मणिपुर: निर्वस्त्र घुमाने के मामले में सीबीआई चार्जशीट ने बताया- पुलिस की जिप्सी में बैठ गई थीं दोनों महिलाएं

बंदूक

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    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए

मणिपुर के मैतेई बहुल थौबल ज़िले में भीड़ द्वारा कुकी-ज़ोमी समुदाय की दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने और उनके साथ यौन उत्पीड़न करने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है.

यह घटना पिछले साल 4 मई की है लेकिन बीते साल 19 जुलाई को जब इन दोनों महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने का एक भयावह वीडियो सामने आया तो पूरा देश हिल गया था.

इस घटना ने बड़े पैमाने पर आक्रोश पैदा किया और चौतरफा इसकी निंदा की गई. अब इस मामले में सीबीआई की चार्जशीट से जो जानकारियां सामने आई हैं वो बेहद परेशान करने वाली हैं.

सीबीआई चार्जशीट में क्या कहती है?

वीडियो कैप्शन, मणिपुर हिंसा के वायरल वीडियो की वो दो औरतें

सीबीआई की चार्जशीट में इस बात का ज़िक्र किया गया है कि जिस समय भीड़ इन महिलाओं का पीछा कर रही थी उस दौरान वो सड़क के किनारे खड़ी पुलिस की एक जिप्सी के अंदर बैठने में कामयाब हो गई थीं.

लेकिन जब उन्होंने पुलिस से वाहन चलाने का अनुरोध किया तो पुलिस चालक ने उन्हें बताया कि "गाड़ी की चाबी नहीं है."

मणिपुर वायरल वीडियो मामले में सीबीआई की चार्जशीट में कहा गया, “पुलिस जिप्सी के पास आते समय भीड़ ने फिर से पीड़ितों को एक-दूसरे से अलग कर दिया था. दोनों महिला पीड़ित पुलिस जिप्सी के अंदर बैठने में कामयाब रहीं. उस समय पुलिस जिप्सी के अंदर सादी खाकी वर्दी पहने ड्राइवर समेत दो पुलिसकर्मी उनके साथ थे और तीन से चार पुलिसकर्मी बाहर खड़े थे."

"एक पीड़ित पुरुष ने पुलिसकर्मियों से वाहन चलाने का अनुरोध किया, हालांकि पुलिस जिप्सी के चालक ने जवाब दिया, 'उनके पास चाबी नहीं है.' वे बार-बार पुलिसकर्मियों से उनकी मदद करने और भीड़ द्वारा हमला किए जा रहे एक व्यक्ति को बचाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन 'पुलिस ने उनकी मदद नहीं की'.''

उस हमले में भीड़ ने एक महिला के भाई और पिता की हत्या कर दी थी. सीबीआई के आरोप-पत्र में यह भी कहा गया कि जब एक बड़ी भीड़ ने महिलाओं को वाहन के अंदर से बाहर निकाल लिया था उस समय घटनास्थल पर मौजूद सभी पुलिसकर्मी मौके से चले गए थे. जबकि भीड़ में से कुछ लोगों ने ही महिलाओं को गांव की सड़क के किनारे खड़ी पुलिस जिप्सी के पास जाने के लिए कहा था.

सीबीआई जांच में पता चला कि एक बड़ी भीड़ पुलिस जिप्सी के पास पहुंची और उन्होंने जिप्सी के अंदर से एक पुरुष और दो महिलाओं को बाहर निकाला. इस बीच पुलिसकर्मी महिलाओं को भीड़ के साथ अकेला छोड़कर मौके से चले गए. भीड़ ने दोनों महिलाओं के कपड़े फाड़ दिए और एक पुरुष पीड़ित की पिटाई शुरू कर दी. पीड़ितों में से एक महिला पास के स्थान पर मौजूद थी और उसने पूरी घटना अपनी आंखों से देखी.

सीबीआई का लिखित बयान

सीबीआई का बयान

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दरअसल सीबीआई ने पिछले साल 16 अक्टूबर को इस मामले (अपराध संख्या 110(06)/2023) की चार्जशीट गुवाहाटी के विशेष न्यायाधीश, सीबीआई कोर्ट में दाखिल कर दी थी.

उस समय सीबीआई ने एक बयान जारी कर बताया था कि मणिपुर वायरल वीडियो मामले में गुवाहाटी में विशेष न्यायाधीश, सीबीआई अदालत के समक्ष छह आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र और कानून के साथ संघर्ष में एक किशोर (सीसीएल) के खिलाफ एक रिपोर्ट दायर की है.

सीबीआई ने मणिपुर सरकार के अनुरोध और भारत सरकार से जारी अधिसूचना के बाद इस मामले की पिछले साल जांच शुरू की थी. उस दौरान थौबल ज़िले के नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन में एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था.

सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल करने के बाद अपने एक लिखित बयान में बताया, "यह आरोप लगाया गया था कि, 4 मई, 2023 को अत्याधुनिक हथियारों से लैस लगभग 900 से एक हज़ार लोगों की भीड़ ने मणिपुर के कांगपोकपी ज़िले के बी. फेनोम गांव में प्रवेश किया, घरों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी. उन लोगों ने संपत्तियों को लूटा, ग्रामीणों पर हमला किया. भीड़ ने हत्याएं कीं और महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया."

