मध्य प्रदेश में केंद्रीय मंत्रियों को विधायकी का चुनाव लड़ाना बीजेपी की मजबूरी या रणनीति?

शिवराज और मोदी

इमेज स्रोत, ANI

    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, भोपाल से

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 39 उम्मीदवारों की अपनी दूसरी सूची जारी करके मध्य प्रदेश के राजनीतिक हलकों के साथ-साथ अपने ही संगठन में हलचल बढ़ा दी है.

इस सूची ने सबको अचंभे में डाल दिया है क्योंकि इस बार तीन केंद्रीय मंत्रियों और चार सांसदों को विधानसभा के चुनावी मैदान में उतारने का फ़ैसला किया गया है.

इसकी अटकलें 13 सितंबर से ही शुरू हो गई थीं जब दिल्ली में केंद्रीय चुनाव कमेटी की बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई थी.

इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे.

बीजेपी अब तक 78 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है. पहली सूची भी 39 उम्मीदवारों की थी जो पार्टी ने 17 अगस्त को जारी की थी.

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ‘दूसरी सूची से साफ़ पता चलता है कि संगठन शिवराज सिंह चौहान को लेकर क्या सोच रहा है.’

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भी उम्मीदवार बनाया गया है

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भी उम्मीदवार बनाया गया है

मंत्रियों को विधायक बनाने की रणनीति

इस सूची में जिन तीन केंद्रीय मंत्रियों नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते और संगठन के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को शामिल किया गया है, वो प्रदेश में अपने ‘राजनीतिक क़द’ की वजह से मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे हैं.

ये पहला मौक़ा ही होगा जब भारतीय जनता पार्टी ने किसी राज्य की चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक को उम्मीदवार बनाया जो तोमर हैं.

वहीं प्रह्लाद सिंह पटेल भी पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. उसी तरह फग्गन सिंह कुलस्ते 33 सालों के बाद विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे.

इस सूची पर कैलाश विजयवर्गीय ने भी आश्चर्य व्यक्त किया है. समाचार एजेंसी एएनआई ने उनका बयान जारी किया है जिसमें वो कहते है, “ये पार्टी का आदेश है. मुझसे कहा गया था कि मुझे कोई ज़िम्मेदारी दी जाएगी और मुझे ना नहीं करना है. जब सूची जारी की गई तो मुझे भी आश्चर्य हुआ. मैं संगठन का सिपाही हूँ. जो कहा जाएगा, वही करूंगा.”

कैलाश विजयवर्गीय

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, कैलाश विजयवर्गीय एमपी बीजेपी का बड़ा नाम हैं

विजयवर्गीय को इंदौर-I की सीट से उम्मीदवार बनाया गया है जहाँ से वो अपने पुत्र के टिकट के लिए प्रयास कर रहे थे.

इस सूची में ज्योतिरादित्य सिंधिया के पांच समर्थकों के नाम भी हैं जबकि 11 नए चेहरों को जगह मिली है.

वैसे 230 सीटों वाली विधानसभा में अभी तक 78 उम्मीदवारों की घोषणा भारतीय जनता पार्टी कर चुकी है. अभी भी बहुत सारी सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए जाने बाक़ी हैं इसलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी कई और बड़े नामों को मैदान में उतार सकती है.

अब तक जो टिकट दिए गए हैं उनमें सबसे ज़्यादा 22 मालवा और निमाड़ अंचल से दिए गए हैं जो भारतीय जनता पार्टी और संघ का सबसे पुराना गढ़ रहा है.

इसके बाद महाकौशल के इलाक़े से 18 उम्मीदवारों की घोषणा की गई है जबकि ग्वालियर-चंबल संभाग से 15 नामों की घोषणा हुई है.

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव कहते हैं कि ‘दूसरी सूची एक तरह से साफ़ संकेत है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान को लेकर क्या सोच रहा है.’

'मामा' को नहीं माना जा रहा अगला सीएम?

मोदी और शिवराज

इमेज स्रोत, ANI

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

भार्गव कहते हैं कि इस सूची से साफ़ संकेत आ रहे हैं कि ‘भाजपा सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है और उससे निपटने के लिए उसकी कमान में ये आख़िरी तीर था.’

वो कहते हैं, "अब सबकी नज़र भाजपा की अगली सूचियों पर होगी क्योंकि अगर ऐसा ही रहा तो हो सकता है कि कहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी चुनावी दंगल में न उतार दिया जाए.”

भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी का कहना है कि अब तक जो उम्मीदवारों की दो सूचियाँ जारी की गई हैं वो इस बात का संकेत है कि संगठन ‘हर चुनाव को गंभीरता से लड़ता है’ चाहे वो लोकसभा का हो या विधानसभा का.

बीबीसी से बात करते हुए चतुर्वेदी कहते हैं, “ये तो संगठन का विशेषाधिकार है. संगठन ही तय करता है कि किस नेता या कार्यकर्ता की क्या ज़िम्मेदारी होगी. चाहे वो किसी पद पर हो. हम अपना ‘बेस्ट फुट’ यानी बेहतर क़दम ही आगे बढ़ाते हैं."

"पार्टी के इस क़दम से जनता का विश्वास हासिल होगा और इसके परिणाम भी अच्छे आएँगे. ये बात सच है कि दूसरी सूची में केन्द्रीय मंत्री भी हैं और सांसद भी. मगर ये चुनावी राजनीति है. इसमें चुनाव जीतने के लिए जो बेहतर है, वो फ़ैसला लिया गया है.”

क्या कह रही है कांग्रेस?

