लोकसभा चुनाव 2024: बंगाल में संदेशखाली कितना बड़ा चुनावी मुद्दा?

संदेशखाली

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    • Author, प्रभाकर मणि तिवारी
    • पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24-परगना ज़िले में बांग्लादेश की सीमा से सटा अनाम-सा कस्बा संदेशखाली एक बार फिर राज्य में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है.

इस मुद्दे पर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी में भी ठन गई है.

प्रधानमंत्री ने रविवार को अपनी एक चुनावी रैली में तृणमूल कांग्रेस पर संदेशखाली की महिलाओं को धमकाने का आरोप लगाया तो ममता ने उन पर इस मामले में झूठ बोलने का आरोप लगा दिया.

एक के बाद एक कई वीडियो सामने आने के बाद अब संदेशखाली पर बहस और विवाद लगातार तेज़ हो रहा है.

तृणमूल कांग्रेस जहां इन वीडियो को संदेशखाली का सच बताते हुए भाजपा पर हमलावर रुख अख्तियार कर चुकी है, वहीं भाजपा इन तमाम वीडियो को फर्जी बताते हुए इसे तृणमूल कांग्रेस की करतूत बता रही है.

दूसरी ओर, संदेशखाली में दोनों दलों यानी भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच हिंसक झड़पों की ख़बरों के बीच भाजपा समर्थको ने संदेशखाली थाने का घेराव किया.

ये लोग गांव में हुई एक डकैती में शामिल कथित टीएमसी कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और पहले गिरफ़्तार भाजपा के एक कार्यकर्ता की रिहाई की मांग कर रहे थे.

रविवार को तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता के साथ कथित भाजपा समर्थकों ने मारपीट भी की. उनमें महिलाएं भी शामिल थीं.

क्यों सुर्ख़ियों में है संदेशखाली

संदेशखाली मामला इस साल की शुरुआत से ही लगातार सुर्खियों में रहा है. पहले ईडी की टीम पर हमले और उसके बाद महिलाओं के कथित यौन उत्पीड़न और बलात्कार और बाद में इन घटनाओं के ख़िलाफ़ महिलाओं के आंदोलन के कारण.

कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने और मुख्य अभियुक्त तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख़ और उसके दो साथियों की गिरफ़्तारी के बाद यह मामला कुछ ठंडा पड़ता नज़र आ रहा था.

लेकिन हाल में आए स्टिंग वीडियो और उसके बाद कथित बलात्कार पीड़िताओं के वीडियो सामने आने के बाद बांग्लादेश की सीमा से सटा यह कस्बा एक बार फिर सुर्खियों में है.

फ़र्क यह है कि पहली बार इसके सुर्खियां बटोरने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सांसत में थी और अब नए खुलासे के बाद संदेशखली को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने वाली भाजपा फंसती नजर आ रही है.

बीबीसी स्वतंत्र रूप से इनमें से किसी भी वीडियो की पुष्टि नहीं करता है.

पश्चिम बंगाल

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इमेज कैप्शन, पश्चिम बंगाल में संदेशखाली के एक बीजेपी नेता के स्टिंग ऑपरेशन का एक वीडियो सामने आया है.

संदेशखाली मामले पर हाल में सामने आने वाले स्टिंग वीडियो में जिन भाजपा नेता गंगाधर कयाल को पूरे मामले को भाजपा के निर्देश पर आयोजित बताते हुए देखा गया था अब उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

कयाल का आरोप है कि उसकी तस्वीर का इस्तेमाल कर फर्जी वीडियो बनाया गया है. गंगाधर ने अदालत से सुरक्षा मुहैया कराने की भी मांग की है.

सबसे पहले जो स्टिंग वीडियो सामने आया था उसमें गंगाधर ये कबूल करते नजर आ रहे हैं कि यह पूरा मामला सुनियोजित था.

