बिहार में विश्वास मत से पहले जीतनराम मांझी के चार विधायकों पर क्यों है नज़र?- प्रेस रिव्यू

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बिहार विधानसभा में 12 फरवरी को होने वाले विश्वास मत से पहले 10 फरवरी को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा-सेक्युलर (एचएएम-एस) के प्रमुख जीतन राम मांझी के पास अपना दूत भेजा.
द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से पहले इंडिया गठबंधन के कुछ नेताओं और मार्क्सवादी लेनिनवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक महबूब आलम भी मांझी से मुलाक़ात करने पहुंचे.
मांझी की दोनों के साथ चर्चा बंद दरवाज़ों के पीछे हुई जो तकरीबन आधे-आधे घंटे चली.
अख़बार लिखता है कि लालू प्रसाद यादव ने कथित तौर पर जीतन राम मांझी को सीएम पद की पेशकश की है और कहा है कि अगर बिहार में विपक्ष की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री पद उन्हें दिया जाएगा. विधानसभा में एचएएम-एस के चार विधायक हैं.
एनडीए से नाराज़ मांझी
पांच दिन पहले उन्होंने राज्य में हाल में बनी एनडीए सरकार में अपने बेटे संतोष कुमार सुमन को दिए पोर्टफ़ोलिया को लेकर नाराज़गी जताई थी.
गया में एक जनसभा में उन्होंने कहा था कि "1984 से लेकर 2013 तक मैं अनुसूचित जाति विकास विभाग में मंत्री रहा और मेरे बेटे को भी वही विभाग दिया गया है."
उन्होंने सवाल किया कि सड़क निर्माण या फिर जल संसाधन जैसे विभाग उन्हें क्यों नहीं दिए गए.
इसके बाद पार्टी ने अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी किया और कहा कि विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दिन वो लोग सदन में मौजूद रहें.
मांझी के राजनीतिक सलाहकार दानिश रिज़वान ने द हिंदू को बताया कि व्हिप का नाता इस बात से नहीं है कि किसे वोट देना है और किसे नहीं, विधायकों से कहा गया है कि उस दिन वो सदन में ज़रूर उपस्थित रहें.
वहीं महबूब आलम ने कहा कि मांझी से उनकी मुलाक़ात का नाता विश्वास मत से नहीं है.
उन्होंने कहा, "मैं उनका हाल-चाल जानने आया था और वो अभी पूरी तरह स्वस्थ हैं. खेल कैसे खेलना है ये उन्हें पता है. वो ग़रीबों की आवाज़ बने रहे हैं. मैंने उनसे कहा कि वो ग़रीबों के लिए काम करते रहें."
फ्लोर टेस्ट से पहले जारी है खींचतान

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विश्वास मत से पहले आरजेडी, जेडीयू और बीजेपी भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है. शनिवार को जेडीयू ने कैबिनेट मंत्री श्रवण कुमार के यहां अपने सभी विधायकों को लंच के लिए बुलाया था. माना जा रहा है कि पार्टी विधायकों की गिनती करना चाहती थी. लेकिन इसमें 45 विधायकों में से 38 नेता शामिल नहीं हुए.
श्रवण कुमार ने कहा कि जो लोग लंच में नहीं आए उनकी पहले से व्यस्तताएं थीं जिसके बारे में उन्होंने पहले ही पार्टी को बता दिया था.
विश्वास मत से पहले कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को हैदराबाद शिफ्ट कर दिया है, वहीं बीजेपी ने अपने विधायकों को बोध गया भेजा है.
आरजेडी ने भी विश्वास मत से पहले अपनी रणनीति पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई थी. सभी 79 विधायकों को विश्वास मत तक तेजस्वी यादव के आधिकारिक बंगले पर रहने को कहा गया है.
बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों की ज़रूरत है. आंकड़ों के अनुसार एनडीए के पास फिलहाल 128 विधायक हैं, जिनमें बीजेपी के 78, जदयू के 45, एचएएम-एस के 4 और निर्दलीय विधायक सुमित सिंह हैं.
वहीं महागठबंधन के पास 114 विधायक हैं, जिन्हें आरजेडी के 79, कांग्रेस के 19 और वाम पार्टियों के 16 विधायक हैं.
पंजाब, चंडीगढ़ में अकेले चुनाव लड़ेगी आम आदमी पार्टी

