कनाडा के आरोपों का असर ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन से भारत के सबंधों पर क्या पड़ेगा?

ब्रितानी प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से हाथ मिलाते कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो

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    • Author, अरविंद छाबड़ा
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ पंजाबी

खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार पर उंगली उठाते हुए संसद में बयान दिया था. इसके बाद से दोनों देशों के बीच राजनयिक संकट खड़ा हो गया है.

कनाडा के अलावा ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों में सिखों की अच्छी ख़ासी संख्या है और यहाँ हाल के महीनों में भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन हुए हैं और खालिस्तान अलगाववाद से जुड़ी गतिविधियों को हवा मिली है.

बहुत से लोग सोचने लगे हैं कि इन प्रदर्शनों से क्या संदेश देने की कोशिश हो रही है और ये गतिविधियां किस तरह भारत और इन देशों के बीच के रिश्तों पर असर डाल रही हैं.

लंदन में एसओएस यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध पढ़ाने वाले अविनाश पालीवाल कहते हैं, “खालिस्तान का मुद्दा पश्चिमी देशों के साथ भारत के रिश्ते में लंबे समय से एक परेशानी का सबब रहा है. लेकिन 2020-21 में हुए किसान प्रदर्शनों और उसके बाद के घटनाक्रमों के बाद यह और बिगड़ा है.”

“कनाडा के साथ मौजूदा तनाव ने द्विपक्षीय संबंधों को और गंभीर संकट में डाल दिया है क्योंकि कनाडा ने भारत पर उसकी संप्रभुता में दखल देने का औपचारिक रूप से आरोप लगाया है.”

कनाडा

इस साल की शुरुआत से ही कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियां बढ़ी हैं

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इमेज कैप्शन, इस साल की शुरुआत से ही कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियां बढ़ी हैं

कनाडा में भारत के बाहर सबसे अधिक सिख आबादी है. यहां कुल सिख आबादी 7.8 लाख है जो कि कुल आबादी का दो प्रतिशत है.

भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, कनाडा के साथ 2022-23 में कुल 4.1 अरब डॉलर व्यापार था, जो कि पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 9 प्रतिशत अधिक है.

प्रवासी समुदाय

भारत और कनाडा के बीच कारोबार पहले की तरह ही चल रहा है

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इमेज कैप्शन, भारत और कनाडा के बीच कारोबार पहले की तरह ही चल रहा है

साल 2018 से ही भारत, कनाडा में विदेशी छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत देश रहा है. साल 2022 में इनकी संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि होई और अब ये संख्या 3.20 लाख पहुंच गई है.

2021 में चुने गए हाउस ऑफ़ कॉमंस में भारतीय मूल के 17 सांसद हैं. कनाडा के न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के अध्यक्ष जगमीत सिंह हैं.

पिछली सरकार में अनीता आनंद समेत तीन अन्य भारतीय मूल के सांसद मंत्री रहे थे. मौजूदा सरकार में अनीता आनंद रक्षा मंत्री हैं और उनके अलावा दो अन्य भारतीय मूल के मंत्री हैं- सज्जन और कमल खेड़ा.

कनाडा के एक पत्रकार शमील के अनुसार, “भारतीय-कनाडाई समुदाय को यहाँ राजनीतिक रूप से सबसे अधिक सक्रिय समुदाय माना जाता है. सभी पार्टियां उन्हें अहमियत देती हैं. वे बहुत राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं.”

खालिस्तान संबंधी गतिविधियां

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर

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इमेज कैप्शन, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर लगातार कनाडा में भारत विरोधी गतिविधियों का मुद्दा उठाते रहे हैं

हरदीप सिंह निज्जर की मौत के बाद भी बहुत से लोग सड़कों पर उतरे थे. आठ जुलाई को सैकड़ों लोगों ने निज्जर की हत्या के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया, इसके जवाब में भारत सरकार के समर्थन में भी प्रदर्शन हुए थे.

