फ़्लाइट-93 की कहानी, विमान जो अमेरिकी संसद को तबाह करने वाला था- विवेचना

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- Author, रेहान फ़ज़ल
- पदनाम, बीबीसी हिंदी
फ़्लाइट-93 अपने निर्धारित समय से 40 मिनट लेट थी. यूनाइटेड एयरलाइंस का बोइंग 757 न्यूयॉर्क अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के रनवे पर खड़ा अपने टेक ऑफ़ का इंतज़ार कर रहा था.
अरब मूल के चार लोग फ़र्स्ट क्लास की छह कतारों में छितराए हुए बैठे हुए थे.
उन्होंने अपनी वापसी का टिकट नहीं खरीदा था.
एक रात पहले उन्होंने अरबी में लिखे एक दस्तावेज़ को पढ़ा था जिसमें उन्हें निर्देश दिया गया था कि वो हर लोभ से अपने-आप को अलग कर लें, संघर्ष के लिए खुद को मज़बूत करें और मरने के लिए अपनी शपथ फिर से दोहराते हुए खुदा को बार-बार याद करें.
टॉम मैकमिलन अपनी किताब ‘फ़्लाइट 93 द स्टोरी द आफ़्टरमाथ एंड द लेगेसी ऑफ़ अमेरिकन करेज’ में लिखते हैं, “इतनी बारीक तैयारी के बावजूद अल-क़ायदा ने इस बात की संभावना के बारे में सोचा नहीं था कि उड़ान में देर भी हो सकती है. उनकी ये योजना पहली बार 1996 में अफ़ग़ानिस्तान के पहाड़ों में बनाई गई थी और उसमें अगले कई सालों में बदलाव होते रहे थे.”
हाइजैकिंग के लिए जिन चार उड़ानों को चुना गया था वो सभी उस सुबह 7.45 से 8.10 के बीच टेक-ऑफ़ करने वाली थीं.
ये भी तय था कि विमान के टेकऑफ़ करने के 15 मिनट के अंदर हाइजैकिंग शुरू हो जाएगी.
अगर सब कुछ योजना के अनुसार समय से हुआ होता तो एक-एक करके चार विमान प्रमुख इमारतों से टकराते और अमेरिकी राजनेता, सैन्य नेतृत्व को सोचने तक का समय नहीं मिला होता.

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विमानों को कॉकपिट में घुसपैठ की चेतावनी दी गई
नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ़्टी बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार- ठीक 8 बजकर 41 मिनट 49 सेकेंड पर एयर ट्रैफ़िक कंट्रोलर ने फ़्लाइट 93 के कैप्टन जेसन डाल और फ़र्स्ट ऑफ़िसर लेरॉय होमर से कहा कि आप रनवे चार से टेकऑफ़ कर सकते हैं.
एक मिनट बाद फ़र्स्ट क्लास में बैठे ज़ियाद जर्राह, अहमद अल हज़नावी, अहमद अल नमी और सईद अल ग़मडी ने अपने-आप को मिशन के लिए तैयार किया. वो मंगलवार का दिन था. तारीख़ थी- 11 सितंबर, 2001.
अंतत: फ़्लाइट 93 हवा में थी. विमान तकरीबन खाली था. 182 यात्रियों की क्षमता वाले विमान में कुल 33 यात्री बैठे हुए थे.
ठीक आठ बज कर 40 मिनट पर एक विमान 500 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराया.
उसने गंगनचुंबी इमारत की 93वीं और 99वीं मंज़िल के बीच एक बड़ा छेद बना दिया.
जब 17 मिनट बाद नौ बज कर 3 मिनट पर एक दूसरे विमान ने दक्षिणी टावर को टक्कर मारी तब जाकर अमेरिकी प्रशासन को आभास हुआ कि अमेरिका पर हमला हो रहा है.
नौ बजकर 19 मिनट पर यूनाइटेड फ़्लाइट के डिस्पैचर एड बैलिंगर ने उस इलाके में उड़ रहे 16 विमानों को पहली चेतावनी जारी की, ‘कॉकपिट में घुसपैठ को लेकर सावधान रहिए. न्यूयॉर्क में दो विमान ट्रेड सेंटर इमारत से टकराए हैं.’
फ़्लाइट के रिकॉर्ड बताते हैं कि फ़्लाइट-93 को ये संदेश नौ बजकर 24 मिनट पर मिला. नौ बजकर 26 मिनट पर कैप्टन डाल ने बैलिंगर को जवाब दिया, ‘एड कन्फ़र्म लेटेस्ट मैसेज.’
इसके ठीक दो मिनट बाद नौ बज कर 28 मिनट पर फ़्लाइट-93 के कॉकपिट के दरवाज़े के बाहर शोर सुनाई दिया.

