मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, बुज़ुर्ग की हत्या के बाद आपसी टकराव में चार लोगों की मौत

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- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
मणिपुर के जिरीबाम ज़िले में शनिवार सुबह हुई हिंसा की एक ताज़ा घटना में चार संदिग्ध चरमपंथियों और एक आम नागरिक की मौत हो गई है.
यह हमला असम की सीमा से सटे जिरीबाम के मोंगबुंग गांव के पास हुआ है.
सुरक्षा बलों के मुताबिक़ जिरीबाम में संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने मैतेई समुदाय के एक बुजुर्ग की उनके घर पर हत्या कर दी थी. इस घटना के बाद वहां हिंसा भड़क गई.
फिलहाल इलाके में तनाव है और सुरक्षा बलों की कई अतिरिक्त टुकड़ियों को इलाके में उतारा गया है.

कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि मैतेई समुदाय के सशस्त्र समूहों और पहाड़ी कुकी जनजातियों के "ग्राम रक्षा स्वयंसेवकों" के बीच शनिवार सुबह से गोलीबारी शुरू हो गई थी.
मोंगबुंग गांव के पास रहने वाले कुकी जनजाति के एक ग्रामीण ने बताया कि यह हमला उग्रवादियों के बीच हुआ था. इस समय इलाके में सुरक्षाबलों का अभियान चल रहा है.

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सुरक्षा बलों के अधिकारी ने क्या कहा

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मणिपुर में तैनात सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने बताया, "सुबह उग्रवादियों के गांव में घुसकर एक व्यक्ति की हत्या करने के बाद वहां गोलीबारी शुरू हो गई. यह हत्या मैतेई और कुकी जनजाति के बीच जारी जातीय संघर्ष का हिस्सा है. हमें रिपोर्ट मिली है कि मरने वाले लोग कुकी और मैतेई दोनों समुदायों से हैं."
63 वर्षीय वाई कुलचंद्र मैतेई समुदाय से थे जिनकी संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने सुबह करीब 5 बजे जिरीबाम पुलिस स्टेशन से महज़ कुछ किलोमीटर दूर निंगथेम खुनौ इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी थी.
कुलचंद्र की पत्नी वाई बेम्चा ने मीडिया को बताया कि घटना के समय वह खाना बना रही थीं. उस दौरान तीन हथियारबंद हमलावर उनके घर में घुसे और उनके पति को गोली मारकर फरार हो गए.
जिरीबाम ज़िले के एसपी कार्यालय में तैनात एक अधिकारी ने हमले की पुष्टि करते हुए बताया, '' हमले में कुल चार लोगों की मौत हुई है. फिलहाल पुलिस सुरक्षाबलों के साथ मिलकर इलाके में कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने में जुटी है."
शनिवार को हुए हमले के बारे में मणिपुर पुलिस के आईजीपी (खुफिया विभाग) के.कबीब ने मीडिया को बताया कि पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व वाली टीम पर भारी हमला हुआ, जिसके बाद जवाबी फायरिंग की गई है.
पुलिस अधिकारी के अनुसार पुलिस ने भारी गोलीबारी वाली जगह से सैन्य वर्दी में तीन शव बरामद किए हैं. फिलहाल तीनों शवों की पहचान नहीं हो पाई है.
मणिपुर में बीते करीब 16 महीनों से जारी जातीय हिंसा में बीते दो दिनों से ड्रोन बम और रॉकेट लॉन्चर से हमले हुए हमलों ने सुरक्षाबलों की चिंता बढ़ा दी है.
मणिपुर पुलिस के आईजीपी (खुफिया विभाग) के.कबीब ने राज्य में शुरू हुई हिंसा पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "राज्य में हाल ही में हुई हिंसा के कारण मणिपुर पुलिस ने संयुक्त सुरक्षा बलों के साथ मिलकर कुछ कार्रवाई की है. हमारे वरिष्ठ अधिकारी ज़मीन पर हैं और ज़िला मुख्यालयों में रह रहे हैं और वे लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं. ड्रोन हमलों सहित हाल ही में हुई घटनाओं के कारण, राज्य पुलिस ने ड्रोन रोधी सिस्टम तैनात किए हैं और वह इस तरह के और सिस्टम की खरीदारी करने जा रही है.''
मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने हिंसा को लेकर कैबिनेट बैठक की
इससे पहले राज्य सरकार ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने और राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक मजबूत प्रतिक्रिया तंत्र के साथ-साथ आवश्यक निवारक और एहतियाती उपाय करने के निर्देश जारी किए थे.
इस बीच मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने शनिवार को हुई इस हिंसक घटना के बाद शाम 4 बजे कैबिनेट की बैठक बुलाकर मौजूदा स्थिति पर बात की है.
एक जानकारी के अनुसार उग्रवादी संगठनों के पास मौजूद ड्रोन बम और रॉकेट लांचर की उपलब्धता को लेकर केंद्र सरकार को पत्र भेजा गया है और ऐसे संगठनों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है.
कुकी जनजाति के संगठन इस ताजा हिंसा के लिए राज्य के मुख्यमंत्री एन.बीरेन सिंह की उस लीक हुई ऑडियो क्लिप को ज़िम्मेदार ठहराते हैं जिसमें कथित तौर पर सीएम इस जातीय हिंसा लिप्त बताए गए हैं.
कुकी जनजाति के शीर्ष संगठन कुकी इनपी के एक शीर्ष नेता ने बीबीसी से कहा, "पिछले हफ्ते सीएम का एक ऑडियो क्लिप लीक होने के बाद से राज्य में फिर से हिंसा शुरू हो गई. क्योंकि इस ऑडियो क्लिप के सामने आने के बाद कुकी संगठनों ने इसका जोरदार विरोध किया.’’
उन्होंने कहा,'' कुकी जनजाति के शीर्ष संगठन कुकी इनपी, कुकी छात्र संगठन समेत कई कुकी-जो संगठनों ने शनिवार को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का आह्वान किया था."
ये प्रदर्शन कथित तौर पर लीक हुए ऑडियो टेप के कारण बुलाए गए, जिसमें कथित तौर पर जातीय संघर्ष में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की संलिप्तता की बात सामने आई है.
हालांकि बीबीसी ऐसी किसी भी ऑडियो क्लिप की पुष्टि नहीं करता है.
मणिपुर सरकार ने इस क्लिप को 'फ़र्ज़ी' करार देते हुए कहा था कि जातीय हिंसा से ग्रस्त राज्य में चल रही 'शांति प्रक्रिया' को बाधित करने के प्रयास में इसे सोशल मीडिया पर जारी किया गया था.
इससे पहले शुक्रवार को रॉकेट हमलों में दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री मैरेम्बम कोइरेंग के घर पर एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और बिष्णुपुर ज़िले में दो इमारतें नष्ट हुई थी.

