बेवजह पैर हिलाने जैसी आदतें आपके लिए हो सकती हैं फ़ायदेमंद

फ़िजेटिंग

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    • Author, फ़ातिमा फ़हरीन
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

अक्सर आपने लोगों को देखा होगा कि वे बैचेनी में पाँव हिलाने लगते हैं, टेबल बजाने लगते हैं या हिलने डुलने लगते हैं.

और जब हमलोग बच्चे थे तो हम में से बहुत कम ही लोग ऐसे होंगे, जिन्हें बैठने के दौरान हिलते-डोलते, कुर्सी पर झूलने या फिर कहीं खोए हुए दिमाग़ से पेंसिल के रबर को कुतरते रहने के लिए अपने टीचर या माता-पिता या घर के दूसरे रिश्तेदारों से डांट ना पड़ी हो या कम से कम टोका ना गया हो.

इसकी वजह यह है कि इस तरह की हरकतों से यह मतलब निकाला जाता था, हम पढ़ाई या किसी काम में ध्यान नहीं लगा रहे हैं. हमारे स्वभाव में दिक़क्त है या दूसरों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए ऐसा कर रहे हैं.

वैसे इन हरकतों को अंग्रेज़ी में फ़िजेटिंग कहा जाता है.

फ़िजेटिंग के बारे में जो पहले राय रखी जाती थी, अब इसे अगल नज़रिए से देखा जाना चाहिए क्योंकि फ़िजेटिंग पर हुए नए शोध से पता चलता है कि फ़िजेटिंग या चंचलता या कुलबुलाहट हमें अपना स्वस्थ वज़न बनाए रखने, तनाव को मैनेज करने और संभवतः लंबे समय तक जीवित रहने में भी मदद कर सकती हैं.

लीड्स विश्वविद्यालय में काम कर रहीं पोषण रोग विशेषज्ञ जैनेट केड ने बीबीसी के प्रोग्राम द इनफ़ाइनाइट मंकी केज के एक एपिसोड में हिस्सा लेते हुए कहा था, "अगर आप एक जगह स्थिर बैठते हैं तो यह आपके लिए अच्छा नहीं है. लेकिन बैठे रहने के दौरान बेचैन भी हैं तो वास्तव में यह आपकी सेहत को होने वाले ख़तरे को कम करता है."

आदतें

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फ़िजेटिंग है क्या?

आमतौर पर फ़िजेटिंग का मतलब समझा जाता है, नर्वस होकर बेचैन रहना, लेकिन इपसेन फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष और मेयो क्लिनिक में मेडिसिन के प्रोफ़ेसर जेम्स लेवाइन का कहना है कि यह शरीर के एक हिस्से की एक लय में की जाने वाली हरकत है जो कि आपके दिमाग़ से नियंत्रित होती है.

फ़ोर्टिस हेल्थकेयर में नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के चेयरमैन डॉक्टर समीर पारिख की राय कुछ अलग है. उनके अनुसार, फ़िजेटिंग को अच्छे या बुरे के ख़ाने में रखना ग़लत है.

बीबीसी से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में फ़िजेटिंग आपके प्रदर्शन को कम कर देता है, उनमें ग़लती करने की आशंका को बढ़ा देता है.

डॉक्टर पारिख के अनुसार, यह एक शारीरिक बीमारी के भी लक्षण हो सकते हैं.

डॉक्टर पारिख कहते हैं, “कुछ लोगों के लिए फ़िजेटिंग फ़ायदेमंद भी हो सकती है. लेकिन इस आधार पर हम कोई आम राय नहीं बना सकते हैं कि फ़िजेटिंग आपके लिए किसी बीमारी की निशानी है या आपके लिए फ़ायदेमंद है.”

मुंबई स्थित मनोरोग चिकित्सक डॉ रुक्षिदा सैय्यदा भी फ़िजेटिंग को लेकर हुए इस शोध से पूरी तरह सहमत नहीं दिखती हैं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि जिन बच्चों को खेलने कूदने का वक़्त नहीं मिलता है या खेलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है तो उनकी एक्टीविटी फ़िजेटिंग की तरह नज़र आएगी.

उनके अनुसार, फ़िजेटिंग को कई हिस्सों में बांटा जा सकता है. एक आपकी सामान्य आदत हो सकती है. लेकिन इसकी भी आशंका है कि आप किसी बीमारी के शिकार हों और यह भी संभव है कि आपकी फ़िजेटिंग बहुत प्रोडक्टिव हो. इसलिए फ़िजेटिंग को लेबल करना सही नहीं है.

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दुनिया भर में 1975 के बाद से अब तक मोटे लोगों की तादाद में तीन गुना इज़ाफ़ा हुआ है. इसकी एक वजह है हमारे काम करने का तरीक़ा.

काम के दौरान हम घंटों कुर्सी पर बैठे रहते हैं, इससे हमारे शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है. यह हमारे शरीर के ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने की क्षमता को प्रभावित करता है. यह हमारे शरीर में मौजूद चर्बी को कम करने में भी रुकावट पैदा करता है.

लेकिन अब इस बात के सबूत मिल रहे हैं कि फ़िजेटिंग से हमें अपना वज़न कम करने में मदद मिल सकती है क्योंकि यह हमें एक जगह स्थिर से बैठे रहने के बजाए हरकत करते रहने के लिए उकसाता है.