बैरीकेड के दोनोें तरफ़ से दोनोें पक्षों ने कई घंटों तक एक दूसरे के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की थी. बैरीकेड को लांघने की कोशिश में एक खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारी को हिरासत में भी लिया गया था. इन प्रदर्शनों से पहले ही इन्हें लेकर चिंताएं ज़ाहिर की गई थीं.

खालिस्तान का झंडा

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टोरंटो में हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ पोस्टरों पर लिखा था, ‘किल इंडिया’ और कनाडा में भारत के राजनयिकों को हत्यारा बताया गया था, इसके बाद भारत सरकार ने कनाडा के राजदूत को तलब किया था.

इसी महीने दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के बीच हुई मुलाक़ात से आगे होने वाले घटनाक्रम के कुछ संकेत ज़रूर मिले थे.

खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में ट्रूडो ने कहा था कि कनाडा हमेशा अभिव्यक्ति की आज़ादी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आज़ादी की रक्षा करेगा.

भारत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी. भारत ने कहा था, “कनाडा अलगाववाद को बढ़ावा दे रहा है और भारतीय राजनयिकों के ख़िलाफ़ हिंसा भड़का रहा है.”

द्विपक्षीय रिश्ते

हरदीप सिंह निज्जर

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इमेज कैप्शन, हरदीप सिंह निज्जर सरे की गुरुनानक सिख गुरुद्वारा साहिब के प्रमुख थे.

दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ़ कंफ्लिक्ट मैनेजमेंट के कार्यकारी निदेशक अजय साहनी कहते हैं, “दोनों देशों के बीच रिश्ते लगातार ख़राब होते दिख रहे हैं. कनाडा खालिस्तानी समुदाय के मिलिटेंट तत्वों की गतिविधियों को बढ़ावा देकर ऐसे तत्वों को अधिक जगह दे रहा है और इसे एक हद तक समझा भी जा सकता है क्योंकि ट्रूडो की सरकार अल्पमत में है और उन्हें जगमीत सिंह की नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन प्राप्त है. जगमीत सिंह खालिस्तान समर्थक हैं. ऐसे में आप ये कह सकते हैं कि ट्रूडो की सरकार खालिस्तान के समर्थन पर ही टिकी है.”

वो कहते हैं कि खालिस्तानी समर्थकों की तादाद भले ही कितनी ही हो लेकिन वो एक ब्लॉक की तरह एकजुट होकर वोट करते हैं जबकि जो उदारवादी मतदाता हैं वो वोट डालने से पहले कई मुद्दों के बारे में सोचते हैं.

वो कहते हैं, “इस समस्या की प्रकृति भारत सरकार जैसी ही है. जब लोग हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं तब वो उन्हें ये तर्क दे देते हैं कि आप अपना हिंदू राष्ट्र बनाओं, हमें हमारा खालिस्तान दे दो.”

एनडीपी नेता जगमीत सिंह अपनी पत्नी के साथ

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इमेज कैप्शन, एनडीपी नेता जगमीत सिंह अपनी पत्नी के साथ

पूर्व राजदूत अनित त्रिगुनायत कहते हैं कि उन्हें निकट भविष्य में दोनों देशों के रिश्ते सामान्य होते नहीं दिख रहे. जब तक ट्रूडो अपना नज़रिया नहीं बदलेंगे, हालात ऐसे ही रहेंगे.

वो कहते हैं, “कनाडा में खालिस्तानी तत्वों को पिछले चालीस सालों से समर्थन मिल रहा है. भारत सरकार कनाडा को आतंकवादियों की सूची सौंपती रही है और अपने समर्थन में सबूत देती रही है. लेकिन अभी तक कुछ हुआ नहीं है.”

कनाडा हमेशा ये तर्क देता रहा है कि वो नफ़रत के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगा लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बरक़रार रखेगा.

