टैरिफ़ वॉर: चीन और कनाडा पर ट्रंप का टैरिफ़ लगाना क्या भारत के लिए मौक़ा है?

डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी

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इमेज कैप्शन, अमेरिका के टैरिफ़ के फ़ैसले के बाद भारत पर इसके असर को लेकर चर्चा शुरू हो गई
    • Author, आनंद मणि त्रिपाठी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार घाटे को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है. उन्होंने एक फरवरी को मेक्सिको और कनाडा पर 25 फ़ीसदी और चीन पर 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने का एलान किया है.

ट्रंप ने यह भी धमकी दी है कि अगर किसी ने उनके फ़ैसले के ख़िलाफ़ बदले की कार्रवाई की तो टैरिफ़ और भी बढ़ा दिया जाएगा. रिसर्च एंड इंफर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलेपिंग कंट्री (आरआईएस) के अनुसार, अमेरिकी व्यापार घाटे में चीन, मेक्सिको और कनाडा का योगदान सबसे ज्यादा है.

अमेरिका को कनाडा सबसे ज्यादा क्रूड आयल आपूर्ति करने वाला देश है. जनवरी से नवंबर के बीच 61 फीसदी क्रूड आयल कनाडा ने अमेरिका को सप्लाई किया है.

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डोनाल्ड ट्रंप और जस्टिन ट्डो

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इमेज कैप्शन, कनाडा ने भी टैरिफ़ लगाने की घोषणा की है
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कनाडा, मेक्सिको और अमेरिका की अर्थव्यवस्था बहुत गहराई से एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं.

एक अनुमान के मुताबिक, तीनों देशों के बीच करीब दो बिलियन डॉलर मूल्य के सामान का व्यापार प्रतिदिन होता है.

पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स ने जनवरी में पेश की एक रिपोर्ट में कहा है कि कनाडा और मेक्सिको पर 25 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने से ना सिर्फ़ इन दोनों देशों में बल्कि अमेरिका में भी विकास धीमा हो जाएगा और महंगाई बढ़ जाएगी.

शनिवार को कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन टूड्रो ने भी टैरिफ़ का जवाब दे दिया है. उन्होंने संवाददता सम्मेलन में कहा, "हम पीछे नहीं हटेंगे. हम 155 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने जा रहे हैं. यह मंगलवार से लागू हो जाएगा.

"अगले 21 दिनों में 125 अरब डॉलर के टैरिफ लागू हो जाएंगे. इसमें अमेरिकी बीयर, वाइन, बोरबॉन, फल और फलों के रस, सब्जियां, इत्र, कपड़े और जूते, घरेलू उपकरण, खेल के सामान, फर्नीचर, लकड़ी और प्लास्टिक भी शामिल हैं."

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

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इमेज कैप्शन, चीन ने कहा है कि अमेरिका गलत तरीका इस्तेमाल कर रहा है

चीन ने बयान जारी कर कहा है कि, "हम टैरिफ का विरोध करते हैं. विश्व व्यापार संगठन में हम अमेरिका के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे. अमेरिका गलत तरीका इस्तेमाल कर रहा है. हम अपने हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है."

चीन ने कहा कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में जो टैरिफ़ लगाया था उसे जो बाइडन ने बरक़रार रखा और इस पर अब 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है.

चीन के उप-प्रधानमंत्री डिंग ज़्येज़ियांग ने पिछले महीने दावोस में वर्ल्ड इकोनामिक फोरम की बैठक में कहा था कि उनका देश व्यापारिक तनाव को कम करके दोनों देशों के हित में आयात को बढ़ाना चाहता है.

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दो देशों के बीच होने वाले आयात और निर्यात के बीच जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से ज्यादा हो जाता है तो इसे व्यापार घाटा कहते हैं. इससे घाटे में रहने वाले देश में रोजगार के अवसर घट जाते हैं. आर्थिक विकास को भी नुकसान होता है.

आईआरएस के अनुसार इस समय अमेरिका में सबसे ज्यादा निर्यात चीन कर रहा है और आयात कम कर रहा है. यही हाल मेक्सिको और कनाडा का है. इसके कारण अमेरिका को व्यापार में घाटा हो रहा है.

यानी अमेरिका को सबसे ज़्यादा व्यापार घाटा चीन की वजह से हो रहा है. इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर मेक्सिको और तीसरे नंबर पर कनाडा है.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

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इमेज कैप्शन, अमेरिका के व्यापार घाटे में भारत की कुल हिस्सेदारी 3.2 प्रतिशत है

भारत में भी अब टैरिफ़ को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है. राजनीति से लेकर आर्थिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ हो रहे व्यापार घाटे को लेकर भी कोई कदम उठा सकते हैं?

