सुपर मारियो ब्रदर्स: एक प्लम्बर से वीडियो गेम का आइकन बनने तक

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सुपर मारियो ब्रदर्स को रिलीज़ हुए 40 साल पूरे हो गए हैं.
यह पहली बार 1985 में जापान में निन्टेंडो एंटरटेनमेंट सिस्टम (एनईएस) पर रिलीज़ हुआ था.
तब से अब तक इस खेल की दुनिया भर में लगभग 4 करोड़ कॉपियाँ बिक चुकी हैं, जिससे यह अब तक के सबसे लोकप्रिय वीडियो गेम्स में से एक बन गया है.
मारियो 200 से ज़्यादा खेलों में दिखाई दिया है.
इनमें निन्टेंडो का ओरिजिनल मारियो ब्रदर्स (1983 में रिलीज़), उनके भाई लुइगी के साथ, और मारियो कार्ट सिरीज़ (1992 से) शामिल हैं.
मारियो के कारनामों ने कई पीढ़ियों के लिए सामान जैसे खिलौने, ट्रेडिंग कार्ड और डिज़ाइनर किमोनो, साथ ही नए एनिमेटेड फीचर फिल्म द सुपर मारियो ब्रदर्स मूवी, स्पिन-ऑफ़ और थीम पार्क जैसी चीज़ों को बनाने की राह दिखाई.
किसी भी अन्य वीडियो गेम किरदार की तुलना में, मारियो ने आर्केड गेम्स से निकलकर जल्दी ही एक घरेलू नाम और पॉप संस्कृति के प्रतीक के रूप में अपनी पहचान बनाई.
यह साहसी प्लम्बर, जिसने 8-बिट से शुरुआत की, आख़िरकार पूरी दुनिया का स्टार कैसे बन गया? और 40 साल बाद भी उसका जादू कैसे क़ायम है?
आइए देखें कि कैसे मारियो ने वीडियो गेम्स से लेकर हॉलीवुड तक का सफ़र तय किया?
गेम का नाम कैसे पड़ा 'मारियो'

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मारियो के लोकप्रियता की शुरुआत बेहद साधारण थी. वह पहली बार सुपर मारियो ब्रदर्स में नहीं, बल्कि आर्केड गेम डंकी कॉन्ग में नज़र आया था.
निन्टेंडो कलाकार शिगेरु मियामोतो के 1981 में विकसित इस गेम का विलेन एक विशालकाय गोरिल्ला था जिसके पास बड़ी संख्या में बैरल थे.
वहीं इसका हीरो सिर पर लाल टोपी और बॉयलर सूट पहने एक आदमी था. यह किरदार जंपमैन नाम का एक बढ़ई था और उसका मिशन अपनी प्रेमिका पॉलीन को बचाना था.
डंकी कॉन्ग में आने से पहले, इस किरदार को जापानी में 'ओसान' ('मध्यम आयु वर्ग का आदमी') था. बाद में इसका नाम 'मिस्टर वीडियो' रखा गया.
अंत में निन्टेंडो के अमेरिकी मुख्यालय के मालिक मारियो सेगाले के नाम पर इसे 'मारियो' कर दिया गया.
मारियो के निर्माता शिगेरु मियामोतो ने वैश्विक पॉप संस्कृति से प्रेरणा लेते हुए एक ऐसे नायक की कल्पना की जो विभिन्न खेलों में बार-बार छोटी-छोटी भूमिकाएं निभा सके, ठीक वैसे ही जैसे अल्फ़्रेड हिचकॉक अपनी निर्देशित फ़िल्मों में कैमियो करते थे.
मारियो मात्र 8-बिट का डिज़ाइन किया गया मोटा, चमकदार, एक विशिष्ट टोपी और मूंछों के साथ तुरंत पहचाना जाने वाला किरदार था.
मारियो ब्रदर्स (1983) की आर्केड रिलीज़ से पहले उसकी पहचान बदल दी गई. वह बढ़ई से एक इतालवी-अमेरिकी प्लंबर बन गया.
यह बदलाव खेल के पाइपों वाले परिदृश्य और मियामोतो के पश्चिमी कॉमिक्स के प्रति लगाव को दर्शाता था. इसके बावजूद गेम उतना ही सहज और सरल बना रहा.
सादगी का जादू

