पाकिस्तान के राष्ट्रपति ज़रदारी ने अपनी बेटी को बनाया फ़र्स्ट लेडी, क्या है इस पर बहस

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पाकिस्तान में आसिफ़ा भुट्टो ज़रदारी देश की फर्स्ट लेडी बनाए जाने के कारण सुर्खियों में हैं.
आम तौर पर फर्स्ट लेडी किसी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की पत्नी को माना जाता है.
मगर पाकिस्तान में राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने ऐतिहासिक एलान करते हुए कहा कि उनकी बेटी आसिफ़ा मुल्क की फर्स्ट लेडी होंगी.
आसिफ़ अली ज़रदारी की पत्नी और पाकिस्तान की पूर्व पीएम बेनज़ीर भुट्टो की साल 2007 में हत्या कर दी गई थी.
आसिफ़ा भुट्टो तब महज़ 14 साल की थीं. बेनज़ीर भुट्टो इस्लामिक देश पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और 1998 में पीएम बनने के बाद ही वह तीन बच्चों की माँ बनी थीं.
ज़रदारी पहली बार 2008 में राष्ट्रपति बने थे और 2007 में बेनज़ीर भुट्टो की हत्या हो गई थी. तब आधिकारिक रूप से किसी को फर्स्ट लेडी के रूप में नियुक्त नहीं किया गया था. ज़रदारी 2013 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे थे.
मगर इस बार जब पाकिस्तान में नई सरकार बनी और इसके बाद आसिफ़ अली ज़रदारी ने देश के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर बीते रविवार को शपथ ली तो फर्स्ट लेडी पद पर अपनी छोटी बेटी आसिफ़ा के नाम का एलान किया गया. अभी आसिफ़ा 31 साल की हैं.
ज़रदारी के इस एलान पर पाकिस्तान में सवाल उठ रहे हैं कि आख़िर बेटी को फर्स्ट लेडी कैसे बनाया जा सकता है?

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2020 से राजनीति में सक्रिय हैं आसिफ़ा
बख़्तावर भुट्टो ज़रदारी आसिफ़ा की बड़ी बहन हैं.
बख़्तावर भुट्टो ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''आसिफ़ा अली ज़रदारी- जेल से रिहाई के लिए कोर्ट की सुनवाइयों के दौरान आसिफ़ अली ज़रदारी के साथ मौजूद रहने से लेकर पाकिस्तान की फर्स्ट लेडी बनने तक.''
आसिफ़ा अली ज़रदारी को फर्स्ट लेडी को मिलने वाली सुविधाएं भी मिलेंगी.
आसिफ़ा पाकिस्तान में सबसे कम उम्र की फर्स्ट लेडी बनी हैं.
वो पाकिस्तान पीपल्स पार्टी यानी पीपीपी के चुनावी अभियान के दौरान सक्रिय रही थीं.
आसिफ़ा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत नवंबर 2020 में पीपीपी की रैली से की थी.
ऐसे में जब पाकिस्तान की फर्स्ट लेडी बनाने का फ़ैसला हुआ तो इस पर सवाल भी उठे.