पूर्व राजदूत तर्क देते हैं कि अगर कनाडा भारत से दोस्ताना संबंध चाहता होता तो वो इन आरोपों को सार्वजनिक नहीं करता और भारतीय राजनयिक को देश से नहीं निकालता. भारत ने ज़ाहिर है इस पर प्रतिक्रिया दी और अब नतीजा हमारे सामने हैं.

ऑस्ट्रेलिया

सांकेतिक तस्वीर

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साल 2021 की जनगणना के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के 6.73 लाख लोग रहते हैं, जिनमें से 2.39 लाख लोग पंजाबी भाषा बोलने वाले हैं.

भारतीय समुदाय

मेलबर्न में रहने वाली पत्रकार रूचिका तलवार कहती हैं, “पिछले कुछ दशकों से ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की तादाद और प्रभाव बढ़ रहा है. अब राजनीति और दूसरे क्षेत्रों में भारतीय अधिक दिखते हैं. ऑस्ट्रेलिया के लोग सामान्य तौर पर आईटी और मेडिसिन क्षेत्र में भारतीय की दक्षता की बात करते हैं. संघीय और प्रांतीय स्तर पर कई निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जिनका जन्म भारत में हुआ था.”

हालांकि ब्रिटेन और कनाडा की तुलना में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों को वो महत्व नहीं मिलता है. लीसा सिंह तसमानिया की सीनेटर बनीं. संसद के लिए चुने गए डेनिल मूखे को हाल ही ट्रेजरर नियुक्त किया गया और वो ऑस्ट्रेलिया में भगवत गीता की शपथ लेने वाले पहले व्यक्ति बने हैं.

खालिस्तान संबंधित गतिविधियां

ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान जनमतसंग्रह से संबंधित पोस्टर

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रुचिका तलवार कहती हैं कि ऑस्ट्रेलिया और भारत के रिश्ते भी खालिस्तान पर बहस से अछूते नहीं हैं. खालिस्तान की मांग करने वाले शीर्ष संगठन एसएफजे इसी साल मेलबर्न, सिडनी और ब्रिसबेन में खालिस्तान के लिए जनमतसंग्रह करा चुका है.

मई में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिख अलगाववादियों और ऑस्ट्रेलिया में उनकी गतिविधियों को लेकर अपनी सरकार की चिंताएं ज़ाहिर की थीं.

उन्होंने हिंदू मंदिरों की दीवारों पर नारे लिखे जाने का मुद्दा भी उठाया था. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने उन्हें भरोसा दिया था कि इस तरह की भारत विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

रूचिका कहती हैं कि ऑस्ट्रेलिया भारत और कनाडा के बीच जारी विवाद को दूर से देख रहा है.

ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता पेनी वांग की कनाडा के आरोपों को लेकर की गई टिप्पणी स्थानीय मीडिया में प्रकाशित हुई है. उन्होंने कहा था कि इस मामले में जांच चल रही है लेकिन आरोप चिंताजनक हैं.

भारत और ऑस्ट्रेलिया, कारोबार-शिक्षा और रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोगी हैं. दोनों ही देश साझा चिंताओं से भी जुड़े हैं और क्वॉड का हिस्सा हैं. क्वॉड चार देशों का रणनीतिक गठबंधन हैं जो भारत-प्रशांत क्षेत्र में इन देशों के प्रभाव को मज़बूत करने के उद्देश्य से गठित किया गया है.

ऑस्ट्रेलिया में विदेशी छात्रों में सबसे बड़ी तादाद भारतीयों की है. पिछले कई सालों से ऑस्ट्रेलिया जाने वाले भारतीय पर्यटकों की तादाद भी बढ़ी है.

