एन. चंद्रबाबू नायडू और पूर्व मंत्री गिरफ़्तार, क्या है स्किल डेवलपमेंट घोटाला?

इमेज स्रोत, TDP
- Author, शंकर वडिशेट्टी
- पदनाम, बीबीसी के लिए
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और तेलुगू देशम पार्टी के अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू को शनिवार सुबह स्किल डेवलपमेंट घोटाले के संबंध में गिरफ़्तार कर लिया गया.
चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के नंदयाल ज़िले के दौरे पर थे जब उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
पूर्व मुख्यमंत्री की गिरफ़्तारी के कुछ देर बाद ही विशाखापट्टनम से नायडू सरकार में मंत्री रहे गंता श्रीनिवास राव को भी गिरफ़्तार कर लिया गया.
पुलिस की एक टीम ने उन्हें सुबह छह बजे के क़रीब उनकी बस से उतारा और गिरफ़्तारी का नोटिस दिया.
गिरफ़्तारी के दौरान पार्टी नेताओं और चंद्रबाबू नायडू के वकीलों की पुलिस से बहस भी हुई है.
पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 50(1)(1) के तहत गिरफ़्तारी की जानकारी उनके वकीलों को दी.
चंद्रबाबू के वकीलों ने जब पुलिस से पूछा कि बिना बुनियादी सबूतों के कैसे गिरफ़्तारी की जा सकती है तो इसके जवाब में पुलिस की तरफ़ से बताया गया कि अदालत में रिमांड रिपोर्ट जमा कराते समय सभी जानकारी दे दी जाएगी.

इमेज स्रोत, ANI
आंद्र प्रदेश पुलिस के डीआईजी रघुरामी रेड्डी के नेतृत्व में पुलिस टीम चंद्रबाबू नायडू को गिरफ़्तार करने पहुंची थी.
भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता के तहत गिरफ़्तारी की जानकारी देते हुए नायडू को बताया गया कि उनकी गिरफ़्तारी अपराध संख्या 28/2021 के तहत की जा रही है.
चंद्रबाबू नायडू पर धोखाधड़ी करने (आईपीसी 420) और आपराधिक साज़िश रचने (आईपीसी 120बी) के आरोप में गिरफ़्तार किया गया.

इमेज स्रोत, UGC
चंद्रबाबू ने मांगे सबूत
गिरफ़्तारी के दौरान चंद्रबाबू नायडू ने पुलिस से पूछा कि स्किल डेवलपमेंट घोटाले (कौशल विकास मामले) में उनका नाम कहां हैं. इसके जवाब में पुलिस अधिकारियों ने उनसे कहा, ‘हमारे पास सबूत हैं, हमने इन्हें हाई कोर्ट में दे दिया है. रिमांड रिपोर्ट में सभी बातों को शामिल किया गया है.’
गिरफ़्तारी के दौरान चंद्रबाबू के समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई. पुलिस की तरफ़ से डीआईजी रघुरामी रेड्डी ने चंद्रबाबू के वकीलों को समझाया.
पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर विजयवाड़ा ले जाना चाहती थी. लेकिन चंद्रबाबू ने कहा कि उन्हें पुलिस सुरक्षा पर भरोसा नहीं है और वो अपने काफ़िले के साथ एनएसजी की निगरानी में जाना चाहते हैं. पूर्व मुख्यमंत्री की इस मांग को पुलिस ने स्वीकार कर लिया.

इमेज स्रोत, TDP
क्या है स्किल डेवलपमेंट घोटाला?
एपीएसएसडीसी (आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) का गठन आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद किया गया था. ये एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप है और इसका उद्देश्य राज्य के युवाओं को कौशल देना और प्रशिक्षित करना है. प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को रोज़गार उपलब्ध करवाना भी इसका मक़सद है.
इसके लिए कौशल विकास निगम ने टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ समझौते किये. इनमें सीमेंस और डिज़ाइन टेक सिस्टम्स जैसी कंपनियां भी शामिल हैं.
सीमेंस इंडस्ट्रियल सॉफ़्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड का मुख्यालय नोएडा में हैं. इस कंपनी के साथ समझौते के तहत आंध्र प्रदेश के छह स्थानों पर स्किल डेवलपमेंट केंद्र स्थापित किए गए. यहां युवाओं का कौशल विकास किया जाता है और प्रशिक्षण दिया जाता है.
आंध्र प्रदेश सरकार ने कहा था कि लागत का दस प्रतिशत हिस्सा सरकार देगी और बाक़ी 90 प्रतिशत सीमेंस कंपनी अनुदान के रूप में देगी.
सरकार और सीमेंस के बीच इस समझौते के बाद आंध्र प्रदेश के कई चर्चित इंजीनियरिंग कॉलेजों में उत्कृष्ता केंद्र (एक्सीलेंस सेंटर) की स्थापना की गई. इनमें आदित्य इंजीनियरिंग कॉलेज भी शामिल है.
सीमेंस साल 2017 से ही कौशल विकास निगम के साथ मिलकर काम कर रही है. समझौते के तहत सीमेंस को तकनीकी सहायता उपलब्ध करानी है. लेकिन आरोप हैं कि कंपनी ने इसे मुहैया नहीं कराया.
मामले की जांच कर रही सीआईडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दस्तावेज़ों में ये दर्ज किया गया कि कंपनी ने तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई थी.

