2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जिस रणनीति की हो रही है चर्चा- प्रेस रिव्यू

मोदी, शाह

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लोकसभा चुनावों के लिए बीजेपी समेत विपक्षी दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' में भी लोकसभा चुनावों की सीटों के बँटवारे पर चर्चाएं तेज़ हुई हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, फ़रवरी में बीजेपी में राष्ट्रीय परिषद की बैठक होगी और इसमें देशभर के नेताओं के लिए गाइडलाइंस को अंतिम रूप दिया जाएगा.

सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व मौजूदा सांसदों का टिकट काट सकता है. साथ ही पार्टी लोकसभा चुनावों में अधिकतम सीटों पर भी लड़ेगी.

सूत्रों का कहना है कि अगर बहुत अहम और बड़े नेता की बात छोड़ दें तो बीजेपी 70 साल से ऊपर के उम्मीदवारों को चुनाव में टिकट नहीं देगी.

अख़बार लिखता है कि पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति इस महीने के आख़िर में मिल सकती है ताकि लोकसभा चुनावों में उम्मीदवारों की पहली लिस्ट के नाम जारी किए जा सकें.

अख़बार से पार्टी से जुड़े सूत्र ने कहा कि पीएम मोदी ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि पार्टी महिलाओं और युवाओं पर ध्यान केंद्रित करेगी. इसे हासिल करने के लिए पार्टी 70 साल से ऊपर के सांसदों का टिकट काट सकती है.

हालांकि अगर ये नेता बड़े कद के हुए तो ऐसा होने की संभावना कम रहेगी.

नरेंद्र मोदी

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बीजेपी में कितने सांसद 70 पार

बीजेपी के 56 लोकसभा सांसद 70 साल या उससे ऊपर की उम्र के हैं.

इनमें राजनाथ सिंह, गिरिराज सिंह, राजेंद्र अग्रवाल, रवि शंकर प्रसाद, एसएल आहलूवालिया, पीपी चौधरी, संतोष गंगवार, राधा मोहन सिंह, जगदम्बिका पाल, अर्जुन राम मेघवाल, श्रीपद नाईक, राव इंद्रजीत सिंह, वीके सिंह जैसे नेता शामिल हैं.

पीएम मोदी भी 73 साल के हैं.

अख़बार से सूत्र बताते हैं कि 70 साल से कम उम्र के नेताओं पर फोकस करने का मतलब ये नहीं होगा कि सारे वरिष्ठ नेताओं का टिकट काटा जाएगा.

वो कहते हैं- उम्मीदवार को चुने जाने का पैमाना सिर्फ़ उम्र नहीं होगी. ऐसे नेता जिनका काफ़ी योगदान रहा होगा, उन्हें भी टिकट दिया जाएगा. पार्टी को लोकसभा में भी अनुभवी नेता चाहिए होंगे.

2019 में बीजेपी ने 303 सीटें जीती थीं. इस बार बीजेपी 400 पार का नारा दे रही है. बीते लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने 436 उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा था.

पार्टी से जुड़े नेता कहते हैं- 10 साल सत्ता में रहने के बाद इस बात का मतलब नहीं बनता कि किसी सीट पर चुनाव ना लड़ा जाए. बीजेपी उन चंदों सीटों पर भी ध्यान देगी, जहां वो कभी चुनाव नहीं जीती है.

मोदी शाह नड्डा

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बीजेपी की पहली लिस्ट जल्दी आएगी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में लिखा है कि बीजेपी लोकसभा चुनावों के लिए सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा जल्दी कर सकती है. विधानसभा चुनावों में भी पार्टी ने ऐसा ही किया था.

एक नेता के मुताबिक़, उम्मीदवारों के नाम का एलान जल्दी करने से न सिर्फ़ पार्टी को फ़ायदा होता है बल्कि इससे नेतृत्व मुश्किल सीटों पर ज़्यादा ध्यान दे पाता है.

इन बातों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय परिषद के नेता जल्द दिल्ली में मिलेंगे. इनमें 7000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है, जिसमें ज़िला परिषद स्तर के नेता भी शामिल रहेंगे.

केंद्रीय नेतृत्व जनवरी के आख़िर में इस बैठक में बुलाए जाने के निमंत्रण भेजना शुरू कर देगी.

इस बैठक में पीएम मोदी की 10 साल की उपलब्धियों को गिनाया जाएगा. साथ ही पार्टी नेताओं को ज़्यादा लोगों तक पहुंचने से जुड़ी गाइडलाइंस भी बताई जाएंगी.

2019 लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने स्थानीय चुनावों से लेकर सांसदी चुनावों में चुने गए सभी सदस्यों को ऐसी ही बैठक में बुलाया गया था.

मोदी नड्डा

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किन सीटों और मुद्दों पर होगा बीजेपी का ध्यान

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द हिंदू की रिपोर्ट में भी बीजेपी की चुनावी तैयारियों को जगह दी गई है.

फ़रवरी में होने वाली बैठक में उम्मीदवारों के नाम का एलान, 2019 से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना के बारे में बात होगी.

