US India: अपने नागरिकों के निर्वासन पर कोलंबिया जैसा कड़ा रुख़ भारत क्यों नहीं दिखा सका

कोलंबिया की तरह अपने लोगों को अमेरिका से वापस लाने के लिए भारत ने क्यों नहीं भेजा विमान?
डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी की तस्वीर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता संभालने के बाद अमेरिका में भारतीय प्रवासियों के निष्कासन की यह पहली खेप है.
    • Author, अंशुल सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

"उन्होंने हमें हथकड़ी पहनाई. हमें बताया गया कि वो हमें वेलकम सेंटर ले जा रहे हैं. लेकिन कुछ देर बाद हमारे सामने सेना का विमान खड़ा था."

यह बात 18 साल के ख़ुशप्रीत सिंह ने अमेरिका से भारत पहुंचने के बाद कही.

हरियाणा के कुरुक्षेत्र ज़िले से ताल्लुक रखने वाले ख़ुशप्रीत सिंह छह महीने पहले 45 लाख रुपये खर्च कर अमेरिका चले गए थे. अब अमेरिकी सरकार ने उन्हें अवैध प्रवासी बताते हुए वापस भारत भेज दिया है.

ख़ुशप्रीत अकेले नहीं हैं जिनके साथ ऐसा बर्ताव किया गया हो. बुधवार को 104 भारतीय अमेरिकी सैन्य विमान से भारत पहुंचे. इनमें से ज़्यादातर लोगों की आपबीती ख़ुशप्रीत से मिलती-जुलती है.

लाइन

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

लाइन

संसद में भारतीयों के साथ इस तरह के बर्ताव की बात उठी. कांग्रेस की तरफ़ से कहा गया कि 'जब कोलंबिया जैसा छोटा सा देश और उनके राष्ट्रपति अमेरिका को लाल आंख दिखा सकते हैं तो भारत सरकार क्यों नहीं?'

कोलंबिया ने अपने नागरिकों को वापस भेजने के तरीके पर खुलकर विरोध किया. वहीं, भारत ने इसे सालों से चली आ रही प्रक्रिया बताया है.

कोलंबिया जवाबी कार्रवाई करेगा: राष्ट्रपति पेत्रो

कोलंबिया के नागरिक विमान से उतरते हुए

इमेज स्रोत, X/@PETROGUSTAVO

इमेज कैप्शन, कोलंबिया के राष्ट्रपति अपने नागरिकों को सामान्य विमान से कोलंबिया लाए.

कोलंबिया दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में फ़ैला एक देश जिसका कुछ हिस्सा उत्तरी अमेरिका में भी आता है. कोलंबिया की सीमा पर पनामा-कोलंबिया के बीच ख़तरनाक जंगली इलाक़ा डेरियन गैप है.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

यह दक्षिण अमेरिका को मध्य अमेरिका से जोड़ने वाला एकमात्र ज़मीनी रास्ता है.

दुनिया भर से प्रवासी अवैध तरीके से अमेरिका में जाने के लिए अपनी जान जोख़िम में डालकर इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं.

अमेरिका में बढ़ते अवैध आप्रवासन के कारण डैरियन गैप और कोलंबिया चर्चा में बने रहते हैं.

बीते दिनों जब अमेरिका ने कोलंबिया के लोगों को वापस भेजा तो राष्ट्रपति गुस्तावो पेत्रो ने कड़ा रुख़ अपनाया.

जनवरी में अमेरिका ने कोलंबिया के नागरिकों को सैन्य विमान से वापस भेजा तो गुस्तावो पेत्रो ने इसे अपने देश में लैंड नहीं होने दिया.

राष्ट्रपति पेत्रो ने कहा कि वह अपने साथी नागरिकों को सामान्य (नागरिक) विमानों में लेकर आएंगे और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं करेंगे.

डोनाल्ड ट्रंप कोलंबिया के इस क़दम से इतने नाराज़ हुए कि उन्होंने कोलंबिया पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने की घोषणा कर दी.

ट्रंप ने कहा कि कोलंबिया से अमेरिका में आने वाली सभी चीज़ों पर टैरिफ 'तुरंत' लागू कर दिया जाएगा और एक हफ़्ते में 25 प्रतिशत टैरिफ़ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया जाएगा.

पेत्रो की तरफ़ से कहा गया कि वह भी इस तरह की जवाबी कार्रवाई करेंगे.

बाद में व्हाइट हाउस ने कहा कि कोलंबिया अब अमेरिकी सैन्य विमानों से आने वाले प्रवासियों को स्वीकार करने के लिए सहमत हो गया है. इसलिए अमेरिका टैरिफ़ के साथ आगे नहीं बढ़ेगा.

दोनों देशों के राजनयिकों के बीच एक समझौता हुआ जिसके तहत कोलंबिया ने प्रवासियों को लाने के लिए अपने वायु सेना के विमान भेजे.

