जौनपुर में धनंजय सिंह की पत्नी को बीएसपी का टिकट न मिलने से क्या बीजेपी को फ़ायदा होगा? - ग्राउंड रिपोर्ट

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इमेज कैप्शन, धनंजय सिंह और उनकी पत्नी श्रीकला रेड्डी
    • Author, प्रवीण कुमार
    • पदनाम, जौनपुर से बीबीसी हिंदी के लिए

जौनपुर लोकसभा का चुनाव छठे चरण में 25 मई को होना है. लेकिन इस क्षेत्र की चर्चा लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही हो रही है.

इस चर्चा को नामांकन के अंतिम दिन यानी छह मई को बीएसपी ने अपना उम्मीदवार बदलकर और तेज़ कर दिया है.

बीएसपी ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पत्नी और वर्तमान में जौनपुर की ज़िला पंचायत अध्यक्ष श्रीकला रेड्डी को 16 अप्रैल को अपना उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन टिकट बदलते हुए नामांकन के अंतिम दिन अपने वर्तमान सांसद श्याम सिंह यादव को टिकट दे दिया.

अब जौनपुर लोकसभा में बीजेपी से कृपाशंकर सिंह, बीएसपी से श्याम सिंह यादव और एसपी के टिकट पर बाबू सिंह कुशवाहा मैदान में हैं.

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि क्या धनंजय सिंह की पत्नी का टिकट बदले जाने से बीजेपी को फ़ायदा होगा और हो रहा है तो कितना हो रहा है?

बीएसपी के टिकट बदलने पर क्या कहते हैं जौनपुर के लोग?

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इमेज कैप्शन, जौनपुर निवासी अशोक सिंह, मोहम्मद अज़ीज़ और अरविंद कुमार सिंह

जौनपुर के शाहगंज विधानसभा के सुरिस गांव के निवासी अशोक सिंह कहते हैं, “धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी का बसपा से टिकट कटने से भाजपा प्रत्याशी कृपाशंकर सिंह को सीधे तौर पर फ़ायदा मिलेगा."

"श्रीकला रेड्डी के चुनाव लड़ने की दशा में क़रीब 50 प्रतिशत ठाकुर उनको वोट करता, अब जब वह चुनावी मैदान में नहीं है तो ठाकुर वर्ग का सारा वोट भाजपा प्रत्याशी को जाएगा. धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी चाहे जिस पार्टी से या निर्दलीय ही चुनाव लड़तीं, अच्छा वोट पातीं.”

अशोक सिंह ख़ुद ठाकुर हैं. वे ठाकुरों के रुझान के बारे में दावा करते हैं, “जौनपुर में ठाकुर वर्ग की पहली पसंद धनंजय सिंह ही हैं लेकिन अब वह चुनाव में नहीं हैं तो कृपाशंकर सिंह को वोट करेंगे. बसपा प्रत्याशी श्याम सिंह यादव सपा को ही नुक़सान पहुंचाएंगे, पहले जब श्रीकला उम्मीदवार थीं तो बीजेपी को नुक़सान हो रहा था, अब मामला पलट गया है.”

वहीं जौनपुर सदर विधानसभा के चौकिया गुरैनी निवासी मोहम्मद अज़ीज़ बीएसपी के इस फ़ैसले को पार्टी का अंदरूनी मामला बताते हैं, "श्रीकला रेड्डी के चुनावी मैदान में होने से ठाकुर और कुछ मुस्लिम वर्ग को वोट उनको जाता लेकिन अब ठाकुर वोट भाजपा की तरफ़ जा रहा है. मुसलमान जो धनंजय सिंह को पसंद करता है वह अब सपा को वोट करेगा, श्रीकला के चुनाव न लड़ने से फ़ायदा दोनों पार्टियों को मिल रहा है. हां ज़रूर श्याम सिंह यादव के बसपा से प्रत्याशी होने के बाद कुछ यादव भी श्याम सिंह यादव को वोट करेंगे, इसलिए सपा को थोड़ा नुक़सान तो हो रहा है.”