स्थानीय महिलाओं ने पैसे लेकर तृणमूल कांग्रेस नेताओं के ख़िलाफ़ बलात्कार और यौन उत्पीड़न की फर्जी रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

उस वीडियो में गंगाधर कई बार विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी का नाम लेते सुने जा सकते हैं. इस वीडियो के सामने आने के बाद भाजपा सांसत में पड़ गई थी.

हालांकि पार्टी शुरू से ही उस वीडियो को फर्जी बताती रही थी. शुभेंदु का कहना था कि उसे डीप फ़ेक तकनीक के जरिए तैयार किया गया है. भाजपा ने इस मामले की सीबीआई जांच की भी मांग उठाई है.

दूसरा वीडियो भी आया सामने

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उस वीडियो के बाद शुरू हुए विवाद अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि बृहस्पतिवार को एक दूसरा वीडियो भी सामने आ गया. उसमें संदेशखाली की महिलाएं दावा करती नजर आ रही हैं कि उनसे सादे कागज पर हस्ताक्षर करा कर उसी के जरिए बलात्कार की फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई थी.

अब सामने आने वाले एक ताजा वीडियो में वीडियो में भाजपा के वही नेता गंगाधर कयाल यह कहते नजर आते हैं कि 70 से ज्यादा महिलाओं को तृणमूल कांग्रेस के नेता शेख शाहजहां के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दो-दो हजार रुपये मिले थे. वे चुनाव प्रबंधन के लिए शराब के मद में पैसों और हथियारों की मांग भी करते नजर आते हैं.

इस बीच, संदेशखाली कांड के सिलसिले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता शाहजहां शेख ने भी इस मामले पर मुंह खोला है.

शुक्रवार को बशीरहाट अदालत में पेश होने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, "चुनाव खत्म होने दें. अभी और सच सामने आएगा."

इससे पहले मंगलवार को भी उन्होंने अदालत से बाहर एक सवाल पर कहा था, "वह वीडियो फर्जी नहीं है, ओरिजिनल है."

उसके बाद ही संदेशखाली की तीन महिलाओं का वीडियो सामने आया. यह तीनों महिलाएं वही हैं जिन्होंने शाहजहां शेख, शिबू हाजरा और उत्तम सरदार के खिलाफ बलात्कार और यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट लिखाई थी.

संदेशखाली की जिस महिला नियति माइती ने बलात्कार का पहला मामला दर्ज कराया था वह एक वीडियो में कहती नजर आती है कि हमारे साथ बलात्कार वगैरह कुछ नहीं हुआ. भाजपा की स्थानीय महिला नेता पियाली दास उर्फ माम्पी ने मेरे अलावा तपती माइती और मीता माइती से सादे कागज पर हस्ताक्षर करा लिए. बाद में हमें पता चला कि हमारे नाम से बलात्कार की शिकायत दर्ज कराई गई है.

बीजेपी का क्या कहना है

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नियति बताती हैं कि उन्हें एक हफ़्ते बाद इसका पता उस समय चला जब पुलिस नोटिस लेकर उसके घर पहुंची.

"उसके बाद जब मैंने शिकायत वापस लेने का फैसला किया तो माम्पी ने हमें धमकियां दी और मुंह बंद रखने को कहा. माम्पी बाहरी हैं और वह संदेशखाली की वोटर भी नहीं है. उसने हमें फंसा दिया है. माम्पी ने हमारी इज्जत सरेबाजार नीलाम कर दी है. उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए."

नियति का दावा है कि माम्पी और उसके लोग यह फर्जी आरोप वापस लेने के बाद हत्या की धमकियां दे रहे हैं. उसने थाने में इसकी शिकायत की है. नियति की शिकायत के बाद ही पुलिस ने माम्पी दास को पूछताछ के लिए तीन दिनों के भीतर थाने बुलाया था. लेकिन फिलहाल उसका कुछ पता नहीं चल रहा है.

संदेशखाली की एक पीड़िता रेखा ने बीते बृहस्पतिवार को भाजपा उम्मीदवार के तौर पर बशीरहाट संसदीय सीट से अपना नामांकन पत्र दायर किया. लेकिन उन्होंने संदेशखाली मामले और स्टिंग वीडियो पर किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया. संदेशखाली इलाका इसी संसदीय क्षेत्र के तहत है.

