एशियन गेम्स में उन महिला खिलाड़ियों की कहानी, जिन्होंने भारत के प्रदर्शन में लगाए हैं चार चाँद

सिफ़त कौर समरा

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इमेज कैप्शन, शूटर सिफ़त कौर समरा के पिता एक किसान हैं. वे पंजाब की रहने वाली हैं.
    • Author, सुशीला सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

चीन के हांगजो शहर में चल रहे 19वें एशियन गेम्स में 655 भारतीय खिलाड़ी भाग ले रहे हैं.

अब तक हुए मुक़ाबलों में भारत 60 से ज़्यादा पदक जीत चुका है.

हालाँकि पदक तालिका में चीन पहले ,कोरिया दूसरे और जापान तीसरे स्थान पर है.

एशियन गेम्स में भारत के प्रदर्शन में महिला खिलाड़ियों ने भी बड़ी भूमिका निभाई है.

आइए जानते हैं कुछ महिला खिलाड़ियों के बारे में, जिन्होंने अपने प्रदर्शन से भारत का मान बढ़ाया है.

सिफ़त कौर समरा

पंजाब के फ़रीदकोट से आने वाली 21 साल की सिफ़्त कौर समरा ने निशानेबाज़ी के 50 मीटर थ्री पोजिशन राइफ़ल की व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल किया है.

ये उनका सातवाँ अंतरराष्ट्रीय मेडल है और वो राज्य और राष्ट्रीय स्तर हुई राइफ़ल प्रतियोगिताओं में भी कई मेडल जीत चुकी हैं.

उनके पिता एक किसान हैं.

उन्होंने बीबीसी से बातचीत में बताया था, "जब मैंने मेडल जीतने शुरू किए मेरी खेल के प्रति एकाग्रता और प्रतिबद्धता बढ़ती चली गई."

वे एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी लेकिन मीडिया में छपी जानकारी के मुताबिक़ पढ़ाई के साथ साथ उनके लिए शूटिंग का अभ्यास करने में परेशानी हो रही थी.

इसके बाद उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने का फ़ैसला किया था.

नेहा ठाकुर

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इमेज कैप्शन, नेहा ठाकुर ने सेलिंग में सिल्वर मेडल जीता है.

नेहा ठाकुर

एशियन गेम्स के महिला नौकायन स्पर्धा (सेलिंग) में भारत को सिल्वर मेडल जीताने वाली नेहा ठाकुर मध्यप्रदेश के देवास ज़िले के छोटे से गांव से आती हैं.

उनके पिता किसान है और उन्होंने भोपाल के नेशनल सेलिंग स्कूल से प्रशिक्षण लिया है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया पर छपी जानकारी के मुताबिक़ नेहा ठाकुर ने अपनी जीत के लिए सरकार और कोच के समर्थन के लिए धन्यवाद किया और कहा कि उनका सपना था कि एशियन गेम्स में वे भारत का प्रतिनिधित्व करें.

उनके अनुसार, ''मुझे ख़ुशी है कि मैंने सिल्वर मेडल जीता और उसके पीछे कई लोगों का हाथ है. अगली बार मैं गोल्ड लाने की कोशिश करूँगी.""

नेहा ठाकुर के कोच नरेंद्र सिंह राजपूत ने बताया, ''एक सेलर के सारे गुण नेहा में हैं - प्रतिबद्धता, कड़ी मेहनत और संयम इसलिए वो यहाँ तक पहुँच पाई.''

पलक गुलिया

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इमेज कैप्शन, पलक गुलिया ने शूटिंग में गोल्ड मेडल जीता है.

पलक गुलिया

शूटिंग में दो भारतीय युवा शूटरों पलक गुलिया और ईशा सिंह ने 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में पदक जीतकर कमाल कर दिखाया है. इन दोनों ने न केवल एकल मुकाबले में मेडल हासिल किया बल्कि टीम प्रतियोगिताओं में भी जीत हासिल की है.

पलक गुलिया और ईशा सिंह की जीत पर राष्ट्रपति दौपदी मुर्मू ने भी दोनों को बधाई दी थी.