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जौनपुर लोकसभा के मल्हनी विधानसभा के रामपुर बैजापुर निवासी पूर्व प्रधान अरविंद कुमार सिंह की राय इससे उलट है. वो कहते हैं, “धनंजय सिंह लगातार कई चुनाव हार चुके हैं, इनके पत्नी का टिकट कटने से बहुत फ़र्क़ भाजपा के चुनाव पर नहीं पड़ा रहा है. हां ज़रूर इनके चुनाव लड़ने पर दोनों पार्टियों सपा और भाजपा को नुकसान पहुंचता. क्योंकि कुछ ठाकुर, मुसलमान, यादव और कुछ ओबीसी वर्ग के लोग इनको वोट करते. श्याम सिंह यादव सपा को नुकसान पहुंचाएंगे यह भी पूरी तरह से ग़लत है. यादव हर हाल में सपा को ही वोट करेगा.”

जौनपुर सदर विधानसभा के सिद्दीकपुर निवासी डीके सिंह धनंजय सिंह के समर्थक हैं. वो कहते हैं, “बहन जी (मायावती) ने किसी के दबाव में टिकट काटा क्योंकि धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी को 100 प्रतिशत चुनाव जीतना था. धनंजय सिंह की पत्नी चुनाव जीत रही थीं लेकिन किस दबाव में टिकट काटा यह समझ से परे है, इसका खामियाजा बसपा को भुगतना पड़ेगा."

"यह बात बिलकुल सच है कि भाजपा को जिताने के लिए टिकट बदला गया है. यहां से डमी कैंडिडेट मायावती लड़ाना चाहती हैं. हम सब धनंजय सिंह के आदेश का इंतज़ार कर रहे हैं वो जहां कहेंगे और उनके सभी समर्थक वहीं वोट करेंगे.”

अपनी जीत का दावा करते हैं बीजेपी प्रत्याशी कृपाशंकर सिंह

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पूर्व में कांग्रेस के कद्दावर नेता कृपाशंकर सिंह महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री रह चुके हैं. साल 2019 में कांग्रेस को अलविदा कह वो 2021 में बीजेपी में शामिल हो गए थे. कृपाशंकर सिंह अब जौनपुर से बीजेपी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं.

बीएसपी के अंतिम समय में टिकट बदलने के सवाल पर कृपाशंकर सिंह कहते हैं, “यह बसपा का अंदरूनी मामला है कि किसका टिकट काट कर किसको दे रहे हैं, इससे न मुझे और ना ही भाजपा का कुछ लेना-देना है.”

अगर धनंजय सिंह की पत्नी का टिकट नहीं कटता तो आपको नुक़सान पहुंचता इस सवाल को बीच में ही काटते हुए वो कहते हैं, “अब जो हुआ नहीं, कौन लड़ता, क्या होता? इस पर मुझे नहीं जाना है. मैं तो प्रत्याशी हूं यही दिखाई दे रहा है. आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में लिए गए फ़ैसले और यूपी में माननीय योगी जी द्वारा लिए गए फ़ैसले के आधार पर लोगों के बीच में जाना है, अगर मुझे यहां से सांसद बनने का मौक़ा मिलता है तो रोज़ी-रोटी के लिए जौनपुर के लोगों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा.”

बीएसपी प्रत्याशी के तौर पर श्याम सिंह यादव के आने से क्या अपना फ़ायदा होता दिखाई दे रहा है? इस सवाल पर कृपाशंकर सिंह कहते हैं, “मैं इस तरह से सोचता ही नहीं, मैं तो सुबह निकलता हूं, कितने लोगों से मिलता हूं, दिनभर में कितने लोगों से मिल सकूं यही सोचता हूं. मेरी लड़ाई न सपा से है न बसपा से है."

"जो विकास के विरूद्ध हैं मेरी लड़ाई उससे है. यह मैं नही तय कर सकता कि इस चुनाव में मेरा मुख्य प्रतिद्वंदी कौन है यह जनता तय करती है. मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं लेकिन मुझे मेरी और भारतीय जनता पार्टी की जीत साफ़ दिखाई दे रही है.”

