हमास से बंधकों की रिहाई के समझौते के बाद भी इसराइली परिवारों को भरोसा नहीं

    • Author, लिपिका पेलहम
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

हेन एविग्दोरी इसराइल के जाने माने टेलीविज़न कॉमेडी राइटर हैं. उनका कहना है कि उनका काम हमेशा लोगों को हँसाने का रहा है. लेकिन पिछले 48 दिनों से यह ‘मेरी बेटियों को वापस लाने’ के अभियान में बदल गया है.

उनकी अंतिम बात, अपनी 52 साल की पत्नी शैरोन और 12 साल की बेटी नोआम से सात अक्टूबर को सुबह 10 बजे हुई थी. 'उन्होंने कहा था कि वे सेफ़ रूम में जा रहे हैं और सब कुछ ठीक होने वाला है.'

हेन कहते हैं, “वे दक्षिणी इसराइल में सबसे शांतिपूर्ण किबुत्ज़ गए थे. लेकिन वहाँ जो कुछ हुआ, उन सबके लिए हममें से कोई तैयार नहीं था.”

“किबुत्ज़ बेरी में रह रहे मेरी पत्नी के भाई को देखने के लिए हम सभी जाने वाले थे, लेकिन अंतिम पलों में बेटों ने घर पर ही रुकने का फ़ैसला किया जबकि बेटियां साथ चली गईं. अगली ख़बर हमें दक्षिण में बहुत बड़े उपद्रव की मिली और पहले दो हफ़्ते तक तो उन्हें लापता घोषित कर दिया गया था- और इसके बाद हमें उनके बंधक बनाए जाने का पता चला.”

हेन एविग्दोरी के परिवार और अधिकांश बंधकों ज़िंदा रहने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं. बुधवार को जब बंधकों के रिहाई के लिए हुए समझौते की घोषणा की गई उसके बाद उनमें उम्मीद जगी है कि रिहा होने वाले लोगों में उनकी पत्नी और बेटी भी होगी.

वो कहते हैं, “पिछले 48 दिनों में उम्मीद ही हमारा एक मात्र सहारा रहा है. लेकिन मैं बहुत सतर्क हूँ. मैं अपनी उम्मीदों को बहुत ऊंचा नहीं करना चाहता. मैंने 16 साल के बेटे और पूरे परिवार से यही कहा है कि जब तक हम उन्हें अपनी आँखों से नहीं देख लेते तब तक हमें किसी बात पर भरोसा नहीं है.”

हेन कहते हैं, “मैं उन स्थितियों के बारे में नहीं सोचना चाहता, जिनमें उनको रखा जा रहा है. हमास का कहना है कि उसने बंधकों को ग़ज़ा में सुरंगों और सुरक्षित जगहों पर छिपा रखा है.”

वो कहते हैं, "मैं कल्पना न करने की कोशिश करता हूँ. मैं उनके बारे में सोचने से ख़ुद को रोकता हूं क्योंकि मेरा एक मिशन है और ये मिशन है, उन्हें वहाँ से बाहर लाने का. जितना ही मैं उनके हालात के बारे में सोचूंगा, उतनी ही हताशा बढ़ेगी."

बंधकों की रिहाई का दबाव

इस बीच हेन इसराइली सरकार, रेड क्रॉस और क़तर की मध्यस्थता करने वाली टीम के जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात कर चुके हैं.

उनका कहना है कि उन्होंने इसराइली सरकार पर "सैन्य विजय के ऊपर बंधकों की रिहाई" को वरीयता देने के लिए काफ़ी दबाव डाला.

सोमवार को, इसराइली नेताओं और परिवारों से इसराइली संसद (नेसेट) में गर्मागरम बहस में हेन ने सांसदों से कहा कि “वे अरबों को मारने की बात बंद करें और यहूदियों को बचाने की बातचीत शुरू करें.”

हेन कहते हैं कि 'उनका हमेशा से मानना रहा है कि अंत में बिना समझौते के उनके परिवार को वापस लाने का कोई रास्ता नहीं है. सैन्य अभियान चलाकर 240 लोगों को ग़ज़ा से वापस लाने का विकल्प टिकाऊ नहीं है.''

लेकिन वो ये भी कहते हैं कि "अगर सभी बंधक रिहा हो जाते हैं, तब भी इस समझौते को लेकर कोई अच्छी फीलिंग नहीं होगी, जब तक हमास को ज़मीनी अभियान का अहसास नहीं हो जाता."

हेन कहते हैं कि इसका मतलब है कि "हमास के वजूद को ख़त्म करना और हर एक बंधक को छुड़ाना आपस में जुड़े हुए हैं. "

उम्मीद की नई किरण

35 साल के सैगुई डेकेल-चेन एक अमेरिकी इसराइली नागरिक हैं, जो किबुत्ज़ नीर ओज़ में हमास के हमले के बाद से ही लापता हैं.

उनके पिता जोनाथन का कहना है कि समझौता इस बात के आगे बढ़ने का संकेत हो सकता है लेकिन हेन की तरह उनका भी मानना है कि उन्हें तभी भरोसा होगा जब बंधकों का पहला जत्था इसराइल पहुंचेगा.

वो कहते हैं, “मेरा बेटा शांति प्रिय नागरिक है. उसकी दो बेटियां हैं और उसकी पत्नी आठ महीने की गर्भवती है. अगर समझौता वाक़ई अमल में आता है तो मैं, मेरा किबुत्ज़ नीर ओज़ और पूरा देश महिलाओं और बच्चों की वापसी का बेशक स्वागत करेगा.”

हालंकि कुछ परिवार इस बात को लेकर सशंकित हैं कि कहीं अंतिम पलों में कोई नई शर्त न आड़े आ जाए.

तीन साल की इसराइली-अमेरिकी अबिगैल को हमास ने सात अक्टूबर को किडनैप कर लिया, जबकि उसके माँ-बाप मारे गए.

अबिगैल की रिश्तेदार हिर्श नाफ़ताली ने बीबीसी के अमेरिकी पार्टनर सीबीएस से कहा, "बंधकों के पहले जत्थे में हम उसके होने की प्रार्थना कर रहे हैं."

रूबी चेन के 19 साल के बेटे इटे को सात अक्टूबर को हमास ने अगवा कर लिया. वो इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ की टैंक यूनिट के साथ सक्रिय ड्यूटी पर थे.

समझौते के बाद रूबी ने कहा कि वो ख़ुश हैं कि सभी बंधक वापस घर लौट रहे हैं.

चेन जानते हैं कि उनका बेटा उन 50 लोगों में नहीं होगा, जिनकी रिहाई होनी है लेकिन उन्हें इससे उम्मीद जगी है.

वो कहते हैं कि हो सकता है कि "इससे बाकी लोगों के रिहाई का रास्ता निकले."

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