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क़ानून के जानकार क्या कह रहे हैं
पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने क़ानून के जानकारों से बात की है.
इन जानकारों का कहना है कि राष्ट्रपति के पास ये अधिकार है कि वो अपने परिवार की किसी महिला सदस्य को फर्स्ट लेडी का पद दे सकता है.
इन जानकारों का कहना है कि क़ानून में इसे लेकर कोई बाध्यता नहीं है. 1975 के क़ानून में राष्ट्रपति को मिले अधिकारों में फर्स्ट लेडी का कोई ज़िक्र नहीं है. गृह मंत्रालय के जारी दस्तावेज़ों में भी फर्स्ट लेडी या फर्स्ट हसबैंड का ज़िक्र नहीं मिलता है.
संविधान और क़ानून के तहत राष्ट्रपति को मिलने वाली सुविधाएं परिवार के सदस्यों, बच्चों को भी मिलती हैं. क़ानून के तहत राष्ट्रपति के परिवार के सदस्य सरकारी आवास, एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं.
जियो टीवी की वेबसाइट की ख़बर के मुताबिक़, सैन्य शासन के दौरान राष्ट्रपति बनने के बाद साल 1958 में अयूब ख़ान ने भी अपनी बेटी नसीम औरंगज़ेब को फर्स्ट लेडी बनाने का एलान किया था. तब अयूब ख़ान की पत्नी जीवित थीं.
मोहम्मद अली जिन्ना की बहन फ़ातिमा जिन्ना भी अपने भाई के साथ कई मौक़ों पर साथ नज़र आती थीं.
अतीत में दूसरे कई देशों में ऐसे मामले देखने को मिले थे, जिसमें पत्नी के ना होने पर राष्ट्रपतियों ने अपनी बेटियों, बहनों को फर्स्ट लेडी बनाने के लिए कहा था.
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति एंड्रू जैक्शन की पत्नी नहीं थी. उन्होंने अपनी भांजी एमिली डोनेल्सन को फर्स्ट लेडी बनाने के लिए कहा था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, दो और अमेरिकी राष्ट्रपतियों चेस्टर आर्थर और ग्रोवर क्लीवलेंड ने अपनी बहनों को फर्स्ट लेडी के तौर पर अपनी सेवाएं देने के लिए कहा था.
पाकिस्तान में राष्ट्रपति के साथ रहने के अलावा फर्स्ट लेडी स्वास्थ्य और समाजिक कार्यक्रमों में भी शामिल होती हैं.
हालांकि पाकिस्तान के मामले में कुछ फर्स्ट लेडी राजनीति में भी सक्रिय रह चुकी हैं.
आसिफ़ा की दादी नुसरत भुट्टो, ज़िया उल हक़ की पत्नी शफ़ीक़ ज़िया फर्स्ट लेडी होने के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय थीं.

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आसिफ़ा के बारे में कुछ बातें
आसिफ़ा पाकिस्तान के विदेश मंत्री रह चुके बिलावल भुट्टो की बहन हैं. आसिफ़ा अपने पिता के साथ ज़्यादा नज़र आती रही हैं.
आसिफ़ा ने ऑक्सफर्ड ब्रुक्स यूनिवर्सिटी से समाज और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की है. आसिफ़ा ने 21 साल की उम्र में ऑक्सफर्ड यूनियन में भाषण दिया था.
आसिफ़ा समाजिक कार्यों में भी सक्रिय नज़र आई हैं.
जब आसिफ़ अली ज़रदारी अपना इलाज करवा रहीं मलाला यूसुफ़ज़ई से मिलने बर्मिंगम गए थे, तब आसिफ़ा भी उनके साथ गई थीं.
आसिफ़ा सोशल मीडिया पर भी सक्रिय नज़र आती हैं.
पाकिस्तान पोलियो की समस्या से अब तक जूझ रहा है और वहां पोलियो की दवा बच्चों को पिलाना एक चुनौती है.
आसिफ़ा पोलियो से जुड़े अभियानों में भी काफी सक्रिय रही थीं.

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भाई बिलावल की शख्सियत
27 दिसंबर, 2007 में बिलावल भुट्टो को माँ बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद पाकिस्तान पीपल्स पार्टी का उत्तराधिकार घोषित किया गया था.
तब बिलावल महज़ 19 साल के थे और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के क्राइस्ट कॉलेज में इतिहास से ग्रैजुएशन कर रहे थे. अब बिलावल जब 33 साल के हैं तो उन्हें पाकिस्तान का विदेश मंत्री बना दिया गया है.
2009 में बिलावल को अमेरिका-पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान के एक समिट में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनाया गया था. तब बिलावल 21 साल के थे और उनके पिता आसिफ़ अली ज़रदारी पाकिस्तान के राष्ट्रपति. कहा जाता है कि इस अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के अलावा कूटनीतिक मामलों में बिलावल के पास कोई अनुभव नहीं है.
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