ट्रंप के वो छह फ़ैसले जिन पर अदालतों ने लगाया ब्रेक

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20 जनवरी को जबसे डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में वापसी की है, उन्होंने अपने बदलाव वाले एजेंडे को तूफ़ानी रफ़्तार से आगे बढ़ाया है.
अमेरिकी सरकार के प्रमुख के तौर पर उन्होंने पहले ही दिन उन्होने जो बाइडन के बनाए नियमों को 78 शासकीय अध्यादेशों के मार्फ़त ख़त्म कर दिया.
तबसे, उन्होंने अपने एजेंडे को लागू करने के लिए जिन दर्जनों आदेशों को जारी किया है, वे अगर लागू होते हैं तो अमेरिका में कार्यपालिका के काम करने के तरीक़े और उनके आकार को ही नहीं बदलेंगे बल्कि सरकार के अन्य विभागों की शक्तियों पर भी असर डालेंगे.
उनके क़दमों का असर कुछ संवैधानिक अधिकारों पर भी पड़ेगा.
हालांकि उनके आदेशों को उनके कई समर्थक बड़े उत्साह से ले रहे हैं और इन आदेशों को चुनावों के दौरान किए गए वायदों को पूरा करने के रूप में देख रहे हैं.

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ट्रंप के इन क़दमों से अमेरिका में लाखों सरकारी कर्मचारी चिंतित हैं, जिन्हें अपनी नौकरी जाने का डर सता रहा है.
इसके अलावा हज़ारों कंपनियां, एनजीओ और कई लोगों में भी असमंजस है कि जो फ़ंड, कांट्रैक्ट और सहायता उन्हें मिल रही थी, वो जारी रहेगी या नहीं.
इन आदेशों ने कई लोगों और परिवारों के लिए भी मुश्किल खड़ी कर दी है जिनकी ज़िंदगी ट्रंप के एजेंडे से बुरी तरह प्रभावित है.
जैसे, बिना दस्तावेज़ के अमेरिका में रह रहीं प्रेग्नेंट महिलाएं, जिन्हें नहीं पता कि उनकी संतान को अमेरिकी नागरिकता मिलेगी भी या नहीं.
ट्रंप के आदेशों को अदालत में चुनौती

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ट्रंप के इन आदेशों में से कई को अदालत में चुनौती दी गई है. कम से कम छह आदेशों को देश के अलग अलग हिस्से में अदालतों ने निलंबित कर दिया है, जिसने ट्रंप प्रशासन में हताशा को पैदा किया है.
शनिवार को अमेरिकी उप राष्ट्रपित जेडी वेंस ने अपने ग़ुस्से को ज़ाहिर करते हुए कहा कि न्यायपालिका अपने फ़ैसलों से हद पार कर रही है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "जजों को कार्यपालिका की वैध शक्तियों को रोकने की इजाज़त नहीं है. अगर एक जज एक जनरल को बताए कि कैसे सैन्य अभियान चलाया जाए, तो यह ग़ैर क़ानूनी होगा."
और मंगलवार को डिपार्टमेंट ऑफ़ गवर्नमेंट एफ़िशिएंसी (डॉज) के प्रमुख और अरबपति एलन मस्क भी एक फ़ैसले के लिए एक जज को निशाने पर लिया.
मस्क ने एक्स पर लिखा, "एक जज को पूरी ज़िंदगी जज बने रहने देने का विचार, भले ही फैसले कितने बुरे हों, यह बहुत बकवास बात है. अब बहुत हो चुका."
इस बीच मंगलवार को ओवल ऑफ़िस में बात करते हुए ट्रंप ने खुद जजों की आलोचना की, "हो सकता है कि उन जजों की जांच करने की ज़रूरत हो."
ऐसे छह मामले हैं जिनमें अमेरिकी न्याय प्रणाली ने ट्रंप प्रशासन के फ़ैसलों को रोक दिया.


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ट्रंप जब 2016 में पहली बार व्हाइट हाउस पहुंचे थे तो अवैध आप्रवासन को रोकना उनका लक्ष्य था.
जब वह दूसरी बार राष्ट्रपति बने तो उनका पहला एजेंडा था बिना दस्तावेज वाले आप्रवासियों या टेंपरेरी वीज़ा पर अमेरिका में रह रहे विदेशियों के होने वाले बच्चों के जन्मसिद्ध नागरिकता के अधिकार को ख़त्म करना.
जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार, गृहयुद्ध के ख़त्म होने के बाद 1868 में अपनाए गए अमेरिकी संविधान के 14वें संसोधन में दिया गया था ताकि अमेरिका में आज़ाद किए गए पूर्व ग़ुलामों को नागरिकता दी जा सके.
साल 1898 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस बात मुहर लगाई कि यह अधिकार आप्रवासियों के बच्चों पर भी लागू होती है.
इस अधिकार को समाप्त करने के लिए ट्रंप ने जब शासकीय अध्यादेश जारी किया तो इसके ख़िलाफ़ देश की अलग अलग अदालतों में इसे चुनौती दी गई.
पहला फ़ैसला सीएटल के एक संघीय जज ने 23 जनवरी को दिया जिसमें इस आदेश पर अस्थाई रोक लगा दी गई.
ट्रंप के आदेश का बचाव करने वाले अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के वकील से जज जॉन कॉगनर ने कहा, "यह पूरी तरह ग़ैर संवैधानिक आदेश है."
इसके बाद मैरीलैंड के एक जज ने पूरे देश में ट्रंप के इस आदेश पर रोक लगा दी. जबकि 10 जनवरी को एक तीसरे जज ने ऐसा ही फ़ैसला सुनाया.


