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हमास ने इसराइल पर हमले से पहले कैसे तैयार किए थे लड़ाके: बीबीसी की पड़ताल
- Author, अब्दलाली रागद,रिचर्ड इरविन-ब्राउन, बेनेडिक्ट गारमैन और सीन सेडन
- पदनाम, बीबीसी अरबी सेवा और बीबीसी वेरिफाई
सात अक्टूबर को जब हमास ने इसराइल पर घातक हमला किया तो पांच हथियारबंद फ़लस्तीनी समूह उसका साथ दे रहे थे.
इन सभी को 2020 और उसके बाद सेना के अंदाज में ट्रेनिंग दी गई थी. बीबीसी के विश्लेषण से यही जाहिर होता है.
इन हथियारबंद जत्थों ने ग़ज़ा में संयुक्त रूप से अभ्यास किया था. इन लोगों ने जो ट्रेनिंग ली थी उसका अंदाज ग़ज़ा में हमले से मिलता-जुलता है. जिन जगहों पर घातक हमले हुए वो इसराइल से लगे बैरियर से एक किलोमीटर की दूरी पर हैं. बाद में इस हमले को सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया गया.
ट्रेनिंग लेने वालों ने जो अभ्यास किया था उनमें बंधक बनाया जाना, इमारतों पर हमले करना और इसराइल के सुरक्षा बैरियर को तोड़ने की ट्रेनिंग शामिल थी.
आखिरी ट्रेनिंग यानी सुरक्षा बैरियर तोड़ना,हमले के महज 25 दिन पहले सिखाया गया था.
बीबीसी अरबी सेवा और बीबीसी ने मिल कर ऐसे सुबूतों को जोड़ा है जो ये दिखाते हैं कि हमास ने कैसे ग़ज़ा के अलग-अलग गुटों को साथ किया ताकि अपनी लड़ाई के तरीके को मारक बनाया जा सके. उनका इरादा इसराइल पर धावा बोलना था. वो धावा, जिसने अब इस पूरे इलाके को युद्ध क्षेत्र में बदल दिया.
‘एकता का संकेत’
29 दिसंबर को हमास के प्रमुख नेता इस्माइल हानिया ने चार अभ्यासों में से एक का एलान किया. इसका कोड नाम 'स्ट्रॉन्ग पिलर' रखा गया था. ये ग़ज़ा के अलग-अलग हथियारबंद गुटों के बीच ‘एकता का मजबूत संदेश और संकेत’ था.
ग़ज़ा के ताकतवर हथियारबंद समूहों में सबसे ताकतवर है हमास.
अलग-अलग 10 फ़लस्तीनी गुट जिस संयुक्त सैन्य अभ्यास के लिए इकट्ठा हुए थे, उनमें हमास का ही वर्चस्व था.
वॉर गेम स्टाइल में किए गए इस ऑपरेशन की निगरानी एक ‘ ज्वाइंट ऑपरेशन रूम’ कर रहा था.
ये स्ट्रक्चर 2018 में खड़ा किया गया था ताकि एक केंद्रीय कमान के तहत उन गुटों के बीच समन्वय कायम किया जा सके.
2018 से पहले हमास फ़लस्तीनी इस्लामिक जिहाद (पीआईजे) के साथ औपचारिक तौर पर समन्वय कायम करता था. पीआईजे ग़ज़ा का दूसरा बड़ा हथियारबंदगुट है.
हमास की तरह पीआईजे पर भी ब्रिटेन और कुछ दूसरे देशों ने प्रतिबंध लगा रखा है.
पिछले कुछ संघर्षों में हमास दूसरे गुटों के साथ मिलकर लड़ चुका है.
लेकिन 2020 का अभ्यास एक प्रोपेगैंडा था. ये बता रहा था कि किस तरह अलग-अलग गुट अब एक साथ आ रहे हैं.
हमास के नेता ने कहा कि पहले अभ्यास ने ही ये दिखा दिया कि अलग-अलग हथियारबंद गुट ‘स्थायी तौर पर तैयार’ हैं.
