शहबाज़ शरीफ़ की सरकार में नवाज़ समर्थक नेताओं का इज़ाफ़ा क्यों हो रहा?

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    • Author, रौहान अहमद
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद

मंगलवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़), पंजाब के अध्यक्ष राना सनाउल्लाह को राजनीतिक और सार्वजनिक मामलों का अपना सलाहकार नियुक्त किया.

इस ख़बर ने पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दिया है.

इसकी वजह यह है कि कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने विदेश मंत्री इसहाक़ डार को उप प्रधानमंत्री नियुक्त किया था.

केंद्र सरकार में नज़र आने वाले बदलावों को ज़्यादा अहम इसलिए समझा जा रहा है क्योंकि राना सनाउल्लाह और इसहाक़ डार दोनों ही प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के बड़े भाई नवाज़ शरीफ़ के नज़दीकी समझे जाते हैं.

राना सनाउल्लाह की गिनती नवाज़ लीग के उन वरिष्ठ नेताओं में होती है जो इस साल आम चुनाव में हारने के कारण राष्ट्रीय असेंबली तक नहीं पहुंच सके थे.

राना सनाउल्लाह और मियां जावेद लतीफ़ चुनाव के बाद नवाज़ लीग के अंदर से उठने वाली उन अवाज़ों में से थे जो अपनी ही पार्टी के मंत्रिमंडल से ख़ुश नहीं थे.

राना सनाउल्लाह कई बार गृह मंत्री मोहसिन नक़वी और वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगज़ेब की आलोचना करते हुए नज़र आए हैं.

एक अवसर पर मोहसिन नक़वी के बारे में बात करते हुए राना सनाउल्लाह ने कहा था, ''यह उनकी मेहरबानी है कि वह प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते और वित्त मंत्रालय पर ही संतोष कर रहे हैं. वह जो चाहे बन सकते हैं.''

ध्यान रहे कि यह दोनों किसी भी राजनीतिक पार्टी का हिस्सा नहीं थे फिर भी न केवल उन्हें सीनेटर बनवाया गया बल्कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी शामिल किया गया.

क्या नवाज़ लीग के अंदर कोई रस्साकशी चल रही है?

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प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ नवाज़ लीग के अध्यक्ष का पद भी संभाल रहे हैं. राना सनाउल्लाह उन लोगों में शामिल हैं जो खुलकर कह चुके हैं कि वह चाहते हैं कि पार्टी का अध्यक्ष पद अब नवाज़ शरीफ़ ख़ुद संभालें.

विदेश मंत्री और सीनेटर इसहाक़ डार को उप प्रधानमंत्री और राना सनाउल्ला को राजनीतिक सलाहकार बनाना इस बात का संकेत है कि शायद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ अपनी पार्टी और सरकारी मामलों में अधिक नियंत्रण चाहते हैं.

इस साल हुए चुनाव से पहले नवाज़ लीग की ओर से कहा जा रहा था कि नवाज़ शरीफ़ चौथी बार देश के प्रधानमंत्री बनेंगे लेकिन चुनाव के नतीजे के बाद यह राय आम हुई कि स्पष्ट जनादेश और बहुमत न मिलने के कारण उन्होंने खुद ही प्रधानमंत्री पद से दूर रहने को प्राथमिकता दी.

हालांकि नवाज़ शरीफ़ की ओर से अब तक इस बारे में कोई बयान सामने नहीं आया है.

चुनाव के नतीजों के बाद नवाज़ शरीफ़ और उनकी पार्टी ने शहबाज़ शरीफ़ को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया.

इसके बाद वह पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट पाकिस्तान (एमक्यूएम) और दूसरी छोटी पार्टियों के समर्थन से दूसरी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री चुने गए.

पाकिस्तान की वर्तमान और अतीत की राजनीति पर नज़र रखने वाले विश्लेषक समझते हैं कि चुनाव के नतीजे के बाद बनने वाली सरकार की कैबिनेट में इस्टैब्लिशमेंट का समर्थन प्राप्त लोगों के आने से नवाज़ लीग में मतभेदों ने जन्म लेना शुरू कर दिया.