पेत्रो ने कहा कि इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित हुआ कि प्रवासियों के साथ 'सम्मानपूर्वक' व्यवहार किया जाएगा.

पेत्रो ने एक्स पर लिखा, "वे कोलंबियाई हैं, स्वतंत्र और सम्मानित हैं. अपनी मातृभूमि में हैं जहां उन्हें प्यार किया जाता है."

उन्होंने बिना हथकड़ी के विमान से उतरते प्रवासियों की तस्वीरें भी पोस्ट कीं.

कोलंबिया की क्यों दी जा रही है नज़ीर

विदेश मंत्री का बयान

भारत में लोगों ने अपना ग़ुस्सा तब ज़ाहिर किया जब अमेरिका ने भारतीयों को वापस भेजने का वीडियो जारी किया. वीडियो में भारतीयों के मुंह पर मास्क, हाथ में हथकड़ी और पैर में बेड़ियां दिख रही हैं.

यूनाइटेड स्टेट्स बॉर्डर पेट्रोल के चीफ़ माइकल डब्ल्यू बैंक्स ने वीडियो के साथ अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, ''भारत के अवैध एलियंस को सफलतापूर्वक वापस भेज दिया गया है. हम इमिग्रेशन के नियमों को लेकर प्रतिबद्ध हैं. अगर आप अवैध रूप से आएंगे तो आपको इसी तरह वापस भेजा जाएगा.''

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने सरकार से सवाल पूछा, "क्या यह व्यवहार मानवीय है या आतंकवादियों जैसा है?"

सुरजेवाला ने राज्यसभा में कहा, "आज राजनीति से ऊपर उठकर भारत माता और 140 करोड़ भारतीयों का सीना छलनी है. हाथ में हथकड़ी, पांव में ज़ंजीर और धूमिल होता स्वाभिमान. जब कोलंबिया जैसा छोटा सा देश अमेरिका को लाल आंख दिखा सकता है तो आप क्यों नहीं?"

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने पूछा कि क्या आगे अपना विमान भेजकर भारतीय नागरिकों को वापस लाने की कोई योजना है?

सामरिक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने एक्स पर लिखा कि भारत को अमेरिका के इस व्यवहार को स्वीकार नहीं करना चाहिए था.

चेलानी ने लिखा, ''मेक्सिको और कोलंबिया ने अपने प्रवासियों को हथकड़ी पहनाकर सैन्य विमान से भेजने को स्वीकार नहीं किया. कोलंबिया ने 'अमानवीय व्यवहार' से बचाव के लिए अपना विमान भेजा. लेकिन भारत ने न केवल सैन्य विमान में सवार हथकड़ी पहने भारतीयों को स्वीकार किया बल्कि शेख़ी बघारते हुए कहा कि अवैध प्रवासियों से निपटने के लिए 'भारत और अमेरिका के बीच सहयोग बहुत मज़बूत' है.''

इस पूरे मामले पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में सरकार का पक्ष रखा.

जयशंकर ने कहा, "वापस भेजने की प्रक्रिया कोई नई नहीं है, बल्कि सालों से ऐसा हो रहा है. हम अमेरिकी सरकार के साथ बात कर रहे हैं कि जिन्हें वापस भेजा जा रहा है, उनके साथ फ्लाइट में अमानवीय व्यवहार नहीं होना चाहिए."

पिछले अमेरिकी प्रशासन में भी लाखों लोगों को निर्वासित किया गया था.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफ़ोर्समेंट ने 2018 से 2023 के बीच 5,477 भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया. साल 2020 में एक साल में सर्वाधिक 2,300 भारतीयों का निर्वासन हुआ.

2024 में सितंबर के महीने तक 1000 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से निर्वासित किया गया था.

क्या भारत कोई क़दम उठा सकता था?

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का बयान

अमेरिका के साथ कोलंबिया जिस तरह पेश आया, क्या भारत भी वैसा कर सकता था?

डॉ. मनन द्विवेदी भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं.

मनन द्विवेदी कहते हैं, "भारत और कोलंबिया की तुलना से पहले हमें अमेरिका के साथ दोनों देशों के रिश्ते समझने होंगे. कोलंबिया में पहली बार वामपंथी सरकार है."

"ट्रंप से पहले बाइडन के दौर में दोनों देशों के बीच उतार-चढ़ाव और मतभेद देखे गए. जबकि इसके उलट भारत हमेशा अमेरिका के साथ अपने संबंधों को आगे ले जाने पर ज़ोर देता है. अगर आपको अमेरिका के साथ संबंध अच्छे रखने हैं तो आपको उनकी बात माननी पड़ेगी."

विदेश मंत्री जयशंकर का कहना है कि अमेरिका में एयरक्राफ़्ट के ज़रिए निर्वासन की यह प्रक्रिया 2012 से प्रभाव में है. जयशंकर ने इसको लेकर आंकड़े भी दिए.