2020 का अभ्यास तीन साल के दौरान चार संयुक्त अभ्यासों में से पहला अभ्यास था.
इनमें से हर अभ्यास का वीडियो पब्लिक सोशल मीडिया चैनलों पर डाला गया था.
बीबीसी ने वीडियो की कैसे की पड़ताल
बीबीसी ने पीआईजे समेत ऐसे दस समूहों की विजुअली पहचान की है.
दरअसल बीबीसी ने उनके लड़ाकों के सिर पर लगाई जाने वाली खास तरह की पट्टी और प्रतीकों से पहचान की. स्ट्रॉन्ग पिलर ड्रिल की जो फुटेज मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर डाली गई हैं उनसे उनकी पहचान हुई है.
सात अक्टूबर के हमले के बाद इनमें से पांच समूहों ने वीडियो पोस्ट डाल कर ये दिखाया कि वे भी इस हमले का हिस्सा थे.
तीन समूहों - पीआईजे, मुजाहिदीन ब्रिगेड और अल-नसीर सलाह अल-द ब्रिगेड ने महिलाओं और बच्चों को बंधक बनाए रखने का दावा किया था.
ये कहा जा रहा है कि ग़ज़ा में अस्थायी संघर्ष विराम को इसलिए बढ़ाया गया था ताकि हमास उन बंधकों को खोजने में समय लगा सके.
ये सभी समूह एक व्यापक विचारधारा के दायरे के अंदर आते हैं. इनमें कट्टरपंथी इस्लामी से लेकर अपेक्षाकृत सेक्युलर विचारधारा से जुड़े लोग हैं. लेकिन ये सभी समूह इसराइल के ख़िलाफ़ हिंसा की मंशा रखते हैं.
रॉकेट फायरिंग और बंधक बनाने का अभ्यास
हमास के बयान ग़ज़ा में अलग-अलग हथियारबंद समूहों के बीच एकता की थीम पर जोर देते रहे हैं.
हमास का कहना है कि संयुक्त अभ्यास में सभी समूह बराबर के साझीदार हैं. जबकि इसराल पर हमले करने में वो शीर्ष भूमिका निभाता आ रहा है.
पहले फुटेज में नकाबपोश कमांडर बंकर में अभ्यास करते दिख रहे हैं. ये अभ्यास रॉकेट फायरिंग से शुरू हो रहा है.
इसमें दिख रहा है कि भारी हथियारों से लैस लड़ाके इसराइली झंडे से सजे एक नकली टैंक पर कब्जा कर लेते हैं. वो एक क्रू मेंबर को अपने कब्जे में लेते हैं और उसे एक कैदी के तौर पर घसीटते हुए ले जाते हैं. साथ ही वो इमारतों पर भी धावा बोलते हैं.
वीडियो और दहशत से भरे चश्मदीदों के बयानों से पता चलता है कि 7 अक्टूबर को सैनिकों को पकड़ने और नागरिकों को निशाना बनाने में इसी तरीके का इस्तेमाल हुआ.
इसराइल पर इस हमले में 1200 लोगों की मौत हो गई थी और लड़ाके कम से कम 240 लोगों को बंधक बनाकर साथ ले गए.
ट्रेनिंग की जानकारी मिली तो...
दूसरी स्ट्रॉन्ग पिलर ड्रिल लगभग एक साल बाद हुई. इज़ेदीन अल-कासिम ब्रिगेड के कमांडर अयमान नोफल ने कहा कि 26 दिसंबर 2021 को हुए इस अभ्यास का मकसद प्रतिरोध आंदोलन से जुड़े अलग-अलग संगठनों के बीच एकता को मजबूत करना था.
इज़ेदीन अल-कासिम ब्रिगेड हमास की आधिकारिक मिलिट्री विंग है.
उन्होंने कहा, "ये सैन्य अभ्यास दुश्मन को बताएंगे कि इसराइल ने जो बाड़बंदी और दीवारें खड़ी कर रखी हैं वो उसे नहीं बचा सकते."