क्या कहते हैं विश्लेषक?

राना सनाउल्लाह (फाइल फोटो)

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इमेज कैप्शन, राना सनाउल्लाह (फाइल फोटो)

लाहौर में रहने वाले राजनीतिक विश्लेषक अजमल जामी कहते हैं कि चुनाव के बाद नवाज़ शरीफ़ के नज़दीकी साथियों की ओर से ऐसे बयान सामने आए जैसे कह रहे हों कि नवाज़ शरीफ़ के साथ कोई धोखा हो गया है.

पहले भी नवाज़ लीग के अंदर विभाजन की ख़बरें सामने आती रही हैं और यह भी कहा जाता रहा है कि शहबाज़ शरीफ़ इस्टैब्लिशमेंट के साथ मिलकर काम करने के समर्थक हैं.

अजमल जामी समझते हैं कि नवाज़ लीग इसहाक़ डार को उप प्रधानमंत्री और राना सनाउल्लाह को प्रधानमंत्री का सलाहकार बनाये जाने को 'सामान्य प्रक्रिया' बता रही है. ''यह कहा जा रहा है कि इनकी नियुक्ति के फ़ैसले ‘हितधारकों’ की राय से किए गए हैं.''

''लेकिन मेरी राय में यह सामान्य प्रक्रिया नहीं है बल्कि ऐसा मामला है जहां से अक्सर खटपट या मतभेद की शुरुआत होती है.''

अजमल जामी, पाकिस्तान

अजमल जामी के अनुसार नवाज़ लीग के नेताओं के ऐसे बयान नवाज़ शरीफ़ के नैरेटिव के लिए तो अच्छे थे लेकिन सरकार के लिए नहीं.

वे कहते हैं, ''राना सनाउल्ला और इसहाक़ डार की नियुक्तियों से सरकार ने इस राय को ग़लत साबित करने की कोशिश की है. यह इस बात का भी सबूत है कि नवाज़ शरीफ़ सरकार में अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें इसमें कामयाबी में भी मिली है.''

'पार्टी में कोई विभाजन नहीं'

पाकिस्तान

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इमेज कैप्शन, इशाक डार (बाएं) को पाकिस्तान का उपप्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है

दूसरी और नवाज़ लीग इस राय को काटती हुई नज़र आती है कि पार्टी में कोई विभाजन पाया जाता है.

नवाज़ लीग के नेता निहाल हाशमी पार्टी नेता राना सनाउल्लाह के हाल के बयानों को ‘सकारात्मक आलोचना’ बताते हुए कहते हैं कि इसका मक़सद सरकार के प्रदर्शन को बेहतर करना है.

निहाल हाशमी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, “इसहाक़ डार को उप प्रधानमंत्री और राना सनाउल्लाह को सलाहकार बनाना नवाज़ लीग की रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वे आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को बेहतर करना चाहते हैं.”

''हाल ही में प्रधानमंत्री की सऊदी अरब में कई विदेशी नेताओं से आर्थिक मामलों पर बातचीत हुई है और इसहाक़ डार को उप प्रधानमंत्री इसलिए नियुक्त किया गया है ताकि वह बतौर विदेश मंत्री भी और उप प्रधानमंत्री भी उन मामलों पर फ़ॉलो अप कर सकें.''

राना सनाउल्लाह के केंद्रीय कैबिनेट में शामिल होने पर निहाल हाशमी ने कहा, ''वह सरकार की ओर से राजनीतिक मामले देखेंगे क्योंकि प्रधानमंत्री अक्सर विदेशी दौरों पर होते हैं और उन्हें ज़रूरत थी एक ऐसे नेता की जो उनका बोझ बांट सके.''

वह कहते हैं, ''पार्टी में कोई विभाजन नहीं है और रही बात नवाज़ शरीफ़ साहब की पार्टी का अध्यक्ष पद संभालने की, तो जब 2017 में एक साज़िश के तहत उन्हें अध्यक्ष पद से हटाया गया था तो शहबाज़ शरीफ़ ने ख़ुद कहा था कि पार्टी की अध्यक्षता नवाज़ शरीफ़ की अमानत है.''

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