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ब्रिटेन

पीएम मोदी के साथ ऋषि सुनक (फ़ाइल फ़ोटो)

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इमेज कैप्शन, पीएम मोदी के साथ ऋषि सुनक (फ़ाइल फ़ोटो)

ब्रिटेन में क़रीब 5.24 लाख सिख रहते हैं जो देश की कुल आबादी के एक प्रतिशत से भी कम हैं.

भारत और ब्रिटेन के बीच साल 2022-23 में 114.06 करोड़ डॉलर का कारोबार हुआ है. पिछले साल के मुक़ाबले ये नौ प्रतिशत बढ़ा है.

भारतीय समुदाय

भारतीय उच्चायोग की 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक़ ब्रिटेन में बड़ी तादाद में भारतीय रहते हैं और अनुमान के मुताबिक़ इनकी संख्या 15 लाख से अधिक हो सकती है. ब्रिटेन में भारतीयों के मालिकाना हक़ वाली 65 हज़ार से अधिक कंपनियां हैं.

उच्यायोग के मुताबिक़, “इनमें से जिन 654 कंपनियों का हमने अध्ययन किया है, उनका कुल साझा टर्नओवर 36.84 अरब पाउंड से भी अधिक है और ये कंपनियां सालाना एक अरब पाउंड से अधिक टैक्स देती हैं.”

ब्रिटेन में भारतीय मूल के दादाभाई नैरोजी 1892-95 तक लिबरल डेमोक्रेट सांसद रहे थे. तब से ही ब्रितानी राजनीति में भारतीय अपनी भूमिका निभाते रहे हैं. 2020 में हाउस ऑफ़ कामन्स में भारतीय मूल के 15 सदस्य थे जबकि हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में भारतीय मूल के 23 सदस्य थे. ब्रिटेन के मौजूदा प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी भारतीय मूल के हैं.

खालिस्तान संबंधित गतिविधियां

भारत से बड़ी तादाद में छात्र कनाडा पढ़ाई करने जाते हैं

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हरदीप सिंह निज्जर की तरह ही, ब्रिटेन में भी एक खालिस्तान समर्थक नेता की हाल ही में मौत हुई है. अवतार सिंह खांडा को खालिस्तान लिब्रेशन फ़ोर्स का प्रमुख कहा जाता है.

उनकी बर्मिंगम में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी. कुछ लोगों का मानना है कि ये ज़हर देने से जुड़ा मामला हो सकता है.

लंदन में हाल के महीनों में कई प्रदर्शन हुए हैं, संभवतः 19 मार्च का प्रदर्शन सबसे बड़ा था, इससे एक दिन पहले ही पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह को हिरासत में लेने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया था.

लंदन में भारतीय उच्चायोग के सामने प्रदर्शन के वीडियो भी सामने आए जिनमें एक व्यक्ति पहली मंज़िल की बालकनी पर लहरा रहे भारतीय ध्वज को खींचता दिख रहा है.

ब्रिटेन ने कनाडा के ताज़ा घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरले ने ट्वीट किया है, “सभी देशों के संप्रभुता और क़ानून के शासन का सम्मान करना चाहिए. हम कनाडा की संसद में उठाई गई गंभीर चिंताओं को लेकर अपने कनाडाई सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में हैं. ये महत्वपूर्ण है कि कनाडा की जांच पूरी हो और दोषियों को सज़ा दी जाए.”

ब्रिटेन में इस समय भारतीय मूल के ऋषि सुनक प्रधानमंत्री हैं. ऐसे में विशेषज्ञों को भारत और ब्रिटेन के रिश्तों में कोई समस्या दिखाई नहीं देती. अनिल त्रिगुनायत कहते हैं, “वास्तव में, जी-20 सम्मेलन के दौरान सुनक ने भारत को भरोसा दिया है कि किसी भी अवैध गतिविधि को उनके देश में नहीं होने दिया जाएगा.”

भारत का वीज़ा

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इमेज कैप्शन, भारत के कनाडा के नागरिकों का वीज़ा बंद करने के बाद तनाव और बढ़ गया है

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