सीरिया: 'इंसाफ़ ऐसा होना चाहिए कि लगे ईश्वर ने किया हो'

उम्म माज़ेन
इमेज कैप्शन, उम्म माज़ेन को अभी भी उनके दो बेटों के भाग्य के बारे में कुछ नहीं मालूम है. उन्हें लोकतंत्र के समर्थन में शुरू हुए प्रदर्शन के दौरान गिरफ़्तार किया गया था.
    • Author, सेबेस्टियन अशर
    • पदनाम, मध्य पूर्व के विश्लेषक, बीबीसी

सीरिया के नए प्रशासन ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन के दौरान दर्ज़ आपराधिक मामलों में न्याय का वादा किया है. लेकिन, यह बहुत बड़ा वादा है क्योंकि सीरिया के गृहयुद्ध में बहुत से लोगों को नुकसान झेलना पड़ा है.

बीबीसी संवाददाता सेबेस्टियन अशर ने सीरिया की राजधानी दमिश्क में उन लोगों से मुलाक़ात की, जिनके लिए सीरिया में उनका भविष्य उन्हें मिलने वाले न्याय पर निर्भर है.

दमिश्क के उपनगर दौमा को गृह युद्ध के दौरान सबसे ज़्यादा तबाही झेलनी पड़ी थी. दौमा की उम्म माज़ेन अपने 12 साल के इंतज़ार के बारे में बताती हैं.

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इन 12 वर्षों के दौरान उन्होंने अपने दो लापता बेटों का पता लगाने की भरसक कोशिश की.

उम्म माज़ेन के दोनों ही बेटे सीरिया में शुरू हुए गृहयुद्ध के शुरुआती दौर में गिरफ़्तार हुए थे. बशर अल-असद के शासन के दौरान वे दोनों ही लापता हो गए.

मज़ेन को उनके बड़े बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र मिला, लेकिन छोटे बटे अबु हादी का पता अभी तक नहीं लगा है.

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अहमद ने इन तीन सालों के दौरान आठ महीने राजनीतिक कैदियों के लिए बनाए गए रेड ब्लॉक में बिताए. रेड ब्लॉक सैदयाना जेल में क्रूरता का पर्याय माना जाता है.

अहमद के सामने वाले दांत को हथौड़े से तोड़ दिया गया था. उन्हें केवल वह पल याद है, जब उन्होंने अपने भाई मज़ान की आवाज़ जेल में हाज़िरी भरते समय सुनी थी. इससे ज़्यादा उन्हें कुछ भी याद नहीं है.

लेकिन, उम्म माज़ेन अपने परिवार को उजाड़ने के लिए किस तरह का इंसाफ़ चाहती हैं?

इसके जवाब में वह कहती हैं, "ऐसा इंसाफ़ होना चाहिए कि लगे ईश्वर ने किया हो."

वह कहती हैं, "मैंने कुछ स्थानीय लोगों को सबीहा (सीरिया के सशस्त्र शासन का समर्थक) को मारने के लिए लाते देखा."

"मैंने उनसे कहा, इसे मत मारो. बल्कि इसे वैसे ही प्रताड़ित करो, जैसे इसने हमारे नौजवानों को प्रताड़ित किया है."

उम्म माज़ेन ने कहा, "मेरे दो बच्चे मारे गए हैं या शायद मर चुके हैं. लेकिन, ऐसे और हज़ारों युवा हैं जिन्हें यातनाएं दी गई हैं."

असद के बारे में उनका कहना है, "मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि बशर अल-असद को ज़मीन के अंदर बनी काल-कोठरी में रखा जाए. जो रूस उनके साथ था, वह भी उनकी सहायता ना कर पाए."

"मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि वह वैसे ही अंडरग्राउंड और ग़ुमनामी के अंधेरे में रहे. जैसे उसने हमारे नौजवानों को जेल में छोड़ दिया."

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वकील हुसैन इस्सा
इमेज कैप्शन, वकील हुसैन इस्सा मानते हैं कि जिन न्यायाधीशों ने बशर शासन को सहयोग किया, उनको अदालत से निष्कासित कर देना चाहिए.

वक़ील हुसैन ईस्सा असद शासन के दौरान राजनीतिक अपराधों के अभियुक्त कई लोगों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं.

अपनी वक़ालत के दौरान उन्हें सीरिया प्रशासन से लगातार दबाव का सामना करना पड़ा, लेकिन वह डटे रहे और अपने कुछ मुवक्किलों को शासन व्यवस्था के चंगुल से बचाने में सफल रहे.

लेकिन, जिन लोगों का मुक़दमा 'विशेष आतंकवाद अदालतों' में चल रहा था, उनके लिए कुछ नहीं किया जा सकता था.

गृहयुद्ध के बढ़ने के साथ ही सीरिया में 'आतंकवाद विरोधी' क़ानून भी और सख़्त होता गया.

अब, अपने गंदे और धूल भरे ऑफ़िस की खिड़की से दमिश्क के किनारे पहाड़ को देखते हुए 54 वर्षीय वकील हुसैन ईस्सा असद प्रशासन के दौरान न्यायाधीशों पर अपनी राय देते हैं.

उनका मानना है कि असद शासन के साथ मिलकर काम करने वाले न्यायाधीशों को बर्ख़ास्त कर देना चाहिए और उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.

हालांकि, उनका यह भी मानना है कि उस समय के कई अन्य न्यायाधीश नई न्यायिक व्यवस्था में अपना योगदान दे सकते हैं.