हमास के एक दूसरे बयान में कहा गया कि संयुक्त सैन्य अभ्यास गज़ा के नजदीक बनी बस्तियों को खाली करने का प्रयास तेज़ करने के मकसद को बताने के लिए किया गया.
ये संगठन यहां बसे इसराइली समुदायों के लिए बस्ती शब्द का इस्तेमाल करते है.
ये अभ्यास 28 दिसंबर 2022 को एक बार फिर दोहराया गया. प्रोपेगैंडा तस्वीरों में लड़ाकों को इमारतों पर हमला करते और उन पर टैंक चढ़ाते दिखाया गया.ये किसी मिलिट्री बेस जैसा लग रहा था.
इसराइल डिफेंस फोर्सेज पहले हमास के ट्रेनिंग शिविरों पर हवाई हमले कर चुकी थी. अप्रैल 2023 में पहली स्ट्रॉन्ग पिलर ड्रिल के लिए इस्तेमाल की गई जगह पर बम बरसाए गए थे.
हमास के हमलों से पहले ग़ज़ा के नजदीक तैनात महिला सर्विलांस सैनिकों ने चेतावनी दी थी कि वहां असाधारण रूप से ड्रोन गतिविधियां बढ़ी हैं. हमास निगरानी चौकियों पर कब्जा करने की ट्रेनिंग कर रहा है.
लेकिन इसराइली मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया है कि इन रिपोर्टों को नजरअंदाज किया गया.
ग़ज़ा में आईडीएफ के डिप्टी कमांडर ने बीबीसी से कहा, "इस बारे में कई इंटेलिजेंस रिपोर्टें थीं कि वे लोग ट्रेनिंग कर रहे हैं. आखिरकार इस बारे में सार्वजनिक तौर पर वीडियो आ चुके थे. और ये सब इसराइली बाड़ों से बस सिर्फ कुछ सौ मीटर की दूरियों पर हुआ था."
लेकिन उन्होंने कहा कि इसराइली सेना को ड्रिल के बारे में पता था. लेकिन उन्होंने ये पता नहीं किया कि ट्रेनिंग किसलिए हो रही है.
आईडीएफ ने बताया कि वो नोफल को 17 अक्टूबर 2023 को मार चुके थे. नोफल इस संघर्ष में मारे गए हमास के पहले मिलिट्री लीडर थे.
2022 में नकली बेस पर हमला
हमास ने इस बात के लिए कड़ी मेहनत की कि सैन्य अभ्यास वास्तविक लगे.
2022 में हमास के लड़ाकों ने एक नकली इसराइली मिलिट्री बेस पर धावा बोला था जो इरेज़ क्रॉसिंग से सिर्फ 2.6 किलोमीटर दूर था.
ये ग़ज़ा और इसराइल के बीच वो रूट है जिस पर आईडीएफ का नियंत्रण है.
बीबीसी वेरिफाई ने ट्रेनिंग फुटेज में दिखी भौगोलिक विशेषताओं और क्षेत्र की हवाई तस्वीरों का मिलान कर ग़ज़ा के सुदूर उत्तर में, बैरियर से केवल 800 मीटर (0.5 मील) की दूरी पर साइट की ओर इशारा किया है. नवंबर 2023 तक, साइट बिंग मैप्स पर दिखाई दे रही थी.
प्रशिक्षण शिविर एक इसराइली निगरानी टावर और एक ऊंचे निगरानी बॉक्स के 1.6 किलोमीटर (1 मील) के भीतर था. ये उस सिक्योरिटी बैरियर का एक हिस्सा है, जिस पर अरबों डॉलर खर्च हुए हैं.
मॉक बेस कई मीटर नीचे खोदी गई जगह पर है. इसलिए हो सकता है कि सामने के किसी इसराइली गश्ती दल को तुरंत न दिखा हो.
लेकिन विस्फोटों की वजह से उठने वाले धुएं का गुबार उन्हें निश्चित तौर पर दिखाई दिया होगा. आईडीएफ एरियल सर्विलांस के इस्तेमाल के लिए जानी जाती है.
