ट्रंप की टैरिफ़ योजना क्या है और किन देशों को हो सकता है इससे नुकसान

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- Author, जेरेमी हॉवेल और ओनर ईरम
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के बाद विदेशी सामान पर कड़े टैरिफ़ लगाने की धमकी दे रहे हैं.
उन्होंने कहा कि जब तक वह कनाडा और मैक्सिको की सरकारें अमेरिका में अवैध प्रवासियों और फेंटानिल ड्रग आने से नहीं रोकती, तब तक वह इन दोनों देशों से आने वाले सामानों पर 25% टैक्स लगाएंगे.
ट्रंप ने ये भी कहा है कि वह चीन से आयात पर 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाएंगे और यूरोपीय संघ से आने वाले सामानों पर भी टैरिफ़ लगाएंगे.
चीन, मैक्सिको और कनाडा अमेरिका के तीन सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं. टैरिफ़ उनकी अर्थव्यवस्थाओं को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं और इससे अमेरिकी उपभाक्ताओं के लिए भी कीमतें बढ़ सकती हैं.

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टैरिफ़ क्या है?

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टैरिफ़ किसी देश से आयात किए जाने वाले उत्पादों पर लगने वाला कर है.
ये निर्यात करने वाले की बजाय उत्पादों को आयात करने वाली फ़र्म पर लगाए जाते हैं.
मसलन, अगर कोई फ़र्म ऐसी कार आयात कर रही हैं जिसकी कीमत 50 हज़ार डॉलर प्रति कार है और उसपर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगेगा, तो फ़र्म को हर कार पर 12,500 डॉलर का शुल्क देना होगा.
ये सवाल कि आख़िरकार टैरिफ़ का 'आर्थिक' बोझ कहां पड़ता है, अधिक जटिल है.
अगर आयात करने वाली अमेरिकी फ़र्म टैरिफ़ की लागत इसकी कीमत बढ़ाकर अमेरिका में उत्पाद खरीदने वाले व्यक्ति पर डालती है, तो इसका आर्थिक बोझ अमेरिकी उपभोक्ता वहन करेगा.
ट्रंप टैरिफ़ के समर्थन में क्यों हैं?
डोनाल्ड ट्रंप ने अक्सर कहा है कि टैरिफ़ घरेलू स्तर पर रोज़गार पैदा करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं. ट्रंप टैरिफ़ को अमेरिकी अर्थव्यवस्था के साथ ही टैक्स रेवेन्यू को भी बढ़ाने के तरीके के रूप में देखते हैं.
साल 2024 में जब डोनाल्ड ट्रंप अपना चुनावी अभियान चला रहे थे तब उन्होंने एक मौके पर कहा था, "मेरी योजना के तहत अमेरिकी कर्मचारी अब अपने ही देश में विदेशियों के हाथों नौकरी खोने के बारे में चिंतित नहीं होंगे. बल्कि विदेशी लोग अमेरिका में अपनी नौकरी गंवाने के बारे में चिंतित होंगे."
बीबीसी के इकोनॉमिक्स एडिटर फ़ैसल इस्लाम का कहना है कि ट्रंप वैश्विक आर्थिक नक्शे को मूल रूप से बदलना चाहते हैं. साथ ही वह अमेरिका के साथ चीन और यूरोप के ट्रेड सरप्लस को कम करना चाहते हैं, जिसे वह 'अमेरिका को लूटने' के रूप में देखते हैं.
ट्रंप ने ये भी कहा है कि उन्होंने साल 2018 में राष्ट्रपति के तौर पर जैसे स्टील और एल्यूमीनियम पर टैरिफ़ शुरू किए थे, वे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा करते हैं क्योंकि ये 'रक्षा-औद्योगिक क्षेत्र की बुनियाद है.'
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में कौन से टैरिफ़ लगाए थे?
साल 2018 में ट्रंप ने आयातित वॉशिंग मशीन और सोलर पैनलों पर 50 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया था. उस समय अमेरिकी सरकार ने कहा था कि दोनों क्षेत्रों में अमेरिकी मैन्युफ़ैक्चर को विदेशों से अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है.
उन्होंने आयातित स्टील पर 25 फ़ीसदी और एल्युमीनियम पर 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया था.
हालांकि, मैक्सिको और कनाडा से स्टील और एल्युमीनियम के लिए छूट थी क्योंकि अमेरिका ने उनके साथ मुक्त व्यापार समझौता किया था. इस समझौते को नॉर्थ अमेरिकन फ़्री ट्रेड अग्रीमेंट या नाफ़टा कहा जाता है, जिसे बाद में अमेरिका-मैक्सिको-कनाडा अग्रीमेंट (यूएसएमसीए) से बदल दिया गया था.
अमेरिका को स्टील के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक यूरोपीय संघ ने जींस बर्बन व्हिस्की और हार्ले डेविडसन मोटरसाइकलों सहित तीन अरब डॉलर से अधिक मूल्य के अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ़ लगाकर जवाबी कार्रवाई की.
ट्रंप ने मीट से लेकर संगीत वाद्ययंत्रों तक 360 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के चीनी उत्पादों पर भी टैरिफ़ लगाया. जवाब में चीन ने 110 अरब डॉलर से अधिक अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ़ लगा दिया.
राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में चीन पर इस टैरिफ़ को बरकरार रखा गया और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे नए उत्पादों पर भी टैरिफ़ लगाए गए.
टैरिफ़ का दूसरे देशों पर क्या असर हुआ?