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एयर ट्रैफ़िक कंट्रोलर को सुनाई दी आवाज़
सिर पर लाल स्कार्फ़ बाँधे चारों हाइजैकर्स तेज़ी से अपनी सीटों से उठे. उन्होंने नौ बजकर 28 मिनट पर कॉकपिट में प्रवेश किया. इसका सबसे बड़ा सबूत था कि ठीक उसी समय जहाज़ 30 सेकेंड के अंदर 680 फ़ीट नीचे चला आया.
उसी समय क्लीवलैंड के एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल को आवाज़ सुनाई दी, ‘मे डे....गेट आउट ऑफ़ हियर.’ 30 सेकेंड बाद फिर वही वाक्य तीन बार सुनाई दिया, ‘गेट आउट ऑफ़ हियर.’
पृष्ठभूमि में संघर्ष की दबी-दबी आवाज़ भी आ रही थी. हो सकता है कि डाल या होमर ने जानबूझ कर माइक्रोफ़ोन का बटन दबा रखा हो ताकि ज़मीन पर मौजूद लोगों को पता चल सके कि कॉकपिट में क्या हो रहा है.
मिचेल ज़ुकौफ़ अपनी किताब ‘फ़ॉल एंड राइज़ द स्टोरी ऑफ़ 9/11’ में लिखते हैं, ‘अगले 90 सेकेंड में क्लीवलैंड एयर ट्रैफ़िक कंट्रोलर के जॉन वर्थ ने विमान से संपर्क करने के सात प्रयास किए लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया. थोड़ी देर में उन्हें इसका कारण पता चल गया.'
नौ बजकर 31 मिनट पर एक अनजान शख़्स ने तेज़ साँसे लेते हुए एक अजीब से लहजे में बोलना शुरू किया.
ये संदेश विमान में बैठे यात्रियों के लिए था लेकिन सुनाई पड़ा एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल वालों को.
संदेश था, ‘लेडीज़ एंड जेंटलमेन. हियर द कैप्टन. प्लीज़ सिट डाउन. कीप रिमेन सीटेड. वी हैव अ बॉम्ब.’
ज़ियाद जर्राह का फ़्लाइट 93 पर नियंत्रण हो चुका था.

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अनाड़ियों की तरह विमान नीचे लाना शुरू किया
अब जर्राह ने फ़्लाइट 93 को वॉशिंगटन की दिशा में मोड़ दिया. वो नौ बजकर 39 मिनट पर विमान को 40 हज़ार फ़ीट की ऊँचाई पर ले गया. उसके बाद उसने अनाड़ियों की तरह विमान को नीचे लाना शुरू किया.
इससे पहले नौ बजकर 33 मिनट पर कॉकपिट में मौजूद एक महिला की आवाज़ सुनाई दी- प्लीज़, प्लीज़, प्लीज़.... प्लीज़, प्लीज़ डोंट हर्ट मी.... ओह गॉड.
जाँचकर्ताओं का मानना है कि संभवत: ये आवाज़ फॉर्स्ट क्लास की महिला क्रू मेंबर डेबी वेल्श या वाँडा ग्रीन की थी. सबसे मान्य थ्योरी ये ही कि 9/11 के सभी चार विमानों के हमले महिला क्रू मेंबर के साथ हिंसा से शुरू हुए थे.
नौ बजकर 35 मिनट पर एक महिला की आवाज़ फिर सुनाई दी जो कह रही थी, ‘आई डोंट वॉन्ट टु डाई.’ वायस रिकॉर्डर के ट्रांसस्क्रिप्ट के अनुसार नौ बजकर 37 मिनट पर कॉकपिट के अंदर सारा प्रतिरोध समाप्त हो चुका था. एक हाइजैकर संभवत ग़मडी अल सईद की आवाज़ सुनाई दी थी, ‘एवरीथिंग इज़ फ़ाइन. आई फ़िनिश्ड.'
इसके बाद महिला क्रू मेंबर की कोई आवाज़ सुनाई नहीं दी थी. बहुत संभावना है कि तब तक उसे मारा जा चुका था.