हुसैन ईस्सा 50 सालों में हुए अत्याचार के बदले न्याय दिलाने की कोशिशों की चुनौतियों पर भी बात करते हैं.

उनका कहना है, "ऐसा करने में सक्षम न्यायिक व्यवस्था बनाना सीरिया के नए अधिकारियों के लिए सबसे ज़रूरी है."

इस्सा के अनुसार, "अगर यह व्यवस्था अच्छी नहीं है, तो नए सीरिया का भविष्य अंधकारमय होगा. हम यह नहीं जानते कि ऐसी स्थिति कितनी बुरी हो सकती है."

"हम पहले से ही इसे लेकर डरे हुए हैं कि कुछ पार्टियां ऐसा करने में रुकावट डाल सकती हैं."

वह कहते हैं, "अगर ऐसी शासन व्यवस्था नहीं बन पाती है, तो हमारे मन में डर बना रहेगा. लेकिन, मैं स्वभाव से आशावादी हूं तो मुझे उम्मीद है कि सीरिया का नया शासन निश्चित रूप से बेहतर होगा."

न्याय मंत्री की डिप्टी ख़ितम हद्दाद
इमेज कैप्शन, ख़ितम हद्दाद को 2023 में उप न्याय मंत्री नियुक्त किया गया था.

सारिया की राजधानी दमिश्क में स्थित स्मारक भवन, जहां न्याय मंत्रालय स्थित है, असद शासन के अंत के बाद कई हफ़्तों तक निलंबित रहा.

अब सिविल और क्रिमिनल कोर्ट के खुलने से लिफ़्ट और गलियारों में वकीलों का समूह फिर से इकट्ठा होने लगा है.

पांचवीं मंजिल पर स्थित कार्यालय में, न्याय मंत्री की डिप्टी ख़ितम हद्दाद का कहना है कि आपराधिक और सिविल मामलों को एक बार फिर से निपटाया जाएगा.

लेकिन, पिछले शासन के दौरान दर्ज हुए आपराधिक मामलों को निपटाने का काम अभी शुरू नहीं होगा.

आधिकारिक काग़ज़ातों से भरी अपनी मेज़ के सामने वह कहती हैं, "मैं 2013 से न्यायधीश के तौर पर काम कर रही हूं. मुझे 2023 में उप न्याय मंत्री नियुक्त किया गया था. अभी मैं इस पद पर हूं. मैं इस मामले पर अपनी ज़िम्मेदारी महसूस करती हूं."

वह कहती हैं, "यह ज़रूरी है कि काम जारी रहे. जज अपने काम पर अदालत लौटें."

"एक सीरियाई नागरिक के तौर पर मैं चाहती हूं कि यह काम जारी रहे. मैं चाहती हूं कि यह जीत जारी रहे, ताकि लोगों को डरने की ज़रूरत ना हो."

"मैं लोगों को वास्तविक और सच्चा आश्वासन देना चाहती हूं, ना कि सिर्फ़ बातें."

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क्या सीरिया की न्यायिक व्यवस्था में सुधार हो पाएगा?

सीरियाई लोगों की मांग
इमेज कैप्शन, सीरिया के लोग अब असद शासन में अधिकारियों द्वारा किए गए अपराधों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं.

लेकिन, कुछ वकील बिना मतदान के बार एसोसिएशन की देख-रेख के लिए एक परिषद बनाए जाने के कदम से चिंतित हैं.

इसकी वजह ये है कि इस परिषद की देख-रेख वह अधिकारी कर रहे हैं, जिन्हें हटाया जाना है.

एक याचिका में उन वकीलों ने कहा, "इस तरह के नज़रिए से बस तानाशाही के तरीके को ही बदला जा रहा है."

अभी भी असद शासन का आतंकवाद विरोधी क़ानून और दूसरे कई और क़ानून लागू हैं.

असद शासन के दौरान हुए अपराधों के मामले की सुनवाई में लंबा समय लग सकता है.

असद शासन के कुछ पूर्व अधिकारियों के साथ क्रूरता के कुछ वीडियो सामने आए हैं. इसके बाद सीरिया के नए अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि वह क़ानून हाथ में ना लें.

सीरिया में ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ छापे मारे जा रहे हैं. गिरफ़्तारियां भी हो रही हैं. जो लोग सीमा पार करके लेबनान या इराक़ भाग गए हैं, उनमें के कुछ को वापस भी लाया गया है.

लेकिन, सीरिया में न्यायिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है. न्यायिक व्यवस्था असद के लंबे शासन के दौरान लोगों के दमन का एक बड़े साधन की तरह थी.

सवाल यह है कि क्या न्यायिक व्यवस्था सीरिया की चुनौतियों को लेने और सुधार में सक्षम है?

दमिश्क के पहाड़ों पर सीरिया के बुज़ुर्ग और युवा अब सर्दियों की ठंडी, साफ़ हवा में आज़ादी की सांस ले रहे हैं.

सुरक्षा बलों ने एक दशक से भी ज़्यादा समय तक यहां प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया था.

बशर अल-असद की सत्ता के पतन के बाद के हफ़्तों में खुले कैफ़े और दुकानों से वह अपने सामने फैले शहर को देखते हैं.

अपनी बुरी यादों और एक नए भविष्य के वादे के साथ, जिसमें उन्हें न्याय और जवाबदेही मिलेगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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