अखिलेश यादव पहलवानों के समर्थक लेकिन बृजभूषण के विरोधी नहीं?

विनेश फोगाट

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    • Author, अनंत झणाणें
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ

उत्तर प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार शाम दिल्ली पुलिस की साक्षी मालिक और विनेश फोगाट को खदेड़ते हुए तस्वीरों और वीडियो को #MurderOfDemocracy हैश टैग के साथ ट्वीट किया.

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर अखिलेश यादव ने लिखा, "आज की घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा के महिला सम्मान एवं सुरक्षा के सभी नारे खोखले हैं तथा वो केवल महिलाओं के वोट हड़पने के लिए थे. सच्चे खिलाड़ियों का अपमान भाजपा की नकारात्मक राजनीति का खेल है. देश नारी का ये अपमान नहीं भूलेगा."

अखिलेश यादव

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अखिलेश यादव ने दो ट्वीट किए और दोनों ट्वीट में उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह का नाम लिए बिना और उन पर लगे आरोपों का ज़िक्र किए बिना महिला पहलवानों का समर्थन किया.

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सोमवार को भी उन्होंने मीडिया को एक छोटा से बयान दिया और उस में भी उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह का नाम नहीं लिया और न ही उन पर दर्ज एफआईआर में लगे आरोपों का ज़िक्र किया.

उत्तर प्रदेश की राजनीति और बृजभूषण शरण सिंह के करियर को लंबे समय से देखती आ रहीं वरिष्ठ पत्रकार सुमन गुप्ता कहती हैं, "देखिये ऐसा है कि वो महिला पहलवानों का समर्थन कर रहे हैं वो एक अलग मुद्दा है और बृजभूषण पर नहीं बोल रहे हैं, वो एक अलग मुद्दा है."

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2004-2013: सपा से निकटता का दौर

बृजभूषण शरण सिंह

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2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान दिए गए एक इंटरव्यू में बृजभूषण शरण सिंह ने भाजपा से नाराज़गी के सवाल पर कहा था कि एक बार उन्होंने गोंडा का नाम लोक नायक जय प्रकाश नारायण नगर रखे जाने पर मायावती का विरोध किया था.

उनके मुताबिक ये बात वो खुद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तक लेकर गए थे. उनकी मानें तो वाजपेयी ने नाम बदलने पर तुरंत रोक लगा दी थी.

बृजभूषण का दावा है कि गोंडा का नाम बदलने का सुझाव संघ के बड़े नेता नानाजी देशमुख का था. वो कहते हैं, "और उसी दिन से मेरा विरोध शुरू हो गया."

उस दौर में भाजपा से अपनी बढ़ती दूरियों के बारे में बात करते हुए उन्होंने 2004 में पार्टी के गोंडा से प्रत्याशी घनश्याम शुक्ल की हत्या का भी ज़िक्र किया.

इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी.

बृजभूषण ने बताया कि जब वो प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिले तो वाजपेयी ने उनसे पूछा, "मरवा दिया?"

इससे उनकी भाजपा से नाराज़गी और दूरियां और बढ़ीं.

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बृजभूषण शरण सिंह

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2008: सपा के लिए क्रॉस वोटिंग

2008 में जब यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार को सत्ता में बने रहने के लिए परमाणु करार से जुड़े ट्रस्ट वोट में समर्थन की ज़रुरत पड़ी तो बृजभूषण ने भाजपा के व्हिप के खिलाफ जाकर क्रॉस वोटिंग की.

उस बारे में वो कहते हैं, "जब परमाणु करार का समय आया तो मुलायम सिंह ने मुझसे संपर्क किया, अखिलेश ने संपर्क किया. मुझको जाना था, मैंने वोट दिया और चला गया और (कैसरगंज से) चुनाव जीता. चुनाव में सब सपा के कार्यकर्ताओं ने मेहनत की."

गोंडा से वरिष्ठ पत्रकार जानकी शरण द्विवेदी कहते हैं कि, "बताया गया कि इसका नतीजा हुआ कि उसी समय से इनको एक तोहफे के रूप में वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई और यूपीए सरकार से मिली सुरक्षा चलती चली आ रही है."

अखिलेश यादव के साथ बृजभूषण शरण सिंह

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इमेज कैप्शन, साल 2016 में हुए वर्ल्ड जूनियर हॉकी चैंपियनशिप (लखनऊ) में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ बृजभूषण शरण सिंह

'अखिलेश मुझे बचपन से जानते हैं'

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बृजभूषण शरण सिंह से गोंडा में हुई एक प्रेस वार्ता में पूछा गया कि आरोप लगने के बाद उत्तर प्रदेश की विपक्षी पार्टियां आखिरकार उनका विरोध क्यों नहीं कर रही हैं.