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नीचे फ़ोन कर अपने रिश्तेदारों से संपर्क किया
नौ बजकर 39 मिनट पर जर्राह ने उद्घोषणा करने की दूसरी कोशिश की.
इस बार उसकी आवाज़ पहले से ज़्यादा नियंत्रित और सधी हुई थी. ये घोषणा भी एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल को सुनाई दी, ‘हियर इज़ कैप्टेन. आई वुड लाइक यू ऑल टु रिमेन सीटेड. वी हैव अ बॉम्ब अबोर्ड एंड वी आर गोइंग बैक टु द एयरपोर्ट एंड वी हैव अवर डिमांड्स. सो प्लीज़ रिमेन क्वाएट.’
यूनाइटेड एयरलाइंस के विमान में यात्रियों और क्रू को एक ख़ास तकनीक वाली ‘वेरीज़ोन’ एयरफ़ोन के ज़रिए हवा से ज़मीन पर बात करने की सुविधा दी गई थी.
विमान हाइजैक होने के 30 मिनटों के अंदर उस पर सवार 12 यात्रियों ने 23वीं और 34वीं पंक्ति के बीच लगे हुए एयरफ़ोन से 35 बार ज़मीन पर कॉल मिलाए थे. इनमें से 20 कॉल्स तुरंत डिसकनेक्ट हो गई थी लेकिन 15 कॉल्स पर नीचे बात हुई थी.
इन कॉल्स से बहुत कुछ संकेत मिले कि फ़्लाइट-93 में उस समय क्या कुछ हो रहा था. सबसे पहले नौ बजकर 30 मिनट पर टॉम बर्नेट ने कैलिफ़ोर्निया में अपनी पत्नी डीना को फ़ोन मिलाया.
अपनी किताब ‘द ओनली प्लेन इन द स्काई’ में गैरेट एम ग्राफ़ लिखते हैं, ‘डीना ने पूछा, ‘टॉम तुम ठीक तो हो’ ? टॉम ने जवाब दिया, ‘नहीं मैं ठीक नहीं हूँ. मैं उस विमान मे हूँ जिसे हाइजैक कर लिया गया है. हाइजैकर्स ने एक व्यक्ति को छुरा भोंक दिया है और अब हमसे कह रहे हैं कि विमान में बम रखा हुआ है. तुम प्रशासन को इसके बारे में सूचित करो.’

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यात्रियों को विमान के पिछले हिस्से में ले जाया गया
विमान की महिला क्रू मेंबर (परिचारिका) सैंडी ब्रैडशॉ ने सबसे पहले इसकी सूचना यूनाइटेड एयरलाइंस को दी. उन्होंने नौ बजकर 35 मिनट पर 33वीं पंक्ति से सैन फ़्राँसिस्को के मेन्टेनेंस कार्यालय में फ़ोन मिलाकर प्रबंधक से कहा, ‘हमलावरों ने कॉकपिट पर कब्ज़ा कर लिया है. बाकी सारे यात्रियों को विमान के पिछले हिस्से में ले आया गया है.’
सैंडी छह मिनट तक लाइन पर रहीं. मैनेजर के अनुसार उनकी आवाज़ आश्चर्यजनक रूप से बहुत संयत थी.
टॉम मैकमिलन लिखते हैं, ‘इस बीच मार्क बिंगम ने अपनी माँ को फ़ोन मिलाया- मैं मार्क बिंघम बोल रहा हूँ. वो शायद इतने दबाव में थे कि उन्होंने अपना पूरा नाम लिया. उन्होंने कहा, ‘मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ. मैं इस समय सैन फ़्राँसिस्को जाने वाले विमान पर सवार हूँ. तीन लोगों ने विमान पर कब्ज़ा कर लिया है. उनका कहना है कि उनके पास बम है.’
उनकी माँ एलिस ने उनसे पूछा, मार्क वो कौन लोग हैं ? बिंगम ने इस प्रश्न का जवाब नहीं दिया, बल्कि कहा कि आपको मुझ पर विश्वास करना चाहिए. जो कुछ मैं कह रहा हूँ बिल्कुल सही है.’

