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संसद भवन उद्घाटन विवाद में बीजेपी का पलटवार, 'सोनिया गांधी ने किस हैसियत से किए थे उद्घाटन?'
- नए संसद भवन के उद्घाटन का विपक्षी दलों द्वारा बायकॉट करने के फ़ैसले पर बीजेपी ने सोनिया गांधी पर साधा निशाना
- बीजेपी का सवाल, 2011 में मणिपुर और तमिलनाडु की विधानसभा इमारतों के उद्घाटन में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह के साथ सोनिया गांधी किस हैसियत में थीं मौजूद
- बीजेपी ने आरोप लगाया है कि विपक्षी दल मोदी के प्रति अपने चरम नफ़रत की वजह से इसे एक मुद्दा बना रहे हैं.
- विपक्ष के बहिष्कार पर छिड़ी बहस के बीच सत्ता पक्ष ने उठाए कई सवाल
कांग्रेस समेत 19 विपक्षी पार्टियों ने 28 मई को नई संसद के उद्घाटन समारोह का बायकॉट करने का फैसला लिया है. उनका कहना है कि इसका उद्घाटन पीएम मोदी की बजाय राषट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों होना चाहिए.
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने विपक्षी पार्टी पर 'पाखंड' का आरोप लगाते हुए कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पार्लियामेंट हाऊस एनेक्सी की इमारत और राजीव गांधी ने 1987 में पार्लियामेंट लाइब्रेरी इमारत का उद्घाटन किया.
सरकार पर राष्ट्रपति मुर्मू को पूरी तरह दरकिनार करने का आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों ने अपने बयान में कहा था कि 'इस इमारत में कोई मूल्य नहीं दिखता क्योंकि लोकतंत्र की आत्मा को निकाल दिया गया है.'
बीजेपी प्रवक्ता पूनावाला ने ट्वीट करते हुए बिहार के सीएम नीतीश कुमार द्वारा बिहार विधानसभा में सेंट्रल हाल के उद्घाटन की भी याद दिलाई.
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि इन पांच मामलों में राष्ट्रपति और राज्यपालों का अपमान हुआ?
पूनावाला ने कांग्रेस को 'मदर ऑफ़ हिप्पोक्रेसी' कहा है.
बहिष्कार करने वाले दल क्या कह रहे हैं?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर लिखा था, "राष्ट्रपति से संसद का उद्घाटन न करवाना और न ही उन्हें समारोह में बुलाना - यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है. संसद अहंकार की ईंटों से नहीं, संवैधानिक मूल्यों से बनती है."
19 विपक्षी दलों ने बयान जारी किया है.
इनमें, कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, डीएमके, जेडीयू, आरजेडी, आईयूएमएल, जेएमएम, एनसी, केसी (एम), आरएसपी, वीसीके, एमडीएमके, आरएलडी, सीपीएम, सीपीआई, एनसीपी और एसएस (यूबीटी) हैं.
एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि उनकी पार्टी भी समारोह से हिस्सा नहीं लेगी.
हालांकि बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने समारोह में शामिल होने से असमर्थता जताई है लेकिन उन्होंने विपक्ष के बहिष्कार की भी आलोचना की है.
मायावती ने कहा, "राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा नए संसद का उद्घाटन नहीं कराए जाने को लेकर विपक्ष का बहिष्कार अनुचित है. सरकार ने इसको बनाया है इसलिए उसके उद्घाटन का उसे हक है. इसको आदिवासी महिला सम्मान से जोड़ना भी अनुचित है. यह उन्हें निर्विरोध न चुनकर उनके विरुद्ध उम्मीदवार खड़ा करते वक्त सोचना चाहिए था."
कार्यक्रम के लिए केंद्र सरकार के निमंत्रण पर मायावती ने कहा, "नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का निमंत्रण मुझे प्राप्त हुआ है, जिसके लिए आभार और मेरी शुभकामनाएं. किन्तु पार्टी की लगातार जारी समीक्षा बैठकों सम्बंधी अपनी पूर्व निर्धारित व्यस्तता के कारण मैं उस समारोह में शामिल नहीं हो पाऊंगी."
कौन दल हो रहे हैं शामिल?
बीजेपी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से जुड़ी पार्टियों ने उद्घाटन समारोह में शामिल होने की बात कही है.
जबकि शिरोमणि अकाली दल, बीजेडी और वाईएसआरसी भी इसमें हिस्सा लेंगी.
विपक्षी पार्टियों द्वारा नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह को राष्ट्रपति मुर्मू का अपमान बताए जाने पर बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने भी सवाल खड़ा किए हैं.
भाटिया ने पूछा है कि जब राष्ट्रपति चुनाव के लिए उनको नामित किया गया तो उन्होंने समर्थन नहीं किया.
उन्होंने कहा कि उन्हें 'राष्ट्रपत्नी' कहने पर कांग्रेस ने अपने नेता अधीर रंजन चौधरी को निकाला क्यों नहीं?
बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों का ये कदम संसद की शुचिता का उल्लंघन है, जिसकी इजाज़त देश की जनता नहीं देगी.
भाटिया ने कहा है कि इसी लोकतंत्र के मंदिर में और भी इतिहास लिखा जाएगा और देश आगे बढ़ेगा.
उन्होंने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि सकारात्मक भूमिका निभाने की बजाय विपक्ष लगातार अलग अलग आरोप लगा रहा है, "पहले उन्होंने इसे मोदी महल कहा. लेकिन ये पीएम मोदी ने वही किया जिसका सपना कांग्रेस और तत्कालीन स्पीकर मीरा कुमार ने देखा था."
किस बीजेपी नेता ने क्या कहा?
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 'संसद इनका बहाना है, इनको बस मोदी जी पर निशाना साधना है.'
पूर्व क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट कर छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन के उद्घाटन के मामले का ज़िक्र किया.
उन्होंने लिखा, "छत्तीसगढ़ में नए विधानसभा भवन का उद्घाटन हुआ था. छत्तीसगढ़ में नए विधान सभा भवन उद्घाटन के समय राज्यपाल अनुसुइया उईके थीं. वह जनजातीय समाज से आती हैं. उनका नाम शिलापट्ट पर नहीं है अपितु सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम अंकित है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उस समय कार्यक्रम की सूचना तक उन्हें नहीं दी थी."
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एनएनआई से कहा स्वतंत्र भारत के इतिहास में 28 मई एक गौरवशाली तिथि के रूप में दर्ज की जाएगी.
उन्होंने कहा कि नए संसद भवन का उद्घाटन भारत के यशस्वी पीएम मोदी करेंगे. इस मामले में विपक्षी दलों द्वारा की जा रही बयानबाज़ी लोकतंत्र को कमजोर करने वाली है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि ये इन पार्टियों का एक ड्रामा है क्योंकि इस प्रोजेक्ट को उन्होंने कभी समर्थन नहीं दिया.
उन्होंने कहा कि इस बायकॉट के पीछे सावरकर के साथ उद्घाटन का दिन होना भी एक कारण है.
संसदीय ममलों के मंत्री प्रहलाद जोशी ने सभी पार्टियों से अपील की है कि वो समारोह के बायकॉट के अपने फैसले पर पुनर्विचार करें.
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