ट्रूडो ने ट्रंप के टैरिफ़ फ़ैसले पर किया पलटवार, अब किस तरह के ट्रेड वॉर की शुरुआत हुई?

ट्रंप और ट्रूडो

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इमेज कैप्शन, अमेरिका के टैरिफ़ के फ़ैसले के बाद कनाडा ने भी टैरिफ़ लगाने की घोषणा की है

अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कनाडा, मेक्सिको और चीन पर टैरिफ़ लगाने के फ़ैसले के बाद इन देशों ने जवाबी कार्रवाई करना शुरू कर दिया है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और मेक्सिको से आयात की जाने वाली वस्तुओं पर 25 फ़ीसदी और चीन पर 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

इस फ़ैसले के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने शनिवार देर रात प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके जवाबी कार्रवाई की जानकारी दी है. ट्रूडो कनाडा के लिबरल पार्टी के प्रमुख और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे चुके हैं और अगला पार्टी प्रमुख चुने जाने तक वो देश के प्रधानमंत्री पद पर रहेंगे.

उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के फ़ैसले को लेकर कहा है कि कनाडा भी इसके लिए तैयार है.

वहीं मेक्सिको और चीन ने भी कहा है कि वो भी अमेरिकी सरकार के फ़ैसले को लेकर जवाबी क़दम उठाएंगे.

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ट्रूडो ने आख़िर क्या फ़ैसला लिया?

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की है जिसमें उन्होंने सीधे अमेरिका के लोगों को संबोधित किया है.

उन्होंने साफ़ कहा है कि इस फ़ैसले का सीधा असर कीमतों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. उन्होंने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों पर बोलते हुए कहा कि ''यह ऐसा रिश्ता है जिससे दुनिया ईर्ष्या करती रही है.''

ट्रूडो ने कनाडा सरकार के फ़ैसले की जानकारी देते हुए कहा कि "कनाडा 'ऐसा नहीं चाहता था', लेकिन ट्रंप की टैरिफ़ को लेकर की गई घोषणा का जवाब देने के लिए 'तैयार' हैं."

उन्होंने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि वह 4 फ़रवरी से कनाडा की अधिकांश वस्तुओं पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़, और ऊर्जा पर 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने की मंशा रखता है."

"मैंने आज प्रमुख मंत्रियों और हमारे मंत्रिमंडल से मुलाक़ात की है, और मैं शीघ्र ही मेक्सिको की राष्ट्रपति शीनबाम से बात करूंगा."

ट्रूडो ने कहा, "हम ऐसा नहीं चाहते थे, लेकिन कनाडा तैयार है. मैं शाम को कनाडा के नागरिकों को संबोधित करूंगा."

ट्रूडो

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इमेज कैप्शन, ट्रूडो ने ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले उनसे मुलाक़ात की थी

कनाडा के पीएम ने और क्या कहा?

जस्टिन ट्रूडो से पूछा गया कि क्या उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करने की कोशिश की थी. इस पर उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक ऐसा नहीं किया है.

हालांकि राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले ट्रूडो ने फ़्लोरिडा में ट्रंप से मुलाक़ात की थी.

कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा है कि वो अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत करने के लिए सभी विकल्प खुले रखेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार आरोप लगाते रहे हैं कि अमेरिका में कनाडा और मेक्सिको के बॉर्डर से नशीली दवा फ़ेंटानिल आ रही है.

ट्रूडो से सवाल किया गया कि क्या अमेरिका का फ़ैसला फ़ेंटानिल की वजह से है. इस पर ट्रूडो ने कहा कि अमेरिका-कनाडा की सीमा 'दुनिया की सबसे सुरक्षित और मज़बूत सीमा में से एक है.'

उन्होंने कहा कि अगले कुछ हफ़्ते कनाडा और अमेरिका के लिए मुश्किल भरे होंगे.

उन्होंने कहा, "हम यहां तक नहीं आना चाहते थे, हम यह चाहते भी नहीं थे. लेकिन हम कनाडाई लोगों के लिए पीछे नहीं हटेंगे."

मेक्सिको की राष्ट्रपति

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इमेज कैप्शन, मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने कहा है कि 'हम भी अमेरिका के ख़िलाफ़ टैरिफ़ समेत जवाबी कार्रवाई करेंगे.'

मेक्सिको और चीन ने क्या लिया फ़ैसला?

