अयोध्या की मिल्कीपुर सीट समाजवादी पार्टी और बीजेपी के लिए क्यों बन गई है प्रतिष्ठा की लड़ाई

योगी और अखिलेश यादव

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इमेज कैप्शन, उत्तर प्रदेश की मिल्कीपुर विधानसभा उप चुनाव के लिए मतदान दिल्ली विधानसभा चुनावों के साथ ही होंगे.
    • Author, सैयद मोज़िज़ इमाम
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ से

दिल्ली विधानसभा चुनाव की चर्चाओं के बीच उत्तर प्रदेश की मिल्कीपुर विधानसभा सीट सुर्ख़ियों में है.

उत्तर प्रदेश में अयोध्या ज़िले में आने वाली ये सीट भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के लिए प्रतिष्ठा की सीट बन गई है.

पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में मिल्कीपुर से विधायक रहे अवधेश प्रसाद फ़ैज़ाबाद से जीत गए थे. इस कारण ये सीट ख़ाली हो गई थी.

अब यहाँ उपचुनाव हो रहे हैं. दिल्ली के साथ ही यहाँ भी पाँच फ़रवरी को मतदान है.

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मिल्कीपुर
इमेज कैप्शन, मिल्कीपुर से सपा के अवधेश प्रसाद विधायक थे और संसाद बनने के बाद यह सीट खाली हुई.
वीडियो कैप्शन, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का एक साल, किन मुश्किलों से गुज़र रहे हैं कुछ आम लोग

अवधेश प्रसाद ने अयोध्या की फ़ैज़ाबाद लोकसभा सीट से बीजेपी के लल्लू सिंह को हराया था. लल्लू सिंह लगातार दो बार वहाँ से सांसद रहे थे.

उनकी इस जीत की राष्ट्रीय स्तर पर ख़ूब चर्चा हुई थी.

पिछले साल जनवरी में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी. बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में इसे ख़ूब भुनाया भी था.

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लेकिन अयोध्या की फ़ैज़ाबाद सीट से मिली हार से बीजेपी को बड़ा झटका लगा था.

विपक्षी इंडिया गठबंधन ने इस जीत को संविधान की जीत कहा था. लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने तो सदन में उन्हें अपने साथ बैठाया और अपने संबोधनों में कई बार उनकी जीत का ज़िक्र भी किया.

अब बीजेपी मिल्कीपुर उपचुनाव में जीत हासिल कर लोकसभा चुनाव में मिली हार को पीछे छोड़ना चाहती है.

इसी कारण बीजेपी की ओर से मिल्कीपुर उपचुनाव की कमान ख़ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभाल रखी है. बीजेपी की ओर से कई मंत्री भी मैदान में डटे हुए हैं.

प्रतिष्ठा की इस सीट पर बने समीकरण ने इस उपचुनाव को और दिलचस्प बना दिया है.

वर्ष 2009 के बाद से मिल्कीपुर सुरक्षित सीट है लेकिन बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) इस चुनाव से बाहर है. बीएसपी ने किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं किया है.

वहीं कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया है. इसके बावजूद मिल्कीपुर में सीधा मुक़ाबला नहीं है.

दरअसल चंद्रशेखर आज़ाद की आज़ाद समाज पार्टी के उम्मीदवार के आने से यहाँ पर मुक़ाबला त्रिकोणीय हो गया है.

पर्चा वापसी के बाद मिल्कीपुर उपचुनाव में कुल 10 उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें प्रमुख हैं समाजवादी पार्टी से अवधेश प्रसाद के पुत्र अजीत प्रसाद, बीजेपी से चंद्रभानु पासवान और आज़ाद समाज पार्टी के सूरज चौधरी उर्फ़ संतोष कुमार.

त्रिकोणीय मुक़ाबला

समाजवादी पार्टी उम्मीदवार अजीत प्रसाद, बीजेपी के उम्मीदवार चंद्रभानु प्रसाद और आज़ाद समाज पार्टी के उम्मीदवार संतोष कुमार.
इमेज कैप्शन, समाजवादी पार्टी उम्मीदवार अजीत प्रसाद, बीजेपी के उम्मीदवार चंद्रभानु प्रसाद और आज़ाद समाज पार्टी के उम्मीदवार सूरज चौधरी उर्फ़ संतोष कुमार.

मिल्कीपुर की सीट परंपरागत रूप से समाजवादी पार्टी का गढ़ रही है. एक समय मिल्कीपुर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से सांसद और बाद में समाजवादी पार्टी के नेता बने मित्रसेन यादव का अभेद्य क़िला था.

