ग़ज़ा में जारी तबाही, इसराइल में क्या माहौल और हमास का कितना ख़ौफ़?

मध्य इसराइल के होलोन में 11 दिसम्बर को एक रॉकेट से हुई क्षति.

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इमेज कैप्शन, मध्य इसराइल के होलोन में 11 दिसम्बर को एक रॉकेट से हुई क्षति.
    • Author, जेरेमी बोवेन
    • पदनाम, बीबीसी इंटरनेशनल एडिटर, यरूशलम

इसराइल में छुट्टियां चल रही हैं. स्कूल बंद हैं और जंग के मैदान से दूर के इलाकों में शॉपिंग सेंटर भरे हुए हैं. केक की दुकानें डोनट सजी हुई हैं, जिसे यहूदी इस समय चल रहे धार्मिक उत्सव हानुका के दौरान खाना बेहद पसंद करते हैं.

लेकिन जैसे ही आप उस इलाके की ओर बढ़ेंगे जिस ओर जंग चल रही है, मंज़र बदलने लगता है.

ग़ज़ा से सटी सीमा के इलाक़े, जिसे इसराइली "एनवलप" कहते हैं, वहां टैंकों और सैनिकों की गहमागहमी है, यहां नागरिक न के बराबर दिखते हैं और यह बिल्कुल जंग के मैदान सा लगता है.

उत्तर में लेबनान से लगती सीमा के पास बसाहटों से लोगों को खाली करा लिया गया है और सेना ईरान के सबसे मजबूत सहयोगी हिज़्बुल्लाह के साथ गोलीबारी में व्यस्त है.

लेकिन अचानक पहुंचे लोगों को ये गल़तफ़हमी हो सकती है कि इसराइल के मध्य यरूशलम से तेल अवीव तक के विस्तृत इलाक़े में ज़िंदगी किसी तरह ‘पटरी पर’ लौट आई है.

जब मैं तेल अवीव की ओर रवाना हुआ तो मुझे लगा कि ये धारणा बनाना कितना ग़लत होगा.

उस इलाक़े की जद में पहुंचते ही हवाई हमले के सायरन सुनाई देने लगे और हर इसराइली के फ़ोन में मौजूद रेड अलर्ट ऐप से चेतावनी आ गई. कारें इमरजेंसी लेन में तेज़ी से रुक गईं ताकि लोग ‘कवर’ ले सकें.

कई कार चालकों ने इस इलाक़े से जल्द से जल्द बाहर निकलने के लिए अपनी रफ़्तार को बढ़ा दिया.

इसी कन्फ़्यूज़न में तीन कारें एक दूसरे से भिड़ गईं.

महिलाओं का एक ग्रुप कार से निकला और उन्होंने एक दूसरे को कस कर पकड़ लिया, वे डरी हुई दिख रही थीं. हमने अपनी कार रोक ली.

आसमान में ग़ज़ा से आने वाले रॉकेट को मार गिराने के लिये एंटी मिसाइल सिस्टम 'ऑयरन डोम' के रॉकेट आसमान में धुएं की लकीर बना रहे थे. गहरे नीले आसमान में चारों ओर धमाके हो रहे थे, अधिकांश रॉकेट को मार गिराया गया था.

हाईवे से कुछ ही दूरी पर होलोन में एक आदमी घायल हो गया था.

हमास के साथ इसराइल की जंग नवें सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है.

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इसराइल का गहरा सदमा

ये तथ्य कि हमास अभी भी इसराइल पर हमला कर सकता है, इस बात का सबूत है कि उसे अभी हराया नहीं गया है.

कार सवारों की प्रतिक्रिया से वो गहरा सदमा साफ़ दिखता है जो इसराइल पर हमास के हमले से पैदा हुआ था. यह बिना शक हमास के नेताओं के लिए एक बढ़िया ख़बर है, जो ग़ज़ा के नीचे किसी सुरंग में हैं, ऐसा इसराइल का मानना है.

तेल अवीव में एक रिटायर्ड मेजर जनरल एमोस याल्दिन, जो इसराइल के रक्षा मंत्रालय में काम करते हैं, उन्होंने साक्षात्कार से पहले कहा था, “सबसे पहले तो, सात अक्टूबर के पहले के इसराइल के बारे में जो कुछ आप जानते थे, वो सब भूल जाइए.”

याल्दिन एक वेटरन फ़ाइटर पायलट थे, जो इसराइली मिलिटरी इंटेलिजेंस के प्रमुख के तौर पर रिटायर हुए.

हमने उनका साक्षात्कार लेने का फैसला किया ताकि इसराइल की युद्ध की रणनीति के बारे में एक तस्वीर मिल सके.

अंत में उन्होंने जो कुछ कहा था, वो उतना ही दिलचस्प था, जितना इसराइल की मनोदशा के बारे में कहा गया था.

ग़ज़ा बॉर्डर के पास इसराइली सैनिक.

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द्वितीय विश्व युद्ध से तुलना...

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मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

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याल्दिन ने हमास के ख़िलाफ़ इसराइल के युद्ध की तुलना बार बार द्वितीय विश्व युद्ध से की.

