इसराइली सेना ने जब मदद मांगते अपने ही नागरिकों पर चला दी गोलियाँ, ऐसा था मंज़र

इसराइल ने उन तीन बंधकों के बारे में जानकारी दी है, जिनको देश की सेना ने ग़ज़ा में अपने अभियान के दौरान ''ग़लती'' से मार दिया था.

ये तीनों इसराइल के ही नागरिक थे.

इसराइल ने कहा है कि इन बंधकों ने बचे हुए खाने के ज़रिए लिखकर मदद की गुहार लगाई थी.

बंधकों ने खाने के सहारे दीवार पर मदद मांगने के संकेत यानी एसओएस लिखे थे.

इसराइल डिफ़ेंस फ़ोंर्स के मुताबिक़, ये बंधक जिस जगह पर मारे गए वहाँ से पास की एक इमारत में कुछ वक़्त से रह रहे थे.

इस बीच हमास संचालित ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि रविवार को जाबालिया शरणार्थी कैंप पर इसराइल के हवाई हमले के कारण कम से कम 90 लोगों की जान गई है.

बीबीसी मरने वालों की संख्या की पुष्टि नहीं कर सका है.

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि ये हवाई हमला ऐसी जगह पर हुआ, जहाँ दो परिवार रह रहे थे.

हमास के पास अब भी हैं बंधक

सात अक्तूबर को इसराइल पर किए हमले के बाद हमास ने 200 से ज़्यादा इसराइलियों को बंधक बनाया था. हालाँकि कुछ बंधकों को समझौते के तहत छोड़ दिया गया.

माना जा रहा है कि ग़ज़ा पट्टी में अब भी 120 इसराइली नागरिक हमास के बंधक हैं.

इन बंधकों को छुड़वाने को लेकर इसराइली सरकार पर काफ़ी दबाव है.

इसराइल के अधिकारियों ने ये माना है कि जिन तीन नागरिकों ने समर्पण करने या शांति का संकेत देने वाले सफेद कपड़ों (झंडों) को पकड़ा हुआ था, उन्हें मारना नियमों का उल्लंघन है.

हमास के इसराइल पर किए हमलों में 1200 लोग मारे गए थे. इसके बाद इसराइली सेना ने जो सैन्य अभियान शुरू किया है, उसमें अब तक ग़ज़ा में 18 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

मरने वालों में एक बड़ी संख्या बच्चों की है. इसराइली हमलों के कारण ग़ज़ा में हज़ारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है.

जो बंधक मारे गए, वो कौन हैं?

इसराइली सेना के मुताबिक़, हमास की ओर से बंधक बनाए गए 28 साल के योतम हैम, 22 साल के समीर तलाल्का और 26 साल के एलोन शमरिज़ को ग़लती से 'ख़तरे' के रूप में पहचाने जाने के बाद मार दिया गया था.

तीनों को ग़ज़ा के उत्तर में शेजैया में मारा गया था.

सेना के एक अधिकारी पहचान छिपाए रखने की शर्त पर बताते हैं कि ये तीनों लोग बिना शर्ट के इमारत से बाहर निकले थे, इनमें से एक के हाथ में छड़ी थी और सफेद कपड़ा था.

ये अधिकारी कहते हैं, ''इन लोगों को देखकर एक सैनिक को ख़तरा महसूस हुआ. वो क़रीब 10 मीटर की दूरी पर था. सैनिक ने इन्हें आतंकवादी कहा और गोलियां चला दीं. दो लोगों की तुरंत मौत हो गई और तीसरा घायल अवस्था में इमारत में लौटा.''

इस घायल व्यक्ति ने हिब्रू भाषा में रोते हुए मदद की गुहार लगाई. ये सुनकर सेना के कमांडर ने सैनिकों से गोलियाँ ना चलाने को कहा. बाद में ये घायल व्यक्ति बाहर आया और गोली लगने के कारण उसकी मौत हो गई.

अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि ये बंधक हमास के कब्ज़े से भाग निकले थे या यहीं छोड़ दिए गए थे.