2012 और 2022 में जब अवधेश प्रसाद यहाँ से विधायक बने, तो उन्हें इस विरासत का फ़ायदा मिला. अवधेश प्रसाद की इस इलाक़े में गहरी पैठ मानी जाती है.

वे छह बार उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. इस बार इस सीट से समाजवादी पार्टी ने उनके बेटे अजीत प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है.

बीबीसी से बातचीत में अजीत प्रसाद ने कहा कि वो राजनीति में कई साल से सक्रिय हैं और 2017 में जगदीशपुर से चुनाव भी लड़ने वाले थे.

उन्होंने कहा, "ये बात सही है कि उनके पिता सांसद हैं और उनके कामकाज़ का भी असर इस चुनाव में रहेगा."

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के स्थानीय पत्रकार अरशद अफ़ज़ाल ख़ान का कहना है कि इस सीट पर अवधेश प्रसाद की पकड़ मज़बूत है लेकिन बीजेपी ने उम्मीदवार बदलकर कड़ी चुनौती पेश की है.

सवाल ये है कि क्या बीएसपी के मैदान में न होने से किसको फ़ायदा मिलेगा?

बीजेपी ने अवधेश प्रसाद के पुत्र अजीत प्रसाद के सामने पासी बिरादरी से आने वाले चंद्रभानु प्रसाद को खड़ा किया है.

अरशद अफ़ज़ाल ख़ान कहते हैं कि बीएसपी के न होने से समीकरणों पर ख़ास असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि ये सीट सुरक्षित है. जितने भी उम्मीदवार हैं, सभी आरक्षित श्रेणी के हैं.

हालाँकि बीजेपी के उम्मीदवार रूदौली विधानसभा के रहने वाले हैं.

लेकिन आज़ाद समाज पार्टी से चुनावी मैदान में उतरे संतोष कुमार यहाँ के लोगों के लिए अजनबी नहीं हैं. एक वक़्त वो अवधेश प्रसाद के ही क़रीबी थे.

अवधेश प्रसाद

इस सीट पर समाजवादी पार्टी ने भी पूरी ताक़त झोंक दी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव यहाँ बड़ी सभा करने वाले हैं, तो उनकी पत्नी और सांसद डिंपल यादव यहाँ रोड शो करने वाली हैं.

बीबीसी हिंदी से बातचीत में अवधेश प्रसाद ने कहा कि ये चुनाव पीडीए का चुनाव है.

उन्होंने कहा, "पीडीए एकजुट है और नतीजों से अंदाज़ा हो जाएगा कि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक किस ओर हैं."

अवधेश प्रसाद का दावा है कि यहाँ समाजवादी पार्टी नहीं, बल्कि जनता चुनाव लड़ रही है.

अवधेश प्रसाद गृह मंत्री अमित शाह के भीमराव आंबेडकर पर दिए गए बयान को अहम मुद्दा मानते हैं.

उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, "मिल्कीपुर की जनता अजीत प्रसाद को जिताकर बाबा साहेब के अपमान का बदला ज़रूर लेगी."

दिसंबर में राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने 'आंबेडकर की विरासत' की बात की थी.

इस दौरान उन्होंने कहा था कि आजकल आंबेडकर का नाम लेना एक फ़ैशन बन गया है.

अमित शाह ने कहा था, "अब ये एक फ़ैशन हो गया है. आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर… इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता."

कांग्रेस ने मांग की थी कि अमित शाह से माफ़ी मांगें और इस्तीफ़ा दें.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि 'ये दुर्भाग्य है कि एक दलित नायक, जो देश में सबके लिए पूजनीय हैं, उनका अपमान किया गया.'

अमित शाह ने जवाब में कहा था कि कांग्रेस पार्टी ने उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया.

बाद में अमित शाह ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस भी की थी और कहा था, "मैं मीडिया से विनती करना चाहता हूँ कि मेरा पूरा बयान जनता के सामने रखें. मैं उस पार्टी से आता हूँ, जो कभी आंबेडकर का अपमान नहीं करती."

अमित शाह ने कहा था कि वह हमेशा आंबेडकर के रास्ते पर चले हैं.

बीजेपी के लिए चुनौती

बीजेपी
इमेज कैप्शन, बीजेपी उम्मीदवार के नामांकन में पार्टी के स्थानीय नेता नदारद रहे

मुक़ाबला अगर समाजवादी पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण है, तो बीजेपी के लिए भी आसान नहीं है.

बीजेपी के उम्मीदवार चंद्रभानु पासवान स्थानीय राजनीति में कोई नया चेहरा नहीं हैं. उनकी पत्नी ज़िला पंचायत सदस्य हैं.

चंद्रभानु पासवान के नामांकन में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही और अनिल राजभर पहुँचे थे. नामांकन से पहले एक बड़ी सभा भी हुई थी.