वो ग़ज़ा पट्टी में इसराइल द्वारा बड़ी संख्या में फ़लस्तीनी नागरिकों की हत्याओं को सही ठहरा रहे थे और तर्क दे रहे थे कि इसराइल के वजूद के लिए हमास का ख़ात्मा ज़रूरी है.

1945 में रॉयल एयर फ़ोर्स द्वारा जर्मनी के ड्रेस्डेन की तबाही का ज़िक्र करते हुए याल्दिन ने कहा, “आपने ड्रेस्डेन पर बमबारी की जिसमें एक लाख 20,000 लोग मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे थे. हम इस दुहरे नुकसान से बचने की कोशिश कर रहे हैं. हम उन्हें जाने को कहते हैं. हम उन्हें ग़ज़ा के दक्षिणी हिस्से की ओर जाने को कहते हैं.”

मैंने उन्हें याद दिलाया कि इसराल उन इलाकों पर बम बरसा रहा है जिसके बारे में उसने कहा था कि वहां फ़लस्तीनी सुरक्षित रहेंगे.

याल्दिन ने ज़ोर देकर कहा कि इसराइल हमास पर बमबारी कर रहा है, नागरिकों पर नहीं.

"नहीं, हमने उन पर बमबारी नहीं की. हमने हमास के ठिकानों पर बमबारी की. केवल हमास निशाना बनाता है और हमास उन्हें मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करता है."

उन्होंने अमेरिका में बाइडेन प्रशासन की उस आलोचना को ख़ारिज़ कर दिया जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि इसराइल ने 'बहुत अधिक' फ़लस्तीनी नागरिकों को मारा है.

उन्होंने कहा कि इसराइल नागरिक क्षति को कम करने को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन से अधिक सतर्क रहा है, जब उन्होंने सीरिया और इराक़ में जिहादी ग्रुपों पर बमबारी की थी.

इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान की जंग में शामिल रहे पूर्व जनरलों की ओर से उनकी इस व्याख्या की पुष्टि नहीं की गई है.

एक वरिष्ठ ब्रितानी अफ़सर ने मुझे बताया कि नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित करने के जंग के नियमों के प्रति इसराइल के तिरस्कार से वो बहुत दुखी थे.

उन्होंने कहा कि ब्रिटिश आर्मी में इसकी इजाज़त नहीं होगी.

दक्षिणी ग़ज़ा पट्टी के रफ़ाह में इसराइली बमबारी के बाद हुआ नुकसान.

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इसराइल को अभी और वक़्त चाहिए...

एमोस याल्दिन इसराइली सेना में अपने उत्तराधिकारियों को अभी भी सलाह देते हैं. याल्दिन का मानना है कि ग़ज़ा में अपने महत्वाकांक्षी मकसद को हासिल करने के लिए इसराइल को और अधिक समय की ज़रूरत है.

इसराइल अपने बंधकों को छुड़ाना चाहता है, हमास के नेताओं को मारना चाहता है और इसराइलियों के लिए ख़तरा पैदा करने वाले एक सैन्य संगठन के रूप में हमास का सफ़ाया करना चाहता है और शासन करने की उसकी क्षमता नष्ट कर देना चाहता है.

मैंने कहा कि हाल ही में युद्ध विराम के प्रस्ताव को हालांकि अमेरिका ने वीटो कर दिया है, तो क्या यह संकेत है कि इसराइल जो चाहता था उसे पूरा करने के लिए महीनों न सही, कुछ हफ़्ते बचे हैं.

याल्दिन ने कहा, “लक्ष्य हासिल करने के लिए ये पर्याप्त नहीं है. बाकी बचे बंधकों की वापसी के बिना अगर युद्ध विराम होता है तो, कोई युद्ध विराम नहीं होगा.”

इसराइल के पास बहुत ताक़तवर सेना है और अमेरिका का समर्थन भी हासिल है.

वो गहरे विश्वास के साथ मान रहा है कि हमास के सफ़ाए के लिए ग़ज़ा को तबाह करने के अलावा उसके पास कोई विकल्प नहीं है.

लेकिन जिस तरह उसने 18,000 से अधिक फ़लस्तीनियों को मार डाला, जिसमें शायद आधे बच्चे हैं, उसके सहयोगी और आलोचक हैरान हैं.

इसराइल को ये भी पता चल गया है कि जैसा अमेरिका और बाकियों ने भी चेताया था, एक ख़ास इलाक़े में दृढ़ प्रतिज्ञ और तैयार दुश्मन से लड़ना कठिन सैन्य कार्रवाईयों में से एक है.

हालांकि एमोस याल्दिन ने संकेत दिया कि आलोचनाओं के बीच इसराइली अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए आगे बढ़ते रहेंगे.

इसके बाद ग़ज़ा के पुनर्निर्माण और शासन का पेचीदा मुद्दा आता है.

याल्दिन ने कहा, "ग़ज़ा में इसराइल बहुत लंबे समय तक कब्जा नहीं रखेगा, लेकिन अगर निकट भविष्य में भी ग़ज़ा पट्टी को नियंत्रित करने का मौजूदा नेतृत्व का संकल्प नहीं बदलता है, तो कब्ज़ा तय दिखता है."

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