हमास ने इस जगह का इस्तेमाल इमारतों पर हमला करने, बंदूक की नोक पर बंधकों को अपने साथ ले जाने और सुरक्षा बैरियर को ध्वस्त करने के लिए किया था.
बीबीसी वेरिफाई ने ग़ज़ा में नौ अलग-अलग जगहों पर 14 प्रशिक्षण स्थलों का पता लगाने के लिए सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल किया है. इनमें सेटेलाइट से हासिल तस्वीरें भी शामिल है.
हमास और दूसरे लड़ाके समूहों ने यूएन ऐड एजेंसी के ड्रिस्टीब्यूशन सेंटर से 1.6 किलोमीटर (1 मील) से भी कम दूरी पर मौजूद जगह पर दो बार ट्रेनिंग ली थी. ये जगह दिसंबर 2022 में इसकी ओर से जारी एक आधिकारिक वीडियो के बैकग्राउंड में दिखाई जा रहे हैं.
जमीन, आसमान और समुद्र में ट्रेनिंग
10 सितंबर 2023 को कथित संयुक्त कमेटी रूम ने डेडिकेटेड टेलीग्राम चैनल पर ऐसी तस्वीरें प्रकाशित की जिनमें मिलिट्री पोशाक में लोग सैन्य प्रतिष्ठानों की निगरानी करते हुए दिख रहे थे. ये सैन्य प्रतिष्ठान ग़ज़ा बैरियर के किनारे मौजूद थे.
दो दिन बाद, चौथा स्ट्रॉन्ग पिलर सैन्य अभ्यास हुआ. और 7 अक्टूबर तक इस अभूतपूर्व हमले में इस्तेमाल होने वाले सभी तरीकों का अभ्यास कर लिया गया था.
लड़ाकों को उसी तरह के सफेद रंग के टोयोटा पिकअप ट्रकों में सवार होते हुए फिल्माया गया था, जिन्हें इसके अगले महीने दक्षिणी इसराइल में घूमते देखा गया था.
प्रोपेगैंडा वीडियो में बंदूकधारियों को नकली इमारतों पर हमला करते और अंदर डमी टार्गेट पर गोलीबारी करते दिखाय गया था.
नाव का इस्तेमाल करने और गोताखोरों के जरिये भी समुद्र तट पर हमले की ट्रेनिंग दी गई थी.
इसराइल ने कहा है कि उसने 7 अक्टूबर को अपने समुद्री तटों पर हमास की नावों को उतरने कोशिश को नाकाम कर दिया था.
हालांकि हमास ने स्ट्रॉन्ग पिलर ट्रेनिंग के प्रोपेगैंडा मोटरसाइकिल और पैराग्लाइडर ट्रेनिंग का प्रचार नहीं किया गया.
7 अक्टूबर के तीन दिन बाद हमास की ओर से पोस्ट किए गए एक ट्रेनिंग वीडियो में मोटरसाइकिलों को गुजरने देने के लिए बैरियर और बाड़ों को ध्वस्त किया जा रहा है.
यह एक ऐसा तरीका है जिसका इस्तेमाल वो दक्षिणी इसराइल में अपने समुदायों तक पहुंचने के लिए करते हैं. हमने पहले के ऐसे ही वीडियो की पहचान नहीं की है.
पैराग्लाइडिंग उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे लड़ाकों की फुटेज को 7 अक्टूबर को उस समय तक नहीं प्रकाशित किया गया था, जब हमले हो रहे थे.
हमले के दिन शेयर किए गए एक ट्रेनिंग वीडियो को बीबीसी वेरिफाई ने साबित किया कि इसे 25 अगस्त 2022 से कुछ समय पहले रिकॉर्ड किया गया था और इसे ईगल स्क्वाड्रन नाम की एक कंप्यूटर फ़ाइल में स्टोर किया गया था.
हमास अपने हवाई डिवीजन के लिए इस नाम का इस्तेमाल करता है. ये बताता है कि पैराग्लाइडर प्लान एक साल से अधिक समय से काम कर रहा है.
