महिलाओं में कैसे लोकप्रिय हो रही है पुरुषों की पसंद मानी जाने वाली बीयर

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न्यूयॉर्क की एक सुपरमार्केट में क्राफ़्ट बीयर के सेक्शन में रंग-बिरंगे पैटर्न वाली बीयर के चार पैक रखे हुए हैं. इन्हें फ़्रूट फ्लेवर वाली बीयर पसंद करने वालों को आकर्षित करने के लिए रखा गया है.
बीबीसी वर्कलाइफ़ की लिलियन स्टोन बताती हैं कि देखने में ये काफ़ी ‘फ़ेमिनिन’ लगती हैं. ऐसा लगता है कि ये महिलाओं के लिए बनाई गई है.
ऐसा इसलिए क्योंकि इनके अलग-बगल में रखी बाक़ी बीयरों की मार्केटिंग कुछ इस तरह से की गई है कि उन्हें ‘मर्दाना’ दिखा जाए.
ये सुंदर पैकेजिंग की है तालिया बीयर कंपनी ने. अमेरिका के ब्रुकलिन की इस ब्रुअरी यानी बीयर बनाने वाली फ़ैक्ट्री को लीएन डार्लैंड और तारा हैन्किन्सन नाम की महिलाएं चलाती हैं. उन्होंने साल 2019 में इस ब्रूअरी की स्थापना की थी.
जिन छोटी फ़ैक्ट्रियों में बिना बड़ी मशीनों की सहायता के छोटे पैमाने पर बीयर तैयार की जाती है, उन्हें क्राफ़्ट ब्रूअरी कहा जाता है.
इस तरह से बनी बीयर कहलाती है क्राफ़्ट बीयर, जिसका चलन आजकल ज़्यादा देखने को मिल रहा है.
बीबीसी वर्कलाइफ़ को भेजे एक ईमेल में डार्लैंड और हैन्किन्सन लिखती हैं, “तालिया की स्थापना करते समय हमारी सोच यह थी कि क्राफ़्ट बीयर बनाने वाली कंपनियां हम जैसी महिलाओं को अपना ग्राहक ही नहीं मान रही थीं.”
वे दोनों कहती हैं कि उनका मक़सद क्राफ़्ट बीयर को सबसे लिए समावेशी बनाना है, भले ही आप महिला हों, एलजीबीटीक्यू प्लस समुदाय से हों, अल्पसंख्यक हों या पहली बार क्राफ़्ट बीयर आज़मा रहे हों.
क्या महिलाओं का ड्रिंक नहीं है बीयर?

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दुनिया भर में बहुत सारी महिलाएं बीयर पीना पसंद करती हैं कि लेकिन शराब की अलग-अलग क़िस्मों के बीच बीयर के मामले में उन्हें नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है.
गुरुग्राम की एक सॉफ़्टवेयर कंपनी में काम करने वालीं अदिति सिंह ने बीबीसी सहयोगी आदर्श राठौर को बताया कि यह आम धारणा है कि लड़कियां बीयर पसंद नहीं करतीं.
उन्होंने कहा, “मैं ख़ुद और मेरी जान-पहचान की कई लड़कियां बीयर पसंद करती हैं. लेकिन मैंने देखा कि जब कभी किसी नई पार्टी में गई तो पूछा गया कि मैं वोडका लूंगी या वाइन. यानी यह मानकर ही लोग चलते हैं कि लड़की है तो बीयर पीएगी ही नहीं.”
बीयर के विज्ञापनों और ब्रैंडिंग में भी यही बात नज़र आती है कि जो इस सोच को दर्शाती है कि बीयर महिलाओं का ड्रिंक नहीं है.
दुनिया भर में यह देखने को मिलता है कि बीयर के कई वैश्विक ब्रैंड और स्थानीय क्राफ़्ट ब्रूअरीज़ भी पुरुषों को ही मुख्य ग्राहक मानती हैं.
भारत में तो शराब के विज्ञापन प्रतिबंधित हैं, मगर यूट्यूब पर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जानी-मानी कंपनियों की ओर से जारी विज्ञापनों के केंद्र में पुरुष ही रहते हैं.
हालांकि, ब्रिटेन और अमेरिका में कई ब्रूअरीज़ अब लिंग के आधार पर भेदभाव करने वाली मार्केटिंग से बचने की कोशिश करती दिख रही हैं.
बीबीसी वर्कलाइफ़ के अनुसार, मिलर लाइट और कोरोना जैसे ब्रैंड भी अपनी मार्केटिंग करते समय महिलाओं को केंद्र में ला रहे हैं.
आंकड़े भी कहते हैं कि अमेरिका में महिलाएं शराब पीने के मामले में पुरुषों को पीछे छोड़ रही हैं.
ऐसे में बीयर इंडस्ट्री भी इस पर ध्यान दे रही हैं और अब तक पुरुष प्रधान रहे अपने रवैये में बदलाव ला रही हैं.
भारत में क्राफ़्ट बीयर का बढ़ता चलन

