संसद की सुरक्षा में सेंध: बुधवार दोपहर से अब तक क्या-क्या हुआ, प्रदर्शनकारियों के परिजन क्या बोले

बुधवार को भारतीय संसद में उस समय अफ़रा-तफ़री फैल गई, जब भवन के अंदर और बाहर, प्रदर्शनकारियों ने पीले रंग का धुआं फैलाते हुए नारेबाज़ी कर दी.

इस मामले में पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ सख़्त आतंकवाद रोधी क़ानून यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया है.

इनमें से पांच को पुलिस ने गिरफ़्तार किया है जबकि एक की तलाश जारी है.

इन लोगों का कहना है कि वे बेरोज़गारी और देश के अन्य संकटों से परेशान थे और इसी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे.

गृह मंत्रालय ने भी घटना की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया है. यह कमेटी अपनी रिपोर्ट में यह भी बताएगी कि संसद की सुरक्षा बढ़ाने के लिए और क्या इंतज़ाम किए जाने चाहिए.

सुरक्षा में चूक की इस हटना को लेकर लोकसभा सचिवालय ने भी कार्रवाई की है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, इस संबंध में कम से कम सात लोगों को सस्पेंड किया गया है.

आइए, एक नज़र डालते हैं कि बुधवार दोपहर से अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ.

सदन में अचानक अफ़रा-तफऱी

दोपहर को लोकसभा की कार्यवाही चल रही थी. शून्यकाल के दौरान पीठासीन अधिकारी राजेंद्र अग्रवाल स्पीकर की कुर्सी पर बैठे हुए थे.

उसी समय अचानक एक शख़्स दर्शक दीर्घा से सदन के चैंबर में गिरता हुआ नज़र आया.

कुछ सांसदों ने बताया कि शुरू में उन्हें लगा कि कोई गिर गया है लेकिन तभी एक और शख़्स दर्शक दीर्घा की रेलिंग से उतरता नज़र आया.

कुछ ही पलों में एक शख़्स डेस्क के ऊपर चलते हुए आगे बढ़ने लगा. उसने अपने जूतों से कुछ निकाला और अचानक पीले रंग का धुआं निकलने लगा.

इसके बाद सदन में अफ़रा-तफ़री फैल गई. हंगामे और धुएं के बीच कुछ सांसदों ने इन युवकों को पकड़ लिया. कुछ ने इनकी पिटाई भी की.

कुछ ही देर में सदन के सुरक्षाकर्मियों ने इन दोनों युवकों को अपने कब्ज़े में ले लिया. लोकसभा की कार्यवाही के वीडियो में दिखता है कि इस माहौल के बीच पीठासीन अधिकारी ने दो बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी.

संसद के बाहर भी प्रदर्शन

सदन के अंदर क्या हुआ, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई थी कि संसद के बाहर भी पीला धुआं छोड़कर नारेबाज़ी होने लगी.

एक लड़का और एक लड़की पीले रंग के धुएं के बीच नारेबाज़ी कर रहे थे. दिल्ली पुलिस ने इन लोगों को तुरंत पकड़ लिया.

नारेबाज़ी और पीले रंग के धुएं से अब तक यह स्पष्ट हो गया था कि संसद भवन के अंदर और बाहर, दोनों घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं.

लेकिन अब तक यह साफ़ नहीं हो पाया था कि ऐसा करने वाले कौन हैं और उनका इरादा क्या था. साथ ही, जो पीले रंग का धुआं छोड़ा गया, उसे लेकर भी सवाल उठ रहे थे कि यह क्या था.

कुछ ही देर में स्पष्ट हुआ कि जो युवक सदन के अंदर कूदे, उनके नाम थे सागर शर्मा और मनोरंजन. वहीं संसद के बाहर अमोल शिंदे और नीलम ने प्रदर्शन किया था.

'संसद में दो नहीं चार लोग थे'

इस घटना के बारे में सांसद दानिश अली ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "पब्लिक गैलरी से दो लोग कूदे. कूदते ही एकदम धुआं उठने लगा. अफरा तफरी मच गई. सब लोग भागे.''

नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने दावा किया कि सदन के अंदर चार लोग थे.

उन्होंने कहा, “सबसे बड़ी बात है कि अंदर चार लोग थे, जिसमें से दो कूद गए और दर्शक दीघा में मौजूद एक महिला और एक लड़का उन्हें सपोर्ट कर रहे थे. वो कहां हैं? तलाश हमें उन चार लोगों की करनी है. बाहर से जिन्हें पकड़ा है वो कोई और होंगे.”