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मियामोतो ने 2015 में एनपीआर को दिए एक साक्षात्कार में बताया, "मुझे लगता है कि मारियो इतना लोकप्रिय इसलिए हुआ क्योंकि मारियो गेम में जो कुछ भी होता है, वह सामान्य तौर पर हर इंसान के साथ होता है."
"हर कोई ऊँचाई से गिरने से डरता है. अगर सामने कोई खाई है जिसे पार करना है, तो हर कोई दौड़कर उसे कूदने की कोशिश करेगा. अनुभवों की यह सादगी और किरदार को नियंत्रित करने की इंटरैक्टिव प्रकृति, साथ ही स्क्रीन पर उसका तुरंत असर देखना लोगों के दिलों को सचमुच छू गया."
मारियो साफ़ तौर पर एक 'हीरो' है, लेकिन उसका रूप-रंग समय-समय पर दिलचस्प तरीक़े से बदलता रहा है.
मारियो की बदलने वाली विशेषताएँ पहली बार सुपर मारियो ब्रदर्स (1985) में सामने आईं, जहाँ मशरूम किंगडम की चीज़ें उसे बड़ा बनातीं और नई शक्तियाँ देतीं हैं.
हर किरदार बेमिसाल

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तब से लेकर अब तक मारियो का हर किरदार बेमिसाल रहा है.
चाहे उड़ने वाला तनुकी (जापानी रैकून डॉग, सुपर मारियो ब्रदर्स 3, 1988) हो, सुपर मारियो गैलेक्सी (2007) में मधुमक्खी, या सुपर मारियो 3डी वर्ल्ड (2013) में बिल्ली का किरदार हो.
डॉ.मारियो (1990 के पज़ल गेम) से लेकर कलाकार और संगीतकार (मारियो पेंट, 1992) और एथलीट तक (रेसिंग, फ़ुटबॉल, टेनिस और निन्टेंडो/सेगा की क्रॉसओवर सिरीज़ मारियो एंड सोनिक एट द ओलंपिक गेम्स) उसकी भूमिकाएँ लगातार बदलती रहीं.
सुपर मारियो ओडिसी (2017) में तो यहाँ तक हुआ कि मारियो की टोपी को ही अलग जीवन मिल गया.
इस बीच मारियो का साथ निभाने वाले किरदारों का दायरा भी तेज़ी से बढ़ा है.
फिर चाहे ये किरदार अपने-अपने खेलों में मुख्य भूमिका में क्यों न आएँ? वे अंततः उसी से जुड़े होते हैं - भाई (लुइगी), साथी (प्रिंसेस पीच, योशी), या प्रतिद्वंद्वी (डंकी कॉन्ग, बाउज़र, वॉरियो).
मारियो का संगीत और साउंड इफ़ेक्ट्स भी खेल के लिए गेम-चेंजर साबित हुई हैं.
संगीतकार कोजी कोंडो की मशहूर धुनें और मूवमेंट इफेक्ट्स सुपर मारियो ब्रदर्स (1985) से ही उसकी हर यात्रा का हिस्सा रहे हैं.
वहीं अमेरिकी वॉइस ऐक्टर चार्ल्स मार्टिनेट ने उसके कार्टूननुमा कैचफ़्रेज़ ("लेट्स-अ-गो!") को लोकप्रिय बना दिया.
यहाँ तक कि पहले मारियो ब्रदर्स गेम में भी ऐसी छोटी-छोटी संगीत धुनें थीं, जो तुरंत मारियो को याद दिला देती हैं.
लंदन वीडियो गेम ऑर्केस्ट्रा के संस्थापक और संगीतकार गैलन वॉल्टकैंप-मून कहते हैं, "वह 'कॉइन ड्रॉप' साउंड, शायद बस दो बहुत ऊँचे नोट्स से बना है. यही इसे यादगार बनाता है."
वह आगे कहते हैं, "मारियो हमेशा आइकॉनिक दिखता था, भले ही लो-रेज़ पिक्सल आर्ट में क्यों न हो? मुझे याद है कि छह-सात साल की उम्र में मैं उसकी धुनें गुनगुनाता था, जो उस समय किसी और गेम के साथ मुमकिन नहीं था. यह संगीत हर उम्र के लिए सुलभ था, लगभग हर दूसरी बार में कुछ बदलता रहता था और दर्शकों को लगातार जोड़कर रखता था."
बड़े पर्दे पर छोटा किरदार