रविवार को सेना ने बताया कि ये बंधक जिस इमारत में रुके हुए थे, वहाँ की छानबीन की गई. इमारत में 'एसओएस' और 'तीन बंधकों की मदद करो' एक कपड़े पर लिखा हुआ था.

अधिकारियों का मानना है कि ये बंधक कुछ वक़्त से इसी इमारत में रुके हुए थे.

नेतन्याहू पर बढ़ता दबाव

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने इन मौतों को ‘असहनीय त्रासदी’ बताया था.

नेतन्याहू ने कहा था, ''इस मुश्किल शाम में भी हम अपने घावों पर मरहम लगाएँगे, सबक सीखेंगे और बंधक बनाए गए अपने सभी लोगों को सुरक्षित घर वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे.''

हमास के कब्ज़े से बंधकों को छुड़ाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सैन्य तरीक़ों पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं.

हेन एविगडोरी, उन लोगों में शामिल हैं, जिनकी पत्नी और बेटी को हमास ने हाल ही में रिहा किया था.

उन्होंने कहा, “अक्सर हम लोगों को यह कहते हुए सुनते हैं कि बंधकों को सैन्य तरीक़ों से बचाया जा सकता है, लेकिन ऐसा कोई सैन्य तरीक़ा नहीं है, जो उन्हें सुरक्षित वापस ला सके.”

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखते हुए उन्होंने कहा कि इसराइल को अपने लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए एक समझौते की पहल करनी चाहिए.

इसराइल हमास का समझौता

नवंबर महीने के आख़िर में इसराइल और हमास के बीच एक अस्थायी संघर्ष विराम को लेकर समझौता हुआ था. इसराइल ने इसे मिलिट्री पॉज कहा था.

इसके तहत हमास और इसराइल ने एक-दूसरे के बंधकों को छोड़ा था. इस दौरान इसराइल ने हमले बंद कर दिए थे.

इस संघर्ष विराम के ख़त्म होने के बाद से इसराइली बंधकों के परिवारों ने नेतन्याहू सरकार से नई डील करने की गुहार लगाई थी ताकि उनके अपने हमास की क़ैद से रिहा हो सकें.

पीएम नेतन्याहू ने ऐसी मांगों को किनारे करते हुए कहा- बंधकों की आज़ादी और जीत के लिए सैन्य दबाव बहुत ज़रूरी है.

ग़ज़ा पर अपने जारी हमलों के कारण इसराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बीते दिनों बढ़ा है. इसराइल का सहयोगी अमेरिका भी ग़ज़ा में हमलों को लेकर अपनी नाराज़गी व्यक्त कर चुका है.

कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि इसराइल अपना वैश्विक समर्थन खोता चला जाएगा.

रविवार को फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने भी इसराइल से तुरंत किसी समझौते को करने की बात कही थी.

हालांकि इसराइली विदेश मंत्री ने कहा कि संघर्ष विराम एक ग़लती होगी और ये हमास के लिए तोहफे़े जैसा होगा.

ब्रिटेन और जर्मनी ने भी इसराइल से हमलों को तुरंत रोकते हुए संघर्ष विराम की बात की थी.

इसराइली सेना का दावा- अब तक की सबसे बड़ी सुरंग मिली

इस बीच ग़ज़ा में इसराइल की सैन्य कार्रवाई जारी है.

इसराइली सेना ने दावा किया है कि उसे हमास की बनाई अब तक की सबसे बड़ी सुरंग मिली है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसराइली सेना ने इस सुरंग का वीडियो शेयर करते हुए दावा किया है कि ये सुरंग चार किलोमीटर लंबी है और सुरंग की एंट्री इरेज़ क्रॉसिंग से महज़ 400 मीटर की दूरी पर है.

इरेज़ क्रॉसिंग से ग़ज़ा के लोग इसराइल में काम करने और इसराइली अस्पतालों में इलाज के लिए जाते हैं. इसका इस्तेमाल ग़ज़ा के लोग करते रहे हैं.

इसराइली सेना का दावा है कि ये सुरंग कुछ जगहों पर इतनी चौड़ी है कि कार तक निकल सकती है.

बीबीसी इसराइल के दावे की पुष्टि नहीं कर सका है.

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