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लोकसभा चुनावों से पहले पंजाब में इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना को खारिज करते हुए शनिवार को आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि पंजाब की 13 लोकसभा सीटों पर उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी.
अख़बार द हिंदू में छपी एक और रिपोर्ट के अनुसार उनका कहना है कि चंडीगढ़ की एकमात्र लोकसभा सीट पर भी पार्टी अकेले दम पर अपना उम्मीदवार उतारेगी.
इन सभी 14 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची जल्द ही जारी की जाएगी.
अख़बार लिखता है कि दिलचस्प बात ये है कि चंडीगढ़ मेयर के चुनावों में पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में अपना उम्मीदवार उतारा था. चुनाव में बीजेपी की जीत से पार्टी को बड़ा धक्का पहुंचा है.
पंजाब के खन्ना में हुए एक जनसभा में केजरीवाल ने कहा कि लोकसभा चुनाव आ रहे हैं, पंजाब में लोकसभा की 13 सीटें हैं और चंडीगढ़ में एक सीट है. अगले 10-15 दिनों में पार्टी इन सभी सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करेगी.
उन्होंने कहा, "मैं आपसे अपील करूंगा कि जिस तरह दो साल पहले (2022 विधानसभा चुनाव) आपने पार्टी का साथ दिया था, उसी तरह इन सभी 14 सीटों पर पार्टी को जिताएं."
'घर घर मुफ्त राशन' नाम की योजना के उद्घाटन के लिए पंजाब पहुंचे केजरीवाल ने विपक्षी पार्टियों पर भी निशाना साधा और कहा कि 75 सालों में योजनाएं उन लोगों तक नहीं पहुंच सकी हैं जिन्हें इनकी ज़रूरत है.
उन्होंने कहा कि न तो शिरोमणी अकाली दल और न ही कांग्रेस ने 75 सालों में लोगों की भलाई के लिए कोई कदम उठाया.
मान ने पहले ही कहा था, साथ नहीं उतरेंगे
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इस ख़बर को हिंदुस्तान टाइम्स ने भी अपने पहले पन्ने पर जगह दी है. अख़बार लिखता है कि जनवरी 24 को भगवंत मान ने पहले ही कह दिया था कि वो अकेले पंजाब में चुनाव लड़ेगी.
अख़बार लिखता है कि हालांकि इस घोषणा के तुरंत बाद पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा था कि वो इंडिया गठबंधन का हिस्सा रहेगा, साथ ही ये भी कहा कि कांग्रेस को सीटों के बंटवारे पर जल्द फ़ैसला लेना चाहिए.
पार्टी ने कहा था कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की स्थानीय यूनिट्स का मानना है कि दोनों को अलग-अलग चुनाव लड़ना चाहिए. पार्टी ने कहा, "हमने कार्यकर्ताओं की राय का सम्मान करने का फ़ैसला किया है. दूसरे राज्यों को लेकर भी बातचीत चल रही है."
"हमें गठबंधन पर पूरा भरोसा है, बीजेपी को हराना हमारा साझा उद्देश्य है. ऐसे में वक्त बेहद ज़रूरी है हम उम्मीद करते हैं कि कांग्रेस जल्द से जल्द सीट बंटवारे पर फ़ैसला लेगी."
किसानों के कूच से पहले राजधानी की सीमाएं बंद

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13 फरवरी को पंजाब के किसानों के दिल्ली कूच के एलान के बाद हरियाणा पुलिस ने सतर्कता बरतते हुए कई बड़े फ़ैसले लिए हैं.
अख़बार जनसत्ता के अनुसार दिल्ली-अमृतसर राजमार्ग पर अंबाला में शंभू सीमा के पास यातायात को बंद कर दिया गया है.
शंभू सीमा पर अवरोधक और कंटीले तार बिछा दिए गए हैं. हालांकि नियमित यातायात के लिए एक मार्ग को खोला गया है.
अख़बार लिखता है कि इसके साथ दिल्ली-अमृतसर सड़क की अंबाला से जुड़ती सीमा को बंद कर दिया गया है, हरियाणा-पंजाब सीमा पर घग्गर नदी के पुल पर यातायात बंद कर दिया गया है. नदी के तल को भी खोद दिया गया है ताकि ट्रैक्टर आगे न बढ़ सकें.
वहीं देर शाम एक आदेश जारी कर सात ज़िलों में इंटरनेट बंद करने का फ़ैसला लिया गया है. ये सभी ज़िले पंजाब से सटे हुए हैं.
प्रदेश के गृह सचिव टीवीएनएस प्रसाद ने शनिवार शाम को जारी आदेश में कहा है कि किसानों के दिल्ली कूच से पहले अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा में 11 फरवरी की सुबह से 13 फरवरी की रात 12 बजे तक इंटरनेट सेवा बंद रहेगी.
हरियाणा पुलिस ने लोगों से कहा है कि वो पंजाब की तरफ जाने से बचें.
अख़बार लिखता है कि किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा है कि केंद्र ने उनकी मांगों पर चर्चा के लिए उन्हें 12 फरवरी को बातचीत के लिए बुलाया है. ये बैठक चंडीगढ़ में हो सकती है.
जेएनयू में एबीवीपी-वामपंथी संगठनों के बीच झड़प

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दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में शुक्रवार शाम को जनरल बॉडी मीटिंग के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और वामपंथी संगठन के छात्रों के बीच झड़प हो गई.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार दोनों ही समूहों ने बैठक में गड़बड़ी के लिए एक-दूसरे पर आरोप लगाया है और दावा किया है कि टकराव के दौरान उनके सदस्यों को चोटें आई हैं.
जेएनयू काउंसिलर अनघा प्रदीप ने एबीवीपी के कार्यकर्ताओं पर जनरल बॉडी मीटिंग में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया.
उनका कहना है कि छात्रों के लिए फ़ैसला लेने वाले छात्र संघ के चुनाव से पहले जनरल बॉडी की बैठक बुलाई गई थी. इसके लिए 1200 छात्रों के हस्ताक्षर इकट्ठा किए गए थे.
लेकिन एबीवीपी का कहना है कि जेएनयू का छात्र संघ वैध नहीं है और इसे मान्यता हासिल नहीं है.
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने बैठक में आकर बैठक का विरोध किया जिसके बाद आधी रात कर बैठक आगे नहीं बढ़ सकी.
एबीवीपी का कहना है कि ऑल इंडिया स्टूडेन्ट्स यूनियन और स्टूडेन्ट फेडेरेशन ऑफ़ इंडिया ने उनका विरोध किया और उन्हें यहां जाने से कहा, जिसके बाद शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एबीवीपी को हस्तक्षेप करना पड़ा.
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