उनके साथ मौजूद शुभेंदु ने भी संदेशखाली के वीडियो पर किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया.

उन्होंने रेखा के नामांकन पत्र दायर होने के बाद पत्रकारों से कहा, "दीदी और उनके भतीजे (ममता-अभिषेक) रेखा पात्रा जैसी दलित और ग़रीब परिवार की एक महिला से इतना क्यों डर रहे हैं? इससे साफ़ है कि रेखा की जीत तय है. उसकी (रेखा की) लड़ाई चोरों के साथ है."

उन्होंने आरोप लगाया है कि तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी प्रशांत किशोर की संस्था आई-पैक के साथ मिलकर साज़िश के तहत संदेशखाली के तमाम फर्जी वीडियो को फैला रहे हैं.

शुभेंदु पहले दिन से ही दावा करते रहे हैं कि स्टिंग वीडियो को डीप फेक तकनीक से बनाया गया है और वह फर्जी है.

तृणमूल कांग्रेस ने क्या कहा है?

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस इस पूरी घटना को सुनियोजित बताते हुए इसके लिए विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को जिम्मेदार ठहरा रही है.

पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि अब ताज़ा वीडियो से यह बात पूरी तरह साफ़ हो गई है कि भाजपा ने संदेशखाली की घटना की पूरी पटकथा तैयार की थी.

इस बीच, संदेशखाली के एक व्यक्ति ने स्टिंग वीडियो में नजर आने वाले भाजपा नेता गंगाधर कयाल और बशीरहाट संसदीय सीट से पार्टी की उम्मीदवार रेखा पात्रा के ख़िलाफ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई है.

यहां इस बात का जिक्र प्रासंगिक है कि भाजपा ने संदेशखाली की एक पीड़िता रेखा पात्रा को बशीरहाट संसदीय सीट पर उम्मीदवार बनाया था.

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी फोन पर रेखा से बात की थी.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को उत्तर 24-परगना ज़िले की एक चुनावी रैली में प्रधानमंत्री पर संदेशखाली के बारे में लगातार झूठ फैलाने का आरोप लगाया.

उनका सवाल था कि वो (प्रधानमंत्री) राज्यपाल सीवी आनंद बोस के ख़िलाफ़ छेड़छाड़ के लगे आरोप पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?

राज्यपाल से इस्तीफा देने के लिए क्यों नहीं कहा जा रहा है? मुख्यमंत्री ने कहा कि संदेशखाली के झूठ पर प्रधानमंत्री को शर्म आनी चाहिए. हाल में सामने आने वाले वीडियो से भाजपा की साज़िश उजागर हो गई है.

पीएम मोदी ने तृणमूल कांग्रेस पर लगाया आरोप

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इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उसी ज़िले में एक चुनावी रैली में तृणमूल कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने और संदेशखाली के दोषियों को बचाने के लिए पीड़ित महिलाओं को धमकाने का आरोप लगाया था.

उन्होंने कहा था कि संदेशखाली की घटना पूरा देश देख रहा है.

संदेशखाली के अपराधियों को पहले तृणमूल की पुलिस ने बचाया और अब तृणमूल के गुंडे संदेशखाली की बहनों को डरा-धमका रहे हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संदेशखाली कांड ने तृणमूल कांग्रेस को बैकफुट पर धकेल दिया था. लेकिन अब लगातार कई वीडियो के सामने आने के बाद वह आक्रामक तरीके से पलटवार करने में जुटी है.

ममता बनर्जी अपनी चुनावी सभाओं में इस मामले को लगातार उठा रही हैं.

वरिष्ठ पत्रकार तापस मुखर्जी कहते हैं, "अभी इन वीडियो की जांच बाकी है. लेकिन उस जांच का नतीजा चाहे जो आए, इनके जरिए होने वाले नए खुलासे भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं."

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