कमलनाथ

इमेज स्रोत, ANI

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का कहना है कि नई सूची ‘भाजपा की आंतरिक हार’ की तरफ़ इशारा कर रही है.

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

पोस्ट X समाप्त, 1

कांग्रेस के प्रवक्ता पियूष बबेले ने भी एक बयान जारी करके कहा, “भाजपा ने जो प्रत्याशियों की सूची जारी की है वो आत्मसमर्पण के अलावा कुछ नहीं है.”

भोपाल से प्रकाशित दैनिक सांध्य प्रकाश के संपादक संजय सक्सेना का कहना था कि जिस तरह अभी तक मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री का चेहरा आगे नहीं किया है उससे ये तो संकेत मिलने लगे थे कि पार्टी राज्य में अब शिवराज सिंह चौहान पर दाव नहीं खेलना चाहती है.

बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, “महाकौशल का इलाक़ा हो या चंबल-ग्वालियर का इलाक़ा हो, भाजपा को यहाँ बड़ी चुनौती मिल रही थी जो कभी उसके सबसे मज़बूत गढ़ हुआ करते थे. मालवा और मध्य भारत भी संघ के प्रभाव का सबसे मज़बूत आधार रहा है जहाँ पार्टी को दिख रहा है कि वो कमज़ोर हो रही है. ये सत्ता विरोधी लहर भी कह सकते हैं या फिर नेतृत्व परिवर्तन की ज़रूरत भी कह सकते हैं."

"कार्यकर्ताओं के उत्साह में भी कमी नज़र आने लगी थी इसलिए भाजपा के पास यही एक रास्ता था. ऐसा मुझे लगता है. तोमर के सहारे ग्वालियर चंबल में अपने खिसकते आधार को पार्टी बचाना चाहती है तो महाकौशल में प्रह्लाद सिंह पटेल के सहारे."

इस नयी सूची में जिन सांसदों के नाम आए हैं उनमें राव उदय प्रताप सिंह 15 सालों के बाद विधानसभा के चुनाव लड़ेंगे जबकि रीति पाठक पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ेंगी. यही हाल गणेश सिंह का भी है.

क्या कांग्रेस की बिसात पलट गई है?

दिग्विजय सिंह

इमेज स्रोत, ANI

भारतीय जनता पार्टी की इस सूची के बाद अब तक प्रदेश में जो राजनीतिक समीकरण बन रहे थे वो सब उलट-पुलट हो गए हैं और जानकारों का कहना है कि अब कांग्रेस के सामने ही बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. उनका मानना है कि अब चुनावों में कांग्रेस को अपनी रणनीति बदलनी पड़ेगी “तब कहीं जाकर वो मैदान में टिक पाएगी.”

राजनीतिक टिप्पणीकार और विश्लेषक रशीद किदवई कहते हैं कि कांग्रेस के साथ सबसे बड़ी कमी ये है कि कोई बड़ा चेहरा उसके पास ऐसा नहीं है जिसे वो चुनावी दंगल में उतार सके, जैसा भाजपा ने किया है.

वो कहते हैं कि न तो दिग्विजय सिंह, न विवेक तनखा चुनाव लड़ने की स्थिति में हैं और ना ही सुरेश पचौरी.

उनका कहना था, “सिर्फ़ दो दिग्गज नेता हैं जैसे अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह और अरुण यादव जो लोकसभा और विधानसभा का चुनाव लड़ने में सक्षम हैं या तैयार रहते हैं. इसके अलावा, कोई बड़ा नेता ऐसा नहीं बचा है जिस पर कांग्रेस दाँव खेल सकती है. इसलिए उसे अपनी रणनीति बदलनी ही पड़ेगी, नहीं तो अति-उत्साह और अति-महत्वाकांक्षा में उसे नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है.”

किदवई कहते हैं कि इसको इस तरह से देखा जाना चाहिए कि अगर पहले भाजपा के चुनाव जीतने की संभावना 40 प्रतिशत थी, नई सूची के आने के बाद ये बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई है.

वो कहते हैं, “अब कांग्रेस को देखना है कि वो इस अनुपात को किस रणनीति के सहारे कम कर सकती है. अगर नहीं कर पाई तो फिर डगर कठिन हो जाएगी.”

क्या एमपी में बंगाल जैसा हाल होगा?

बीजेपी

इमेज स्रोत, ANI

इस रणनीति की कामयाबी की संभावना पर भी राय बँटी हुई है.

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव कहते हैं कि इस तरह का प्रयोग भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में भी किया था जब उसने बाबुल सुप्रियो जैसे मंत्री को विधानसभा का चुनाव लड़वाया था. मगर सुप्रियो चुनाव हार गए थे और फिर उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था.

वो कहते हैं, “ये दोधारी तलवार है. एक जुए जैसा है. मध्य प्रदेश के मामले में ये फार्मूला कितना सफल होगा ये देखने वाली बात है.”

कमलनाथ का कहना था कि भाजपा ने मध्य प्रदेश में अपने सांसदों को विधानसभा का टिकट देकर साबित कर दिया है कि 'भाजपा न तो 2023 का विधानसभा चुनाव जीत रही है और न ही 2024 का लोकसभा चुनाव.'

अपने ट्विटर पोस्ट में उन्होंने कहा, "अपने को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहने वाली भाजपा को आज ये दिन देखने पड़ रहे हैं कि उसको लड़वाने के लिए उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे हैं, तो फिर वोट देने वाले कहाँ से मिलेंगे."

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

पोस्ट X समाप्त, 2

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)