लेवाइन ने एक रिसर्च में पाया कि दफ़्तर में काम करने वाले पतले-दुबले लोगों में ज़्यादा कुलबुलाहट और चंचलता देखी गई. दफ़्तर में मोटे लोगों की तुलना में पतले-दुबले लोग ज़्यादा देर तक खड़े रहते थे और हर दिन क़रीब दो घंटे अपनी जगह से हटकर इधर-उधर चलते-फिरते थे.

वो कहते हैं कि पैर हिलाते रहने जैसे फ़िजेटिंग के आम उदाहरण से हमें अपने शरीर की अत्यधिक ऊर्जा बर्न करने में मदद मिल सकती है.

एक छोटी सी स्टडी में 24 लोगों की फ़िजेटिंग हरकतों में कितनी ऊर्जा ख़र्च हुई इसको मापा गया. इसमें पाया गया कि जो लोग बिना हिले-डुले स्थिर बैठे रहते हैं उनकी तुलना में फ़िजेटिंग करने वाले लोग अपने शरीर से 29 फ़ीसद ज़्यादा कैलोरी बर्न करते हैं.

इससे यह तो पता चल गया कि फ़िजेटिंग से शरीर की ऊर्जा संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है, लेकिन यह ख़ुद को फ़िट रखने के लिए कसरत करने का कोई विकल्प नहीं है.

हमारे वज़न को नियंत्रित करने के अलावा फ़िजेटिंग के कई और फ़ायदे भी हैं. यह हमारे दिमाग़ के लिए भी फ़ायदेमंद हो सकता है.

डॉक्टर सैय्यदा के अनुसार फ़िजेटिंग से मोटापा कम हो सकता है शायद यह कोई भी डॉक्टर आपको ऐसी सलाह नहीं देगा.

उन्होंने कहा कि फ़िजेटिंग और फ़ीज़िकल एक्टवीविटी में बहुत फ़र्क़ है और इसमें हमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि वर्क आउट करने का विकल्प फ़िजेटिंग नहीं हो सकती है.

मोटापा

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फ़िजेटिंग से होती है लंबी उम्र?

हालांकि अभी तक इस बात का कोई सीधा प्रमाण नहीं मिला है कि फ़िजेटिंग से आपकी उम्र लंबी हो जाती है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे तनाव से हमारी ज़िंदगी कम हो सकती है.

जानकारों के मुताबिक़ हमेशा स्थिर बैठे रहने से आपको दिल की बीमारी होने का ख़तरा दो गुना बढ़ जाता है. इससे डायबेटीज़, मोटापा, डिप्रेशन और एंग्ज़ायटी होने का भी ख़तरा बढ़ जाता है. फ़िजेटिंग से आपको मदद मिल सकती है.

फ़िजेटिंग से हमें अपना स्ट्रेस लेवल कम करने में मदद मिलती है. एक स्टडी की गई जिसमें 42 लोगों को एक तनावपूर्ण स्थिति में रखा गया.

उन्हें नौकरी के लिए इंटरव्यू जैसी स्थिति में बैठाया गया और उसके बाद उन्हें दो लोगों के सामने दिमाग़ से जोड-घटाव करने के लिए कुछ टास्क दिया गया.

इस स्टडी को करने वाले शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग फ़िजेटिंग बिहेवियर के शिकार थे यानी जो लोग खुजलाते थे, अपने होंठों को खाते थे या बार-बार अपने चेहरे को छूते थे उन्हें या सारी क़वायद कम तनावपूर्ण लगी थी.

ज़्यादा देर तक बैठे रहने से शरीर को जिस तरह के ख़तरे हो सकते हैं उनको भी कम करने में फ़िजेटिंग से मदद मिल सकती है.

रिसर्च में पाया गया कि बैठे रहने के दौरान पैरों को हिलाते रहने से आपके पैरों की धमनियों की हिफ़ाज़त होती है और इससे धमनियों की बीमारी को रोकने में मदद मिलती है.

फ़िजेटिंग को पहले चाहे जितना भी ख़राब समझा जाता था लेकिन अगर आपकी यह हरकत आपकी सेहत के लिए फ़ायदेमंद है तो आपको यह करते रहना चाहिए.

वो यह भी कहते हैं कि लंबे समय तक एक ही जगह और एक ही पोस्चर में बैठे रहने से बचना चाहिए और फ़िजेटिंग आपको इससे आपको निजात दिलाता है जिससे आपकी सेहत पर बहुत असर पड़ता है.

लेवाइन कहते हैं, “अगर आप अपने शरीर के स्वभाविक हरकत को करते रहने की इजाज़त देते हैं तो इसकी बहुत संभावना है कि आप ज़्यादा सेहतमंद, ख़ुश, और दुबले रहेंगे और सचमुच में कहा जाए तो आप ज़्यादा दिनों तक जीवित रहेंगे.”

डॉ समीर पारिख और डॉ रुक्षिदा सैय्यदा दोनों का मानना है कि फ़िजेटिंग से आपको फ़ायदा है या नहीं, इस बारे में कुछ भी दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है लेकिन अगर कोई व्यक्ति फ़िजेटिंग करता है तो उसको लेकर कोई नज़रिया क़ायम करना बिल्कुल ग़लत है.

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