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ट्रंप के टैरिफ़ ने कुछ अमेरिका में कुछ देशों से आयात किए जाने वाले उत्पादों की मात्रा घट गई. लेकिन इससे अन्य देशों के अमेरिका भेजे जाने वाले सामान की मात्रा बढ़ भी गई.
साल 2018 से पहले अमेरिका के कुल आयात में 20 फ़ीसदी चीन से आता था. लेकिन यूएस सेंसस ब्यूरो के अनुसार अब ये हिस्सा 15 फ़ीसदी से भी कम है.
साल 2023 तक मैक्सिको चीन को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया. मैक्सिको अब अमेरिका को 476 अरब डॉलर का सामान निर्यात करता है, जबकि चीन 427 अरब डॉलर का सामान निर्यात करता है.
ये हिस्सेदारी आंशिक रूप से है क्योंकि कई बड़ी कंपनियां, ख़ासतौर पर कार बनाने वाली कंपनियों ने अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते और उत्पादन की कम लागत का फ़ायदा उठाने के लिए अपना उत्पादन मैक्सिको में स्थानांतरित कर दिया.
साल 2023 में मैक्सिको पैसेंजर व्हीकल बनाने के मामले में दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश बन गया.
चीन पर ट्रंप के भारी टैरिफ़ की वजह से अमेरिका में पूर्वी एशिया के देशों की ओर से निर्यात में भी बढ़ोतरी देखी गई.
हालांकि, ये आंकड़ा पूरी तस्वीर नहीं दिखाता क्योंकि इन देशों के सामान अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए चीनी उत्पादों की तुलना में सस्ते हो गए और कई चीनी कंपनियां अमेरिकी टैरिफ़ से बचने के लिए इन देशों में स्थानांतरित हो गईं.
यूएस ट्रेड रिप्रेंज़ेटेटिव के आंकड़ों के अनुसार, आसियान व्यापार गुट से संबंधित देश जैसे इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाइलैंड और वियतनाम ने साल 2016 में अमेरिका को 158 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया लेकिन 2023 में इन देशों से लगभग 338 अरब डॉलर का निर्यात हुआ.
ब्रिटेन में ससेक्स यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री डॉ. निकोलो टैम्बरी कहते हैं, "2018 के टैरिफ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित देश चीन था."
वह कहते हैं, "मुझे लगता है कि शायद टैरिफ़ के इस दौरा में सबसे बड़ा विजेता वियतनाम रहा है."
पीटरसन इंस्टीट्यूट फ़ॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के अनुसार, टैरिफ़ ने अमेरिका में स्टील और एल्यूमीनियम के उत्पादन को बढ़ावा दिया लेकिन इसने धातुओं की कीमतों को भी बढ़ाया. इसका नतीजा ये हुआ कि दूसरे मैन्युफ़ैक्चरिंग उद्योगों में हज़ारों नौकरियां चली गईं.
पीटरसन इंस्टीट्यूट का यह भी कहना है कि ट्रंप के टैरिफ़ से जुड़े कदमों से सभी जगह कीमतें बढ़ गईं, जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं की स्थिति खराब हो गई.
ट्रंप इस बार कौन से टैरिफ़ लगा सकते हैं?

