बीजेपी में आने से पहले और बाद में टीडीपी सांसदों के बोल

मोदी, चंद्रबाबू नायडु

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    • Author, टीम बीबीसी
    • पदनाम, नई दिल्ली

तेलुगू देशम पार्टी के चार राज्यसभा सदस्यों वाईएस चौधरी (सुजाना चौधरी), सीएम रमेश, टीजी वेंकटेश और गरिकापति मोहनराव ने गुरुवार 20 जून को बीजेपी की सदस्यता हासिल कर ली है.

इन चार राज्यसभा सदस्यों ने राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडू से मिलकर टीडीपी को बीजेपी में मिलाने के लिए भी निवेदन किया है.

नायडु के साथ मुलाक़ात के दौरान इन सांसदों के साथ बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा मौजूद थे.

नड्डा ने इन चारों सांसदों के निवेदन से जुड़ा पत्र नायडू को दिया.

इसके बाद, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उपराष्ट्रपति को पत्र लिखकर बीजेपी के टीडीपी को अपने साथ मिलाने के फ़ैसले को सूचित करते हुए पत्र लिखा.

सुजाना चौधरी ने कहा है कि वे देश के विकास और आंध्र प्रदेश की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी में शामिल हो रहे हैं.

हालांकि, अतीत में सुजाना चौधरी और सीएम रमेश बीजेपी के ख़िलाफ़ राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने जैसे आरोप लगा चुके हैं.

मोदी और माइक इन इंडिया

साल 2018 के नवंबर महीने में प्रवर्तन निदेशालय ने सुजाना चौधरी के कार्यालयों पर छापा मारा था.

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इसके बाद चौधरी ने कहा था, "ये छापे इसलिए पड़ रहे हैं क्योंकि मैं राजनीतिक रूप से सक्रिय हूं. केंद्र सरकार ईडी के माध्यम से मेरा राजनीतिक करियर ख़त्म करने के लिए ये छापे मरवा रहा है."

वहीं, अक्टूबर 2018 में चौधरी ने कहा था, "केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश को बर्बाद करने के लिए काम कर रही है. संविधान के अनुसार, सरकार को स्वतंत्र रूप से काम करने की आवश्यकता है. लेकिन, बीजेपी की नीतियां सरकारी नीतियों के साथ जुड़ी हुई हैं. चीन में कम्युनिस्ट पार्टियां इसी तरह से बर्ताव करती हैं. यह बहुत अन्यायपूर्ण है."

"केंद्र सरकार ने टीडीपी के एनडीए से बाहर होने के बाद विशाखापत्तनम को रेलवे ज़ोन बनाने की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया. आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा दिए जाने पर पर भी बातचीत बंद हो गई. ककिनडा में ऑइल रिफ़ाइनरी और कुड्डापाह में स्टील फैक्ट्री लगाने की योजना भी टाल दी गई."

मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेक इन इंडिया योजना पर तंज कसते हुए चौधरी ने कहा था कि मोदी के रहते हुए मेक इंडिया नहीं माइक इन इंडिया संभव है.

लेकिन 20 जून, 2019 को बीजेपी में शामिल होने के बाद चौधरी के स्वर बदले हुए दिखाई देते हैं.

उन्होंने कहा है, "हाल के चुनावों में हमने देखा है कि देश किस दिशा में सोच रहा है. इसके बाद हमने राष्ट्र निर्माण के काम में शामिल होने का फ़ैसला किया. अगर मैं अपनी बात करूं तो मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में साढ़े तीन साल तक जूनियर मिनिस्टर के रूप में काम किया है. ऐसे में हमने ये फ़ैसला देश के निर्माण के बारे में सोचकर लिया है."

"कुछ वजहों से आंध्र प्रदेश को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा. हमें लगता है कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन कानून - 2014 में आंध्र प्रदेश को जो आश्वासन दिए गए थे उनको अमल में लाने के लिए यही सही मंच है. हमने फ़ैसला किया है कि हमें लड़ने-झगड़ने की जगह समन्वय और सहयोग के साथ काम करना होगा."

उन्होंने कहा कि हमने तत्कालीन पार्टी के फैसले के अनुसार आंध्र प्रदेश को विशेष श्रेणी का दर्जा दिलाने के लिए काम किया.

लेकिन, आज आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा दिए जाने की बात भूले दिनों की बात हो गई है.

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'आयकर अधिकारियों ने मुझसे ये कहा'

साल 2018 के अक्टूबर महीने में आयकर अधिकारियों ने टीडीपी के राज्यसभा सांसद सीएम रमेश के घर और कार्यालयों की तलाशी ली थी.

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इनकम टैक्स के छापे के बाद सीएम रमेश ने कहा था कि छापे में शामिल एक आयकर अधिकारी ने उनसे बीजेपी में शामिल होने के लिए कहा था.