इमेज स्रोत, TDP
आंध्र प्रदेश सरकार ने स्किल डेवलपमेंट एक्सीलेंस सेंटरों की स्थापना के लिए सीमेंस और डिज़ाइन टेक के साथ 3356 करोड़ रुपये के समझौते किए थे. समझौते के मुताबिक टेक कंपनियों को इस प्रेजेक्ट में 90 फ़ीसदी हिस्सेदारी वहन करनी थी, लेकिन ये बात आगे नहीं बढ़ी.
इस समझौते के तहत स्किल डेवलपमेंट के लिए छह क्लस्टर बनने थे और प्रत्येक क्लस्टर पर 560 रुपये ख़र्च होने थे. तत्कालीन चंद्रबाबू नायडू सरकार ने घोषणा की थी कि वह अपने हिस्से की दस प्रतिशत ज़िम्मेदारी यानी 371 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी.
आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने हिस्से का भुगतान कर दिया था. आंध्र प्रदेश में सीआईडी ने कौशल विकास के लिए जारी फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए सबसे पहले दिसंबर 2021 में मामला दर्ज किया था.
सीआईडी ने आरोप लगाया था कि सीमेंस ने प्रोजेक्ट की लागत को कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर 3300 करोड़ रुपये कर दिया था. इस आरोप में सीमेंस से जुड़े जीवीएस भास्कर पर मुक़दमा भी दर्ज हुआ था.
आंध्र प्रदेश सरकार ने सीमेंस इंडस्ट्रियल सॉफ़्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड को 371 करोड़ रुपये का भुगतान किया था. सीआईडी का आरोप था कि इस सॉफ़्टवेयर की वास्तविक क़ीमत सिर्फ़ 58 करोड़ रुपये थी.
सीआईडी ने इस समझौते में कौशल विकास निगम की तरफ़ से मुख्य भूमिका निभाने वाले गंता सुब्बाराव और लक्ष्मीनारायण समेत कुल 26 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया था. बाद में इनमें से दस लोगों को गिरफ़्तार भी कर लिया गया था.
अब आंध्र प्रदेश सीआईडी ने इस मामले में चंद्रबाबू नायडू को भी गिरफ़्तार कर लिया है.

इमेज स्रोत, Jagan Reddy Facebook
जगनमोहन रेड्डी ने क्या कहा था?
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया था कि ये आंध्र प्रदेश में बेरोज़गार छात्रों के नाम पर हुआ सबसे बड़ा घोटाला है.
इसी साल 20 मार्च को उन्होंने विधानसभा में कौशल विकास के नाम पर हुए कथित घोटाले के बारे में बात की थी.
रेड्डी ने आरोप लगाया था, “जो एमओयू में कहा गया, उसके विपरीत हुआ. फंड को विदेशों में शेल कंपनियों के लिए भेजा गया और उसे फिर वापस हैदराबाद लाया गया. जीएसटी, इंटेलिजेंस, आईटी, ईडी सहित एजेंसियां इसकी जांच कर रही है. चंद्रबाबू नायडू ने एक गिरोह बनाया और 371 करोड़ रुपये लूटे.”
जगन ने आरोप लगाया, “उन्होंने यह सोचे बिना नियमों का उल्लंघन किया कि दुनिया में कहीं भी कोई निजी कंपनी किसी को 3000 करोड़ रुपये अनुदान में क्यों और कैसे देगी.”
जगन ने आरोप लगाया कि सीमेंस कंपनी के एक उच्च पदस्थ अधिकारी को जेल में डालकर इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया और सरकारी धन की बंदरबाट की गई.

