सुरक्षा चूक पर संसद में हंगामा, एक दिन में 78 सांसदों के निलंबन पर सवाल

संसद के शीतकालीन सत्र के 11वें दिन (18 दिसंबर, 2023) सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा से कुल 78 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है.

इन निलंबित सांसदों में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, तृणमल कांग्रेस के सौगत राय, डीएमके के टीआर बालू, दयानिधि मारन समेत लोकसभा के कुल 33 सांसद हैं.

वहीं राज्यसभा से जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी, केसी वेणुगोपाल, इमरान प्रतापगढ़ी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, मोहम्मद नदीमुल हक़ समेत 45 सांसद शामिल हैं.

जिन सांसदों को निलंबित किया गया है वो 13 दिसंबर को संसद में हुई सुरक्षा में चूक के मसले पर दोनों सदनों में हंगामे के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे थे.

2001 के संसद हमले की बरसी के दिन यानी बीती 13 दिसंबर को दो शख़्स ने लोकसभा के अंदर और दो ने बाहर प्रदर्शन किया था.

उसके बाद से विपक्ष लगातार सुरक्षा में हुई उस चूक को लेकर सरकार से जवाब मांग रही है लेकिन सोमवार से पहले 14 दिसंबर को लोकसभा से कुल 13 सांसद निलंबित किए गए थे.

तब राज्यसभा से टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन को निलंबित किया गया था. शीतकालीन सत्र से अब तक कुल मिलाकर 92 सांसदों को सस्पेंड किया जा चुका है.

विपक्ष ने कहा- लोकतंत्र पर हमला

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सांसदों के निलंबन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है.

उन्होंने कहा, "सबसे पहले घुसपैठियों ने संसद पर हमला किया. अब मोदी सरकार संसद और लोकतंत्र पर हमला कर रही है."

"निरंकुश मोदी सरकार 47 सासंदों को निलंबित करके सभी लोकतांत्रिक मानदंडों को कूड़ेदान में फेंक रही है."

वे बोले, "विपक्ष-रहित संसद के साथ, मोदी सरकार अब किसी भी असमहति को कुचल सकती है."

वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कहा है कि बीजेपी के पास सदन चलाने का नैतिक अधिकार नहीं है.

वे बोलीं, "अगर वो (बीजेपी) सभी सांसदों को निलंबित कर देंगे तो सांसद अपनी आवाज़ कैसे उठाएंगे? वो तीन महत्वपूर्ण विधेयक पास कर रहे हैं. लोकतंत्र में एक व्यवस्था होती है. लोगों की आवाज़ को दबा दिया गया है. विपक्ष को पूरी तरह निलंबित करने के बाद उन्हें सदन चलाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है."

वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई बोले, "देश साफ़-साफ़ देख रहा है कि संसद के अंदर आज कैसे बुलडोज़र चलाया जा रहा है. ये विरोधियों को रौंदने की प्रक्रिया है. अमित शाह जी को, उनकी विफलताओं को बचाने के लिए विपक्ष पर, जनप्रतिनिधियों पर, जनता के मूल अधिकारों पर बुलडोज़र चला रहे हैं."

लोकसभा अध्यक्ष ने क्या कहा?

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की सुरक्षा में चूक के मामले पर कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस घटना को लेकर राजनीति हो रही है.

उन्होंने कहा, "उच्चस्तरीय जांच के लिए समिति बनाई गई है और जांच जारी है. पहले भी जब इस तरह की घटनाएं हुई तो लोकसभा अध्यक्ष के ज़रिए ही उनकी जांच प्रक्रिया आगे बढ़ी."

साथ ही विपक्ष को लेकर वे बोले, "सदन में नारेबाज़ी करना, तख़्तियां लाना, विरोध करते हुए वेल में आ जाना ठीक नहीं है. जनता भी ऐसे आचरण को पंसद नहीं करती. सदन में लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत ही चर्चा होनी चाहिए. लोकसभा से जिन सांसदों को निलंबित किया गया है उनका सुरक्षा में चूक के मामले से संबंध नहीं है."

उघर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि वो (निलंबित सांसद) नहीं चाहते कि सदन ठीक से चले. ये उनकी सोची समझी रणनीति है.

गोयल ने कहा, "राज्यसभा से 34 सांसदों को निलंबित किया गया है. 11 सांसदों का मामला प्रिवलेज कमेटी को भेजा गया है. इस तरह आज 45 सांसदों को निलंबित किया गया है."

राज्यसभा से निलंबित किए गए सांसद

राज्यसभा से अब तक कुल 34 सांसद निलंबित किए जा चुके हैं.

इनमें जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, प्रमोद तिवारी, इमरान प्रतापगढ़ी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, डेरेक ओ ब्रायन, शक्तिसिंह गोहिल, रामगोपाल यादव, जावेद अली ख़ान, डॉ. अमी याज्ञनिक, रजनी अशोकराव पाटिल, मनोज कुमार झा, फैयाज अहमद, वी सिवासदन, रामनाथ ठाकुर, अनिल प्रसाद हेगड़े, वंदना चव्हाण, महुआ मांझी, जोस के मनि,अजित कमार भयान, नरेंद्र राठवा, सईद नासिर हुसैन, फुलो देवी, रंजीत रंजन, सुखेंदु शेखर, सांतनु सेन, मौसम नूर, प्रकाश चिक बराइक, समीरुल इस्लाम, मोहम्मद नदीमुल हक़, अबीर रंजन विश्वास, एम. शनमुगम, एनआर इलेंगो, कनिमोई एनवीएन सोमू, आर गिरिराजन शामिल हैं.

इन निलंबित सांसदों में 11 के मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजा गया है.

विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट आने तक इन सभी सांसदों का निलंबन बरकरार रहेगा.

"सांसदों का निलंबन चौंकाने वाला फ़ैसला"

वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी सांसदों के निलंबन को चौंकाने वाला फ़ैसला बताती हैं.

वे कहती हैं, "ये संस्पेंशन चौंकाने वाली बात है. ये बहुत ही दुर्भाग्यशाली है. संसद में हल्ला-गुल्ला होता रहता है लेकिन आज जिस विषय पर हुआ वो अहम हैं. संसद की सिक्यूरिटी का उल्लंघन एक बहुत बड़ा मुद्दा है. अगर विपक्ष के सांसद ये मुद्दा नहीं उठाते हैं तो उनके संसद में रहने का क्या अर्थ है? उनको जनता से भेजा ही है ये मुद्दा उठान के लिए."

उन्होंने कहा कि सांसदों को निलंबन करना सही विकल्प नहीं है और उनकी बात सुननी चाहिए थी.

वे बोलीं, "मेरा मानना है कि अगर सांसदों का व्यवहार बिघ्न डालने वाला था भी तो भी ये मुद्दा ऐसा था कि सरकार को कड़वा घूंट पीकर रह जाना चाहिए था. उनकी बात सुननी चाहिए थी और चाहते तो कुछ घंटों के लिए संस्पेंड भी कर देते."

"मुझे याद है जब 1989 में बोफ़ोर्स का मुद्दा उठा था तो विपक्ष के सांसदों ने इस्तीफ़ा दे दिया था. लेकिन ये तो उलटा है, इन्हें सदन से निकाला गया है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)