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डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि जब तक अमेरिकी सीमाओं के पार से अवैध प्रवासियों और ग़ैर-क़ानूनी तरीके से बनाई फेंटेनिल का देश में आना बंद नहीं हो जाता, तब तक कनाडा और मैक्सिको से आने वाले सामान पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगेगा.
उन्होंने कहा कि वह चीनी सामानों पर मौजूदा टैरिफ़ के अतिरिक्त 10 फ़ीसदी 'दंडात्मक' टैरिफ़ लगाना चाहते हैं. उनका दावा है कि अवैध फैंटेनिल बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल वहीं से आते हैं.
इसे एक फ़रवरी से लागू किया जा सकता है.
ट्रंप ने यूरोपीय संघ के देशों पर भी टैरिफ़ लगाने की धमकी दी है. उनका कहना है कि ये देश 'हमारे साथ बहुत ज़्यादा बुरा बर्ताव करते हैं.'
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जवाबी कार्रवाई करने का वादा किया है. ये काउंटर टैरिफ़ कथित तौर पर अरबों डॉलर का हो सकता है. उन्होंने कहा, "कनाडा जवाब देगा और हर विषय पर बातचीत होगी."
चीन के विदेश मंत्रालय ने इस अतिरिक्त टैरिफ़ के जवाब कहा है कि वह "अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेंगे."
कनाडा और मैक्सिको पर क्या होगा असर?

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यूके के थिंक टैंक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ इकोनॉमिक्स एंड सोशल रिसर्च में प्रोफ़ेसर स्टीफ़न मिलर्ड का कहना है कि ट्रंप ने जिन टैरिफ़ का एलान किया है अगर वे प्रभावी हो जाते हैं तो इससे मुख्य तौर पर कनाडा और मैक्सिको की अर्थव्यवस्थाओं को नुक़सान पहुंचेगा.
ये दोनों देश अमेरिका पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं. मैक्सिको दूसरे देशों को जो भी सामान बेचता है उसका 83 फ़ीसदी अमेरिका खरीदता है. कनाडा के कुल निर्यात में 76 फ़ीसदी अमेरिका को जाता है.
प्रोफे़सर मिलर्ड कहते हैं, "कनाडा बड़ी मात्रा में तेल और मशीनरी अमेरिका को बेचता है और 25 फ़ीसदी टैरिफ़ से पाँच सालों में उसकी जीडीपी सिकुड़ कर 7.5 फ़ीसदी तक आ सकती है, जो एक बड़ा झटका होगा."
उन्होंने कहा, "अगर मैक्सिको पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगता है, तो जिन कंपनियों ने यहां अपने कार बनाने वाले प्लांट लगाए हैं, वे आसानी से अपने देशों में उत्पादन स्थानांतरित कर सकते हैं. टैरिफ़ से मेक्सिको की जीडीपी में पाँच साल के भीतर 12.5 फ़ीसदी की गिरावट हो सकती है. ये भी एक बड़ा आघात होगा."
अमेरिकी थिंक टैंक विलसन सेंटर के मैक्सिको इंस्टीट्यूट की लीला अबेद कहती हैं कि अमेरिका की ओर से जिस टैरिफ़ की धमकी दी जा रही है वो मेक्सिकन कर्मियों के लिए 'भयावह' साबित हो सकते हैं.
वह कहती हैं, "अमेरिका में करीब 50 लाख नौकरियां अमेरका-मैक्सिको कारोबार पर निर्भर करती हैं और एक हालिया अध्ययन दिखाता है कि मैक्सिको में करीब 1.46 करोड़ नौकरियां उसके उत्तरी अमेरिकी सहयोगियों से होने वाले कारोबार पर निर्भर हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.