जवाब में उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश की जो अन्य पार्टियां हैं, विशेष करके समाजवादी पार्टी, जहाँ आपका इशारा है. समाजवादी पार्टी के नेता हैं अखिलेश यादव, वो मुझे बचपन से जानते हैं."

समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव के अपने प्रति रुख को समझाते हुए बृज भूषण कहते हैं, " उत्तर प्रदेश के अंदर जो ज़्यादातर पहलवान हैं वो ऐसे समाज से आते हैं, जो समाजवादी विचारधारा से ज़्यादा ताल्लुक रखते हैं. अगर देखा जाए तो प्रदेश में अगर 10 हज़ार बच्चे पहलवानी करते हैं तो 8000 बच्चे ऐसे हैं जो समाजवादी परिवार से हैं. और उनको सबको पता है कि हमारे नेताजी (बृजभूषण) कैसे हैं. "

वो कहते हैं , "मैं धन्यवाद करूंगा उनका, सबका, अखिलेश का धन्यवाद करूंगा. क्यों नहीं धन्यवाद करूंगा?"

मई के शुरुआत में बीबीसी ने एक इंटरव्यू में बृजभूषण शरण सिंह से अखिलेश यादव के उनके रिश्तों पर सवाल पूछा था.

तब ये भी पूछा था कि 2008 की तरह क्या वो सपा में फिर जा सकते हैं. जवाब में बृजभूषण ने कहा, "सवाल यह नहीं है. जब मीडिया ने सवाल किया तो मैंने कहा कि अखिलेश यादव मुझे बचपन से जानते हैं. मैं उनको बचपन से जानता हूँ. वो मेरे घर आए हैं, हम उनके घर गए हैं. हम उनके कार्यक्रमों में गए हैं. और क्योंकि सच्चाई से वाकिफ हैं, इसलिए उन्होंने हमारा विरोध नहीं किया उनको धन्यवाद."

बृजभूषण शरण सिंह

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मुलायम सिंह से गहरे रिश्ते?

मुलायम सिंह को उत्तर प्रदेश के राजनीतिक अखाड़े का पहलवान भी माना जाता था. वो खुद पहलवानी भी करते थे.

10 अक्टूबर 2022 को सपा संस्थापक मुलायम सिंह के गुज़र जाने पर बृज भूषण शरण सिंह ने उन्हें गोद में उठाते हुए, उनका सम्मान करते हुए एक तस्वीर फेसबुक पर साझा की.

इस पोस्ट में बृजभूषण ने लिखा, "उनका निधन राजनीतिक जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है. उनके निधन की सूचना सुनकर मैं स्तब्ध एवं निःशब्द हूँ."

ज़ाहिर है कि बृजभूषण के मन में मुलायम सिंह यादव के प्रति काफी आदर और सम्मान था.

मुलायम सिंह से बृज भूषण के रिश्तों के बारे में पत्रकार सुमन गुप्ता कहती हैं, " मुलायम सिंह के रिश्ते थे, बहुत ज़्यादा नहीं थे. रिश्ते थे, तभी तो यह सपा में आए थे. तब तो अखिलेश का युग नहीं था."

लेकिन सुमन गुप्ता कहती हैं कि अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में आपराधिक छवि के नेताओं को पार्टी से दूर रखने की कोशिश की.

तो क्या आरोपों का सामना कर रहे बृजभूषण के लिए अखिलेश की सपा में कोई जगह है?

इस बारे में वो कहती हैं, "राजनीतिक अवसरवाद भी होता है. वो (अखिलेश) देख रहे हैं कि अगर यह आदमी हमारे पास आ गया कैसरगंज लोकसभा सीट है. गोंडा है. अगर ये अयोध्या से लड़ जाते हैं, तो इस तरीके से कुछ हो सकता है. 2022 में भी बृजभूषण ने कुछ सीटों का ठेका ले लिया था कि हम लोगों को जिता देंगे और वो सीटों जो कमज़ोर दिख रही थीं, बृजभूषण ने उन सीटों को जिता कर दिया."

बृजभूषण शरण सिंह

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'बृजभूषण की राजनीतिक उपयोगिता'

क्या बृजभूषण शरण सिंह सपा में जा सकते हैं?