बेनीवाल ने कहा, “जब वह व्यक्ति अंदर कूदते हुए आया, तो मैंने उसे दबोच लिया. उसके बाद दूसरे ने स्प्रे किया, धुंआ छोड़ा. पहले वाले ने भी धुंआ छोड़ा. जब राजेंद्र अग्रवाल ने दो बजे तक लोकसभा को स्थगित किया, तो वो दो लोग दर्शकों के साथ बाहर निकल गए थे. वो दो लोग कौन हैं?”

जिस दिन यह घटना हुई, साल 2011 में उसी दिन यानी 13 दिसंबर भारतीय संसद पर चरमपंथियों ने हमला किया था.

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “देखने की बात ये है कि सदन में जो 2001 में हमला हुआ था, उसमें शहीद होने वालों को आज सुबह हमने श्रद्धांजलि दी. आज ही के दिन जो फिर हमला हुआ, ये हमारी नज़र में सुरक्षा में चूक है.''

बाद में जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा, "शून्यकाल के दौरान हुई घटना की लोकसभा अपने स्तर पर संपूर्ण जांच कर रही है. इस संबंध में दिल्ली पुलिस को भी जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं. प्राथमिक जांच के अनुसार यह सिर्फ साधारण धुआं था इसलिए यह धुआं चिंता का विषय नहीं है.”

सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा अध्यक्ष पर घटना को सामान्य बताने की कोशिश का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, “लोकसभा अध्यक्ष जी का बार-बार यह बयान कि घटना मामूली थी, ये ठीक नहीं है. जो हुआ है वो गलत हुआ है. लोकसभा अध्यक्ष जी को कहना चाहिए कि ये बहुत बड़ी घटना है और मैं मामले में कार्रवाई करूंगा.”

इसके बाद सर्वदलीय बैठक भी हुई, जिसमें विपक्षी दलों के गठबंधन ने घटना की जांच की मांग की और कर्नाटक से भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रताप सिम्हा के खिलाफ़ कार्रवाई की मांग की, जिनके नाम पर पास जारी हुआ था.

प्रदर्शनकारियों के बारे में क्या पता है

पुलिस ने इस घटना को लेकर सख़्त आतंकवाद रोधी क़ानून यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया है.

कुल छह लोगों को अभियुक्त बनाया गया है, जिनमें संसद भवन के अंदर और बाहर गिरफ़्तार किए गए चार लोगों के अलावा ललित और विक्रम नाम के दो और शख़्स शामिल हैं.

इनमें से विक्रम को गुरुग्राम से हिरासत में लिया गया, जबकि पुलिस की टीमें अलग-अलग जगहों पर ललित की तलाश में दबिश दे रही हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि ये छह अभियुक्त पिछले चार साल से सोशल मीडिया के ज़रिये एक-दूसरे को जानते थे.

अधिकारियों ने बताया, “उनकी विचारधारा एक ही है और इसलिए उन्होंने सरकार को संदेश देने का फ़ैसला किया. सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन्हें किसी संगठन से ऐसा करने के आदेश मिले थे.”

प्रदर्शन कर रहे युवक ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘भारत मां की जय’ जैसे नारे लगा रहे थे.

पीटीआई की ख़बर के अनुसार, पूछताछ के दौरान संसद के बाहर प्रदर्शन करने पर हिरासत में लिए गए अमोल शिंदे ने कहा कि वे लोग किसानों के आंदोलन, मणिपुर संकट और बेरोज़गारी के कारण नाराज़ थे, इसलिए इस घटना को अंजाम दिया.

प्रदर्शनकारियों के परिजन क्या बोले

दर्शक दीर्घा से छलांग लगाने वालों में से एक सागर शर्मा लखनऊ के रहने वाले हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सागर के परिजनों ने बताया कि वह कुछ दिन पहले ‘दिल्ली में विरोध प्रदर्शन’ में भाग लेने के लिए घर से निकले थे.

पुलिस के मुताबिक, सागर का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का रहने वाला है. पुलिस ने परिजनों के हवाले से बताया कि सागर हाल ही में बेंगलुरु से लखनऊ लौटा था.

सागर की बहन ने कहा, "मेरा भाई ई-रिक्शा चलाता था. वह पहले बेंगलुरु में काम करता था.’