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पिछले साल महिला दिवस के मौक़े पर बेंगलुरु की गाइस्ट नाम की एक क्राफ़्ट ब्रूअरी ने ‘विमेन हू लागर’ अभियान के तहत एक ख़ास क्राफ़्ट बीयर लॉन्च की थी.
लागर उस बीयर को कहा जाता है जो कम तापमान पर धीरे-धीरे काम करने वाले यीस्ट की मदद से बड़ी धीमी प्रक्रिया से तैयार की जाती है.
‘विमेन हू लागर’ का मतलब हुआ- ऐसी महिलाएं जो लागर क़िस्म की बीयर तैयार करती हैं.
इस अभियान में छह ऐसी महिलाएं शामिल थीं, जो भारत में बीयर इंडस्ट्री से जुड़ी हैं. कुछ की अपनी ब्रुअरीज़ हैं, कुछ छोटी ब्रूअरी चलाने वालों की सलाहकार हैं तो कुछ बीयर बनाने के लिए ज़रूरी सामान मुहैया करवाती हैं.
उन्होंने स्ट्रैटोस्फ़ियर नाम से बीयर लॉन्च की थी, जो कुछ समय के लिए उपलब्ध थी. लेकिन यह बीयर सिर्फ़ महिलाओं के लिए नहीं थी.
इस मुहिम से जुड़ी महिलाओं का कहना था कि उनका मक़सद इस राय को तोड़ना था कि महिलाएं जो बीयर बनाती हैं, वे सिर्फ़ महिलाओं के लिए नहीं होतीं.
'आर्थिक मजबूरी' के कारण आ रहा बदलाव

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केट बर्नोट अमेरिका मे बेवरेज-एल्कॉहल रिपोर्टर हैं. उन्होंने ‘गुड बीयर हंटिग्स साइटलाइन्स’ के लिए इस विषय पर काफ़ी विस्तार से लेखन किया है.
बीबीसी वर्कलाइफ़ के लिए लिलियन स्टोन से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब मार्केटिंग के तरीक़े में जो बदलाव आ रहा है, उसके पीछे आर्थिक मजबूरी भी है.
वह कहती हैं, “अब सांस्कृतिक व्यवस्थाएं लिंग आधारित नहीं रही हैं. मुझे लगता है कि महिलाएं और कई सारे पुरुष अब नए और समझ भरे विचारों को पसंद करते हैं. इसलिए कंपनियों को अब पहले से ज़्यादा मेहनत करनी पड़ रही है.”
बर्नोट को लगता है कि इस बदलाव का एक कारण यह भी है कि अब तक ऐतिहासिक रूप से पुरुष प्रधान रही बीयर इंडस्ट्री की कंपनियों में उच्च पदों पर महिलाओं की संख्या बढ़ी है और वे अब खुलकर फ़ैसले ले पा रही हैं.
हेनिकेन अमेरिका की सीईओ मैगी टिमनी साल 2021 में कंपनी के इस शीर्ष पर पह पहुंची थीं. इसी तरह मॉलसन कूर्स में मिशेल सैंट जाक, चीफ़ कमर्शियल ऑफिसर हैं.
भारत में भी कई ऐसी क्राफ़्ट ब्रूअरीज़ खुली हैं, जिन्हें महिलाएं चला रही हैं. इसके अलावा, बड़ी शराब कंपनियों में उच्च पदों पर भी महिलाएं अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही हैं.
महिलाओं को केंद्र में रखकर बनती बीयर

