एक विदेश मंत्री के पतन से कैसे हुआ चीन शर्मसार

चिन गांग

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इमेज कैप्शन, 'लड़ाकू' किस्म की छवि के बावजूद चिन गांग ने ये दिखलाया था कि वे उन्हें नरमी से पेश आना भी आता है
    • Author, टेसा वॉन्ग
    • पदनाम, एशिया डिजिटल रिपोर्टर, बीबीसी न्यूज़

चीन के विदेश मंत्री चिन गांग को पद से हटाए जाने के मामले में एक तरफ़ रहस्य गहराता जा रहा है तो दूसरी तरफ़ ये सवाल भी उठ रहे हैं कि उनके पतन का चीन की कूटनीति पर क्या असर पड़ेगा?

चिन गांग विदेश मंत्रालय में हफ़्तों गैरहाजिर रहे और इसकी कोई वजह सामने नहीं आई. इसके बाद चीनी नेतृत्व ने उन्हें पद से मुक्त कर दिया.

यहां तक कि विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद उनके हरेक जिक्र को भी मिटा दिया गया.

विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकरण से चीन के अन्य देशों के साथ रिश्तों पर शायद ही कोई फर्क पड़ेगा लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि ये घटना बीजिंग के शर्मिंदगी का सबब बन गई.

'लड़ाकू' किस्म की छवि के बावजूद चिन गांग ने ये दिखलाया था कि वे उन्हें नरमी से पेश आना भी आता है. अमेरिका में जब वे राजदूत थे तो ये बात ख़ासतौर पर लोगों ने उनके बारे में नोटिस की थी.

चिन गांग

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इमेज कैप्शन, चिन गांग ने दुनिया के सामने चीन की अधिक उदारवादी छवि पेश करने में मदद की

चीन की 'उदारवादी' छवि

चिन गांग चीन और अमेरिका के रिश्तों में बारीक पहलुओं पर जोर देते थे. अमेरिकियों को लुभाने के लिए चिन गांग ने खेल का भी सहारा लिया.

वे एनबीए गेम्स में दिखे, बेसबॉल के मैदान में उन्हें गेंद फेंकते हुए भी देखा गया.

पिछले साल दिसंबर में जब चिन गांग की नियुक्ति विदेश मंत्री के तौर पर हुई थी तो ऐसा लगा कि चीन अपने कूटनीतिक दस्ते के शांत और स्थिर चित वाले चेहरों को फ्रंटलाइन पर तैनात कर अपनी आक्रामक छवि को नरम दिखाने की कोशिश कर रहा है.

लेकिन जहां एक ओर चिन गांग ने दुनिया के सामने चीन की अधिक उदारवादी छवि पेश करने में मदद की तो दूसरी तरफ़ देश की विदेश नीति में उनका अपना दखल बेहद मामूली ही रहा.

जब वे विदेश मंत्री थे तब भी उन्हें वांग यी को रिपोर्ट करना होता था. वांग यी कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश मामलों के महकमे के प्रमुख की हैसियत से देश के टॉप डिप्लोमैट हैं.

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विदेश नीति

चीन की सत्ता के ढांचे में किसी की हैसियत पार्टी में उसके ओहदे से तय होती है. वांग यी को अब चिन गांग की जिम्मेदारी दी गई है.

और आख़िरकार दोनों को ही अपने राष्ट्रपति की राजनीतिक विचारधारा के रास्ते पर चलना है.

थिंकटैंक 'एशिया सोसायटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट' में चीनी राजनीति का अध्ययन कर रहे नील थॉमस कहते हैं, "शी जिनपिंग ने चिन गांग को विदेश नीति के निर्धारण के लिए नहीं चुना था बल्कि उन्हें अपनी कूटनीतिक विचारधारा को लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी थी. चीन में शी जिनपिंग और उनके करीबी लोगों का गुट विदेश नीति के अहम फ़ैसले लेता है."

वांग यी ने विदेश मंत्री के अपने पुराने रोल में लौटने में ज़्यादा देरी नहीं की है. उनके पास पहले की तरह पार्टी के विदेश मामलों के महकमे की जिम्मेदारी बनी रहेगी.

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वांग यी

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इमेज कैप्शन, वांग यी कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश मामलों के महकमे के प्रमुख की हैसियत से देश के टॉप डिप्लोमैट हैं

कद्दावर डिप्लोमैट

वांग यी जैसे कद्दावर डिप्लोमैट के विदेश मंत्रालय संभालने के साथ ही चीन वैश्विक समुदाय को ये संदेश देने की कोशिश करता हुआ दिख रहा है कि उसकी विदेश नीति के मोर्चे पर सबकुछ पहले की तरह सामान्य चल रहा है.