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जनवरी के अंत में ट्रंप प्रशासन ने 20 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों को एक नोटिस भेजा, जिसमें मुआवजे के तौर पर आठ महीने के वेतन के बदले, उन्हें स्वेच्छा से इस्तीफ़ा देने की पेशकश की गई थी.
इस पेशकश को स्वीकार करने की डेडलाइन छह फ़रवरी दी गई थी.
इस आदेश के ज़रिए व्हाइट हाउस नौकरशाही को छोटा करना चाहता है और उसने चेतावनी भी दी कि जिन्होंने यह पेशकश स्वीकार नहीं की उनकी नौकरी की कोई गारंटी नहीं है.
सरकार के इस क़दम पर सवाल खड़े हो गए थे क्योंकि शासकीय प्रक्रिया की व्यवहारिकता और इसकी वैधानिकता को लेकर संदेह था.
आलोचकों का कहना था कि जिस मुआवज़े की पेशकश की गई, उसका आधार वह फ़ंड है जिसे कांग्रेस से अभी मंज़ूरी भी नहीं मिली है.
सरकारी क्षेत्र की चार यूनियनों और 20 डेमोक्रेट वकीलों ने इसे कोर्ट में चुनौती दी. छह फ़रवरी को एक संघीय जज ने इसे लागू होने पर रोक लगा दी और पेशकश स्वीकार करने की समय सीमा भी बढ़ा दी.
10 फ़रवरी तक 65,000 अधिकारी इस ऑफ़र को स्वीकार कर चुके हैं.


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जबसे ट्रंप ने सत्ता संभाली है, यूनाइटेड स्टेट एजेंसी फ़ॉर इंटरनेशनल डिवेलपमेंट (यूएसएड) पर आशंका के बादल छा गए हैं.
नए प्रशासन ने यूएसएड के सभी तरह के सभी अंतरराष्ट्रीय सहायता कार्यक्रमों पर रोक लगा दी और अमेरिका से बाहर काम करने वाले सभी कर्मचारियों को वापस आने का आदेश देते हुए हज़ारों कर्मचारियों की नौकरी निलंबित कर दी थी.
सात फ़रवरी को एक संघीय जज ने ट्रंप प्रशासन की योजना पर तात्कालिक रोक लगा दी. इसके अलावा एलन मस्क के डिपार्टमेंट ऑफ़ गवर्नमेंट एफ़िशिएंसी की ओर से यूएसएड के 2,200 कर्मचारियों को निलंबित किए जाने पर भी रोक लगा दी.
जज कार्ल निकोलस ने उन 500 कर्मचारियों को भी काम पर लौटने का आदेश दिया जिन्हें पहले निलंबित किया गया था. साथ ही यह भी आदेश दिया कि अमेरिका से बाहर काम करने वाले यूएसएड के कर्मचारियों को 14 फ़रवरी की आधी रात से पहले नहीं बुलाया जा सकता.
कर्मचारी यूनियनों ने ट्रंप के आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी और कहा था कि ट्रंप प्रशासन यूएसएड में 14 हज़ार कर्मचारियों की छंटनी कर उनकी संख्या 300 तक लाना चाहता है.
यूएसएड के बारे में सात फ़रवरी को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था, "यूएसएड का खर्च पूरी तरह समझ से परे है. इसे बंद करा होगा."


