बीजेपी में शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे सिंधिया के भविष्य पर चर्चा तेज़- प्रेस रिव्यू

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मध्य प्रदेश चुनावों के लिए बीजेपी ने अपनी दूसरी लिस्ट जब जारी की, तो उसमें कई केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों का नाम देखकर सबको हैरत हुई.
द टेलीग्राफ की ख़बर के मुताबिक़, बीजेपी से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि इस लिस्ट के आने से एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक भविष्य डगमगाया है.
अख़बार बीजेपी से जुड़े नेता के हवाले से लिखता है कि इस लिस्ट के ज़रिए मोदी के दौर से पहले की एक और बीजेपी नेता वसुंधरा राजे को भी संकेत चले गए हैं.
वसुंधरा राजस्थान की सीएम रही हैं और आगामी विधानसभा चुनावों में एक बार फिर सीएम की कुर्सी पर निगाह लगाए हुई हैं.
बीजेपी ने एमपी चुनावों की दूसरी लिस्ट में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर समेत चार सांसदों को विधायकी का टिकट दिया है.
मंगलवार को ये भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि बीजेपी शिवराज सिंह चौहान का टिकट काट सकती है.
अब तक बीजेपी ने जो दो लिस्ट जारी की हैं, उसमें शिवराज सिंह चौहान का नाम नहीं है.

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शिवराज का चुनावी टिकट कटेगा या बचेगा?
अख़बार लिखता है कि बीजेपी का मौजूदा शीर्ष नेतृत्व चौंकाने वाले फ़ैसलों के लिए जाना जाता रहा है.
पार्टी से जुड़े एक नेता ने कहा कि शिवराज सिंह का टिकट कटने से जुड़ी संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है.
वो कहते हैं, ''इस बात की संभावना कम ही है कि शिवराज सिंह चौहान चुनावी मैदान में ना हों पर इस बात को पुख़्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता कि अगर बीजेपी जीतती है तो वो मुख्यमंत्री बने रहेंगे.''
एक नेता ने कहा- चुनावी नतीजों के बाद केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा?
बीजेपी नेताओं का कहना है कि नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और महासचिव कैलाश विजयवर्गीय मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं और इन नेताओं को चुनावी मैदान में उतारकर बीजेपी ने अगले सीएम की संभावनाओं को और विस्तार दे दिया है.

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राजस्थान के लिए क्या संकेत?
राजस्थान में कांग्रेस सत्ता में है. राजस्थान में हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा रही है. ऐसे में कांग्रेस के लिए बीजेपी चुनौती है.
बीजेपी से जुड़े एक नेता ने टेलीग्राफ अख़बार को बताया कि मध्य प्रदेश जैसे हालात राजस्थान में भी हो सकते हैं.
शिवराज सिंह चौहान चार बार से मुख्यमंत्री हैं और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी दो दशक से राजस्थान में बीजेपी की बड़ी नेता हैं लेकिन मौजूदा नेतृत्व चाहता है कि उनका प्रभुत्व ख़त्म हो.
बीजेपी ने राजस्थान में भी सीएम चेहरे का एलान नहीं किया है और पार्टी राजस्थान में भी ऐसा ही कर सकती है.
अख़बार लिखता है कि राजस्थान में भी बीजेपी अपने अहम नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों को चुनावी मैदान में उतार सकती है.
कुछ पार्टी नेताओं का कहना है कि बीजेपी जो तरीका अपना रही है, उससे गुटबाज़ी बढ़ सकती है और इसका नुकसान पार्टी को ही होगा.
दोनों राज्यों में बीजेपी के अंदर भी हालात पहले से ही बहुत अच्छे नहीं हैं.
एक पार्टी नेता ने कहा, ''मौजूदा नेतृत्व की दुविधा ये है कि वो शिवराज सिंह और वसुंधरा राजे को नहीं चाहते हैं लेकिन वो उन्हें नज़रअंदाज़ भी नहीं कर सकते. दोनों की नेताओं के पास काफ़ी समर्थन है.''
कांग्रेस के सीएम पद के उम्मीदवार कमलनाथ ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखा- सांसदों को टिकट देकर बीजेपी ने ये साबित कर दिया है कि न तो वो 2023 विधानसभा चुनाव जीत रही है और न ही 2024 लोकसभा चुनाव.