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विमानों को तुरंत उतरने के लिए कहा गया
उधर जैसे ही क्लीवलैंड एयर ट्रैफ़िक ने ज़ियाद जर्राह की उदघोषणा सुनी, उसने फ़ौरन प्रतिक्रिया दी, ‘ओके, दैट्स यूनाइटेड 93 कॉलिंग. अंडरस्टैंड यू हैव अ बॉम्ब ऑन बोर्ड. गो अहैड. यूनाइटेड 93 गो अहैड.’ लेकिन कॉकपिट से उनके पास कोई जवाब नहीं आया.
इस बीच एयर कंट्रोलर जॉन वर्थ के लिए सबसे बड़ी चुनौती उस समय उठ खड़ी हुई जब नौ बजकर 42 मिनट पर फ़ेडेरल अविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने अमेरिकी वायु क्षेत्र में उड़ रहे सभी असैनिक विमानों को नज़दीक के हवाईअड्डों पर उतरने का आदेश दिया.
सभी विमान आनन-फानन में नीचे उतरने लगे लेकिन ओहायो के ऊपर उड़ रही फ़्लाइट 93 पर इसका कोई असर नहीं हुआ. उसने वॉशिंगटन डीसी की तरफ़ उड़ना जारी रखा.
अमेरीकियों को अब तक अंदाज़ा लग चुका था कि फ़्लाइट 93 या तो व्हाइट हाउस की तरफ़ बढ़ रही है या कैपिटल हिल की तरफ़.
मिचेल ज़ुकोफ़ लिखते हैं, ‘कैपिटल हिल में एक पुलिस अफ़सर हॉल में चिल्लाते हुए दौड़ा, ‘एक जहाज़ आ रहा है. बाहर निकलिए.’
ये सुनकर महिलाएं नंगे पैर बाहर दौड़ीं. ख़तरे का सायरन बजने लगा. कांग्रेस के कुछ सदस्य पेड़ के नीचे जमा होने शुरू हो गए. हथियारों से लैस पुलिस अफ़सरों ने अमेरिकी सीनेट के नेताओं को शीत युद्ध के ज़माने में बनाए गए बंकरों में पहुंचाया.

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प्रतिरोध की योजना
इस बीच विमान 40 हज़ार फ़ीट की ऊँचाई से उतरकर 20 हज़ार फ़ीट की ऊँचाई पर आ गया था.
साफ़ जाहिर था कि ज़ियाद जर्राह को उसे उड़ाने में दिक्कत पेश आ रही थी. जर्राह 9/11के हाइजैकर्स में वाहिद शख़्स था जिसके पास पायलट का कमर्शियल लाइसेंस नहीं था और उसने बाकी लोगों की तुलना में विमान उड़ाने की ट्रेनिंग लेने में कम समय लगाया था.
इस बीच यात्रियों के बीच हाइजैकर्स का प्रतिरोध करने की योजना बनने लगी थी.
टॉम मैकमिलन लिखते हैं, ‘टॉम बर्नेट ने अपनी पत्नी डीना को फ़ोन पर बताया कि वो कुछ करने की योजना बना रहे हैं. डीना ने पूछा कौन आपकी मदद कर रहा है ? टॉम ने कहा, कई लोग. हमारा एक समूह है. एक दूसरे यात्री टेरेमी ग्लिक ने कहा- ‘हम आपस में वोट कर रहे हैं. मेरे जैसे तीन लहीम-शहीम लोग इस समय विमान में हैं. हम बम वाले शख़्स पर हमला करने के बारे में सोच रहे हैं.’
उसने ये भी बताया कि वो हथियार के रूप में किसका इस्तेमाल करेगा. ‘मेरे पास अभी भी नाश्ते के साथ आया बटर नाइफ़ है.’ टॉड बीमर ने भी लिज़ा जैफ़रसन को बताया, ‘हम कुछ करने जा रहे हैं. हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा है.’’

