चीन के विदेश मंत्री चिन गांग के ग़ायब होने का रहस्य, प्रेम प्रसंग की अटकलें और पद से हटाया जाना

क्विन गैंग को राष्ट्रपति शी जिनपिंग का क़रीबी माना जाता रहा है.

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इमेज कैप्शन, चिन गांग को राष्ट्रपति शी जिनपिंग का क़रीबी माना जाता रहा है.

चीन की सरकार में प्रमुख चेहरों में से एक और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के क़रीबी रहे चिन गांग को आख़िरकार विदेश मंत्री के पद से हटा दिया गया है.

चिन गांग की जगह कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश मामलों के प्रमुख वांग यी को फिर से विदेश मंत्री बनाया गया है.

चीन के लिए चिन गांग के पतन की ख़बर बहुत बड़ी है लेकिन हमेशा की तरह इस ख़बर को बिना तामझाम और बहुत मामूली जानकारी के साथ सार्वजनिक किया गया.

इसमें बस इतना कहा गया, “चिन गांग को विदेश मंत्री के पद से हटा दिया गया है. चीन की शीर्ष विधायिका ने विदेश मंत्री के रूप में वांग यी की नियुक्ति के पक्ष में वोट किया.”

चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, अपनी नियुक्ति के छह महीने के अंदर चिन गांग को पद से हटा दिया गया.

57 साल के चिन गांग को अंतिम समय 25 जून को सार्वजनिक रूप से देखा गया था. उनको हटाए जाने को लेकर कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया है.

एक महीने से वो अपने आधिकारिक कार्यों से ग़ायब रहे और सेहत को कारण बताया गया.

हालांकि जब वो चार हफ़्ते तक नहीं लौटे तो ये अनुमान लगाया जाने लगा कि या तो उनको सज़ा दी जा रही है या राजनीतिक रूप से वो अपनी जगह छोड़ रहे हैं.

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टीवी प्रेजेंटर के साथ अफ़ेयर की अफवाह

सोशल मीडिया पर एक महिला टेलीविज़न प्रेजेंटर के साथ उनके अफ़ेयर की अफवाह उड़ने लगी. ये प्रेजेंटर सोशल मीडिया पर काफ़ी एक्टिव थीं लेकिन इस अटकलबाज़ी के बाद वो अचानक ग़ायब हो गईं.

चीन के बारे में कुछ जानकारों का कहना है कि हो सकता है कि चिन गांग के राजनीतिक विरोधियों ने कम्युनिस्ट पार्टी में इस अफ़ेयर को नैतिकता का सवाल बनाकर इसे इस्तेमाल किया है.

हालांकि ऐसे अफ़ेयर क़ानून के ख़िलाफ़ नहीं हैं, लेकिन इसे पार्टी अनुशासन के उल्लंघन के तौर पर लिया जाता है.

लेकिन हेल्थ इमर्जेंसी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है.

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के काम करने का जो तरीक़ा है, उसमें इन दोनों संभावनाओं की न तो पुष्टि की जा सकती है और न ही इन्हें ख़ारिज किया जा सकता है.

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इमेज कैप्शन, जून में हुए कई आधिकारिक कार्यक्रमों में चिन गांग की उपस्थिति थी. इनमें अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से मुलाकात भी शामिल है.

चिन के ग़ायब होने का रहस्य

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चिन गांग चीनी सरकार में जाना पहचाना चेहरा थे और उनकी ग़ैरमौजूदगी से न सिर्फ़ राजनयिक हलकों में चर्चा थी बल्कि आम चीनी जनता में अटकलबाजी चल रही थी.

शी जिनपिंग ने पिछले दिसंबर में ही उन्हें विदेश मंत्री नियुक्त किया था और एक महीने पहले ही वो अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से बीजिंग में मिले थे जब दोनों देश उच्च स्तर पर राजनयिक रिश्तों को बहाल करने पर रज़ामंदी जताई थी.

एक महीने पहले इंडोनेशिया में एक बैठक में चिन को शामिल होना था लेकिन वो वहां नहीं पहुंचे. उनके बारे में सिर्फ़ 'कुछ सेहत से संबंधित दिक्क़तों' का हवाला दिया गया था.

उनके मंत्रालय की ओर से इस बारे में कछ ख़ास जानकारी नहीं दी गई लेकिन कई लोगों ने अनुमान लगाया कि या तो राजनीतिक कारणों से उन्हें सज़ा दी जा रही हो या विवाहेतर संबंधों के चलते ऐसा हो.

चार जुलाई को उनकी मुलाक़ात यूरोपियन यूनियन के विदेशी मामलों के चीफ़ जोसेफ़ बोरेल से होनी थी, लेकिन बिना कोई कारण बताये इसकी तारीख़ आगे बढ़ा दी गई, जिससे अफ़वाहों का बाज़ार और गर्म हो गया.

हालांकि सार्वजनिक रूप से अचानक लंबे समय के लिए ग़ायब हो जाना चीन के हाई प्रोफ़ाइल चेहरों के लिए कोई नहीं बात नहीं रही है.