इसके बाद उन्होंने कहा था, "केंद्र सरकार राजनीतिक बदले की भावना के साथ मेरे ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है. मेरे ऑफ़िस पर छापे के दौरान मदन नाम के एक आयकर अधिकारी ने मुझसे पूछा - आप सरकार के विरोध में काम क्यों कर रहे हैं. उसने मेरे कर्मचारियों से कहा कि अगर हम ऐसा करते रहे तो हमें आने वाले दिनों में और अधिक छापेमारी की उम्मीद करनी चाहिए."

"मैंने उस अधिकारी को फोन करके कहा कि वह अपने काम से काम रखे और उसे ये अधिकार नहीं है कि वह मुझे पार्टी बदलने के लिए कहे. मैंने फोन पर हुई इस बातचीत को भी रिकॉर्ड किया."

"इन छापों के पीछे केंद्र सरकार है जोकि आंध्र प्रदेश में निवेश करने वालों को संदेश देना चाहती है कि अगर वे आंध्र प्रदेश में निवेश करेंगे तो उन्हें भी ऐसी छापेमारी का सामना करना पड़ेगा. केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ जो भी बोल रहा है, उस पर ऐसे ही हमले हो रहे हैं.'

"केंद्र सरकार वाईएस जगन और विजयसाई रेड्डी के इशारे पर काम कर रही है. हमने लोक सभा में केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव का नुकसान उठाया है. हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से सवाल किया. इसके बाद वे टीडीपी नेताओं को निशाना बनाने लगे हैं. इसके बाद भी हम डरे हुए नहीं हैं. हम हर मुश्किल का सामना करेंगे."

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क्या बोले थे बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव

वहीं, बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने सुजाना चौधरी के ऑफ़िस पर छापेमारी के बाद सुजाना चौधरी की तुलना विजय माल्या से की थी.

राव ने कहा था, "सुजाना चौधरी 5700 करोड़ रुपये का फ्रॉड करने के बाद आंध्र प्रदेश के विजय माल्या बन गए हैं. बीजेपी को विजय माल्या को देश से बाहर निकालने की कोई ज़रूरत नहीं है. जल्द ही विजय माल्या की तरह सुजाना चौधरी भी देश छोड़ देंगे. अब हमें चंद्र बाबू नायडु पर शक होने लगा है क्योंकि वह सुजाना और सीएम रमेश जैसे नेताओं के साथ रहते हैं. और इनके साथ रहते हुए वह अलीबाबा के चालीस चोर की कहानी के अलीबाबा की तरह व्यवहार कर रहे हैं."

लेकिन टीडीपी के इन चार राज्यसभा सांसदों ने बीजेपी में शामिल होने के बाद कहा है कि वे पार्टी को मजबूत करने के लिए पार्टी का हिस्सा बने हैं.

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राव कहते हैं, "टीडीपी का आंध्र प्रदेश में कोई भविष्य नहीं है. ये निश्चित है कि ये पार्टी जल्द ही ख़त्म हो जाएगी. बीजेपी में शामिल होने वालों को तात्कालिक राहत मिलेगी. लेकिन लोगों को अपने ख़िलाफ़ चल रहे मामलों का बचाव अपने स्तर पर ही करना होगा."

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वेंकैया नायडू का रुख?

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू कई बार कह चुके हैं कि दल बदलना एक अच्छी बात नहीं है और इसे रोकने के लिए एक सख़्त कानून की ज़रूरत है.

17 जून, 2016 को उन्होंने कहा था कि जब तक एक ऐसा क़ानून नहीं बनता जिसमें किसी व्यक्ति के एक दल छोड़कर दूसरे दल में शामिल होने पर उसको पद से तत्काल अपदस्थ करने की व्यवस्था न हो तब तक लोकतंत्र चल नहीं सकता है.

उन्होंने कहा था कि दलबदल के कारण लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन हो रहा है और मौजूदा दलबदल विरोधी क़ानून की समीक्षा की जानी चाहिए.

नायडू ने जब ये बात कही थी तब वह केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हुआ करते थे.

उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले हैदराबाद के इमेज गार्डन में अपने करीबियों को पार्टी देते हुए उन्होंने ये भी कहा था कि वर्तमान राजनीति पूरी तरह सड़ चुकी है.

उन्होंने कहा था, "पार्टियां ऐसे व्यवहार करती हैं, जैसे कि दलबदल विरोधी क़ानून सिर्फ़ एक व्यक्ति के पार्टी छोड़कर जाने पर लागू होता है और कई सांसदों के दूसरे दलों में जाने पर नहीं होता है. ऐसे में एक क़ानून होना चाहिए जो कि किसी एक चुनाव चिह्न से चुनाव जीतने के बाद दूसरी पार्टी में शामिल होने पर ऐसे नेता को दल बदलते ही उसके पद से हटा दे."

हालांकि, विडंबना ये है कि तीन साल बाद टीडीपी सांसदों ने बीजेपी में शामिल होते हुए राज्यसभा अध्यक्ष के रूप में उन्हें ही अपना पत्र सौंपा है जिसमें टीडीपी को बीजेपी के साथ मिलाने की बात कही गई है.

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