क्या चीन और अमेरिका के बीच रिश्ते सुधार पाएंगी जेनेट येलैन
पीटर हॉस्किन्स
बिज़नेस रिपोर्टर

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अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलैन चीन की यात्रा पर आने वाली हैं. ये दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाने की दिशा में एक अहम प्रयास होगा.
बीते दो महीनों में किसी वरिष्ठ अमेरिकी मंत्री की ये दूसरी चीन यात्रा है. पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिकंन चीन पहुँचे थे.
इस साल दोनों देशों के बीच रिश्ते बद से बदतर होते गए हैं.
अमेरिका और चीन के बीच ताइवान, यूक्रेन और व्यापार जैसे कई गंभीर मतभेद के विषय हैं.
ये यात्रा ऐसे वक़्त में हो रही है जब चीन ने कहा है कि वो कंप्यूटर चिप के निर्माण में काम आने वाली दो अहम चीज़ों का निर्यात घटा देगा.
अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलैन ने हाल ही में कहा था कि दोनों देश एक साथ काम कर सकते हैं.
उनका ये बयान इस यात्रा को सुलभ बनाने में सहायक हो सकता है. येलैन चीन की उप प्रधानमंत्री ही लिफेंग से भी मिलने वाली हैं.

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यात्रा से पहले अमेरिका ने कही ये बात
यात्रा से पहले ही अमेरिका ने कह दिया है कि देशों को आपसी संबंध ज़िम्मेदारी के साथ निभाने चाहिए और जिन विषयों पर मतभेद हो उन पर सीधी चर्चा की जानी चाहिए ताकि दुनिया के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना किया जा सके.
दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव कम करने के मकसद से येलैन ने सोमवार को अमेरिका में चीन के राजदूत शी फ़ेंग से भी मुलाक़ात की है.
दोनों पक्षों ने इस बातचीत को ‘बेबाक’ बताया है.
अमेरिकी थिंक टैंक एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीच्यूट की उपाध्यक्ष वेंडी कटलर ने बीबीसी को बताया, “येलेन की यात्रा से अधिक उम्मीदें नहीं लगाई जानी चाहिए. वे चीन और अमेरिका संबंधो को पटरी पर लाने में सक्षम नहीं है न ही चीन के निर्यात पर नियंत्रण हटाए जाने की मांग को स्वीकार कर सकती हैं.”
अमेरिकी वित्त मंत्री का ये चीन दौरा विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के बाद आया है. ब्लिंकन ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग और विदेश मंत्री चिन गैंग से भी सीधी मुलाक़ात की थी.

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ब्लिंकन के दौरे से क्या हुआ?
ब्लिंकन बीते पाँच वर्षों में चीन की राजधानी पहुँचने वाले सबसे वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी हैं. ये बैठकें दोनों देशों के बीच लगातार बिगड़ते संबंधों की दिशा बदलने की कोशिश के रूप में देखी गई थीं.
अपनी चीन यात्रा ख़त्म करने के बाद ब्लिंकन ने कहा था कि चीन और अमेरिका के बीच अब भी कई बड़े मुद्दों पर मतभेद हैं. उन्होंने उम्मीद जताई थी कि भविष्य में बेहतर बातचीत से इन्हें सुधारने का प्रयास जारी रहेगा.
लेकिन ब्लिंकन के इस बयान के अगले दिन ही दिन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को तानाशाह कह दिया था. चीन ने इस पर सख़्त आपत्ति जताई थी.
जानकारों का तर्क था कि बाइडन के इस बयान से संबंध और ख़राब होने के आसार नहीं है. लेकिन ऐसे बयानों के ज़रिए संबंध सुधर जाएं ये भी ज़रूरी नहीं है.
चीन ने किया ये एलान

