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संसद में सुरक्षा चूक: क्यों दर्शक दीर्घा तक पहुँचना आसान नहीं होता
- Author, राघवेंद्र राव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बुधवार को भारतीय संसद में हुई सुरक्षा चूक के बाद इसकी सुरक्षा से जुड़े इंतज़ामों पर सवाल उठ रहे हैं.
ये सुरक्षा चूक उस वक़्त हुई जब लोक सभा के शून्यकाल या ज़ीरो ऑवर के दौरान दर्शक दीर्घा से दो लोग कूदकर सदन में आ गए.
इन लोगों ने सदन में रंगीन धुआं फैला दिया. कुछ सांसदों ने मिलकर इनमें से एक को घेरा और पकड़ लिया और बाद में इन दोनों को सुरक्षाकर्मियों ने हिरासत में ले लिया.
लोक सभा के उस समय के सीधे प्रसारण में इनमें से एक व्यक्ति सदन के बेंचों के ऊपर भागता हुआ दिखाई दिया. ये घटना संसद पर साल 2001 में हुए हमले की बरसी के दिन हुई.
भारतीय मीडिया की रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने इस मामले में चार गिरफ़्तार किए गए लोगों से पूछताछ की है.
दर्शक दीर्घा तक पहुँचने की प्रक्रिया
सुरक्षा में लगी इस सेंध की वजह लोक-सभा की दर्शक दीर्घा सुर्ख़ियों में है.
आइए समझते हैं वो प्रक्रिया जिसके तहत लोक सभा की दर्शक-दीर्घा में जाकर कोई भी शख़्स सदन की कार्रवाई देख सकता है.
लोकसभा के पूर्व सेक्रेटरी जनरल पीडीटी आचारी कहते हैं कि किसी सांसद के ज़रिये ही दर्शक दीर्घा में जाने का पास बन सकता है.
लोग अक़्सर अपने इलाक़े के सांसद से सिफ़ारिश की एक चिट्ठी लेते हैं जिसके आधार पर उनका दर्शक दीर्घा में जाने का पास बनता है.
आचारी कहते हैं, "किसी एमपी का लिखा हुआ पत्र उनके पास होना ज़रूरी है."
दर्शकों या अपने मेहमानों के लिए दर्शक दीर्घा का पास बनवाने के लिए सांसदों को सेंट्रलाइज्ड पास इश्यू सेल में आवेदन देना होता है.
ये आवेदन फॉर्म जमा करवा कर या ऑनलाइन किया जा सकता है.
नियमों के तहत एक सांसद ऐसे व्यक्ति के लिए विज़िटर पास का आवेदन कर सकता है जिसे वो व्यक्तिगत रूप से जानता हो.
चुनिंदा मामलों में एक सांसद ऐसे व्यक्ति के लिए भी पास का आवेदन कर सकता है जिसका उनसे परिचय किसी ऐसे व्यक्ति ने कराया है जिसे वो सांसद व्यक्तिगत रूप से जानते हों.
इन चुनिंदा मामलों में नियमों में सांसदों से ये उम्मीद की गई है कि वो आवेदन करते वक़्त सावधानी बरतेंगे.
सांसदों को ये ध्यान रखने की सलाह दी जाती है कि उनके अनुरोध पर जारी किए गए कार्ड धारकों द्वारा दर्शक दीर्घाओं में होने वाली किसी भी अप्रिय घटना या अवांछनीय हरकत के लिए वो ज़िम्मेदार होंगे.
अब तक जो जानकारी सामने आयी है, उसके मुताबिक सदन में कूदने वाले शख़्स सागर शर्मा के पास जो संसद का विज़िटर पास था उसे मैसूरु के बीजेपी सांसद प्रताप सिम्हा की सिफ़ारिश पर जारी किया गया था.
दर्शक दीर्घा में प्रवेश के लिए विज़िटर पास सामान्यतः एक बैठक के लिए जारी किया जाता है जिसमें दर्शक ज़्यादा से ज़्यादा एक घंटे तक दीर्घा में बैठ सकता है.
ये कार्ड हस्तांतरणीय नहीं हैं. दस वर्ष से कम उम्र के बच्चों को विज़िटर गैलरी में प्रवेश की अनुमति नहीं है.
'पास बनाने से पहले बैकग्राउंड इंटेलिजेंस चेक होता है'
लोक सभा के पूर्व सेक्रेटरी जनरल पीडीटी आचारी कहते हैं, "जब पास जारी किया जाता है तो जिस व्यक्ति को पास दिया जा रहा है उसकी इंटेलिजेंस जांच होती है. पास बनाने के आवेदन पत्र में उस व्यक्ति की सारी जानकारी देनी होती है."
"इस जानकारी में व्यक्ति के पिता या पति का नाम, पता, फ़ोन नंबर, ईमेल आईडी शामिल हैं. इसके बात आवेदक का इंटेलिजेंस चेक होता है. संसद में आने वाले दर्शकों का कई जगह फिज़िकल चेक होता है, शरीर की तलाशी ली जाती है, मेटल डिटेक्टर से गुज़रना होता है."
वैसे इस मामले में इन दोनों लोगों की बारे में ज़्यादा जानकारी हासिल करने के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो और स्थानीय पुलिस की टीमें आरोपियों के घर पहुँच गई हैं.
आचारी कहते हैं कि दर्शक दीर्घा में भी बेंच के दोनों सिरों पर सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मी बैठते हैं.
वे कहते हैं, "दीर्घा में बैठे लोगों की हर हरक़त पर वो नज़र रखते हैं. अगर कोई दर्शक अचानक से नारेबाजी करने की कोशिश करे तो ये सुरक्षाकर्मी एकदम से आकर उन्हें रोकते हैं और उठाकर वहां से बाहर ले जाते हैं."
आचारी का कहना है कि बुधवार को हुई घटना "सुरक्षा में एक गंभीर चूक है."
वे कहते हैं, "मैंने कभी इस तरह की चीज़ों के बारे में सुना भी नहीं था. मैं 40 साल संसद में रहा हूँ, पांच साल सेक्रेटरी जनरल रहा हूँ. मैंने ऐसा कभी नहीं देखा कि कैनिस्टर लेकर कोई दर्शक संसद में जा पाए."
बुधवार के घटनाक्रम को सुरक्षा में एक बड़ी चूक इसलिए माना जा रहा है क्यूंकि संसद भवन में कई स्तरों का सुरक्षा इंतज़ाम है.
ये जांच का विषय है कि कैसे कोई विज़िटर कनस्तर लेकर सुरक्षा व्यवस्था की आँखों में धूल झोंकते हुए सदन में प्रवेश कर सका.
अलग-अलग सुरक्षा चेक प्वाइंट की सीसीटीवी फुटेज़ को भी खंगाला जा रहा जिससे ये पता लगाया जा सके की क्या हाथों से ली जाने वाली तलाशी में कोई कोताही बरती गई.
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