10 मीटर एयर पिस्टल मुकाबले में गोल्ड मेडल जीतने के बाद इंडिया टुडे से एक साक्षात्कार में पलक ने कहा कि 2019 तक उन्हें शूटिंग गेम के बारे में कोई जानकारी नहीं थी

हरियाणा के गुरुग्राम में रहने वाली पलक गुलिया का कहना था, ''कोविड ख़त्म होने के बाद उन्होंने नेशनल के लिए तैयारी की और फिर एशियन गेम्स आ गए. लेकिन अगले कुछ महीने बहुत अहम है क्योंकि छह से आठ महीने प्री ओलंपिक पीरियड है और मैं इसमें बहुत मेहनत करूँगी.''

ईशा सिंह

ईशा सिंह

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इमेज कैप्शन, ईशा सिंह अब तक एशियन गेम्स में चार मेडल जीत चुकी हैं.

एशियन गेम्स में ईशा सिंह ने दो पदक जीते. 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में गोल्ड और 25 मीटर एयर पिस्टल प्रतियोगिता में सिल्वर.

वो टीम प्रतियोगिता में दो सिल्वर मेडल अपने नाम कर चुकी हैं.

तेलंगाना की रहने वाली ईशा सिंह ने नौ साल की उम्र से ही निशानेबाज़ी की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी थी.

बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, ''पिस्टल की गोली की आवाज़ उनके कानों में किसी संगीत की तरह लगती है और इस खेल में जिस हिम्मत की ज़रूरत होती है, उससे उन्हें प्यार था.''

उन्होंने 2014 में पहली बार बंदूक थामी थी और साल 2018 में उन्होंने नेशनल शूटिंग चैम्पियनशिप का ख़िताब जीत लिया था.

महज़ 13 साल की उम्र में उन्होंने मनु भाकर और हिना सिद्धू जैसे अंतरराष्ट्रीय मेडल विजेताओं को मात दी. साथ ही उन्होंने यूथ, जूनियर और सीनियर कैटेगरी में तीन गोल्ड मेडल जीते.

वे अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में शिरकत कर चुकी हैं और जूनियर वर्ल्ड कप में सिल्वर और एशियाई शूटिंग चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी है.

रोशिबिना देवी

नाओरेम रोशिबिना देवी

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इमेज कैप्शन, नाओरेम रोशिबिना देवी मणिपुर की रहने वाली हैं और मेडल जीतने के बाद वे काफ़ी भावुक हो गईं.

वुशु में सिल्वर मेडल जीतने वाली मणिपुर की नाओरेम रोशिबिना देवी मीडिया से बातचीत में अपने आंसू रोक नहीं पाईं.

उन्होंने सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क से बातचीत में कहा, '' हाँ. अभी मैं नहीं जानती कि हमारा क्या होगा. अभी पूरा डर बैठा हुआ है. काश सब सामान्य हो जाए और जो था उससे सब कुछ बेहतर हो जाए और हम शांतिपूर्वक रह सकें. सब कुछ ऐसे जलते देख अच्छा नहीं लगता है.''

22 साल की रोशिबिना देवी इससे पहले इंडोनेशिया में साल 2018 में हुए एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीत चुकी हैं.

ज्योति यर्राजी

ज्योति यर्राजी

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इमेज कैप्शन, ज्योति यर्राजी एक विवाद का सामना करना पड़ा लेकिन सिल्वर मेडल जीतने में वो कामयाब रहीं.

विशाखापट्टनम की रहने वाली ज्योति यर्राजी महिलाओं की 100 मीटर बाधा दौड़ में एक विवाद के बाद सिल्वर अपनी झोली में डालने में कामयाब रही.

हालांकि ज्योति ने मुक़ाबले के बाद कहा कि विवाद के कारण उन्हें मानसिक तौर पर परेशानी हुई और इसका असर उनके प्रदर्शन पर भी पड़ा.