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ड्रोन और आरपीजी से हमले ने चिंता बढ़ाई

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पुलिस ने दावा किया है कि राज्य में ताज़ा हिंसा में अत्याधुनिक ड्रोन और आरपीजी (रॉकेट प्रोपैल्ड गन यानी कंधे पर रखकर रॉकेट दागने वाली गन) का इस्तेमाल किया गया है.
ऐसे हथियारों का प्रयोग आमतौर पर युद्ध के दौरान किया जाता है.
पुलिस के मुताबिक़ ड्रोन बम का इस्तेमाल आमतौर पर जंग के दौरान किया जाता है. सुरक्षाबलों और आम नागरिकों के ख़िलाफ़ इसका इस्तेमाल एक बड़ा बदलाव है.
पुलिस का कहना है, "इस मामले में बेहतरीन ट्रेनिंग, तकनीकी विशेषज्ञता और मदद की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है."
इस हमले के बाद राज्य के बड़े अधिकारी हालात पर क़रीबी नज़र बनाए हुए हैं और पुलिस किसी भी परिस्थिति से निपटने की तैयारी कर रही है.
डेढ़ साल से हिंसा जारी

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मणिपुर में क़रीब डेढ़ साल पहले हिंसा का दौर शुरू हुआ था. उस वक़्त मणिपुर हाई कोर्ट ने 27 मार्च 2023 को एक आदेश में राज्य सरकार से मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की बात पर जल्दी विचार करने को कहा था.
इस आदेश के कुछ दिन बाद ही राज्य में जातीय हिंसा भड़क गई थी और कई लोगों की जान भी गई. इस हिंसा की वजह से हज़ारों लोगों को बेघर भी होना पड़ा और सार्वजनिक संपत्ति का भी नुक़सान हुआ.
राज्य के मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग को इस हिंसा की मुख्य वजह माना जाता है. इसका विरोध मणिपुर के पहाड़ी इलाक़ों में रहने वाले कुकी जनजाति के लोग कर रहे हैं.
बाद में फ़रवरी 2024 में मणिपुर हाई कोर्ट ने अपने पिछले आदेश से उस अंश को हटा दिया था, जिसमें मैतेई समुदाय के लिए एसटी का दर्जा देने की सिफ़ारिश का ज़िक्र था.
मणिपुर में पिछले साल शुरू हुई हिंसा में 200 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. राज्य में हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं.
हिंसा से प्रभावित मैतेई और कुकी समुदाय के लोग अब भी बड़ी संख्या में राहत शिविरों में रह रहे हैं. हिंसा से प्रभावित कुछ लोगों को भागकर पड़ोसी राज्य मिज़ोरम में शरण लेनी पड़ी है.
हालांकि हाल के महीनों में राज्य में हिंसा की कोई बड़ा घटना नहीं हुई थी.















