मणिपुर में दो दिन में 5 नागरिकों समेत दो जवानों की हत्या, ताज़ा हिंसा की वजह?

मोरेह शहर में जलाया गया घर

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    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए

मणिपुर में बीते 48 घंटों में अलग-अलग जगह पर हुई हिंसा में पांच नागरिकों समेत दो सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है.

इसमें से एक मामला विष्णुपुर ज़िले का है. यहां संदिग्ध हथियारबंद चरमपंथियों ने गुरुवार शाम एक पिता-पुत्र समेत चार लोगों की हत्या कर दी.

मरने वाले लोगों की पहचान थियाम सोमेन सिंह,ओइनम बामोइजाओ सिंह, उनके बेटे ओइनम मनितोम्बा सिंह और निंगथौजम नबादीप मैतेई के रूप में की गई है.

वहीं बुधवार रात इंफाल पश्चिम ज़िले के कांगचुप में हमलावरों ने एक मैतेई बहुल गांव के ग्राम रक्षक की हत्या कर दी. बुधवार को ही संदिग्ध चरमपंथियों ने टैंगनोपल ज़िले में म्यांमार सीमा से सटे मोरेह शहर में सुरक्षाबलों पर हमला किया था. इसमें पुलिस के दो जवानों की मौत हो गई थी.

हिंसा की इन अलग-अलग घटनाओं में मारे गए सभी लोग मैतेई समुदाय के थे. इसके बाद राजधानी इंफाल से लेकर बिष्णुपुर जैसे मैतेई बहुल इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए है.

मणिपुर में 3 मई से रह-रहकर हो रही हिंसा के बीच पिछले कुछ दिनों से शांति का माहौल बना हुआ था. लेकिन बुधवार को मोरेह शहर से फिर शुरू हुई हिंसा ने राज्य में भय और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है.

मणिपुर में चरमराई कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस ताज़ा हिंसा के पीछे क्या वजह है? क्यों पिछले आठ महीनों से यहां हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है?

मोरेह में कैसे भड़की हिंसा

मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह

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पिछले 8 महीनों में मणिपुर के जिन शहरी इलाकों में व्यापक स्तर पर हिंसा हुई, उसमें सीमावर्ती मोरेह शहर भी एक है.

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कुकी जनजाति बहुल इस शहर में हिंसा के दौरान मैतेई लोगों के अधिकतर घरों को जला दिया गया था. इस समय मोरेह में एक भी मैतेई परिवार नहीं है.

मोरेह में असम राइफल्स और बीएसएफ के साथ मणिपुर पुलिस कमांडो की तैनाती को लेकर विरोध होता रहा है. वहां कुकी जनजाति के लोग मणिपुर पुलिस कमांडो को इलाके से हटाने की मांग करते आ रहे हैं. उनका कहना है कि मणिपुर पुलिस कमांडो में मैतेई समुदाय के जवान हैं, जिसके कारण वे लोग सुरक्षित महसूस नहीं करते. उनका यह भी आरोप है कि पुलिस कमांडो के साथ कुछ मैतेई हमलावर भी इलाके में आ गए हैं.

कुकी जनजाति के प्रमुख संगठन कुकी इंग्पी के वरिष्ठ नेता थांगमिलन किपजेन की मानें तो इस लड़ाई को रोकने के लिए भारत सरकार का हस्तक्षेप ज़रूरी है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "राज्य में तुलनात्मक शांति थी. क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी ने कहा था कि पहाड़ी इलाकों की कानून-व्यवस्था वे खुद देखेंगे और घाटी वाले इलाकों को मुख्यमंत्री बीरेन सिंह संभालेंगे. लिहाज़ा अब तक राज्य पुलिस के कमांडो पहाड़ी इलाके में नहीं आ रहे थे. अब हिंसा इसलिए बढ़ गई कि मणिपुर सरकार मैतेई समुदाय के पुलिस कमांडो को हेलीकॉप्टर के जरिए मोरेह भेज रही है. राज्य सरकार को शांति कायम करने के लिए इन कमांडो को वापस बुलाने की ज़रूरत है."

कुछ कुकी संगठनों ने मोरेह शहर से मणिपुर पुलिस कमांडो को हटाने की मांग पर कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया है.

पिछले साल अक्टूबर महीने में मोरेह में सब डिविजनल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) चिंगथम आनंद कुमार की संदिग्ध चरमपंथियों ने हत्या कर दी थी जिसके बाद से इलाके में संघर्ष बढ़ता गया.

गिरफ्तारी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

पुलिस थानों पर प्रदर्शन करती महिलाएं

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मणिपुर पुलिस की स्पेशल कमांडो टीम ने सोमवार की शाम एक मुठभेड़ के बाद दो संदिग्ध लोगों को पकड़ा था. पुलिस का दावा है कि ये दोनों लोग मोरेह शहर के एसडीपीओ रहे आनंद कुमार की हत्या में शामिल हैं.

पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया. ये दोनों लोग कुकी-ज़ो जनजाति से जुड़े थे. ऐसे में कुकी लोगों, ख़ासकर इस समुदाय की महिलाओं ने दोनों की रिहाई के लिए मोरेह थाने के सामने प्रदर्शन किया.

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल का प्रयोग किया. इसमें कई महिलाएं घायल हो गईं. इसके अगले दिन ही हथियारबंद संदिग्ध चरमपंथियों ने मोरेह शहर के तीन अलग-अलग जगहों पर हमला कर दो पुलिस कमांडो की जान ले ली.

