प्रियंका गांधी पहली बार लड़ेंगी चुनाव, राहुल गांधी ने छोड़ी वायनाड लोकसभा सीट

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी वायनाड सीट खाली करेंगे. इस सीट पर उनकी बहन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी चुनाव लड़ेंगी.
राहुल गांधी लोकसभा चुनाव में केरल की वायनाड और उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट से जीते थे. नियम के मुताबिक़ उन्हें एक सीट छोड़नी है. लिहाजा उन्होंने रायबरेली सीट को अपने पास रखने का फैसला किया है.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रियंका गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने की जानकारी दी है.
इस फैसले के बाद राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा कि वे वायनाड सीट जरूर छोड़ रहे हैं लेकिन वो वहां जाते रहेंगे और प्रियंका गांधी रायबरेली का साथ नहीं छोड़ेंगी.
उन्होंने कहा कि अब वायनाड और रायबरेली को दो-दो सांसद मिलेंगे.
सोमवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक के बाद फैसला किया गया कि प्रियंका गांधी वायनाड से उपचुनाव में उतरेंगी.
भारतीय जन प्रतिनिधित्व कानून के मुताबिक राहुल को चुनाव नतीजे घोषित होने के 14 दिनों के भीतर एक सीट को छोड़ने का एलान करना था.

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इससे पहले राहुल गांधी ने कहा था कि वो किस सीट को छोड़ेंगे और किसे रखेंगे इसे लेकर उनके मन में दुविधा है, लेकिन वो ऐसा फैसला करेंगे जिससे दोनों लोकसभा सीटों के वोटर खुश रहें.
प्रियंका गांधी के वायनाड सीट से चुनाव लड़ने का एलान करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "कांग्रेस पार्टी में हम सबने मिलकर तय किया है कि राहुल गांधी रायबरेली सीट से सांसद रहेंगे. वे वायनाड से भी चुनाव लड़े, वहां के लोगों का प्यार भी उन्हें मिला. इसलिए हम ने तय किया है कि वायनाड से श्रीमती प्रियंका गांधी चुनाव लड़ेंगी."

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कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा है कि वो वायनाड के लोगों को राहुल गांधी की कमी महसूस नहीं होने देंगी.
प्रियंका गांधी ने कहा, "वायनाड का प्रतिनिधित्व करके मुझे बेहद खुशी होगी. मैं वायनाड के लोगों को राहुल गांधी की कमी महसूस नहीं होने दूंगी."
उन्होंने कहा, "राहुल गांधी ने कहा है कि वो वायनाड आते रहेंगे. मैं भी सभी को खुश रखने के लिए कड़ी मेहनत करूंगी."
प्रियंका गांधी ने कहा, "रायबरेली से तो मेरा पुराना रिश्ता है. 20 साल से मैंने रायबरेली और अमेठी के लिए काम किया है."
कांग्रेस पार्टी के इस फैसले पर वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "कांग्रेस के इस फैसले में कुछ भी अनापेक्षित नहीं है. इस चुनाव में ये शुरू से रणनीति का हिस्सा था."
वे कहते हैं, "प्रियंका चाहती तो अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत अमेठी से कर सकती थीं लेकिन ऐसा इसलिए नहीं किया गया क्योंकि कांग्रेस पार्टी स्मृति इरानी को करारा जवाब देना चाहती थी. इसलिए अमेठी सीट पर केएल शर्मा को चुना गया."
अत्री कहते हैं, "जैसे गुरु गोबिंद सिंह जी ने कहा था कि सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं. वैसी ही कांग्रेस ने केएल शर्मा को अमेठी से उतारकर स्मृति को जवाब दिया है."
वे कहते हैं, "अगर कांग्रेस चुनाव में प्रियंका को उतार देती तो पार्टी के पास एक अहम स्टार प्रचारक की कमी पड़ जाती और प्रियंका को अपना ज्यादा ध्यान अमेठी पर लगाना पड़ता."
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने क्या कहा?

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पार्टी के इस फैसले पर उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा, "सोनिया जी ने पहले ही कहा था कि रायबरेली हमारे परिवार की सीट है. यहां के लोगों को मैं अपना बेटा सौंप रही हूं. उन्होंने जो रायबरेली और उत्तर प्रदेश में लोगों से वादा किया था उसे पूरा किया."
"अब कार्यकर्ता और पार्टी के लोग ज्यादा उत्साह से काम करेंगे. इससे पूरे देश में पार्टी के अंदर उत्साह पैदा होगा."
बीजेपी ने जताई नाराजगी

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बीजेपी ने प्रियंका गांधी के वायनाड से उपचुनाव लड़ने के फैसले की आलोचना की है.
बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "कांग्रेस एक पार्टी नहीं बल्कि एक फैमिली कंपनी है और आज ये साबित हो गया. उनकी मां सोनिया गांधी राज्यसभा में होंगी. बेटा लोकसभा में होगा और बेटी भी. यह वशंवादी राजनीति का उदाहरण है."
बीजेपी नेता नलिन कोहली ने कहा, "कांग्रेस के इस फैसले से दो चीजें साफ हो गई हैं. पहली ये कि वे वायनाड से लेकर रायबरेली तक परिवार की राजनीति का प्रसार करना चाहते हैं."
"दूसरी बात ये कि अब वायनाड के उन लोगों का क्या होगा जिन्होंने सारी दिक्कतों के बावजूद राहुल गांधी को दूसरी बार चुना था, लेकिन उन्होंने कभी ये नहीं बताया कि वो दूसरी सीट से भी चुनाव लड़ेंगे और वायनाड को छोड़ देंगे."
प्रियंका गांधी के लिए वायनाड सीट ही क्यों चुनी गई

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रायबरेली सीट से गांधी परिवार का रिश्ता
रायबरेली सीट से नेहरू-गांधी परिवार का पुराना संबंध रहा है.
सबसे पहले राहुल गांधी के दादा फिरोज गांधी ने यहां से 1952 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था.
1967 में इंदिरा गांधी पहली बार इस सीट से चुनकर संसद पहुंचीं थीं. उन्होंने 1971 में भी इसी सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 1975 में अदालत के आदेश से यहां से उनका चुनाव रद्द हो गया. 1977 में इमरजेंसी के 21 महीने बाद जब चुनाव हुआ तो इंदिरा गांधी को रायबरेली सीट पर हार का सामना करना पड़ा.
1980 में इंदिरा गांधी रायबरेली और आंध्र प्रदेश (अब तेलंगाना) की मेडक सीट से चुनाव लड़ी थीं और दोनों सीटों पर उन्होंने जीत हासिल की थी.
रायबरेली सीट उन्होंने तब छोड़ दी थी. उस साल यहां उपचुनाव में कांग्रेस के अरुण नेहरू चुनाव जीते थे. इसके बाद 1984 में भी उन्होंने ही दोबारा इस सीट पर जीत दर्ज की.
इसके बाद 1989 और 1991 के चुनाव में कांग्रेस नेता शीला कौल ने यहां से जीत दर्ज की.
1996 और 1998 में बीजेपी नेता अशोक सिंह ने रायबरेली सीट पर कमल खिलाने का काम किया.
1999 में रायबरेली सीट एक बार फिर कांग्रेस के पास आ गई. तब यहां से कांग्रेस नेता सतीश शर्मा ने जीत दर्ज की थी.
2004 से 2024 तक यानी बीस साल इस सीट से सोनिया गांधी सांसद रहीं. वहीं इस आम चुनाव में राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी ने रायबरेली सीट पर उतारा और उन्होंने करीब चार लाख वोट से जीत हासिल की.
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