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'लेट्स रोल'
9 बज कर 53 मिनट पर ज़ियाद जर्राह और सईद अल ग़मडी को पहली बार अहसास हुआ कि विमान में सवार यात्री विद्रोह भी कर सकते हैं.
कॉकपिट के बाहर खड़े अहमद अल हज़नवी और अहमद अल नमी उन्हें बता चुके थे कि किस तरह यात्री लगातार फ़ोन कर रहे हैं, उनके बीच बैठकें हो रही हैं और वो हमें घूर घूर कर देख रहे हैं.
जर्राह को मालूम था कि उसे अपने लक्ष्य तक पहुंचने में अभी आधा घंटा और लगेगा.
टॉम मैकमिलन लिखते हैं, ‘विद्रोह करने वाले यात्री विमान के बीच में इकट्ठा हुए. विमान परिचारिका सैंडी ब्रैडशॉ विमान के पिछले हिस्से में पानी गर्म कर रही थीं ताकि उसे हाइजैकर्स पर फेंका जा सके. कुछ जाँचकर्ताओं का मानना है कि कि वो लोग खाने की ट्रॉली को कॉकपिट पर ज़ोर से टकराने के बारे में भी सोच रहे थे.
जब टॉम बर्नेट की पत्नी ने उनसे पूछा क्या आप लोग हमला करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. बर्नेट का जवाब था, यस लेट्स रोल.’

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यात्रियों का कॉकपिट पर धावा
यात्रियों का हमला ठीक नौ बज कर 57 पर शुरू हुआ. उड्डयन इतिहास में इससे पहले कभी भी उड़ान के बीच बिना हथियार के यात्रियों ने हाइजैकर्स पर इस तरह का हमला नहीं बोला था.
गैरेट एम ग्राफ़ लिखते हैं, ‘उस समय एलिज़ाबेथ वैनियो अपनी सौतेली माँ के साथ फ़ोन लाइन पर थीं. उन्होंने कहा, ‘ये लोग कॉकपिट में घुसने के लिए तैयार हो रहे हैं. मुझे भी जाना चाहिए. मैं आपसे प्यार करती हूँ. गुड बाई.’
उसी समय सैंडी ब्रेडशॉ ने भी अपने पति से कहा, ‘हर कोई फ़र्स्ट क्लास की तरफ़ जा रहा है. मुझे भी वहाँ जाना है. बाय.’
इस तरह 757 विमान के 20 इंच संकरे गलियारे से गुज़रते हुए उन यात्रियों ने कॉकपिट पर हमला बोल दिया. विमान उड़ा रहे जर्राह ओर उसके साथी ग़मडी को इन लोगों की आवाज़ें सुनाई पड़ीं. उन दोनों को विमान उड़ाने में ही कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था.
इन आवाज़ों ने उन्हें और विचलित कर दिया. वॉयस रिकॉर्डर की ट्रांसस्क्रिप्ट कहती है, नौ बज कर 57 पर जर्राह ने चिल्लाकर पूछा, ‘क्या है वहाँ?'
तभी पीछे से लड़ाई की आवाज़ सुनाई दी.
उसने विमान के योक को दाएं से बाएं घुमाना शुरू कर दिया ताकि यात्रियों का संतुलन बिगड़ जाए. तभी एक यात्री बर्नेट की ज़ोरदार आवाज़ सुनाई दी, ‘कॉकपिट में ! कॉकपिट में!’ इस पर जर्राह ने अरबी में कहा, ‘वो कॉकपिट में घुसना चाहते हैं. दरवाज़े को अंदर से दबाए रखो.’
जर्राह ने विमान के विंग्स को हिलाना जारी रखा. तब तक विमान पाँच हज़ार फ़ीट नीचे तक आ गया था.
नौ बज कर 59 मिनट पर जर्राह ने अपनी रणनीति बदल दी. वो विमान की नोज़ को ऊपर नीचे करने लगा. 10 बजे के आसपास जब यात्रियों का हमला तेज़ हो गया, कॉकपिट में मौजूद हाइजैकरों ने जहाज़ को क्रैश कराने के बारे में बात की.
जर्राह ने कहा, ‘क्या अब ख़त्म करें ?’ ग़मडी का जवाब था, ‘नहीं अभी नहीं. वो जब सब अंदर आ जाएंगे तब हम ख़्त्म करेंगे.’
फ़्लाइट-93 एक बार फिर नीचे की तरफ़ आई. अभी तक यात्री कॉकपिट के अंदर नहीं घुस पाए थे और विमान पर अब भी जर्राह का नियंत्रण था. लेकिन तब तक जर्राह को हालात की गंभीरता का अंदाज़ा हो चुका था.
उसने पहली बार ग़मडी का नाम लेकर उसे संबोधित किया. ‘ऊपर, नीचे सईद, ऊपर नीचे.’ पाँच सेकेंड बाद एक यात्री चिल्लाया, ‘रोल इट’.
शायद उसका मतलब खाने की ट्रॉली से था क्योंकि इसके बाद प्लेटों और गिलासों के गिर कर टूटने की आवाज़ सुनाई दी.

