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संसद की सुरक्षा का प्रोटोकॉल क्या है और जो शख़्स दर्शक दीर्घा से सदन में कूदा, उसे पकड़ने वाले सांसदों ने क्या बताया
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान दर्शक दीर्घा से सदन में कूदने वाले शख़्स को पकड़ने वाले कांग्रेस के सांसद गुरजीत सिंह औजला और बसपा के सांसद मलूक नागर ने घटना के बारे में मीडिया को विस्तार से बताया है.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, "वे लोग जब ऊपर से कूदे तो हम आगे बैठे थे. ज़ीरो आवर का लास्ट टाइम था. थोड़ा हल्ला गुल्ला हुआ तो हमने ध्यान दिया. एक आदमी पहले कूद गया था और दूसरा भी कूद रहा था. वो जो पहले कूदा था, वो स्पीकर की तरफ़ बढ़ रहा था. वो हल्ला गुल्ला कर रहा था."
"उसने जूता उतारना शुरू किया. जूते में कोई चीज़ थी. उसे बेनीवाल जी ने पकड़ लिया, वे पास थे. मुझे लगा कि एक दूसरा भी है वहां पर, उसने बम टाइप का कुछ था जिससे स्मोक निकल रहा था. मेरे हाथ में वही लगा है. मैं उसे पकड़कर बाहर की तरफ़ फेंका. पता नहीं लग रहा था कि वो क्या है. लेकिन सब की सुरक्षा का मामला था. फिर उसे पकड़ लिया गया."
बहुजन समाज पार्टी के सांसद मलूक नागर ने आज लोकसभा में दो युवाओं के दर्शक दीर्घा से गैलरी में उतरने की घटना की जानकारी दी है.
उन्होंने बताया, “हमारी शून्यकाल की कार्यवाही चल रही है. दूसरी तरफ़ धड़ाम सी आवाज़ आई. हमें लगा कि दर्शक दीर्घा से कोई गिर गया है या किसी ने धकेल दिया. या कोई रपटकर गिर गया. इतने में ही हमने देखा कि ऊपर से कोई और कूदा. जैसे ही दूसरा शख़्स कूदा, वैसे ही साफ लग गया कि कुछ गड़बड़ होने वाली है. वो शख़्स किनारे से निकलकर भागने की जगह सीटों के ऊपर कूदता हुआ भागा. तो ऊधर से हनुमान बेनीवाल और इधर से मैं. और दूसरे कई सांसद भी भागे."
"जैसे ही उसने जूता निकाला. हम थोड़ा झिझके. पर एक दम जोर से पकड़ा. फिर उसे पीटना शुरू किया. ये मकसद था कि उस शख़्स को किसी भी तरह के हथियार निकालने से रोका जाए. फिर सुरक्षाकर्मी आ गए."
लोकसभा के भीतर और बाहर क्या हुआ
भारतीय संसद के बाहर बुधवार दोपहर रंगीन धुआँ छोड़ने के मामले में एक महिला और पुरुष को पकड़ा गया है.
लोकसभा में दर्शकदीर्घा से कूदे दो लोगों को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है.
बाहर नारे लगा रहे दोनों लोगों को संसद की सुरक्षा में लगे सुरक्षाबलों ने पकड़ लिया है. इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.
एक वीडियो में एक महिला पुलिसकर्मी नीले रंग की ड्रेस पहने महिला को पकड़कर ले जाती दिख रही हैं.
इस दौरान ये महिला नारे लगाती सुनाई दे रही है.
वीडियो में इस महिला को नारे लगाते सुना जा सकता है, “भारत माता की जय, तानाशाही बंद करो, जय भीम-जय भारत, संविधान बचाओ. महिलाओं पर अत्याचार नहीं चलेगा."
क्या है सुरक्षा प्रोटोकॉल
संसद की सुरक्षा पर वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह ने बीबीसी संवाददाता मानसी दाश को बताया कि वहां सिक्योरिटी सिस्टम किस तरह से काम करता है.
अरविंद कुमार सिंह कहते हैं, "इस तरह के दिनों में क्या सामान्य दिनों में भी जो संसद का अपना सुरक्षा तंत्र है और वो काफी मजबूत रहता है. मजबूत इस सेंस में कि आप देखेंगे कि रूटीन में भी जब संसद का सत्र नहीं चलता है, तब भी उनकी चेकिंग की व्यवस्था रहती है. अभी जो घटना घटी है, उसके संदर्भ में आप देखेंगे तो ये जो लोग आए हुए थे, किसी मेंबर ने उनके पास बनवाए थे क्योंकि वो गैलरी से आए हैं. उनके पास गैस जैसा जो कुछ मिला है, वो क्या है, ये आगे जांच का विषय होगा."
पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस की भूमिका के सवाल पर उन्होंने बताया, "रूटीन में संसद की सुरक्षा का जिम्मा लोकसभा के पास होता है. संसद की सुरक्षा की जो आंतरिक व्यवस्था होती है, उसका इंचार्ज लोकसभा के पास होता है. दोनों सदनों के अपने सुरक्षा कर्मी होते हैं, जिन्हें पीएसएस (पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस) कहते हैं. ये सर्विस ओवरऑल सारी चीज़ें देखती हैं."
"जब संसद का सत्र चल रहा होता है, तो इसमें दिल्ली पुलिस के लोग भी सुरक्षा में होते हैं. इसमें सेंट्रल रिज़र्व पुलिस बल, आईटीबीपी के जवान होते हैं. इंटेलीजेंस ब्यूरो, एसपीजी, एनएसजी सब के लोग यहां ऐसे मौकों पर रहते हैं क्योंकि संसद का सत्र चल रहा होता है."
बड़े आयोजनों के मौकों पर कैसी व्यवस्था रहती है, इसके बारे में अरविंद कुमार सिंह ने बताया, "जब कोई बड़ा आयोजन होता है जैसे पिछले दिनों जी-20 देशों के स्पीकर्स का सम्मेलन हुआ था तो सुरक्षा चाकचौबंद की गई थी. 22 साल पहले जो हमला हुआ था, उसके बाद संसद की सुरक्षा में काफी चीज़ें हाई टेक हुई हैं. संसद के स्टाफ़ के पास भी अगर वैध पहचान पत्र नहीं है तो उन्हें ड्यूटी से लौटा दिया जाता है. उन्हें भी पास बनवाना होता है, और उनके विभाग प्रमुख अनुमति देंगे तो ही उन्हें आने के लिए इजाजत दी जाएगी."
संसद पर 22 साल पहले हुए हमले की आज बरसी है. उस घटना के बाद से सुरक्षा व्यवस्था में कैसे बदलाव हुए हैं, इसके बारे में उनका कहना है, "संसद पर हमले के बाद इसकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करोड़ो रुपये खर्च किए गए हैं. इसे वेल इक्विप्ड (पूरी तरह से आधुनिक), डिजिटलाइज़्ड किया गया है. संसद की सुरक्षा के लिए एक अलग से फोर्स बनी हुई है. आंतरिक व्यवस्था को मजबूत किया गया है. ये सारी चीज़ें की गई हैं. ये काफी मजबूत है. पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस के लोग संसद सदस्यों को पहचानते भी हैं. पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस सीधे स्पीकर के मातहत काम करती है."
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