विदेश मंत्री के मुताबिक़, साल 2012 से लेकर 2025 तक 15000 से ज़्यादा भारतीय निर्वासित किए जा चुके हैं.

जेएनयू में एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. अपराजिता कश्यप का मानना है कि भारत और कोलंबिया के रुख़ में अंतर दोनों देशों की परिस्थितयों की वजह से है.

प्रोफ़ेसर अपराजिता कश्यप बताती हैं, "भारत का रुख़ कोलंबिया से इसलिए अलग है क्योंकि दोनों देशों के सामाजिक, राजनीतिक और भौगोलिक दृष्टिकोण अलग-अलग हैं. इन मामलों में फ़ैसले लेने से ये कारक प्रभावित होते हैं."

"भारत की तरफ़ से सधा हुआ बयान इसलिए दिया गया क्योंकि कोलंबिया की तरह भारत अमेरिकी प्रतिक्रिया का सामना नहीं करना चाहता है. एक और वजह कोलंबिया में सरकार की विचारधारा है. गुस्तावो पेत्रो कोलंबिया के पहले वामपंथी झुकाव वाले राष्ट्रपति हैं. यह विचारधारा ट्रंप सरकार के अनुरूप नहीं है."

भारत के सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता और क़ानून के जानकार डॉ. सूरत सिंह का मानना है कि 'हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां डालना' अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ है.

डॉ. सूरत सिंह कहते हैं, "भारत की तुलना में कोलंबिया का रुख़ बेहतर था. जबरदस्ती यहां लाने से बेहतर है अपने नागरिकों को सम्मानपूर्वक लाना. ट्रंप जब धमका रहे थे तब भारत सरकार को बैठकर बातचीत करनी चाहिए थी और समय मांगना चाहिए था."

"बेड़ियां डालकर भारतीयों को यहां लाया गया है, यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों के ख़िलाफ़ है. बल का प्रयोग तभी करते हैं जब कोई भागने की कोशिश करे या बल का इस्तेमाल करे. जब हवाई जहाज़ में ला रहे हो तो इसकी क्या ज़रूत थी?"

ट्रंप को 'आंख दिखाने वाले' वाले पेत्रो कौन हैं?

गुस्तावो पेत्रो की तस्वीर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, गुस्तावो पेत्रो कोलंबिया के पहले वामपंथी राष्ट्रपति हैं.

गुस्तावो पेत्रो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बार साल 2022 में दक्षिणपंथी राजनीति को परास्त कर सुर्खियों में आए थे.

पेत्रो ने राष्ट्रपति चुनाव में रोडोल्फ़ो हर्नांडेज़ को हराया और कोलंबिया को पहली बार वामपंथी राष्ट्रपति मिला.

कोलंबिया की राजनीति में यह बड़े बदलाव का संकेत था, एक देश जिसका नेतृत्व दशकों से उदारवादियों और रूढ़िवादियों ने किया था.

ट्रंप के ख़िलाफ़ उन्होंने जो तेवर दिखाए उसकी झलक उनकी राजनीति पृष्ठभूमि में भी दिखाई पड़ती है.

26 जनवरी को राष्ट्रपति पेत्रो ने एक्स पर लिखा, "एक प्रवासी कोई अपराधी नहीं है. उसके साथ उसी सम्मान के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए जिसका एक इंसान हक़दार है. इसलिए मैंने कोलंबियाई प्रवासियों को ले जा रहे अमेरिकी सैन्य विमानों को वापस लौटा दिया."

64 वर्षीय पेत्रो 1980 के दशक में 19 अप्रैल आंदोलन (एम-19 मूवमेंट) के सदस्य थे. यह कोलंबिया का शहरी गुरिल्ला आंदोलन था जो बाद में एक राजनीतिक पार्टी (एम-19 डेमोक्रेटिक एलायंस) में तब्दील हो गया.

एम-19 आंदोलन से जुड़ाव के दौरान उन पर अवैध हथियार रखने का आरोप लगा और उन्हें जेल जाना पड़ा.

कुछ समय बाद वह जेल से रिहा हो गए और साल 1991 के संसदीय चुनाव में सांसद चुने गए.

कुछ साल बाद, 2006 के कोलंबियाई संसदीय चुनाव के बाद पेत्रो अल्टरनेटिव डेमोक्रेटिक पोल (पीडीए) पार्टी के सदस्य के रूप में कोलंबियाई सीनेट के लिए चुने गए.

वैचारिक मतभेद के कारण उन्होंने पीडीए को छोड़ दिया और ह्यूमन कोलंबिया पार्टी की स्थापना की. इसके बाद साल 2011 में बोगोटा के मेयर चुने गए और 2015 तक इस पद पर रहे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)