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एनसीईआरटी की किताबों में बदलाव का केरल ने दिया जवाब, उठाया ये कदम
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
केरल 11वीं और 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स के लिए सप्लीमेंट्री टेक्स्टबुक जारी करने जा रहा है.
ऐसा करने वाला वो देश का पहला राज्य होगा. एनसीईआरटी ने मानविकी विषयों के सिलेबस में जो बदलाव किए थे, उसे 'सुधारने' के लिए ये कदम उठाया जा रहा है.
राज्य सरकार इन किताबों को इसी शैक्षणिक सत्र में शामिल करने जा रही है. 23 अगस्त को ये किताबें जारी कर दी जाएंगी.
केरल के जनरल एजुकेशन मंत्री वी सिवनकुट्टी ने इन बदलावों के बारे में जानकारी देते हुए बीबीसी हिंदी से कहा, "एकेडेमिक कम्युनिटी इतिहास, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र की किताबों के कोर्स में इतनी ज्यादा कटौती को मंजूर नहीं किया जा सकता है. लिहाजा सरकार ने इन विषयों पर अतिरिक्त टेक्स्टबुक जारी करने का फैसला किया है. राज्य सरकार अपने इस कदम के जरिये राष्ट्र और अकादमिक हितों को बढ़ावा दे रही है."
सप्लीमेंट्री टेक्स्टबुक छापने का तकनीकी मतलब ये है इसके तहत 2005 से लागू एनसीईआरटी सिलेबस का हिस्सा रही किताबों को दोबारा प्रकाशित किया जाएगा.
केरल सरकार कक्षा एक लेकर दस तक के छात्र-छात्राओं के लिए अपना सिलेबस बनाती है. लेकिन 11 से 12वीं कक्षाओं के लिए एनसीईआरटी का सिलेबस चलाया जाता है.
लेकिन इन कक्षाओं के लिए राज्य में एससीईआरटी की किताबों को चलाए जाने पर इस बदलाव का यहां असर नहीं पड़ा.
सिवनकुट्टी ने कहा, "सिलेबस में ये कटौती कोविड के नाम पर छात्र-छात्राओं पर पढ़ाई का बोझ घटाने के लिए की गई थी. लेकिन कोई भी इन किताबों को देख कर बता सकता है कि कटौती पढ़ाई का बोझ घटाने के लिए नहीं बल्कि कुछ स्वार्थों को साधने के लिए की गई है."
बदलाव के लिए क्या दलीलें दी गई थीं?
एनसीईआरटी ने इन बदलावों के लिए तीन दलीलें दी थीं. उसने कहा था कि क्लास छह से लेकर ऊपर की कक्षाओं के बच्चों के लिए कंटेंट में दोहराव हो रहा था. दूसरी दलील थी कि इसे समझने में उन्हें दिक्कत हो रही थी. तीसरी वजह ये बताई गई थी देश के मौजूदा हालात में ये कंटेंट प्रासंगिक नहीं हैं.
एनसीईआरटी ने इस साल अप्रैल में क्लास छह से दस तक की किताबों में बदलाव किया था. इसके बाद जून में क्लास 11 और 12 की राजनीति विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र और समाज शास्त्र की किताबों में बदलाव किए गए.
किताबों में इस हद तक बदलाव किए गए कि महात्मा गांधी को गोली मारे जाने की घटना भी ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाते थे.
उदाहरण के लिए, "थीम्स इन इंडियन हिस्ट्री-3 में महात्मा गांधी से जुड़े एक पैराग्राफ को संशोधित करके लिखा गया- 30 जनवरी को शाम की प्रार्थना सभा में गांधीजी को एक युवक ने गोली मार दी. गांधी पर हमला करने वाले ने बाद में आत्मसमर्पण कर दिया. इस युवक का नाम नाथूराम गोडसे था.
लेकिन 2005 के सिलेबस के मुताबिक़ छपी किताबों में लिखा गया था, "गांधी जी को एक युवक ने गोली मार दी. हमलावर ने बाद में समर्पण कर दिया था. वो पुणे का रहने वाला था और एक अतिवादी हिंदू अख़बार के संपादक के तौर पर काम कर रहा था. इस अख़बार ने लिखा था कि गांधी जी मुस्लिमों का तुष्टिकरण कर रहे हैं."