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मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने भी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मेक्सिको पर लगाए गए 25 फ़ीसदी टैरिफ़ पर प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने कहा है कि 'हम भी अमेरिका के ख़िलाफ़ टैरिफ़ समेत जवाबी कार्रवाई करेंगे.'

राष्ट्रपति शिनबाम ने लिखा, "मैं अर्थव्यवस्था के सचिव को प्लान बी को लागू करने के निर्देश देती हूं, जिस पर हम काम कर रहे हैं. इसमें मेक्सिको की रक्षा से जुड़े टैरिफ़ और ग़ैर-टैरिफ़ उपाय शामिल हैं."

हालांकि, यह क्या होंगे, इसकी जानकारी नहीं दी गई है.

इस मुद्दे पर चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें इस क़दम के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है.

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "चीन इस क़दम से पूरी तरह असंतुष्ट है और इसका कड़ा विरोध करता है." इसमें कहा गया है कि यह विश्व व्यापार संगठन के नियमों का 'गंभीर उल्लंघन' है.

चीन ने कहा है कि इस तरह के उपाय चीन और अमेरिका के बीच के सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को नुक़सान पहुंचाएगा.

चीन ने कहा है कि वो अब अमेरिका के 'ग़लत व्यवहार' के ख़िलाफ़ विश्व व्यापार संगठन में मुक़दमा दायर करेगा और 'अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए' जवाबी क़दम उठाएगा.

चीनी वाणिज्य मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि चीन ने अमेरिका से ग़लत तरीकों को सुधारने और समस्या के समाधान के लिए चीन के साथ मिलकर काम करने की अपील करता है.

चीन ने अमेरिका से कहा है कि वो पारस्परिक लाभ, सम्मान और समानता के आधार पर मतभेदों को दूर करने और आपसी सहयोग को मज़बूत करने के लिए काम करे.

इससे पहले, टैरिफ़ के मामले पर चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ में चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ही यादोंग का बयान आया था.

इसमें कहा गया कि टैरिफ़ उपाय न तो चीन या अमेरिका और न ही बाक़ी दुनिया के हितों के अनुकूल है.

दरअसल, शनिवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल मीडिया पर लिखा था कि टैरिफ़ लगाने का फ़ैसला अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) के ज़रिए किया गया.

क्या ये दुनियाभर में ट्रे़ड वॉर की नई शुरुआत है?

फ़ैक्ट्री

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इमेज कैप्शन, ट्रंप अगर अपने टैरिफ़ का दायरा अन्य देशों तक बढ़ाते हैं तो इसका दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं

इस मुद्दे पर बीबीसी के बिज़नेस संवाददाता जोनाथन जोसेफ़ने कंसल्टेंसी कैपिटल इकोनॉमिक्स के पॉल एशवर्थ से बीत की है.

कंसल्टेंसी कैपिटल इकोनॉमिक्स के पॉल एशवर्थ के मुताबिक़, इससे "बहुत विनाशकारी व्यापार युद्ध" की शुरुआत हो सकती है.

उन्होंने बताया कि मेक्सिको और कनाडा दोनों की अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका को क़रीब 20% निर्यात किया जाता है, ये टैरिफ़ उनकी अर्थव्यवस्था को मंदी में डाल सकते हैं.

"यह टैरिफ़ उनके उत्पादों को अमेरिकियों के लिए अधिक महंगा बना देंगे और लोग उन्हें ख़रीदना बंद कर देंगे जिसका सीधा मतलब है कि मेक्सिको और कनाडा की कंपनियों के लिए कम बिक्री और लाभ."

एशवर्थ ने आने वाले महीनों में यूरोपीय संघ को भी अमेरिकी टैरिफ़ का सामना करने की संभावना की ओर इशारा किया है. इससे संभवतः इसी तरह के परिणाम सामने आएंगे.

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिकी व्यवसाय और उपभोक्ताओं के सामने आने वाली ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ाएंगी और इसका मतलब होगा कि अगले एक से डेढ़ साल में किसी भी अमेरिकी ब्याज दर में कटौती के रास्ते "बंद हो जाएंगे."

क़र्ज़ की ज़्यादा कीमत चुकाने से अमेरिकी उपभोक्ताओं के जीवन स्तर को कम करने और भविष्य में व्यवसायों में निवेश की इच्छा को कम करने की संभावना बढ़ सकती है.

यह सरकारों और दुनिया भर में अन्य लोगों को भी नुक़सान पहुंचाएगा जो अमेरिकी डॉलर में पैसा उधार लेते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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