हालांकि अमेरिका के व्यापार घाटे में भारत की कुल हिस्सेदारी केवल 3.2 प्रतिशत ही है लेकिन पिछले दिनों ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को धमकी दी थी. इस समूह से शामिल चीन पर कार्रवाई भी कर दी है. भारत भी इस समूह में शामिल है.

ट्रंप आगे की कार्रवाई कर सकते हैं. पिछले कार्यकाल में ट्रंप ने स्टील और एल्युमीनियम के आयात पर टैरिफ़ लगाए थे. भारत ने हार्ले-डेविडसन बाइक के आयात पर शुल्क कम किए थे.

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नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप

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इमेज कैप्शन, चीन पर टैरिफ़ लगाना क्या भारत के लिए फ़ायदेमंद साबित होगा, इसे लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है.
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टैरिफ़ बढ़ाने के लिए भले ही ट्रंप लगातार धमका रहे हैं लेकिन अमेरिका भारत के बड़े बाजार को अनदेखा भी नहीं कर सकता है.

अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनियों, बैंकों, वित्तीय सेवाओं सहित तकनीकी कंपनियों का भारत में बड़ा हित है. सोशल नेटवर्किंग कंपनियों का सबसे बड़ा बेस भी भारत है.

ऐसा भी संभव है कि फरवरी में दोनों नेताओं के बीच होने वाली मुलाकात में अमेरिका के व्यापारिक घाटे के अंतर को पाटने को लेकर कोई नया रास्ता निकल आए.

रक्षा क्षेत्र में भारत को अमेरिका के साथ की जरूरत भी है. भारत इस क्षेत्र में विविधता के साथ बेहतरीन हथियार चाहता है. वहीं पेट्रोलियम क्षेत्र में भी खाड़ी देशों के मुकाबले अमेरिका से अच्छी पेशकश मिलने पर आगे बढ़ सकता है.

ट्रंप और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच 27 जनवरी को हुई टेलीफोन कॉल के बाद व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'राष्ट्रपति ने भारत को अमेरिकी निर्मित सुरक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ाने और निष्पक्ष द्विपक्षीय व्यापार संबंधों की ओर बढ़ने के महत्व पर ज़ोर दिया. दोनों नेताओं ने अमेरिका-भारत की रणनीतिक साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्वाड साझेदारी को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता पर भी बल दिया. इस साल के अंत में भारत पहली बार क्वाड नेताओं की अगवानी करेगा.'

आईआईपीए में प्रोफसर डॉक्टर मनन द्विवेदी कहते हैं '' भारत के लिए यह ट्रेड का अवसर है. भारत इलेक्ट्रॉनिक, मोबाइल सहित अन्य कई विनिर्माण उद्योग को वैकल्पिक सप्लाई चेन के रूप उभार ले सकता है. भारत पर जहां तक टैरिफ लगाने की बात है तो ट्रंप ऐसा कर सकते हैं लेकिन हाल ही सीबीएस को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा है कि भारत बुरा देश नहीं है. भारत और अमेरिका टैरिफ को लेकर काम कर रहे हैं.

डॉक्टर मनन द्विवेदी कहते हैं ''एक बात यह भी है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक बेहतर तालमेल है. ऐसे में भारत पर ज्यादा टैरिफ नहीं लगाया जाएगा. भारत को इस टैरिफ वॉर का फायदा मिलेगा. चीन की इस समय सप्लाई चैन प्रभावित होने से भारत को इसमें प्रवेश का मौका मिलेगा. ये टैरिफ अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित करेंगे.

वह कहते हैं ''मेक्सिको का अपना 83 फीसदी सामान अमेरिका को बेचता है वहीं कनाडा अपना 76 फीसदी निर्यात अमेरिका को करता है. चीन पर ट्रंप के भारी टैरिफ़ की वजह से अमेरिका में पूर्वी एशिया के दूसरे देशों की ओर से निर्यात में भी बढ़ोतरी होगी. इससे चीन, कनाडा और मेक्सिको में सबसे ज्यादा नौकरियां प्रभावित होने जा रही हैं. इन देशों की जीडीपी पर भी नकारात्मक असर दिखाई देगा.''

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टैरिफ़ किसी देश से आयात किए जाने वाले उत्पादों पर लगने वाला कर है. ये निर्यात करने वाले के बजाय उत्पादों को आयात करने वाली फ़र्म पर लगाए जाते हैं.

इसका मतलब यह है कि अगर कोई कार अमेरिका आयात कर रहा है, जिसकी कीमत एक लाख डालर है तो अब उस पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगेगा तो हर कार की कीमत 25,000 डॉलर बढ़ जाएगी.