इनके बारे में बाद में आपराधिक जांच का मामला सामने आया या फिर लौटे लेकिन इसका कोई कारण नहीं दिया गया.

शी जिनपिंग जब चीन के राष्ट्रपति बनी तो उसके तुरंत बाद ख़ुद एक पखवाड़े के लिए अचानक ग़ायब हो गए थे, जिससे उनकी सेहत और संभावित सत्ता संघर्ष की अटकलें लगने लगी थीं.

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इमेज कैप्शन, चिन गांग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में एक हैं जो महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए भी लंबे समय तक ग़ायब रहे.

चिन गांग का नाटकीय उभार

कहा जाता है कि चिन गांग का विदेश मंत्री के पद तक का सफर बहुत नाटकीय रहा है.

देश के प्रमुख पद से चिन के पतन का सबसे हैरान करने वाला पहलू ये है कि उनको चीन के सबसे शक्तिशाली नेता ख़ुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग का समर्थन हासिल था.

रिपोर्टों में कहा गया है कि चिन गांग को हटाने के आदेश पर ख़ुद शी जिनपिंग ने हस्ताक्षर किए थे.

शी जिनपिंग चिन गांग को वॉशिंगटन से लेकर आए, जहाँ पर वो अमेरिका में चीन के राजदूत के रूप में काम कर रहे थे.

चीन के इतिहास में इस पद पर इतनी कम उम्र (57 वर्ष) के किसी व्यक्ति की नियुक्ति नहीं हुई है.

वो अमेरिका में दो साल तक चीन के राजदूत रहे, जहाँ खरी-खरी बात कहने वाले राजनयिक की उनकी छवि बनी.

उससे पहले वो विदेश मंत्री के प्रवक्ता थे और शी जिनपिंग के विदेशी दौरों के आयोजन की ज़िम्मेदारी उन्हीं पर थी. यहीं से शी जिनपिंग के साथ उनकी क़रीबी बढ़ी थी.

चिन गांग के साथ क्या हो रहा है, इसे लेकर चीन में बहुत अधिक उत्सुकता है.

देश के सबसे बड़े सर्च इंजन बाईडू में उनके नाम के सर्च में अचानक बहुत उछाल देखा गया.

विश्लेषकों का कहना है कि चीनी इंटरनेट पर इतने शीर्ष अधिकारी के बारे में अफ़वाहों पर बिना किसी सेंसरशिप के चर्चा, हैरानी वाली बात है.

पिछले हफ़्ते सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी के इयान चोंग ने बीबीसी से कहा था, “चर्चा पर सेंसरशिप न होने से लोगों को ताज्जुब हो रहा है कि क्या सत्ता संघर्ष, भ्रष्टाचार, पद और सत्ता के दुरुपयोग या रोमांटिक अफ़ेयर इसका कारण है.”

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग

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इमेज कैप्शन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने क्विन को खुद नियुक्त किया था.

चिन गांग की छवि

जब चिन गांग विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता थे तो उनकी छवि चीन का बहुत मज़बूती से बचाव करने वाले एक शख़्स के रूप में बनी.

वो धाराप्रवाह अंग्रेज़ी बोलते हैं और मुखर खेल प्रेमी भी हैं, जिन्हें अमेरिका में एनबीए खेलों के दौरान हाथ आजमाते भी देखा गया था.

ये बातें उन्हें एक आकर्षक शख़्सियत बनाती थीं. वो बिल्कुल मॉडर्न टाइप, विवेकवान मुलाज़िम थे, जिसकी शायद कम्युनिस्ट पार्टी को सबसे अधिक ज़रूरत थी.

लेकिन अब उनका भविष्य अज्ञात है. विदेश मंत्रालय की वेबसिट से उनका संदर्भ भी हटा दिया गया है.

और जिस भी तरह से इसे लें, ये बहुत अच्छा संकेत नहीं है.

कई सप्ताह से चला आ रहा असमंजस ख़त्म हो गया है लेकिन चिन की विदाई ने अपने पीछे कई सवाल भी छोड़ दिए हैं.

नए विदेश मंत्री वांग यी

चीन के कम्युनिस्ट पार्टी सिस्टम में विदेश नीति को शीर्ष स्तर के अधिकारियों द्वारा तय किया जाता है और उसी के अनुसार विदेश मंत्री को इसे लागू करना होता है.

वांग यी एक पेशेवर राजनयिक रहे हैं और उन्हें जापानी भी आती है. वो 2013 से 2022 के बीच विदेश मंत्री रहे.

वो चिन के सपोर्ट में रहे हैं और इस समय दक्षिण अफ़्रीका में ब्रिक्स नेशनल सिक्यॉरिटी मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं.

विश्लेषक 69 साल के वांग की नियुक्त को चीन की कूटनीति को स्थायित्व देने की कोशिश के तौर पर भी देखते हैं.

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