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राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप प्रशासन ने संघीय अनुदान के तहत दी जाने वाली सैकड़ों अरब डॉलर की मदद और कर्ज़ पर रोक लगाने का आदेश जारी किया.
इस आदेश को ऑफ़िस ऑफ़ मैनेजमेंट एंड बजट की ओर से लागू किया गया, जिसने संघीय एजेंसियों को आदेश दिया कि 'सभी संघीय वित्तीय मदद या देनदारियों से संबंधित सभी गतिविधियों को अस्थायी तौर पर रोक लगा दी जाए.'
फ़ंड पाने वालों में ग़ैर लाभकारी और शोध संस्थाएं थीं, जो प्राकृतिक आपदा में मदद से लेकर कैंसर रिसर्च के क्षेत्र में काम करती थीं. इसके पीछे इन कार्यक्रमों की समीक्षा करने का तर्क दिया गया था.
28 जनवरी को जज लॉरेन अली ख़ान ने इस फ़ैसले पर अस्थाई रोक लगा दी.
डेमोक्रेट शासन वाले राज्यों ने मिलकर इसके ख़िलाफ़ एक और याचिका दायर की और इसे असंवैधानिक क़रार दिया.
कई राज्यों ने सरकारी स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम मेडीकेड के तहत मिलने वाले फ़ंड को निकालने में दिक्कत आने की बात कही है. जबकि व्हाइट ने कहा कि यह कार्यक्रम अभी लागू नहीं है और जल्द ही इस समस्या को हल किया जाएगा.
31 जनवरी को जज जॉन मैककोनेल ने ट्रंप प्रशासन के इस आदेश पर अस्थाई रोक लगा दी.
ऊहापोह और क़ानूनी कार्यवाही के चलते ट्रंप प्रशासन ने अपने आदेश को वापस ले लिया. ट्रंप की टीम ने कहा कि वह कोर्ट के आदेश के बाद पैदा हुई असमंजस की स्थिति को स्पष्ट करना चाहता है.
10 फ़रवरी को जज मैककोनेल ने कहा कि ट्रंप प्रशासन संघीय मदद बांटना जारी रखने में आदेश का उल्लंघन कर रहा है और इसके लिए कार्यपालिक पर कुछ पाबंदियां लगाई जा सकती हैं.
पांच पेज के अपने आदेश में जज मैककोनेल ने कहा कि बच्चों की शिक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और एचआईवी रोकथाम रिसर्च के लिए संघीय मदद में बाधा, उनके 31 जनवरी के आदेश का उल्लंघन है.


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पहले पहल जारी किए गए ट्रंप के आदेशों में जन्मजात लिंग के आधार पर जेंडर की पहचान को सीमित करना भी शामिल था.
इस संबंध में जेल प्रशासन को आदेश दिया गया कि वे ट्रांसजेंडर महिलाओँ को पुरुष जेलों में स्थानांतरित करें और उनकी हार्मोन थेरेपी को समाप्त किया जाए.
ट्रांसजेंडर अधिकार ग्रुपों ने इस आदेश की आलोचना की और चेताया कि इसके लागू होने से उनकी सुरक्षा को ख़तरा पैदा हो सकता है.
पांच फ़रवरी को वॉशिंगटन डीसी में एक संघीय जज रॉयसी लैंबर्थ ने तीन ट्रांसजेंडर महिलाओं को पुरुष जेल में ट्रांसफ़र किए जाने पर अस्थाई रोक लगा दी. साथ ही उनकी हार्मोन थेरेपी ख़त्म किए जाने को भी रोक दिया.
ट्रंप के आदेश के ख़िलाफ़ ट्रांसजेंडर लोगों के प्रति भेदभाव और उनके संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन को लेकर याचिका दायर की गई थी.


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ट्रेज़री डिपार्टमेंट ने एलन मस्क के डिपार्टमेंट ऑफ़ गवर्नमेंट एफ़िशिएंसी के कर्मचारियों को संघीय सरकार के भुगतान और संग्रह से जुड़ी जानकारियां इकट्ठा करने की अनुमति दी थी. साथ ही इसके पास मौजूद लोगों की सूचनाओं तक पहुंच की भी मंज़ूरी दी गई थी.
इस विवाद में ट्रंप प्रशासन बुरी तरह घिर गया.
आठ फ़रवरी को एक संघीय जज ने डिपार्टमेंट ऑफ़ गवर्नमेंट एफ़िशिएंसी के कर्मचारियों की इन जानकारियों तक पहुंच पर रोक लगा दी. साथ ही मस्क और उनकी टीम को आदेश दिया कि जो भी रिकॉर्ड उनके पास हैं उन्हें वे नष्ट करें.
असल में 19 राज्यों के अटार्नी जनरलों ने मिलकर ट्रंप प्रशासन के इस आदेश को चुनौती दी थी.
शिकातकर्ताओं का कहना है कि एलन मस्क एक विशेष सरकारी कर्मचारी की हैसियत रखते हैं और डिपार्मटमेंट ऑफ़ गवर्नमेंट एफ़िशिएंसी द्वारा जानकारी इकट्ठा करना, संघीय क़ानून का उल्लंघन है क्योंकि यह सरकार का कोई आधिकारिक विभाग नहीं है.
(ये लेख बीबीसी की स्पेनिश भाषा की सेवा बीबीसी मुंडो से लिया गया है.)
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