क्या कह रहे हैं बीएसपी प्रत्याशी श्याम सिंह यादव?

श्याम सिंह यादव

पांच मई के घटनाक्रम को याद करते हुए जौनपुर से वर्तमान बीएसपी सांसद और बीएसपी प्रत्याशी श्याम सिंह यादव कहते हैं, “05 और 06 मई के मध्य रात्रि 12:30 बजे मायावती जी का फ़ोन आता है और मुझे चुनाव लड़ने के लिए कहती हैं. हालांकि, क़रीब तीन महीने पहले मैं प्रेस कांफ्रेंस कर चुनाव न लड़ने की इच्छा ज़ाहिर कर चुका था लेकिन बहन जी के फ़ैसले को मैं मना नहीं कर सकता था."

"थोड़ा हिचक ज़रूर रहा था लेकिन अंतत: मैंने उनकी इच्छा अनुसार 06 मई (नामांकन के अंतिम दिन) को बीएसपी प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाख़िल किया. 2019 में भी जौनपुर की जनता ने मुझे आशीर्वाद देकर सांसद बनाया इस बार भी मुझे जनता का आशीर्वाद मिलेगा."

धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी का टिकट काट कर अंतिम समय में आपको टिकट क्यों दिया गया इस सवाल के जवाब में श्याम सिंह यादव कहते हैं, “मैं इन सब बातों में नहीं पड़ना चाहता, इसमें बड़ा विरोधाभास है. उनका (धनंजय सिंह) वर्ज़न कुछ और है और पार्टी का कुछ और है, ना ही मैं इस बारे में कुछ जानता हूं.”

हालांकि, श्याम सिंह यादव अपने जौनपुर सांसद के तौर पर क्षेत्र में किये गये विकास कार्यों को गिनाते हुए कहते हैं, “कुछ लोग कहते हैं कि मैं क्षेत्र में दिखाई नहीं देता. मैंने कोई विकास कार्य नहीं किया है. इस तरह के आरोप सही नहीं हैं, मुझसे जितना हो सका मैंने एक सांसद के तौर पर क्षेत्र के विकास के लिये काम किया.”

चुनाव पूर्व एसपी से नज़दीकियों के सवाल पर श्याम सिंह यादव दावा करते हैं, “मैं कभी टिकट मांगने के लिए सपा के पास नहीं गया, बल्कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुझे बुलाया था और जौनपुर से मुझे लड़ाने की इच्छा ज़ाहिर की थी. एक बार नहीं कई बार अलग-अलग समय में मुझसे यह बात कही गयी, इस संदर्भ में बाद में मैंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को चिठ्ठी भी लिखी थी.”

'बसपा किसे लड़ा रही है यह उनका फ़ैसला है'

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बसपा के टिकट बदलने पर सामान्य सी प्रतिक्रिया देते हुए सपा प्रत्याशी बाबू सिंह कुशवाहा कहते हैं, “अंतिम समय में बसपा के टिकट बदलने से मेरा क्या लेना-देना, यह बसपा का अपना फ़ैसला है वो किसे लड़ा रहे हैं किसे नहीं लड़ा रहे हैं, सबकी अपनी रणनीति होती है उसके अनुसार पार्टियां चुनाव लड़वाती हैं, जीतता वही है जिसे जनता अपना आशीर्वाद देती है."

"मैं इंडिया गठबंधन से सपा का उम्मीदवार हूं, मैं इतने दिन जनता के बीच गया हूं मुझे पूरा भरोसा है जौनपुर की सम्मानित जनता मुझे अपना स्नेह और आशीर्वाद ज़रूर देगी.”