इस सवाल पर सुमन गुप्ता कहती हैं, "वो सपा में जा सकते हैं. उनके लिए राजनीतिक पार्टी मायने नहीं रखती है. यह बात अलग है कि भाजपा उनकी प्राकृतिक पार्टी जैसी है. लेकिन उनके पास, उनके सैकड़ों शिक्षण संस्थानों का मैनपावर है वो उनकी बहुत बड़ी पूँजी है."

आपको बता दें कि बृजभूषण शरण सिंह के पास गोंडा और आस पास के ज़िलों में तकरीबन 60 स्कूल और कॉलेज हैं.

बृजभूषण को लेकर क्या अखिलेश यादव "वेट एंड वॉच" मोड में हैं?

इस बारे में सुमन गुप्ता कहती हैं, "अभी अखिलेश यादव के रवैये को बिटवीन-द-लाइन्स (रेखाओं के बीच में) कहा जा सकता है. वो यह सोच रहे हैं कि जब दिल्ली का फीता टूट जायेगा तो दो तीन लोकसभा की सीटें मिल जाएँगी. तब तक अखिलेश नरम रहेंगे. अगर भाजपा दिखाने के लिए इनके साथ नहीं दिखती है तो फिर इन्हें सपा में जाते-जाते देर नहीं लगेगी, और अखिलेश इन्हें हाथों हाथ ले लेंगे."

बृजभूषण शरण सिंह

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समाजवादी पार्टी ने क्या कहा?

हमने सपा की वरिष्ठ प्रवक्ता जूही सिंह से इन तमाम पहलुओं पर पार्टी की राय जानने की कोशिश की.

उनसे पूछा कि अखिलेश यादव महिला पहलवानों का समर्थन करते हुए बृज भूषण शरण सिंह का नाम क्यों नहीं लेते हैं?

जूही सिंह भी बृजभूषण शरण सिंह का नाम लिए बिना कहती हैं, "जब हम निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं तो हम उसी मुद्दे की जांच की मांग कर रहे हैं जो आरोप महिला पहलवान किसी के ऊपर भी लगा रही हैं और यह हम शुरू से कह रहे हैं कि इसमें किसी का नाम लेने या न लेने से कोई फर्क नहीं पड़ता है. मुद्दे की जांच होनी है, मुद्दे की जांच तुरंत होनी है और उस पर न्याय होना है."

समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी है, तो पार्टी बृजभूषण शरण सिंह पर लगे यौन शोषण के आरोपों को लेकर सड़कों पर क्यों नहीं उतर रही है? क्या वो मुद्दा नहीं है?

इस बारे में जूही सिंह कहती हैं, "समाजवादी पार्टी ऐसे हर मुद्दे पर विरोध करती है. अगर हमारे किसी व्यक्ति पर भी ऐसे कोई प्रश्नचिंन्ह लगते हैं तो हम उस पर भी विरोध करते हैं. हम न्याय के साथ हैं और हम निष्पक्ष जांच के साथ हैं."

वीडियो कैप्शन, ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली में जंतर-मंतर से पहलवानों के तंबू उखाड़े गए

लेकिन पत्रकार सुमन गुप्ता अखिलेश यादव के यूपी के सबसे बड़े विपक्षी नेता होने के नाते उनकी भूमिका के बारे में कहती हैं कि, "अखिलेश यादव किसी आंदोलन को लंबी दूरी तक लेकर नहीं जाते हैं. एक दिन कोई मुद्दा फ़्लैश कर दिया, दूसरे दिन वो मुद्दा गायब हो जायेगा. वो मुद्दा पाते हैं, उसे कन्वर्ट नहीं कर पाते हैं. यह उनका बहुत बड़ा माइनस पॉइंट है. अब राजनीति का फायदा तो उन्हें ही लेना है. तो या तो जान-बूझकर नहीं कर रहे हैं, या तो कोई दबाव है, या तो वो कर नहीं पाते हैं."

महिला पहलवानों को न्याय मिलने के बारे में सपा प्रवक्ता जूही सिंह कहती हैं, "जांच तभी उपयुक्त होती है जब जांच जल्दी हो. एक निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना चाहिए जिससे उनको न्याय मिल सके. अगर वो संसद के सामने प्रदर्शन कर रहे थे, जहाँ लोकतंत्र का जश्न मनाया जा रहा था, और जिस तरह से महिलाओं को घसीटने के नज़ारे सामने आए, तो वो तो शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे, तो क्यों ऐसा किया गया? मेरे हिसाब से यह जघन्य है. सरकार इसके लिए ज़िम्मेदार है."

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