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हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़ी जांच पर कनाडा पुलिस क्या बोली?
कनाडा में अलगाववादी सिख नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में वॉशिंगटन पोस्ट ने एक रिपोर्ट की थी.
इस रिपोर्ट में कहा गया था कि निज्जर की हत्या के बाद घटनास्थल पर पहुंचने में पुलिस ने 12-20 मिनट लिए थे. रिपोर्ट में एक चश्मदीद के हवाले से बताया गया था कि सरे पुलिस और रॉयल कनेडियन माउंटेड पुलिस के बीच घंटों तक जांच को लेकर बहस रही, जिससे जांच शुरू होने में देरी हुई.
द हिंदुस्तान टाइम्स ने इस रिपोर्ट में किए दावों पर कनाडा पुलिस की प्रतिक्रिया को जगह दी है.
कनाडा पुलिस ने घटनास्थल पर देर से पहुंचने की रिपोर्ट को ख़ारिज किया है.
कनाडा पुलिस ने कहा, ''घटना की पहली जानकारी सुबह 8.27 पर मिली थी और चार मिनट के अंदर ही पुलिस अधिकारी वहां पहुंच गया था और बाद में कुछ अन्य अधिकारी भी वहां पहुंचे.''
पुलिस के बयान के मुताबिक़, सरे पुलिस और रॉयल कनेडियन माउंटेड पुलिस के बीच विवाद की जहां तक बात है, तो बता दें कि सरे में होने वाली हर पुलिस जांच के लिए रॉयल कनेडियन माउंटेड पुलिस ज़िम्मेदार है. इसमें ऐसा कुछ नहीं है कि जांच में देरी हुई.
पुलिस ने कहा कि जैसा कि मर्डर के मामलों में होता है, ये केस भी इंटीग्रेटेड होमीसाइड इंवेस्टिगेशन टीम यानी आईएचआईटी को सौंप दी गई. हमें भरोसा है कि हत्या के पीछे जो हैं, उनको पकड़ने के लिए जांच से जुड़ा हर कदम उठाया गया.

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सरकार के कारण न्यायपालिका काबिल लोगों को खो रही है: सुप्रीम कोर्ट
न्यायपालिका में जजों की भर्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार पर टिप्पणी की है.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि कॉलेजियम की 70 सिफारिशें बीते 10 महीनों से सरकार के पास अटकी हुई हैं.
कोर्ट ने कहा कि सरकार महीनों तक कुछ नहीं करती है और इस कारण न्यायपालिका नए काबिल लोगों को खोती जा रही है.
ये टिप्पणी जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ की ओर से की गई.
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से जस्टिस कौल ने कहा, ''लोग आने से इंकार कर रहे हैं. हम सर्वश्रेष्ठ लोगों को लाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर हम इन लोगों को खोते जा रहे हैं. मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता लेकिन हमने एक-दो काबिल लोगों को खोया है क्योंकि देरी के कारण वो अपना नाम वापस ले लेते हैं.''
कोर्ट ने कहा, ''हाई कोर्ट में 70 जजों की जगह खाली है. जब आप हाईकोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों को पाते हैं, तब आपको कुछ प्रक्रिया तो शुरू करनी चाहिए और इसे सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजना चाहिए. लेकिन आपने ये तक नहीं किया.''
द हिंदू अखबार ने लिखा है कि 25 हाईकोर्ट में क़रीब 340 जजों की जगह खाली है, वहीं सुप्रीम कोर्ट में भी दो जजों की जगह खाली है.
कॉलेजियम सिस्टम के ज़रिए जजों की नियुक्ति को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच टकराव देखने को मिला था.
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