बदले गए किताबों में इतिहास के कई पहलुओं पर कोई संदर्भ नहीं है.
सिवनकुट्टी कहते हैं, "इतिहास की किताबों में मुगल इतिहास, औद्योगिक क्रांति, विभाजन के इतिहास वगैरह पर कोई संदर्भ नहीं है. राजनीति विज्ञान में महात्मा गांधी की हत्या, पंचवर्षीय योजनाओं, इमरजेंसी के हालात, जनांदोलन वगैरह पर कोई संदर्भ नहीं है. इसी तरह अर्थशास्त्र में अमेरिकी साम्राज्यवाद या गरीबी, भारत के सामाजिक हालात और समाज शास्त्र की किताब में जाति का कोई संदर्भ नहीं है."
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
डेवलपमेंटल एजुकेशनिस्ट प्रोफेसर वीपी निरंजनराध्या ने बीबीसी हिंदी से कहा, "इतिहास एक निरंतर विषय है और सही भविष्य का निर्माण करने के लिए अतीत को समझने की जरूरत होती है और इसके लिए इसे संदर्भों के तहत पेश करना होता है. किसी सहमति तक पहुंचने के लिए ऐतिहासिक तथ्य विश्वसनीय सुबूतों और प्रामाणिक चीजों पर आधारित होने चाहिए."
9 जून को राजनीति विज्ञानी सुहास पलशिकर और योगेन्द्र यादव ने एक खुली चिट्टी लिख कर एनसीईआरटी के राजनीति विज्ञान के किताबों से अपना नाम हटाने को कहा था.
दोनों एनसीईआरटी की राजनीति विज्ञान की किताबों के के मुख्य सलाहकार थे और उन्होंने एनसीईआरटी की ओर से किए गए विवादास्पद परिवर्तनों से असहमत होते हुए विरोध दर्ज कराया था.
लेकिन आईसीएचआर के पूर्व सदस्य प्रोफेसर सीआई आइजक ने बीबीसी हिंदी से कहा, "मेरा कहना ये है कि मुगल साम्राज्य को कई असफलताओं का सामना करना पड़ा लेकिन यह कहीं भी नहीं पढ़ाया जा रहा है. इतिहास के विद्यार्थियों को किसी भी घटना के दोनों पक्षों को पढ़ाया जाना चाहिए."
प्रोफेसर आइजक ने कहा, "महात्मा गांधी की हत्या की अनुचित जांच की गई थी. समय की मांग है कि यह बताया जाए कि मोहम्मद अली जिन्ना और जवाहरलाल नेहरू दोनों ही सत्ता चाहते थे. लेकिन हमारी किताबों में ये नहीं बताया जाता."
प्रोफेसर निरंजनराध्या ने कहा, "बदलाव मनमाने ढंग से या इतिहास को इस तरह पेश करके नहीं किया जा सकता. केरल सरकार सही तथ्यों के आधार पर बदलाव कर रही है. वो तथ्य जो प्रामाणिक हैं. अगर कोई सुबूतों के साथ कोई नया तथ्य लाता है तो इसकी भी समीक्षा की जानी चाहिए."
'एनसीईआरटी के बदलाव संविधान के सिद्धांतों के ख़िलाफ़'
सिवनकुट्टी ने कहा, "एकेडेमिक कम्युनिटी इतिहास, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र के टेक्स्टबुक में इतने व्यापक ढंग से एकतरफा बदलाव को मंजूर नहीं कर सकती. इसीलिए केरल सरकार ने इन विषयों पर सप्लीमेंट्री किताबें जारी करने का फैसला किया है."
चूंकि एससीईआरटी का एनसीईआरटी के साथ समझौता है इसलिए केरल सरकार किताबों को बदल नहीं सकती.
मीडिया में बोलने का अधिकार न रखने वाले एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि यही वजह है कि केरल सरकार सप्लीमेंट्री टेक्स्टबुक जारी कर रही है.
उन्होंने कहा, "किताबों में मूल रूप से जो बदलाव किए गए हैं वो संविधान के मूल सिद्धांतों के ख़िलाफ़ हैं. ये देश के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताने-बाने के मुताबिक नहीं हैं. यही वजह है कि सरकार ने इन विषयों पर सप्लीमेंट्री किताबें लाने का फैसला किया."
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