बचा था, वो एयरशिप के अवशेष थे.

इस एयरशिप में 16 हाइड्रोजन गैस के गुब्बारे थे. एयरशिप में क़रीब 100 लोगों को जबरन बैठा दिया गया था और हादसे में 35 लोगों की जान चली गई थी.

माना जाता है कि हाईड्रोजन के गुब्बारों में पहले भी हादसे हुए थे, ऐसे में सबक लेते हुए इस हादसे से बचा जा सकता था.

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