यानी अमेरिका की कोई कंपनी अगर किसी चीनी फ़र्म से कोई सामान आयात कर रही है तो उसे तय दर से टैरिफ़ देना होगा. अब इससे होगा ये कि चीन के प्रोडक्ट्स पर अगर टैरिफ़ बढ़ेगा तो उस अमेरिकी कंपनी को ज़्यादा टैरिफ़ देना होगा.

ऐसे में अमेरिकी कंपनी चीन के बजाय ऐसे देश की कंपनियों से सामान आयात करना चाहेंगी जहां के सामान पर टैरिफ़ कम है. इससे उस दूसरे देश को तो फ़ायदा होगा लेकिन चीन को नुक़सान होगा.

दिल्ली के फ़ोर स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट में चीन मामलों के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर फ़ैसल अहमद कहते हैं, "भारत पर ट्रंप का टैरिफ़ लगाना कोई बड़ी बात नहीं है. वह पहले भी लगा चुके है. इतना ही नहीं उन्होंने जनरलाइज़्ड सिस्टम ऑफ़ प्रिफ़रेंसेज़ (जीएसपी) से भी भारत को हटा दिया था. वह आगे भी ऐसा कर सकते हैं. इसके ख़िलाफ़ भारत ने भी करीब दो दर्जन अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ़ लगा दिया था. हालांकि इसे जी 20 समिट से पहले खत्म कर दिया था. ऐसी चीजें हों उससे पहले ही भारत को अमेरिका के साथ पहल करनी चाहिए और उसके साथ व्यापार को लेकर एक समग्र समझौता (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) और जीएसपी को फिर से लागू करने की बात करनी चाहिए."

प्रोफ़ेसर फ़ैसल अहमद कहते हैं, "दूसरी बात अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के दबदबे को कम करना चाहता है. इसी वजह से यह चीजें की गई. इससे दोनों देश आगे चलकर नई व्याापरिक रणनीति पर बात करेंगे और अपने पक्ष में फैसला कराने के लिए आगे बढ़ेंगे. मेक्सिको और कनाडा की जहां तक बात करें तो यह कार्रवाई क्षेत्रीय वर्चस्व को आगे बढ़ाने के लिए की गई है. इस लड़ाई में भारत के लिए अवसर की बात करें तो वह कम नज़र आती है, लेकिन इस लड़ाई के असर से भारत को इन देशों से मिलने वाली चीजें महंगी जरूर हो जाएंगी."

वह कहते हैं, "अमेरिका को सबसे ज्यादा करीब 65 फीसदी व्यापारिक घाटा इन्हीं तीन देशों से हो रहा है तो यह लड़ाई थोड़ी लंबी खिंच सकती है लेकिन इससे चीन को ज्यादा नुकसान नहीं होने जा रहा है. टैरिफ़ को लेकर ट्रंप की कार्रवाई का मतलब यह है कि अब व्यापाारिक चीजें एक नए सिरे से फिर से अमेरिकी हित को देखते हुए निर्धारित की जाएं. वह ग्लोबल वैल्यू चेन में अपना वर्चस्व बढ़ाना चाहते है."

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भारत अमेरिका के बड़े निर्यातकों में से एक है. भारत ने 2023-24 में अमेरिका को 77.5 बिलियन डॉलर का माल निर्यात किया.

इस दौरान ही अमेरिका से भारत का आयात 17 प्रतिशत घटकर 42.2 बिलियन डॉलर रह गया है. इसी संतुलन को बनाने के लिए ही ट्रंप लगातार धमकी दे रहे हैं।

भारत में औसत आयात शुल्क 18 फ़ीसदी है. कारों पर शुल्क यह बढ़कर 125 फ़ीसदी और शराब पर पर यह 150 फीसदी तक पहुंच जाता है।

आयात शुल्क की इस टैरिफ़ व्यवस्था के साथ भारत विश्व व्यापार संगठन के नियमों का भी अनुपालन करता है.

भारत और अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौता यानी एफटीए नहीं है.

अगर ऐसा होता तो यह शुल्क कम होने की संभावना बढ़ जाती.

भारत कच्चा तेल, इसका उत्पाद, मोती, कीमती पत्थर, आर्टिफिशयल ज्वैलरी, परमाणु रिएक्टर, बॉयलर, बिजली संयंत्र उपकरण, विमान और इसके पुर्जे, चिकित्सा और सैन्य उपकरण का आयात अमेरिका से करता है.

भारत पेट्रोलियम उत्पाद, औषधि निर्माण, मोती, कीमती पत्थर, दूरसंचार उपकरण, सूती कपड़े, परिधान और इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी का बहुतायत में निर्यात करना है. भारत का निर्यात तेजी से बढ़ा है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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