स्थानीय लोग बताते हैं कि चंद्रभानु पासवान के नामांकन के वक़्त जुलूस जैसा माहौल था.

उन्होंने दर्जनों गाड़ियों के साथ नामांकन किया था, लेकिन उनके मंच पर बीजेपी के स्थानीय नेता नदारद थे.

मिल्कीपुर से टिकट मांगने वाले पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ, राधेश्याम और कई अन्य नेता मंच पर नहीं पहुँचे थे.

बीबीसी से बातचीत में राधेश्याम ने कहा कि अब पार्टी ने फ़ैसला कर लिया है, तो वो उस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं.

हालाँकि बीजेपी के ज़िला मीडिया प्रभारी डॉ. रजनीश सिंह ने कहा, "हम लोग चाहते थे कि मिल्कीपुर का ही कोई व्यक्ति पार्टी से चुनाव लड़ता तो बेहतर होता."

उनसे जब पूछा गया कि वह नामांकन में क्यों नहीं गए, तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

राधेश्याम कोरी समाज से आते हैं. दावा ये किया जाता है मिल्कीपुर विधानसभा में कोरी समाज के क़रीब 40 हज़ार वोट हैं.

स्थानीय पत्रकार अरशद अफ़ज़ाल खान का कहना है कि इस समाज की नाराज़गी बीजेपी को नुक़सान पहुँचा सकती है.

बीजेपी उम्मीदवार चंद्रभानु प्रसाद ने कहा कि सबकी सहमति है और कोई नाराज़ नहीं है.

बीबीसी हिंदी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "ये चुनाव मोदी जी और योगी जी के विकास के वायदे पर लड़ा जा रहा है. यही मेरा भी चुनाव का एजेंडा है."

बीजेपी के नेताओं का मानना है कि असंतोष और खींचतान से तो असल में समाजवादी पार्टी को जूझना है क्योंकि समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे संतोष कुमार आज़ाद समाज पार्टी के उम्मीदवार हैं.

अवारा पशु एक बड़ा मुद्दा

आवारा पशु
इमेज कैप्शन, आवारा पशु को लेकर किसानों में काफ़ी बेचैनी है.

स्थानीय पत्रकार अरशद अफज़ाल कहते हैं, "मिल्कीपुर विधानसभा का उपचुनाव अलग है. यहाँ लोकसभा चुनाव से पहले तत्कालीन बीजेपी सांसद लल्लू सिंह ने संविधान बदलने की बात उठाई थी लेकिन जनता ने उनको ही बदल दिया."

वरिष्ठ पत्रकार इंदूभूषण पांडेय मानते हैं कि लोकसभा चुनाव के नतीजों में शहर में तोड़फोड़ और मुआवज़े का मसला भी शामिल था.

मिल्कीपुर में आवारा पशु एक बड़ा मुद्दा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा पशुओं की वजह से फसल बर्बाद हो रही है.

मिल्कीपुर विधानसभा के बीच से रायबरेली-अयोध्या हाइवे निकलता है. सड़क के दोनों किनारों पर किसानों के गेहूँ की फसल खड़ी है.

पूरे इलाक़े में लगभग हर खेत तार से घिरा हुआ है. कई खेतों में बिजली के हल्के झटके देने वाले तार भी लगे हैं.

जगन्नाथपुर में स्थानीय किसान राम कुमार प्रजापति ने बताया कि ये खेतों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए हैं.

राम कुमार प्रजापति
इमेज कैप्शन, राम कुमार प्रजापति का कहना है कि आवारा पशुओं से बचाव के लिए खेतों में हल्की बिजली के तार लगाए गए हैं.

राम कुमार ने कहा कि आवारा पशुओं की वजह से सारी फसलें नष्ट हो रही हैं और फसल बचाना बहुत मुश्किल हो रहा है.

बहुत से किसान रात में आवारा पशुओं से अपनी फसलों को बचाने के लिए पहरा भी देते हैं.

चुनाव प्रचार में अवधेश प्रसाद भी अवारा पशुओं का मुद्दा उठा रहे हैं. अवधेश प्रसाद ने वादा किया है कि अगर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी, वो इस इलाक़े में हाई टेक गोशाला बनवाएँगे और किसानों की फसल भी बचाएँगे.

हालाँकि बीजेपी उम्मीदवार चंद्रभानु पासवान इससे इनकार करते हैं कि आवारा पशु चुनाव में कोई मुद्दा हैं. उनका कहना है कि आवारा पशु की समस्या नहीं है.