धनंजय सिंह की पत्नी के बीएसपी से उम्मीदवार होने पर एसपी को होने वाले कथित फ़ायदे पर बाबू सिंह कुशवाहा तल्ख़ अंदाज़ में कहते हैं, “जो हुआ नहीं उस पर क्यों जाते हैं, बसपा से श्याम सिंह यादव के आने से सपा को कोई नुक़सान नहीं हो रहा है. सपा के और इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ता और वोटर सपा के साथ हैं किसी के आने जाने से एक वोट भी नहीं हिलने वाला है. संविधान को बचाने के लिये लोकतंत्र को बचाने के लिये आम जनता चुनाव लड़ रही है."

पूर्व सांसद धनंजय सिंह का पक्ष

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अंतिम समय में टिकट कटने के सवाल के संदर्भ में हमने धनंजय सिंह का पक्ष जानने के लिए धनंजय सिंह और पत्नी श्रीकला रेड्डी से मिलने की कोशिश की लेकिन उनके सहयोगियों द्वारा यहा बताया गया कि दोनों लोग जौनपुर से बाहर हैं और दो-तीन दिन बाद जब वापस आयेंगे तब ही बात हो पाएगी.

हालांकि, धनंजय सिंह से व्हाट्सऐप कॉल पर 30 सेकेंड की बातचीत में उन्होंने केवल इतना कहा कि “बसपा द्वारा मुझे धोखा दिया गया है, जब तक मैं चुनाव में था जौनपुर की चर्चा थी अब कोई जौनपुर की चर्चा नहीं कर रहा है.”

इतना कहने के बाद कोर्ट के काम से व्यस्त होने और बाद में कॉल करने की बात कहते हुए उन्होंने फ़ोन डिस्कनेक्ट कर दिया.

जौनपुर के बदलते राजनीतिक घटनाक्रम

02 मार्च 2024 को जब बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की तब से जौनपुर लोकसभा सीट चर्चा में है. बीजेपी की लिस्ट में जौनपुर से बीजेपी प्रत्याशी के रूप में मुंबई के कद्दावर नेता कृपाशंकर सिंह के नाम ने जौनपुर के लोगों को चौंकाया.

बीजेपी प्रत्याशी कृपाशंकर सिंह जौनपुर ज़िले के बक्शा ब्लॉक के सहोदपुर गांव के मूल निवासी हैं.

74 वर्षीय कृपाशंकर सिंह के जौनपुर से बीजेपी प्रत्याशी बनने से पहले तक की पूरी राजनीति मुंबई और महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी की रही है. कृपाशंकर सिंह महाराष्ट्र में कांग्रेस से तीन बार विधानसभा चुनाव जीते, एक बार एमएलसी रहे, मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष रहे, विलासराव देशमुख सरकार में गृह राज्य मंत्री रहे.

वहीं बीएसपी के पूर्व सांसद धनंजय सिंह कभी राजनीतिक तो कभी अपने आपराधिक मामलों की वजह से भी चर्चा में रहते हैं. लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज़ होते ही उन्होंने बैनर, पोस्टर और अन्य माध्यमों से जौनपुर लोकसभा चुनाव लड़ने की दावेदारी महीनों पहले पेश कर दी थी.

पूर्व सांसद धनंजय सिंह की उम्मीदों पर तब पानी फिरते दिखा जब नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर के अपहरण और रंगदारी वसूलने के एक मामले में छह मार्च को जौनपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने दोषी मानते हुए उन्हें सात साल की सज़ा सुनाई.

धनंजय सिंह को जेल जाना पड़ा और सात साल की सज़ा होने के कारण जनप्रतिनिधि क़ानून के अंतर्गत पूर्व सांसद धनंजय सिंह चुनाव लड़ने के लिये अयोग्य हो गये.

इसके बाद उनकी पत्नी के चुनाव लड़ने की चर्चा ने ज़ोर पकड़ लिया. बीती 16 अप्रैल को बीएसपी ने जौनपुर से धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया. इसके बाद 27 अप्रैल को धनंजय सिंह को जौनपुर जेल से हाई सिक्योरिटी जेल बरेली में शिफ़्ट किया गया.