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दोनों देशों के बीच ट्रेड विवाद अभी भी एक बड़ी दिक्कत है. चीन ने इसी हफ़्ते घोषणा की है कि वो कंप्यूटर चिप में लगने वाली दो चीज़ों के निर्यात पर नियंत्रण बढ़ा रहा है.
अगले महीने से गैलियम और जर्मेनियम के निर्यात के लिए चीनी कंपनियों को एक विशेष लाइसेंस की ज़रूरत होगी. कंप्यूटर चिप के लिए अहम इन दो उत्पादों का चीन सबसे बड़ा उत्पादक है.
पिछले साल अमेरिका ने भी कुछ एडवांस कंप्यूटर चिप्स को चीनी पहुँच से दूर कर दिया था.
अक्तूबर में अमेरिका ने कहा था कि अगर कोई कंपनी चीन को अमेरिकी सॉफ्टवेयर से निर्मित चिप्स निर्यात करती है तो उन्हें लाइसेंस लेने की ज़रूरत होगी.
प्रियंका किशोर आईएमए एशिया से जुड़ी हैं. ये एक बिज़नेस फ़ोरम है.
प्रियंका किशोर कहती हैं, "वरिष्ठ कूटनयिकों की यात्राओं के बीच दोनों देशों में बेहतर सियासी संबंधों की एक ख़्वाहिश तो दिखती है. लेकिन ज़मीन पर दोनों देश एक दूसरे के ख़िलाफ़ क़दम उठाते रहे हैं.”
चीन में अपनी यात्रा के दौरान येलैन से उम्मीद है कि ये साफ़ कर देंगी कि अमेरिका मानवाधिकारों की रक्षा और अपने राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों से कभी पीछे नहीं हटेगा.
लेकिन वे ये भी बता देंगी कि अमेरिका चीन के साथ सभी मुद्दों पर बात करने को तैयार है, फिर चाहे वो बात जलवायु परिवर्तन की हो या क़र्ज़ के बोझ में दबे देशों को.
कई हाई-प्रोफ़ाइल अमेरिकियों ने चीन के साथ आर्थिक संबंध बंद करने का आह्वान किया है लेकिन अमेरिकी वित्त मंत्री दोस्ती का हाथ बढ़ाने चीन पहुँच रही हैं.
वे बताएंगी कि अमेरिका का उद्देश्य चीनी अर्थव्यवस्था से ख़ुद को अलग-थलग करना नहीं है.
क्या बात कर सकती हैं जेनेट येलैन

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इसी साल उन्होंने एक भाषण में कहा था कि ‘दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को एक दूसरे से अलग-थलग करना दोनों ही देशों में भयंकर तबाही मचाएगा. इससे सारी दुनिया भी अस्थिर हो जाएगी.'
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पूर्व चीफ़ इकोनॉमिस्ट केन रोगोफ़ ने बीबीसी को बताया, “ये हीरो और विलेन जैसा कुछ है. ब्लिंकन ने सख़्त रवैया अपनाया तो वे एक किस्म से विलेन थे. अब येलैन जा रही हैं और वो अच्छी - अच्छी बातें करके हीरो की तरह दिखना चाह रही हैं.”
रोगोफ़ कहते हैं कि अमेरिका के विदेश मंत्री के तौर पर एंटनी ब्लिंकन के लिए ज़रूरी था कि वे ताइवान और यूक्रेन जैसे अहम मुद्दे उठाएं.
लेकिन रोगोफ़ आगाह करते हैं कि ज़रूरी नहीं येलैन सिर्फ़ अच्छी-अच्छी बातें ही करेंगी. वे इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी कानून (आईपीआर) और चीनी मार्केट को खोलने जैसे नाज़ुक विषयों पर भी अपना मत रख सकती हैं.
चाहे कुछ लोग चीन से आर्थिक संबंध पूरी तरह से विच्छेद करने की सलाह देते हों लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है.
साल 2022 में दोनों देशों के बीच ट्रेड लगातार तीसरे वर्ष भी बढ़ा है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चीन ने 2022 अमेरिका को कुल $536 बिलियन का निर्यात किया. इसी तरह अमेरिका ने चीन को $154 बिलियन का निर्यात किया.
लेकिन दोनों देशों के बीच चल रही है संबंधों में तल्खी के बीच अमेरिका एक और राष्ट्रपति चुनाव के मुहाने पर है.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ हवाई के प्रोफ़ेसर एरिक हार्विट कहते हैं, “अगर बाइडन जीतते हैं तो ट्रंप के ज़माने में चीन पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है. विशेषकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में. लेकिन अगर ट्रंप जीते तो सब उलट हो जाएगा.”
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