मिल्कीपुर सीट में 3 लाख 70 हज़ार 829 मतदाता हैं. पुरुष मतदाता 1 लाख 92 हज़ार 984 और महिला मतदाता 1 लाख 77 हज़ार 838 हैं. इन मतदाताओं में पहली बार 4811 नए मतदाता हैं. यहाँ मतगणना आठ फ़रवरी को होगी.

क्या कहते हैं स्थानीय लोग

मिल्कीपुर के लोग अपने यहाँ हो रहे उप चुनाव को लेकर उत्साहित दिखते हैं. कुछ लोग जहाँ बीजेपी के आगे होने की बात कह रहे हैं, तो कुछ को लगता है कि समाजवादी पार्टी का पलड़ा भारी है.

मिल्कीपुर के कुचेरा बाज़ार में क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर विजय कुमार तिवारी कहते हैं, "मैं तो सनातन प्रेमी हूँ. यहाँ पर विकास बहुत है. फ़िलहाल बीजेपी चुनाव में काफ़ी आगे है. लेकिन एक प्रमुख समस्या है, वो है आवारा पशु की. इसका निदान हो जाए, तो बेहतर है."

इस क्लीनिक के बाहर गले में भगवा गमछा डाले कामता प्रसाद यादव का कहना है कि विकास बहुत हुआ है.

अमानीगंज बाज़ार में मूंगफली बेच रहे सतीश कुमार कहते हैं कि अभी उन्होंने तय नहीं किया है कि किसको वोट देना है, लेकिन लड़ाई इस बार कठिन है.

वो कहते हैं, "जीते कोई भी, हालात नहीं बदलने वाले हैं."

इन सबके बीच आवारा पशुओं की भी लोग चर्चा करते हैं. चाय की दुकान पर बैठे राम मिलन ने कहा, "सरकार ने काम किया है. सरकार से कोई परेशानी नहीं है. लेकिन दिन-रात खेत की रखवाली करनी पड़ रही है."

स्थानीय निवासी ग़ुलाम हुसैन को लगता है कि लड़ाई सिर्फ़ बीजेपी और सपा की है और सपा का पलड़ा भारी है.

चुनाव में मुद्दे की बात पर मिल्कीपुर के लक्ष्मण सिंह कहते हैं, "यहाँ जाति नहीं बल्कि विकास एक अहम मुद्दा है."

अमानीगंज ब्लाक के परसवां के रहने वाले राम तीर्थ आवारा पशु को एक अहम मुद्दा मानते हैं. साथ ही इस मामले को लेकर योगी सरकार पर सवाल भी उठाते हैं.

उनका कहना था, "मुख्यमंत्री नहीं कोई भी आए, लेकिन आवारा पशु का उपाय नहीं करेंगे, तो क्या कर सकते हैं."

वे कहते हैं, "कोई मंत्रियों से मिल भी नहीं पाता है. विकास तो सपा सरकार में भी हुआ है. लेकिन सांड की समस्या नहीं थी. अब दिन रात खेत की रखवाली करनी पड़ रही है."

सीएम योगी और अवधेश प्रसाद के लिए अहम है चुनाव

शरत प्रधान

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक शरत प्रधान का कहना है कि ये उपचुनाव बीजेपी और समाजवादी पार्टी से ज़्यादा महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए है.

वो कहते हैं, "लोकसभा चुनाव के बाद ये ऐसी सीट है, जिसको जीतकर मुख्यंमत्री अपने विरोधियों को जवाब दे सकते हैं. ये सीट जीत कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पार्टी के भीतर चल रही उनके ख़िलाफ़ मुहिम को भी कमज़ोर करना चाहते हैं."

उनके मुताबिक़, "जहाँ तक समाजवादी पार्टी की बात है, ये चुनाव नतीजे अखिलेश यादव से ज़्यादा अवधेश प्रसाद की आन की बात होगी. अवधेश ने अपने पुत्र को टिकट दिलाया है. एक तो पार्टी के भीतर विरोध है. वहीं बीजेपी परिवारवाद का आरोप भी लगा रही है और चुनाव में इसका इस्तेमाल भी कर रही है."

लखनऊ स्थित वरिष्ठ पत्रकार रचना सरन का कहना है कि उपचुनाव में माना जाता है कि सत्ताधारी दल की जीत होती है.

वो कहती हैं, "अगर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी मिल्कीपुर जीतती है, तो ये हवा बनेगी कि पीडीए का समीकरण चल गया है."

रचना सरन ने कहा, "बीजेपी के लिए अयोध्या राजनीति का केंद्र है और अगर यहाँ से बीजेपी जीतती है, तो यह कह सकती है कि पिछली बार जनता को गुमराह कर समाजवादी पार्टी जीत गई थी."

उनका मानना है कि चुनाव में जो भी जीतेगा, उसको माइलेज ज़रूर मिलेगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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