इस बैठक में राज्य परिषद, बीजेपी के संसदीय दल से 10 फ़ीसदी नेता, नेशनल एग्ज़ीक्यूटिव के अलावा वो नेता भी शामिल होंगे, जिन्हें बीजेपी प्रमुख बुलाना चाहेंगे.

द हिंदू लिखता है कि 2019 में जब ये बैठक हुई थी, तब बीजेपी तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव हारी थी. इस बार ऐसा नहीं है.

इन चुनावों में बीजेपी नई रणनीति के साथ उतरेगी. इस रणनीति के तहत उम्मीदवारों के नाम का एलान चुनाव की तारीख़ की घोषणा से पहले ही कर दिया जाएगा.

विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी ने ऐसा किया था और इसका फ़ायदा भी देखने को मिला है.

ऐसी सीटें 160 हो सकती हैं, जिसे बीजेपी ने 2022 में कमज़ोर सीटें माना था. इस सीटों पर बीजेपी कभी चुनाव नहीं जीती या दूसरे नंबर पर भी नहीं आई. पार्टी की कोशिश होगी कि इन सीटों पर अपनी पकड़ मज़बूत की जाए.

उदाहरण के लिए बिहार में नवादा, वैशाली, वाल्मिकी नगर, किशन गंज, कटिहार, सुपौल, मुंगेर, गया, पूर्णिया सीटों पर बीजेपी की ज़्यादा नज़र रहेगी.

वहीं तमिलनाडु में रामनाथ पुरम, सिवगंगा, वेल्लोर, कन्याकुमारी और चेन्नई जैसी सीटों पर बीजेपी ज़्यादा केंद्रित रहेगी.

इन सीटों पर बीजेपी अपने उम्मीदवारों का एलान पहले कर सकती है.

बीजेपी

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यूपी में बीजेपी का ध्यान किन सीटों पर होगा

द हिंदू की रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार और महाराष्ट्र में अपने सहयोगियों को खोने के बाद जिन सीटों पर बीजेपी कमज़ोर है, वो 144 से बढ़कर 2022 में 160 हो गईं.

बिहार में बीजेपी का साथ जेडीयू ने छोड़ा है. वहीं महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना की राहें बीजेपी से जुदा हुई थीं.

इन सहयोगियों के अलग होने के कारण ये पहली बार होगा कि बीजेपी अधिकतम सीटों पर चुनाव लड़ रही होगी.

2019 में बीजेपी 543 में से 436 सीटों पर लड़ी थी और 133 सीटों पर हारी थी.

ऐसे में जब बीजेपी इतने बड़े स्तर पर सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है, तब पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दो बार राज्यसभा के सांसद रह चुके नेताओं, केंद्रीय मंत्रिमंडल के नेताओं को भी चुनावों में उतारा जा सकता है.

विनोद तावड़े और अमित शाह

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चुनाव से पहले बीजेपी में कौन होगा शामिल, पार्टी ने बनाया पैनल

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, बीजेपी ने राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई है.

इस कमिटी का काम होगा कि लोकसभा चुनावों से पहले किसको पार्टी में शामिल किया जा सकता है और कौन इच्छुक है, उन लोगों पर विचार करे.

अख़बार लिखता है कि बीजेपी 400 से ज़्यादा सीटें चुनावों में जीतना चाह रही है, इसलिए बीजेपी उन सीटों पर ज़्यादा ध्यान दे रही है, जहाँ वो 2019 में हार गई थी.

एक सूत्र ने बताया कि इस कमिटी का काम होगा कि दूसरी पार्टियों के जो सांसद बीजेपी में आना चाहते हैं, उनकी मेरिट पर विचार किया जाए. साथ ही ऐसे नेताओं को भी देखा जाए जिनको पार्टी में लाने से फ़ायदा होगा.

अख़बार सूत्रों के हवाले से बताता है कि राज्यसभा सांसद और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राधामोहन दास अग्रवाल को घोषणापत्र बनाने का काम दिया गया है.

निर्मला सीतारमण

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चुनाव से पहले का आम बजट कैसा होगा

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, 2024 लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी अपने बजट में कई मुद्दों पर ध्यान देगी.

अखबार लिखता है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट में महिलाओं, ग़रीब, युवाओं, किसान और आदिवासियों से जुड़ी योजनाओं पर ख़ासा ध्यान रहेगा.

अखबार एक सूत्र के हवाले से लिखता है कि बजट में इन तबकों के लिए जो योजनाएं हैं, उन्हें अच्छा आवंटन दिया जा सकता है.

उदाहरण के लिए शिक्षा, कौशल विकास पर ख़ास ध्यान रहेगा.

अखबार लिखता है कि एक फरवरी को सरकार का बजट महिलाओं से जुड़ी योजनाओं पर केंद्रित रहेगा. ऐसा इसलिए भी अहम है क्योंकि बीते विधानसभा चुनावों में महिलाओं से जुड़ी योजनाएं बीजेपी और कांग्रेस दोनों के फोकस में रही थीं.

इन चुनावों में महिलाओं की भूमिका अच्छी रही थी.

बजट के ज़रिए बीजेपी कोशिश होगी कि लोकसभा चुनावों में भी महिलाओं के वोट हासिल किए जा सकें.

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