दरअसल विवाद चीन की खिलाड़ी यानी वू को लेकर हुआ था, लेकिन इसमें भारत की खिलाड़ी ज्योति यर्राजी भी फँस गईं.

पहले अधिकारियों को ये लगा कि चीन की यानी वू और भारत की ज्योति दोनों ने ग़लत शुरुआत की और एक बार ऐसा लगा कि दोनों को अयोग्य करार दे दिया जाएगा.

लेकिन दोनों खिलाड़ियों ने अपना विरोध जताया और भारतीय अधिकारियों ने भी इस मामले में अपना विरोध दर्ज कराया.

दौड़ में ज्योति तीसरे नंबर पर आईं, लेकिन बाद में चीन की खिलाड़ी को अयोग्य करार दिया गया और ज्योति को सिल्वर मेडल मिल गया.

हरमिलन बैंस

हरमिलन बैंस

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इमेज कैप्शन, हरमिलन बैंस एक एथलिट्स के परिवार से आती हैं.

हरमिलन बैंस ने 1500 मीटर में अपना सिल्वर मेडल एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया और साई को समर्थित करते हुए उनकी मदद के लिए आभार व्यक्त किया.

दअरसल हरमिलन बैंस साल 2017 में चोटिल हो गईं थी जिसके बाद उनकी सर्जरी हुई थी.

ख़बरों के मुताबिक़ उन्होंने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपयनशिप में भाग लेने से इनकार कर दिया था.

लेकिन फिर उन्होंने तैयारियां की और फेडरेशन और साई का रिकवरी के बाद मिलने वाली सुविधाओं में मदद देने के लिए धन्यवाद दिया.

हरमिलन बैंस एथलिट्स के परिवार से आती हैं.

पंजाब के होशियारपुर से आने वाली हरमिलन बैंस के पिता अमनदीप बैंस नेशनल चैंपियन और 1500 मीटर इवेंट में पदक विजेता है तो उनकी मां माधुरी साल 2002 में हुए एशियन गेम्स में 800 मीटर इवेंट में सिल्वर मेडल जीत चुकी है.

रांची में अंडर 18 की हुई 800 मीटर और 1500 मीटर प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीतने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने का उनका सिलसिला 2016 में शुरू हुआ जब उन्होंने वियतनाम में हुए एशियन जूनियर चैंपियनशिप में हुई 1500 मीटर प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता.

अदिति अशोक

अदिति अशोक

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इमेज कैप्शन, गोल्फ़ में पुरुषों का वर्चस्व रहा है लेकिन मेडल जीतकर अदिति अशोक ने ऐसी धारणा को तोड़ दिया है.

अदिति अशोक ने एशियन गेम्स में गोल्फ में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया.

गोल्फ में अब तक पुरुषों का ही वर्चस्व रहा है. एशियन गेम्स में गोल्फ में जीतने वाली अदिति अशोक पहली भारतीय महिला हैं.

साक्षात्कार में इस युवा गोल्फर ने उम्मीद जताई कि हांगज़ो में उनका अनुभव पेरिस में 2024 में होने वाले ओलंपिक में मेडल लाने में मदद करेगा.

अदिति अशोक बेंगलुरू से आती हैं और पांच साल की उम्र में वे गोल्फ से आकर्षित हो गईं थी.

उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में चौथा स्थान हासिल किया था.

निख़त ज़रीन

निख़त ज़रीन

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इमेज कैप्शन, बॉक्सर निख़त ज़रीन ने 50 किलो वर्ग बॉक्सिंग में कांस्य पदक हासिल किया है.

भारत की स्टार बॉक्सर निख़त ज़रीन ने 50 किलो वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया है.

इससे पहले दिल्ली में हुई वीमेंस वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के 50 किलो वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया था.

इसी साल फरवरी महीने में हुए बीबीसी के 'इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर' पुरस्कार की एक दावेदार निख़त ज़रीन भी थीं.

उन्होंने पिछले साल इस्तांबुल में विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था.

निज़ामाबाद से आने वाली निख़त ज़रीन का मुख्य सपना ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है.

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