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वांग यी एक जाना पहचाना नाम हैं. यूक्रेन युद्ध जैसे अहम मुद्दों पर चीन के हालिया रुख के लिए उन्हें ही जिम्मेदार माना जाता है.

माना जा रहा है कि वे अमेरिका चीन संबंधों में नीतिगत स्तर पर बिना कोई बदलाव लाए सुधार लाने पर फोकस करेंगे.

विश्लेषकों का कहना है कि शी जिनपिंग की नवंबर में अमेरिका यात्रा प्रस्तावित है और ये उनकी टॉप प्रायरिटी में है.

कुछ लोग इस ओर भी ध्यान दिला रहे हैं कि वांग यी ताइवान अफेयर्स ऑफिस के डायरेक्टर रह चुके हैं और उनका ये अनुभव ताइवान के साथ चीन के संबंधों के लिए अहम हो सकता है.

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आदर्श स्थिति

ताइवान में साल 2024 की जनवरी में राष्ट्रपति के चुनाव होने हैं और ऐसे वक़्त में अतीत में ये देखा गया है कि ताइपेई और बीजिंग के बीच तनाव अक्सर बढ़ जाता है.

वांग को एक अच्छा डिप्लोमेट माना जाता है लेकिन इस पर संदेह है कि वे लंबे वक़्त तक विदेश मंत्री बने रहेंगे.

कई लोगों का मानना है कि वो तो बस नए विदेश मंत्री के खोजे जाने तक कुर्सी संभाल रहे हैं.

वांग को अब चीन की डिप्लोमेसी में दो अहम काम एक साथ करने हैं. तीन साल तक चले कोविड के कारण चीन की डिप्लोमेटिक डायरी कई अहम कामों से भरी पड़ी है.

विशेषज्ञ कह रहे हैं कि चीनी विदेश मंत्री के पास छोटे देशों के प्रतिनिधियों से मिलने का वक़्त कम ही मिलेगा. ये आदर्श स्थिति नहीं है क्योंकि चीन छोटे मुल्कों से दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहता है.

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ब्यूरोक्रेसी की सीढ़ियां

इसके अलावा चिन को अचानक और बिना कारण बताए पद से हटाने के बाद दुनिया को पहले ही एक असमंजस में डालने वाला संदेश गया है.

ये सारे घटनाक्रम राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निर्णयों पर भी ध्यान खींच रहे हैं. साफ़ है कि उन्होंने चिन को एक स्टार प्लेयर के तौर पर पेश किया था जो तेज़ी से ब्यूरोक्रेसी की सीढ़ियां चढ़कर ऊपर पहुँचा था.

ज्यां पीयर काबेस्तान एशिया सेंटर थिंक टैंक के सीनियर रिसर्च फ़ेलो हैं.

वे कहते हैं, "चिन गांग अफ़ेयर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की इमेज के ठीक नहीं है… न तो देश के भीतर और न ही बाहर."

"ये चीनी नेतृत्व में एक किस्म की अस्थिरता को हाईलाइट करता है जिसमें नीतियों पर मतभेद, वरिष्ठ स्तर पर अधिकारियों का ग़ैर-पेशेवाराना रवैया और राजनीतिक अपारदर्शीता नज़र आती है. ये सब चीन के ग्लोबल पॉवर बनने के सपने में फिट नहीं बैठता."

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निर्णायक भूमिका

फ़ॉरेन पॉलिसी के जेम्स पामर कहते हैं कि वांग यी को विदेश मंत्री बनाकर चीन ने अपनी नीति में निंरतरता को चुना है और ये समझ से परे है.

वे कहते हैं, "चीन ने अपने पार्टनर देशों को ये संदेश दिया है कि उनके अधिकारी किसी भी वक़्त ग़ायब हो सकते हैं. और सरकार उसके बारे में जानकारी तक साझा नहीं करेगी. अब चिन के साथ हुई सारी बातचीत व्यर्थ साबित हो गई है."

चिन गांग एपिसोड बताता है कि विदेशी सरकारें जिन चीनी डिप्लोमेट से डील करती हैं, वो सत्ता से कितने दूर हैं.

और आख़िर में ये साफ़ है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ही चीन में एक निर्णायक भूमिका में हैं.

(सिल्विया चांग ने भी इस रिपोर्ट में मदद की है.)

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