"आरोपों के अनुसार एक पीड़ित के परिवार के दो सदस्य भी मारे गए. सीबीआई की जांच में पता चला कि आरोपी उक्त घटना में शामिल थे."

मणिपुर पुलिस ने क्या कहा

हिंसाग्रस्त क्षेत्र

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सीबीआई की चार्जशीट में पुलिस की मौजूदगी में हुए इस अपराध पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए मणिपुर के पुलिस महानिदेशक राजीव सिंह ने बीबीसी से कहा, "घटना का पता लगते ही थाना प्रभारी समेत उन सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ पहले ही विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है. मणिपुर पुलिस ने ही सातों आरोपियों को गिरफ्तार किया था."

"सीबीआई ने बाद में आकर जांच शुरू की. यह करीब एक साल पुराना मामला है और अब इसकी जांच सीबीआई कर रही है. तो दोषियों को उसी आधार पर सज़ा दी जाएगी. लेकिन यह कहना ठीक नहीं होगा कि मणिपुर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की."

दरअसल दोनों महिलाओं के यौन उत्पीड़न वाला वीडियो वायरल होने के बाद नोंगपोक सेकमाई के थाना प्रभारी समेत कुल पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया था.

पिछले साल जुलाई महीने में वायरल हुए इस वीडियो ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया था. उन दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न का वो वीडियो इतना भयावह था जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनका 'हृदय पीड़ा से भरा हुआ है.' पीएम मोदी ने कहा था कि देश की बेइज़्ज़ती हो रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.

वीडियो कैप्शन, मणिपुर हिंसा में अपनों को खोने वालों का दर्द

उस वीडियो में जो दो महिलाएं थीं इनमें एक की उम्र 20 साल और दूसरी की 40 साल के आसपास थी.

वीडियो में दिख रहा है कि दोनों महिलाओं को पुरुषों की भीड़ निर्वस्त्र अवस्था में एक खेत की ओर ले जा रही है. वीडियो में कुछ लोगों को उन महिलाओं को घसीटते और उनका यौन उत्पीड़न करते देखा जा सकता है.

मणिपुर जातीय हिंसा से जुड़े करीब 11 मामलों की जांच कर रही सीबीआई ने अपने आरोप पत्र में अन्य स्थानों पर भी कई घटनाएं होने का ज़िक्र किया है. भीड़ द्वारा घरों में आग लगाने और एक गांव पर हमला शुरू करने की बात का भी आरोप पत्र में ज़िक्र है.

जांच में यह भी पता चला कि 4 मई को आसपास के मैतेई गांवों के प्रधानों और अन्य सामुदायिक गांवों के प्रमुखों की एक बैठक हुई थी. हालाँकि, बैठक में लिए गए निर्णय के बावजूद भीड़ ने चर्च, कुछ घरों और आस-पास के गाँवों को जला दिया.

इस घटना के आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिनमें सामूहिक बलात्कार, हत्या, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना और आपराधिक साज़िश से संबंधित धाराएं शामिल हैं.

जिन लोगों के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की है उनकी पहचान हुइरेम हेरोदाश मैतेई (32) है जिसे मणिपुर पुलिस ने 20 जुलाई को गिरफ्तार किया था.

इसके अलावा गिरफ्तार किए गए अरुण खुंडोंगबम उर्फ नानाओ (31), निंगोम्बम टोम्बा सिंह उर्फ टोमथिन (18),पुखरीहोंगबाम सुरंजॉय मैतेई (24), नामीराकपम किरम मैतेई (30) और एक किशोर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है.

जला हुआ वाहन

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केंद्र द्वारा गठित आयोग की जांच कहां पहुंची?

मणिपुर में चल रहे जातीय संघर्ष की व्यापक जांच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीते जून महीने में गौहाटी हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था.

इस समय जांच आयोग के सदस्य पीड़ित परिवारों की जानकारियां इकट्ठा कर रहे हैं और जल्द ही हिंसा प्रभावित इलाकों में जन-सुनवाई का काम शुरू होगा.

एक अधिकारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बीबीसी से कहा, "आयोग मणिपुर हिंसा की जांच न्यायिक प्रक्रिया के ज़रिए कर रहा है. हिंसा पीड़ित लोगों की तरफ से अब तक 11 हज़ार से ज़्यादा हलफनामे प्राप्त हुए हैं. ऐसी कई गंभीर बातें सामने आई हैं जिनका मीडिया में खुलासा नहीं किया जा सकता. अभी इन मामलों पर जन सुनवाई शुरू होना बाकी है."

एक सवाल के जवाब में अधिकारी ने बताया कि 4 मई को जिन दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने और उनके साथ यौन उत्पीड़न की घटना हुई थी उनकी तरफ से भी आयोग को हलफनामे प्राप्त हुए हैं.

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