ठीक इसी दिन यानी 27 अप्रैल को ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धनंजय सिंह को इस मामले में ज़मानत दे दी और 01 मई को बरेली जेल से रिहा हुए. छह मई को बीएसपी ने इनकी पत्नी का टिकट काटते हुये बीएसपी के वर्तमान सांसद श्याम सिंह यादव को टिकट दिया.

कौन हैं धनंजय सिंह?

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वैसे जौनपुर का चुनाव इस बार धनंजय सिंह की पत्नी के चलते ही चर्चा में था. दरअसल, धनंजय सिंह दो बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं. धनंजय सिंह ने 2002 में एलजेपी के टिकट पर जौनपुर के रारी (अब मल्हनी) विधानसभा से जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी.

2004 में एलजेपी के प्रत्याशी के तौर पर जौनपुर लोकसभा से चुनाव लड़ा था लेकिन हार गये थे.

2007 में जेडीयू के टिकट पर दूसरी बार उसी सीट से विधायक निर्वाचित हुये, 2009 में बीएसपी के टिकट पर जौनपुर के सांसद बने.

2009 में सांसद बनने से ख़ाली हुयी रारी विधानसभा से अपने पिता राजदेव सिंह को बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़वाया और विधायक बनवाया. 2012 में अपनी दूसरी पत्नी डॉक्टर जागृति सिंह (बाद में तलाक़ ले लिया) को मल्हनी विधानसभा से चुनाव लड़वाया लेकिन हार का सामना करना पड़ा.

2014 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जौनपुर लोकसभा का चुनाव लड़े और हारे. 2020 में मल्हनी विधायक पारसनाथ यादव के देहांत से खाली हुयी सीट पर मल्हनी विधानसभा का उपचुनाव निर्दलीय लड़े लेकिन एसपी उम्मीदवार लकी यादव से हार का सामना करना पड़ा.

2022 में भी मल्हनी से जेडीयू प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा लेकिन फिर एसपी प्रत्याशी लकी यादव से हार का सामना करना पड़ा.

2023 में जेडीयू ने उन्हें अपना राष्ट्रीय महासचिव बनाया. ललन सिंह जब तक जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे तब तक धनंजय सिंह इस पद पर बने रहे. 2021 में अपनी तीसरी पत्नी श्रीकला रेड्डी को जौनपुर ज़िला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़वाया और जीत हासिल की. लेकिन इस बार उनकी योजना परवान चढ़ती नहीं दिख रही है.

वहीं एसपी-कांग्रेस गठबंधन में जौनपुर की सीट एसपी के हिस्से में आयी. 14 अप्रैल को एसपी ने सभी को चौंकाते हुए बीएसपी सरकार में मंत्री रहे और एनआरएचएम घोटाले के आरोपी बाबू सिंह कुशवाहा को अपना उम्मीदवार बनाया.

बांदा निवासी बाबू सिंह कुशवाहा एसपी प्रत्याशी बनने से पहले अपनी बनायी जनअधिकार पार्टी के अध्यक्ष थे.

जौनपुर लोकसभा का समीकरण?

जौनपुर लोकसभा में पांच विधानसभा जौनपुर सदर, मल्हनी, बदलापुर, मुंगरा बादशाहपुर और शाहगंज हैं, 2022 विधानसभा चुनाव में जौनपुर सदर, बदलापुर से बीजेपी ने जीत दर्ज की थी.

शाहगंज से बीजेपी के सहयोगी दल निषाद पार्टी के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी और मल्हनी और मुंगरा बादशाहपुर एसपी के खाते में आयी थी.

जौनपुर लोकसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 19 लाख 58 हज़ार 554 है, जिसमें अनुमान के मुताबिक ठाकुर 10 प्रतिशत, ब्राह्मण 9 प्रतिशत, मुसलमान 13 प्रतिशत, अनुसूचित वर्ग 16 प्रतिशत, यादव 12 प्रतिशत, कुशवाहा/मौर्या 8 प्रतिशत और अन्य ओबीसी जातियां हैं.

अगर पिछले पांच लोकसभा चुनाव की बात करें तो जौनपुर लोकसभा सीट से 1999 में बीजेपी के चिन्मयानंद ने जीत हासिल की थी.

