फ्रांस में सीईओ की गिरफ़्तारी के बाद भारत में क्यों ट्रेंड कर रहा है टेलीग्राम?

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"क्या भारत में टेलीग्राम बैन हो जाएगा?"
"टेलीग्राम का विकल्प क्या है?"
इंटरनेट पर मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम से जुड़े ऐसे सवाल ट्रेंड कर रहे हैं.
दरअसल, भारतीय मीडिया में ऐसी ख़बरें आई हैं कि टेलीग्राम का इस्तेमाल कथित तौर पर उगाही और सट्टेबाज़ी के लिए हो रहा है और ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना तकनीक मंत्रालय इन आरोपों की जांच कर सकते हैं.

हाल ही में यूजीसी नेट और नीट परीक्षा विवाद में भी टेलीग्राम का नाम सामने आया था. सेबी ने भी टेलीग्राम पर शेयरों में हो रही सट्टेबाज़ी की जाँच की बात की थी.
पेरिस में टेलीग्राम के चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव पावेल दुरोव की गिरफ़्तारी के बाद से भारत में टेलीग्राम को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है.
टेलीग्राम फ़ेसबुक, यूट्यूब, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और वी चैट के बाद सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में से एक है.
फ्रांस में टेलीग्राम के सीईओ की गिरफ़्तारी

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फ्रांस के मीडिया की ख़बर के मुताबिक, शनिवार शाम पावेल दुरोव को पेरिस में गिरफ़्तार किया गया.
अधिकारियों के मुताबिक, 39 साल के अरबपति को मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम से संबंधित गतिविधियों के मामले में गिरफ़्तार किया गया. दुरोव पर आरोप है कि टेलीग्राम पर हो रही आपराधिक गतिविधियों को रोकने में वो विफल रहे.
मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर आरोप है कि मादक पदार्थों की तस्करी, बाल यौन सामग्री और धोखाधड़ी के मामलों की जांच में इस ऐप ने अधिकारियों के साथ सहयोग नहीं किया. हालांकि टेलीग्राम ने इस आरोप से इनकार किया है कि वो इस तरह की चीज़ों को रोकने में विफल रहे.
टेलीग्राम ने एक बयान में कहा, "ऐप का मॉडरेशन (अवांछित गतिविधियों पर नज़र रखना और उन्हें काबू में करना) इंडस्ट्री के मानदंड के अनुसार हैं और लगातार इसमें सुधार भी हो रहा है. ये दावा करना अजीब है कि एक प्लेटफॉर्म या उसका मालिक प्लेटफॉर्म के ग़लत इस्तेमाल के लिए ज़िम्मेदार है."
ऐप ने कहा, "सालाना क़रीब एक अरब यूज़र टेलीग्राम का इस्तेमाल कम्युनिकेशन और सूचना के लिए करते हैं."
टेलीग्राम भारत में एक लोकप्रिय ऐप है और सीईओ की गिरफ़्तारी के बाद से भारत में इंटरनेट पर ऐसे सवाल आ रहे हैं कि क्या भारत में टेलीग्राम को बैन कर दिया जाएगा.
टेलीग्राम को लेकर उस समय भी बहस छिड़ी थी जब यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द करने के बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस ऐप का ज़िक्र किया था.
यूजीसी नेट की परीक्षा कथित तौर पर प्रश्न पत्र लीक होने के आधार पर 24 घंटे के भीतर रद्द कर दी गई थी. इस पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि ये प्रश्न डार्क नेट पर मिले थे और इसका सर्कुलेशन टेलीग्राम पर हुआ था.
उन्होंने कहा था, "इन दिनों में टेलीग्राम पर ये क्वेश्चन आता है. टेलीग्राम का जो चरित्र है, उसको एक उच्चस्तरीय जांच के बिना ट्रैकिंग करना अपने-आप में एक चुनौती है."
वहीं, इस साल अप्रैल में बाज़ार नियामक संस्था सेबी ने भी टेलीग्राम पर शेयरों में हो रही सट्टेबाज़ी की जाँच की बात की थी.
सेबी का मानना था कि इन चैनलों पर कुछ लोग शेयरों के भाव कृत्रिम रूप से बढ़ा या घटा रहे हैं और आम निवेशकों को नुक़सान हो रहा है.
सेबी ने 30 सितंबर 2021 को मिली शिकायत के आधार पर सेफ़बुल्स नामक चैनल के ख़िलाफ़ जाँच शुरू की थी. सेबी ने जाँच में पाया कि चैनल कई शेयरों की सिफ़ारिश इस चैनल के ज़रिये कर रहा था और फिर इन्हें रीटेल निवेशकों को लेने की सलाह दे रहा था. इसे 'पंप एंड डंप' घोटाला कहा गया.

द हिंदू में छपी एक ख़बर में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि आईटी मंत्रालय ने गृह मंत्रालय से भारत में इस बारे में स्थिति की जानकारी मांगी है और कहा है कि अगर कोई उल्लंघन है तो उसके बारे में भी बताएं.
इस ख़बर में कहा गया है कि आईटी मंत्रालय ने इस ओर इशारा किया है कि ये मंत्रालय इस मामले में जांच एजेंसी की भूमिका अदा नहीं कर सकता है.
इस मंत्रालय के अधीन- इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी) साइबर सिक्योरिटी के अपराधों को देखता है.. न कि साइबर क्राइम को. इसलिए बेसिक सवाल ये है कि क्या कोई शिकायत है, या भारत में इस तरह की स्थिति है और इसमें किस तरह के एक्शन की ज़रूरत है.

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सोशल मीडिया पर क्या कह रहे लोग?
अनुराग त्रिपाठी नाम के एक यूज़र ने एक्स पर लिखा, "यूपीएससी की तैयारी के लिए लाखों स्टूडेंट्स टेलीग्राम पर निर्भर हैं. मुझे निजी तौर पर नहीं लगता है कि इस पर बैन लगेगा."
असीम यादव नाम के एक यूज़र लिखते हैं, " ये फ़्री स्पीच पर हमला है."
कुशाग्र सिंह नाम के एक यूज़र ने आरोप लगाया, "इसे बैन कर देना चाहिए क्योंकि यहां कोई रेगुलेशन नहीं है. ये अवैध गतिविधियों का अड्डा है."
अपर्णा नाम की एक यूजर लिखती हैं, "टेलीग्राम पर इनवेस्टमेंट फ्रॉड देखने को मिलता है. लोगों को इस जाल में नहीं फंसना चाहिए."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