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फ़्लाइट-93 क्रैश
10 बज कर एक मिनट पर विमान फिर ऊपर जाने लगा.
टॉम मैकमिलन लिखते हैं- तभी जर्राह ने कहा, ‘क्या वक्त आ पहुंचा है ? क्या हम इसे गिरा दें?’ ग़मडी ने कहा, ‘ठीक है. ऐसा ही करते हैं.’
फिर अचानक लोगों की और चीख़ सुनाई दी. तभी हाइजैकर्स को लगा कि अगर वो विमान को उड़ाना जारी रखते हैं तो बहुत जल्द ही यात्री उन पर क़ाबू पा लेंगे. मजबूर होकर जर्राह चिल्लाया, ‘सईद, ऑक्सीजन काटो.’
उधर यात्री जोर ज़ोर से चिल्ला रहे थे ‘गो गो… मूव मूव.’
तभी यात्री कॉकपिट का दरवाज़ा तोड़ने में कामयाब हो गए. जर्राह अरबी में चिल्लाया. ‘नीचे गिराओ. नीचे गिराओ.’ कुछ सेकेंड बाद बाद ग़मडी की आवाज़ सुनाई दी, ‘मुझे दो, मुझे दो.’
तब तक यात्री कॉकपिट में पहुंचकर जर्राह की पिटाई करने लगे थे. संभवत: ग़मडी जहाज़ का नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहा था. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.’

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विमान पेंसेल्वेनिया की सोमरसेट काउंटी में बिल्कुल नीचे आ चुका था. 563 मील प्रति घंटे की गति से उड़ते हुए 40 डिग्री का कोण बनाते हुए बोइंग 757 विमान ने नोज़ डाइव किया और बिजली के तारों को तोड़ता हुआ धरती से जा टकराया.
उस समय उसके अंदर करीब पाँच हज़ार गैलन जेट ईंधन भरा हुआ था. धरती से टकराते ही विमान के टुकड़े-टुकड़े हो गए और उसे आग की लपटों ने घेर लिया. उस समय घड़ी में समय था 10 बज कर 3 मिनट.
अमेरिकी की राजधानी वॉशिंगटन डीसी अब भी वहाँ से 15 मिनट की दूरी पर थी.

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