इमेज स्रोत, TDP
टीडीपी का क्या कहना है?
टीडीपी के वरिष्ठ विधायक पय्यावुला केशव ने कहा है कि इस समझौते के तहत केंद्र स्थापित किए गए और लाखों लोगों को प्रशिक्षित किया गया.
केशव ने कहा कि सीमेंस ने जिस तरह से गुजरात सरकार के साथ समझौता किया था उसी के आधार पर कंपनी ने आंध्र प्रदेश में भी समझौता किया और इसे लागू किया.
सीमेंस एक जर्मन कंपनी है जिसकी उपस्थिति दुनिया के 160 देशों में है.
टीडीपी विधायक ने आरोप लगाया कि सीमेंस के तत्कालीन प्रमुख सौम्याद्री बोस ने अपने उद्देश्यों के लिए कुछ निजी कंपनियों को फ़ायदा पहुंचाया था.
उन्होंने कहा, “ईडी जांच में पता चला की सीमेंस ने जीएसटी का भुगतान नहीं किया है. ये झूठ है कि सीमेंस के नाम पर 371 करोड़ रुपये डायवर्ट किए गए. सीमेंस अपने सहयोगियों की निगरानी के लिए ज़िम्मेदार है, तत्कालीन आंध्र प्रदेश सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है.”
उन्होंने कहा कि ये बिडंबना है कि सीमेंस की गलती के लिए चंद्रबाबू नायडू को गिरफ़्तार किया गया है. इस मामले में चंद्रबाबू पर अनुचित आरोप लगाये जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि सीमेंस या डिज़ाइन टेक ने जो कुछ भी किया है उसके लिए चंद्रबाबू ज़िम्मेदार नहीं हैं.
इसी साल दस मार्च को प्रवर्तन निदेशालय ने चार लोगों को गिरफ़्तार किया था जिनमें सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर लिमिटेड के भारत में पूर्व प्रबंध निदेशक सौम्याद्री शेखर बोस भी शामिल थे.
इसके अलावा मनी लॉंड्रिंग के आरोप में डिज़ाइन टेक सिस्टम्स (पुणे) के प्रबंध निदेशक विकास विनायक खानवेल्कर, पीवीएसपी आईटी स्किल्स प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफ़िसर मुकुल चंद्र अग्रवाल और एसएसआरए एंड एसोसिएट्स के चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश गोयल को भी गिरफ़्तार किया गया था.
सीआईडी की एफ़आईआर के बाद ईडी ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी थी.
गिरफ़्तारी के बाद नायडू ने क्या कहा?
अपनी गिरफ़्तारी के बाद नायडू ने कहा कि पुलिस जनता को डराने की कोशिश कर रही है.
उन्होंने कहा, “मैंने उनसे पूछा कि आप मुझे क्यों गिरफ़्तार कर रहे हैं, मेरे ख़िलाफ़ सबूत कहां हैं..लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बताया है. उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा कि हमारे पास गिरफ़्तार करने का अधिकार है. ये बहुत दुखद है. आज आंध्र प्रदेश पुलिस ने दिनदहाड़े लोकतंत्र की हत्या की है. आम आदमी के मूल अधिकार होते हैं. ये मेरा अधिकार है कि मैं जानूं कि मुझे क्यों गिरफ़्तार किया जा रहा है. पुलिस की ज़िम्मेदारी है कि वो मुझे बताएं कि मुझे क्यों गिरफ़्तार किया जा रहा है. मैंने यही पूछा था. मैंने उनसे पूछा कि मेरी ग़लती क्या है, लेकिन वो कहते रहे कि हम ये नहीं बतायेंगे.”
नायडू ने कहा, “वो आधी रात मुझे गिरफ़्तार करने आये, इससे बहुत पीड़ा हुई है. मैं सभी लोगों से अपील करता हूं, मैं साढ़े चार सालों से जनता के मुद्दों के लिए लड़ रहा हूं. ये बहुत दुखत है, मैं जनता के मुद्दों के लिए लड़ रहा हूं, वो मुझे गिरफ़्तार कर रहे हैं और जेल ले जा रहे हैं. मैं इसकी आलोचना करता हूं. न्याय की जीत होगी. वो जो भी कुछ करें, मैं जनता के लिए आगे बढ़ता रहूंगा.”
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)