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न सिर्फ़ पुरानी कंपनियों ने अपनी मार्केटिंग का तरीक़ा बदला है, बल्कि नई कंपनियां भी इसे अवसर की तरह ले रही हैं और महिलाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं.
इसके लिए पैकेजिंग से लेकर बीयर का नाम रखने से पहले भी विचार किया जा रहा है. यही नहीं, अलग तरह बीयर भी तैयार की जा रही है. जैसे कि तालेया जो बीयर बनाती है, उनमें से कुछ में हल्के फ़्लेवर होते हैं. कुछ में फलों का फ़्लेवर भी होतात है.
भारत की क्राफ़्ट बीयर कंपनियां भी इसी तरह की रणनीति अपना रही हैं. शिमला में रहने वालीं दीपिका शर्मा बीबीसी सहयोगी आदर्श राठौर से कहती हैं कि कड़वाहट के कारण उन्हें और उनकी ज़्यादातर सहेलियों को बीयर पसंद नहीं आती थी.
उन्होंने कहा, “एक बार शिमला की एक ब्रूअरी में मैंने मैंगो फ़्लेवर क्राफ़्ट बीयर चखी और मुझे बहुत पसंद आई. अब मैं कभी-कभार किसी क्राफ़्ट ब्रूअरी की फ़्लेवर्ड बीयर ट्राई कर लेती हूं.”
हमारा मानना है कि महिलाओं को ऐसे स्वाद वाली बीयर चखाई जाए, जिन स्वादों से वे वाकिफ हैं और जो उन्हें पसंद हैं. बाद में वे और क़िस्म की बीयर का भी लुत्फ़ उठा सकते हैं.
दीपिका को लगता है कि क्राफ़्ट ब्रूअरीज़ ने परंपरागत तौर पर एक जैसे स्वाद वाली बीयरों से अलग विकल्प मुहैया करवाना शुरू किया है, इस वजह से बीयर महिलाओं में पहले से अधिक लोकप्रिय हुई है.
तालिया की सह-संस्थापक तारा हैन्किन्सन कहती हैं, “हमने रेटिंग वेबसाइट बीयर एडवोकेट की रेटिंग देखी और पाया कि महिलाओं को क्या पसंद है. उसे देखते हुए हमने फ्रूट फ्लेवर वाली बियर बनाईं जिनमें कड़वाहट कम होती है.”
“हमारा मानना है कि महिलाओं को ऐसे स्वाद वाली बीयर चखाई जाए, जिन स्वादों से वे वाकिफ हैं और जो उन्हें पसंद हैं. बाद में वे और क़िस्म की बीयर का भी लुत्फ़ उठा सकते हैं.”
यह तरीक़ा काम भी कर गया है. तालिया की संस्थापकों का अनुमान है कि उनके ग्राहकों में 70 फ़ीसदी महिलाएं हैं.
महिलाओं के सशक्त होने का असर

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अमेरिका में बेवरेज-एल्कॉहल रिपोर्टर केट बर्नोट कहती हैं कि महिलाओं की खरीदने की क्षमता बढ़ने से भी बदलाव हुआ है.
वह कहती हैं कि अगर आप एक बीयर कंपनी के रूप में महिलाओं की उम्मीदों का ख़्याल रखेंगे तो वे पुरुष भी आपकी ओर आकर्षित होंगे, जिन्हें वर्तमान में उपलब्ध बीयर पसंद नहीं है.
वहीं, अदिति सिंह कहती हैं, “बाज़ार में अब ऐसे कई ब्रैंड आ गए हैं जो लड़कियों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं. यह दिखाता है कि इंडस्ट्री को एहसास हो चुका है कि महिलाओं के बीच प्रॉडक्ट बेचना है तो उनकी पसंद की चीज़ें बनानी होंगी.”
केट बर्नोट कहती हैं, “महिलाएं अब अच्छा पैसा कमा रही हैं. वे कॉलेज जा रही हैं और अच्छी प्रोफ़ेशनल जॉब कर रही हैं. उनके पास पैसा भी है और ताकत भी है.”
वह कहती है कि महिलाएं इस मामले में सशक्त हैं कि वे शराब के ब्रैंडों को प्रभावित कर सकें, क्योंकि वे पैसे और ताक़त, दोनों के दम पर अपनी पसंद के प्रॉडक्ट्स तलाश सकती हैं.
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