2004 में एसपी के पारसनाथ यादव ने जीत दर्ज की थी, वहीं 2009 में बीएसपी के टिकट पर धनंजय सिंह सांसद बने थे.

2014 में बीजेपी से कृष्ण प्रताप सिंह ने जीत हासिल की और 2019 में एसपी-बीएसपी गठबंधन में बीएसपी के प्रत्याशी के तौर पर श्याम सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी.

जौनपुर का टिकट और बीएसपी पर दबाव

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अंतिम समय में बीएसपी को जौनपुर का टिकट क्या किसी दबाव में बदलना पड़ा?

इसके जवाब में वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, “चर्चा में दो बातें है, बसपा के कोआर्डिनेटर घनश्याम चंद खरवार के अनुसार धनंजय सिंह खुद पहले कह रहे थे कि पत्नी चुनाव लड़ेगी लेकिन पांच मई को अचानक रात 11:30 बजे फोन कर चुनाव लड़ने से मना कर दिया. यह हो सकता है कि दोनों तरफ़ दबाव डाला गया हो."

"धनंजय सिंह पर भी डाला गया हो कि आप हट जाइये, और मायावती पर भी दबाव डाला हो कि आप वहां कैंडिडेट बदलिये हमारा नुक़सान हो रहा है. परिणाम स्वरूप श्याम सिंह यादव को टिकट दिया गया. बसपा की इस चुनाव में जो रणनीति है उससे यही लगता है कि वह ख़ुद जीतने के बजाय इंडिया गठबंधन को हराने और बीजेपी को लाभ पहुंचाने के लिये काम कर रही है, उसी सिलसिले में यह माना जा रहा है कि टिकट बदला गया हो.”

बीएसपी प्रमुख मायावती को क्या कोई डर है इसके जवाब में रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं- “ये तो साफ़ दिख रहा है हर कोई कह रहा है, लेकिन यह बात मायावती तो कुबूल करेंगी नहीं.”

बीएसपी ने जौनपुर से टिकट बदलने के साथ ही कई सीटों पर अपने प्रत्याशी बदले. बस्ती से दयाशंकर मिश्रा का टिकट बदल कर लवकुश पटेल (कुर्मी) को टिकट दिया गया है, जबकि बस्ती से एसपी के रामप्रसाद चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं, रामप्रसाद चौधरी भी कुर्मी समाज से आते हैं.

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आज़मगढ़ से भीम राजभर की जगह बीएसपी ने सबिया अंसारी को टिकट दिया. वहीं मैनपुरी में एसपी प्रत्याशी डिंपल यादव के विरुद्ध गुलशन शाक्य का टिकट बदलते हुए शिवप्रसाद यादव को चुनाव लड़वाया. अमेठी में रवि प्रकाश मौर्य का टिकट काटते हुये नन्हे सिंह चौहान को टिकट दिया.

बीएसपी ने पिछले दिनों में कई टिकट बदले हैं, इस पर रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, “जातीय समीकरण के अनुसार बीजेपी को जो कैंडिडेट सूट करता है या जो कैंडिडेट इंडिया गठबंधन को डैमेज कर सकता है वैसा उम्मीदवार बसपा दे रही है, कई जगह पर यादव और मुसलमान को टिकट दिया गया है. मायावती की कोशिश यही लगती है कि इंडिया गठबंधन को अधिक से अधिक नुक़सान हो और परोक्ष रूप से बीजेपी को फ़ायदा हो.”

बीएसपी प्रमुख मायावती की रणनीति पर रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं, “मायावती ने बीजेपी की आलोचना करने के लिए जिस तरह से आकाश आनंद को हटाया है उससे भी यह समझ आता है कि कहीं न कहीं बीजेपी ने किसी तरह से उनको दबाव में ले रखा है. मायावती इस समय अपनी पार्टी के लिहाज़ से स्वतंत्र निर्णय नहीं ले पा रही हैं, इस समय उनकी चिंता ख़ुद को और परिवार को किसी तरह से बचाने पर है."

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