चौंकाने वाले काम
आईडीएफ कमांडरों के हवाले से दी गई रिपोर्टों में कहा गया है कि माना जा रहा था कि 7 अक्टूबर से पहले, ग़ज़ा पट्टी में हमास के लगभग 30,000 लड़ाके थे. यह भी अनुमान था कि हमास छोटे समूहों से कई हज़ार लड़ाकों को ला सकता है.
दूसरे गुटों के समर्थन के बगैर भी हमास फ़लस्तीनी हथियारबंद गुटों में अब तक का सबसे शक्तिशाली समूह है.
रिपोर्ट बताती है कि गुटों को प्रेरित करने में हमास की दिलचस्पी ग़ज़ा के भीतर कम से कम अपनी तादाद बढ़ाने की कोशिश के तहत आ रही थी.
आईडीएफ ने पहले अनुमान लगाया था कि 7 अक्टूबर के हमले में 1,500 लड़ाके शामिल हुए थे.
‘टाइम्स ऑफ इसराइल’ ने इस महीने की शुरुआत में लिखा था कि आईडीएफ अब मानता है कि ये तादाद लगभग 3000 थी.
वास्तविक संख्या चाहे जो हो लेकिन इसका मतलब ये है कि ग़ज़ा में हथियारबंद लड़ाके कुल लड़ाकों का एक छोटा हिस्सा ही थे. छोटे गुटों के कितने लड़ाकों ने हमले या स्ट्रॉन्ग पिलर अभ्यास में हिस्सा लिया, इसकी सटीक संख्या बताना मुश्किल है.
हमले की तैयारी के लिए दूसरे गुटों के समर्थन हासिल करने के बारे में लेबनानी सेना के पूर्व ब्रिगेडियर जनरल हिशाम जाबेर (जो अब मिडिल ईस्ट सेंटर फॉर स्टडीज एंड रिसर्च) ने कहा है कि केवल हमास को ही अंतिम योजना के बारे में मालूम था.
शायद आखिरी दिन ही हमास ने इन गुटों को इस योजना में शामिल होने को कहा.
किंग्स कॉलेज लंदन में सिक्योरिटी स्टडीज के एक सीनियर लेक्चरार एंद्रेस क्रिग ने बीबीसी से कहा, "हमले के लिए भले ही सेंट्रलाइज प्लानिंग की गई हो लेकिन ये डी-सेंट्रलाइज्ड तरीके से लागू की गई. हर स्कवॉड उसी तरह इस योजना को लागू कर रहा था जैसा उसे मुफीद लग रहा था."
उन्होंने कहा कि हमास के अंदर के लोग इसराइल की सुरक्षा कमजोरियों पर आश्चर्यचकित थे. ऐसा लगा कि चरमपंथियों ने ऑफलाइन कम्युनिकेशन का सहारा लिया था. इसलिए इसराइल की सर्विलांस टेक्नोलॉजी उन्हें पकड़ नहीं पाई.
यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरन रिलेशन्स में मध्य पूर्व विश्लेषक ह्यू लोवात ने कहा कि इसराइल को अगर संयुक्त मिलिट्री ड्रिलिंग के बारे में पता भी होगा तो भी वो गलत निष्कर्ष पर पहुंचे.
उन्होंने उनकी इस गतिविधि को स्टैंडर्ड मिलिट्री ड्रिल ही समझा. इसके जरिये किसी बड़े हमले की आशंका को अंदाजा वो नहीं लगा पाए.
इस आलेख में उठाए गए मुद्दों के बारे में पूछने पर इसराइली डिफेंस फोर्सेज ने कहा कि फिलहाल वो "आतंकी संगठन हमास की ओर से आने वाले ख़तरों को खत्म करने पर फोकस किए हुए हैं."
सेना ने कहा कि अगर हमले के संकेत को समझने में कोई ग़लती भी हुई है तो इस पर बाद में विचार किया जाएगा.
बहरहाल इसराइल को इस बात का आकलन करने में कई साल लग सकते हैं कि क्या वो 7 अक्टूबर के 'नरसंहार' को रोकने का मौका चूक गए.
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