मणिपुर में कुकी चरमपंथियों की ओर से ताज़ा हमले किए जाने के सवाल पर किपजेन कहते हैं, "म्यांमार में अभी संघर्ष चल रहा है. लिहाज़ा इस समय वहां कई चरमपंथी संगठन सक्रिय हैं. मणिपुर का बॉर्डर सील नहीं है, इसलिए यहां मूवमेंट होता रहता है. लेकिन मोरेह में सुरक्षाबलों पर हुए हमले में विदेशी चरमपंथियों का हाथ नहीं है."

सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग और उनका जवाब

 मोरेह में हिंसा के बाद बरामद हथियार

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राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ संगठनों ने मणिपुर में राज्य और केंद्रीय बलों की एकीकृत कमान के अध्यक्ष कुलदीप सिंह के इस्तीफे की मांग की है.

राज्य में मैतेई महिलाओं के सबसे ताकतवर संगठन मीरा पैबी ने भी यही मांग उठाई है.

जबकि मणिपुर के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह का कहना है कि सुरक्षाबलों के जवान असम राइफल्स के साथ मिलकर हमला करने वाले चरमपंथियों का मुकाबला कर रहे हैं.

सुरक्षाबलों पर हुए हमले पर गुरुवार शाम इंफाल में कुलदीप सिंह ने कहा, "म्यांमार की सीमा पर स्थित मोरेह शहर में बुधवार को पुलिसकर्मियों पर हुए हमले से पहले एक खुफिया रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि विद्रोही गुटों के साथ ‘बर्मा से आए सैनिक’ सुरक्षाबलों पर हमला कर सकते हैं."

उन्होंने कहा कि कुकी समूहों से मिली धमकी के बाद खुफिया जानकारी इकट्ठा की गई थी कि मोरेह में तैनात मणिपुर पुलिस कमांडो को निशाना बनाया जाएगा. क्योंकि कूकी इंग्पी और नागरिक समाज संगठन के कई लोग मोरेह में सुरक्षित स्थानों पर आ रहे थे और वे कह रहे थे कि पुलिस के कमांडो को वहां से हटा दिया जाए.

लेकिन उस घटना में विदेशी हमलावरों की संलिप्तता के संबंध में अभी भी कोई सबूत नहीं है.

मैतेई समाज के हितों के लिए बनी कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ मणिपुर इंटीग्रिटी अर्थात कोकोमी के वरिष्ठ नेता किरेन कुमार मानते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार मणिपुर में स्थिति संभालने में सफल नहीं हो रहे हैं.

वो कहते है, "सरकार कुकी आतंकियों को नियंत्रित नहीं कर पा रही है. कुकी बॉर्डर टाउन मोरेह पर कब्जा करना चाहता है. म्यांमार के विद्रोही इन कुकी आतंकियों के साथ मिलकर आरपीजी विस्फोटक से हमला कर रहे हैं. किसी भी जातीय हिंसा में आरपीजी चलाने की बात किसी ने नहीं सुनी होगी."

राज्य में शांति स्थापित करने के सवाल पर मैतेई नेता किरेन कुमार कहते हैं, "प्रदेश में शांति केवल भारत सरकार के हस्तक्षेप से ही कायम हो सकती है. हिंसा को शुरू हुए आठ महीने से ज्यादा हो चुके हैं. बीरेन सरकार पूरी तरह फेल हो गई है. लोगों की हत्या की जा रही है. घरों को जलाया जा रहा है लेकिन किसी को मणिपुर की चिंता नहीं है."

सुरक्षा इंतज़ामों में बदलाव

भारत म्यांमार सीमा के पास की गई तोड़फोड़

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राज्य में सामने आई हिंसा की इन ताज़ा घटनाओं के बाद नए सिरे से सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं. क्योंकि पहले चरमपंथी इस तरह के हमले दूर-दराज़ के इलाकों से कर रहे थे.

लेकिन हाल ही में पुलिस के कमांडो पर पास से आकर हमला किया गया है. लिहाज़ा सीमावर्ती इलाकों में असम राइफल्स, बीएसएफ और पुलिस कमांडो के जवानों ने हमलावरों को खोजने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है.

इस बीच राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से सैन्य और मेडिकल संबंधी मदद के साथ-साथ इमरजेंसी सिचुएशन में इस्तेमाल किया जाने वाला विशेष हेलिकॉप्टर मांगा. केंद्र सरकार ने ये हेलिकॉप्टर उपलब्ध भी करा दिया है.

मणिपुर के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह ने बताया, "मोरेह में बीएसएफ की एक कंपनी, सेना की दो टुकड़ियां और चार कैस्पर वाहनों सहित अतिरिक्त बल तैनात किया गया है. इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक हेलीकॉप्टर को भी इलाके में उतारा गया है."

मणिपुर में पिछले 8 महीनों से जारी हिंसा पर नज़र रख रहे वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप फनजौबाम कहते हैं, "पहाड़ी इलाकों के लिए अलग प्रशासन की मांग की जा रही है जिसका मैतेई समुदाय विरोध कर रहा है. बीते कुछ दिन बिना हिंसा के बीतने के बाद चरमपंथियों ने सरकार का ध्यान खींचने के लिए फिर से हमला करना शुरू कर दिया है.”

“लोकसभा चुनाव नज़दीक है. चरमपंथियों को लगता है कि इस तरह से वे अपनी मांगें मनवा सकते हैं. अगर केंद्र सरकार अलग प्रशासन देने जैसा कोई फैसला लेती है तो मणिपुर के साथ नागालैंड और मेघालय जैसे राज्यों में भी लड़ाइयां शुरू हो जाएंगी."

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