बिहार में पीएम मोदी की सभा में आए लोगों ने बेरोज़गारी और महंगाई पर क्या कहा?

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- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, औरंगाबाद बिहार
बिहार के औरंगाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में आया लोगों का हुजूम बीजेपी का उत्साह बढ़ाने के लिए काफ़ी है. इस सभा में काफ़ी दिनों बाद नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच साझा किया. इस दौरान प्रधानमंत्री ने 21 हज़ार करोड़ रुपये की 28 परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया.
कुछ दिन पहले ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान औरंगाबाद पहुँचे थे.
मोदी की सभा में सड़क पर मोटरसाइकिल, कार और बसों की कतार बताती हैं कि यहाँ स्थानीय लोगों के अलावा बड़ी संख्या में आसपास की जगहों से भी लोग पहुँचे थे.
पूरा औरंगाबाद शहर और इसके हाइवे से लेकर छोटी छोटी सड़कों पर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से झंडे, बैनर और पोस्टर लगे हुए थे.
बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ ही ढोल नगाड़े और अबकी बार 400 पार के नारे से पूरा इलाका गूंज रहा था.
यह इसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव का संकेत है.
लोकसभा चुनाव सामने है तो लोगों की भीड़ भी दूर-दूर से पैदल चलकर पीएम मोदी का भाषण सुनने पहुँची थी.
चुनावी मौसम में लोग अक्सर ऐसे भाषण को सुनने पहुँचते हैं. हालाँकि यहाँ बड़ी संख्या में लोगों के अपने मुद्दे हैं जो राजनीतिक दलों के वादे और दावों पर हावी हैं.
महंगाई और रोज़गार का मुद्दा

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क्षत्रिय नगर औरंगाबाद के एक युवक सन्नी राज गुप्ता नरेंद्र मोदी का भाषण सुनने आए हैं. उनका कहना है, "बिहार में बेरोज़गारी बड़ी समस्या है. यहाँ युवाओं को रोज़गार चाहिए. अगर मोदी रोज़गार देते हैं, वैकेंसी आती है तो ठीक है, नहीं तो सोचना होगा."
इस मामले में लोग न तो केंद्र सरकार से लोग संतुष्ट दिखते हैं और न ही राज्य सरकार से.
लोगों के मन में महंगाई भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा दिखता है.
पार्वती देवी कहती हैं, ''महंगाई कैसी है ये हम नहीं देख रहे हैं. दिनो-दिन सरसों का तेल और नमक सबकुछ महंगा होता जा रहा है."
मोदी और नीतीश को सुनने के लिए यहाँ बड़ी संख्या में जीविका योजना से जुड़ी महिलाएं भी पहुँची हुई थीं.
इनमें से कई महिलाओं का कहना था कि सरकार ने 'हमें रोज़गार देने के लिए काम किया है, लेकिन महंगाई बहुत ज़्यादा है.'
महंगाई कैसी है ये हम नहीं देख रहे हैं. दिनो-दिन सरसों तेल और नमक सबकुछ महंगा होता जा रहा है.
औरंगाबाद के एक बुज़ुर्ग रमाकांत शर्मा कहते हैं कि सब जगह राम लहर है इसलिए लोकसभा सीटें 400 पार तो हो जानी चाहिए.
हालांकि वो मानते हैं कि बिहार विकास में अब भी बहुत पीछे है.
वो कहते हैं, "बिहार में विकास बड़ा मुद्दा है. सब जगह निवेश आ रहा है, फैक्ट्री खुल रही है. लेकिन बिहार में कानून व्यवस्था जब तक ठीक नहीं होगी तब तक कुछ नहीं हो सकता".
औरंगाबाद के रामप्रवेश सिंह बताते हैं कि बिहार में किसानों की हालत बहुत ख़राब है. वो इसके लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराते हैं.
फिर भी उनका दावा है कि केंद्र सरकार किसानों को 6000 रुपये दे रही है. इसलिए अबकी बार लोकसभा चुनाव में 400 पार सीटें आएंगी.
नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी एक साथ

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औरंगाबाद की रैली इस मायने में भी खास रही कि लंबे समय के बाद नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार एक मंच पर दिखे.
नीतीश कुमार ने मोदी के सामने एक बार फिर से दोहराया कि वो अब 'इधर उधर नहीं करेंगे.'
नीतीश कुमार ने कहा, "हम तो साल 2005 से आपके साथ हैं. हम आये तभी बिहार में काम हुआ है, पहले यहाँ कहीं जाने के लिए सड़क तक नहीं थी.''
मोदी का यह कार्यक्रम 21 हज़ार करोड़ की 28 परियोजनाओं से जुड़ा हुआ था. जिसका मोदी ने रिमोट के ज़रिए शिलान्यास और उद्घाटन किया.
लेकिन रेलवे, सड़क और नमामि गंगे से जुड़ी परियोजना पर चुनावी रंग यहां ज़्यादा हावी दिखा है.
नीतीश कुमार ने भी मंच से दावा किया है कि अबकी बार 400 पार होगा, लोग बेवजह इधर-उधर कर रहे हैं.
हालाँकि औरंगाबाद में एक बात ज़रूर दिख रही थी कि नीतीश के भाषण पर ताली बजाने वाले भी कम थे और सड़कों पर भी एनडीए में जनता दल यूनाइटेड की मौजूदगी बैनर, पोस्टर या झंडों में कम ही दिखी.
कितना आसान है बिहार का रास्ता

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नीतीश कुमार के महागठबंधन में रहते कई बार बिहार बीजेपी के नेताओं ने दावा किया था कि पीएम मोदी बिहार आने वाले हैं.
लेकिन मोदी तभी आए जब नीतीश क़रीब 2 महीने पहले वापस एनडीए में आए हैं.
नीतीश की वापसी के बाद चुनावी आंकड़ों के लिहाज़ से एनडीए यहाँ महागठबंधन पर भारी तो दिखता है.
मोदी ने कहा है, "जबसे एनडीए की ताक़त बढ़ी है. परिवारवादी राजनीति हाशिए पर जा रही है. मैंने सुना है ऐसी पार्टी के लोग लोकसभा चुनाव भी नहीं लड़ना चाह रहे हैं, वो राज्यसभा का टिकट चाहते हैं."
लेकिन उसकी यही ताकत उसके लिए चुनौती भी बन सकती है.
एनडीए के कुनबे में यहाँ कम से कम 6 दल शामिल हैं. इन सभी दलों के बीच सीटों का बंटवारा आसान नहीं दिखता है.
राज्य में सत्ता विरोधी रुझान से भी एनडीए का सामना हो सकता है.
यहाँ नीतीश कुमार बीते क़रीब 2 दशक से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हैं.
जबकि नरेंद्र मोदी भी लगातार तीसरी बार अपनी सरकार बनवाने के लिए वोट मांग रहे हैं.
नरेंद्र मोदी एक बार फिर से विकसित बिहार बनाने का दावा कर रहे हैं.
वहीं बिहार में नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद आरजेडी नेता तेजस्वी यादव लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी दो बार बिहार का दौरा कर चुके हैं.
विपक्ष बिहार में रोज़गार और महंगाई जैसे मुद्दे को हवा दे रहा है. चुनाव में अब ज़्यादा वक़्त नहीं बचा है, इसलिए यह भी जल्द ही स्पष्ट हो सकता है कि बिहार में जनता किस मुद्दे पर किस दल के साथ खड़ी हो सकती है.
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