सागर की मां रानी ने कहा, ‘‘वह दो दिन पहले घर से निकला था. उसने कहा था कि वह कुछ काम के लिए दोस्तों के साथ दिल्ली जा रहा है."

'वंचितों के लिए कुछ करना चाहता था मनोरंजन'

दर्शक दीर्घा से लोकसभा के फ्लोर पर कूदने वाले दूसरे शख़्स का नाम मनोरंजन डी है. वह बीजेपी सांसद प्रताप सिम्हा के निर्वाचन क्षेत्र मैसूर से हैं.

कूदने वाले लोगों में से एक प्रदर्शनकारी के पास से जो संसद में प्रवेश का पास मिला है, वह बीजेपी सांसद प्रताप सिम्हा की सिफ़ारिश पर जारी हुआ था.

बीबीसी के सहयोगी पत्रकार इमरान क़ुरैशी के मुताबिक़ मनोरंजन के पिता देवराजू गौड़ा ने मैसूर में अपने बेटे की 'हरकत' को 'कड़ी निंदा' के लायक बताया है.

देवराजू गौड़ा ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि वे किसान परिवार से आते हैं और उनके बेटे ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. उन्होंने कहा कि मनोरंजन हासन ज़िले में स्थित अपने गांव में अपनी ज़मीन पर खेती करता था.

देवराजू गौड़ा ने कहा, "उसने विवेकानंद को खूब पढ़ा है. वो समाज के लिए, वंचितों के लिए सिर्फ़ अच्छा करना चाहता था. "

इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद मनोरंजन मुर्गियां, भेड़ें और मछली पालन करते थे. पिता ने बताया कि मनोरंजन दिल्ली जाते थे लेकिन कभी ये बताया नहीं कि वहां करते क्या थे.

नीलम की मां ने बेटी के लिए मांगा रोज़गार

नीलम की माँ सरस्वती ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है कि उनकी बेटी नौकरी न मिलने की वजह से परेशान थी.

नीलम के छोटे भाई ने बताया, "उसने बीए, एमए, बीएड, एमएड, सीटीईटी, एमफिल और नेट क्वालिफाई किया था. उसने बेरोज़गारी का मुद्दा कई बार उठाया है. उसने किसान आंदोलन में भी हिस्सा लिया था."

नीलम की मां सरस्वती ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत करते हुए कहा, "मुझे अफ़सोस नहीं हो रहा है. नीलम ने जो किया, वो उसने अपने हिसाब से सही किया है. वह बेरोज़गार थी, वह भटकती घूम रही थी. बहुत बच्चे ऐसे हैं, जो बिना रोजगार के भटक रहे हैं. उसने किसी पर जानलेवा हमला नहीं किया है. उसने बेरोज़गारी के हिसाब से कदम उठाया है."

उन्होंने बताया, "वह रोज़गार को लेकर बहुत परेशान है और उसे ऐसा लगता था कि वह घर वालों पर बोझ है. मैंने अपनी बेटी को समझाया कि अगर तुझे नौकरी नहीं भी मिलेगी तो कोई बात नहीं. हम तुझे बोझ नहीं समझते हैं. वह नौकरी से बहुत परेशान थी, वह एक दो बार तो यह भी कहती थी कि मैं मर जाऊंगी."

"हमारी कोशिश यही है कि सरकार उसे रोज़गार दे दे और हम माफी मांग लेंगे. हमारा किसी से कोई लेना-देना नहीं है. उसे राजनीति से तो बिना मतलब के जोड़ा जा रहा है."

पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे थे अमोल शिंदे

संसद भवन के बाहर नीलम के साथ प्रदर्शन करते समय गिरफ़्तार किए गए अमोल शिंदे महाराष्ट्र के लातूर ज़िले के रहने वाले हैं.

पुलिस की कई टीमें बुधवार को शिंदे के गांव पहुंचीं और उनके घर की तलाशी ली.

बीबीसी मराठी के अनुसार, अमोल शिंदे कुछ साल पहले तक पुलिस भर्ती के लिए तैयारी कर रहे थे. लेकिन पुलिस का कहना है कि वह लगातार परीक्षा में नाकाम रहे.

परिजनों का कहना है कि उन्हें अपने बेटे के बारे में कुछ नहीं मालूम.

पुलिस का कहना है कि वह अमोल और उनके परिजनों के बारे में और जानकारियां जुटा रही है.

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