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वीडियो गेम के लोकप्रिय किरदारों को फ़िल्मी पर्दे पर उतारना अक्सर निर्माताओं के लिए बड़ा जोखिम साबित हुआ है. हालाँकि अब एक नई लहर देखने को मिल रही है.
हाल ही में बनी सोनिक द हेजहॉग जैसी फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर ख़ास कमाल नहीं दिखा सकीं और दर्शकों की नज़र में "फीकी" ही रहीं.
1993 में रिलीज़ हुई लाइव-एक्शन सुपर मारियो ब्रदर्स फ़िल्म बड़े पर्दे पर बुरी तरह फ़्लॉप साबित हुई.
इस फ़िल्म में जहाँ एक ओर शानदार कलाकारों की टीम और दूसरी ओर हाई-टेक विज़ुअल इफ़ेक्ट्स मौजूद थे.
मारियो का किरदार निभाने वाले मशहूर अभिनेता बॉब हॉस्किन्स ने साल 2007 में द गार्डियन को दिए एक इंटरव्यू में इसे अपने करियर की "सबसे बुरी फ़िल्म" करार दिया.
नई सुपर मारियो ब्रदर्स मूवी रिलीज़ से पहले ही विवादों में घिर गई है. फ़िल्म में मारियो के लिए हॉलीवुड स्टार क्रिस प्रैट की आवाज़ को लेकर फ़ैंस ने नाराज़गी जताई है.
हालाँकि फ़िल्म के सह-निर्देशक एरन हॉर्वाथ का कहना है कि इसमें कोई समस्या नहीं है और यह फ़िल्म की भावना के अनुरूप है.
उन्होंने टोटल फ़िल्म से बातचीत में कहा, "जब आप गेम खेलते हैं, अगर आप हार नहीं मानते, तो मारियो हमेशा जीतता है. हमने उसी अनुभव को इस फ़िल्मी मारियो के स्वभाव में उतारा है. क्रिस प्रैट एक ब्लू-कॉलर हीरो का रोल बहुत अच्छे से निभा लेते हैं, जिसमें दिल और जज़्बा दोनों है."
मारियो की मौजूदगी केवल गेम में ही नहीं, बल्कि इंटरनेट मीम्स से लेकर कॉन्सेप्चुअल आर्ट और ब्लॉकबस्टर प्रोजेक्ट्स तक हर जगह नज़र आती है.
अमेरिकी विज़ुअल आर्टिस्ट कोरी आर्कएंजल ने 2002 में अपनी इंस्टॉलेशन सुपर मारियो क्लाउड में सुपर मारियो वर्ल्ड गेम को ही नए तरीकडे से पेश किया.
वहीं, 2015 में सामीर अल-मुत्फ़ी नामक एक कलाकार ने "सीरियन सुपर मारियो" नाम का गेम बनाया, इसमें शरणार्थियों के संघर्ष और सुरक्षा पाने की चुनौतियों को दिखाया गया.
आज मारियो को दुनिया भर की बड़ी गैलरी और संस्थानों के संग्रह में जगह मिल रही है.
लंदन के यंग वीएंडए संग्रहालय के क्यूरेटर क्रिस्टियन वोलसिंग का कहना है कि मारियो को संग्रहालयों में शामिल किया जाना चाहिए.
बीबीसी कल्चर से उन्होंने कहा, "वीडियो गेम्स को भी अन्य माध्यमों की तरह उनके सांस्कृतिक प्रभाव के लिए पहचाना जाना चाहिए. 1980 के दशक की वीडियो गेम क्रांति से ही मारियो मौजूद रहा है और आज भी वह पहले से कहीं ज़्यादा लोकप्रिय है."
उन्होंने बीबीसी कल्चर से बातचीत में कहा, "1980 के दशक की वीडियो गेम क्रांति की शुरुआत से ही मारियो मौजूद रहा है और 40वीं वर्षगाँठ के क़रीब वह पहले से कहीं ज़्यादा लोकप्रिय है."
वोलसिंग का कहना है कि मारियो पूरी दुनिया में पहचाना जाता है, भले ही उसका किरदार एक तरह से "ख़ाली स्लेट" जैसा है. शानदार गेम डिज़ाइन का मक़सद हमेशा एक बेहतर अनुभव देना रहा है.
उन्होंने कहा कि सुपर मारियो मेकर (2015 में रिलीज़ हुआ गेम, जिसमें डिज़ाइन टूल्स भी हैं) इस विचार को आगे बढ़ाता है कि जो भी खिलाड़ी ये गेम खेलते हैं, वे पहले से जानते हैं कि ये कैसे काम करते हैं, क्योंकि वे इनके साथ गहराई से जुड़े रहते हैं.
मारियो के खेल ने अलग-अलग पीढ़ियों को एक साथ जोड़ा है. तेज़ी से बदलती इस दुनिया में वह एक स्थायी और परिचित दोस्त की तरह मौजूद है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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