अभिषेक बनर्जी, बांसुरी स्वराज ने संसद में ऐसा क्या कुछ कहा कि चर्चा में आए

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टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने 24 जुलाई को संसद में जो कुछ कहा, वो चर्चा में बना हुआ है.
लोकसभा में अभिषेक बनर्जी और स्पीकर ओम बिरला के बीच हुई बहस के वीडियो लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं.
अभिषेक ने अपने भाषण के दौरान मोदी सरकार को घेरते हुए जो कुछ कहा, उसका विरोध करने के लिए बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज भी खड़ी हो गईं.
बांसुरी ने अभिषेक के भाषण से कुछ शब्दों को एक्सपंज करने के लिए कहा.
अभिषेक बनर्जी ने अपने भाषण में कुछ साल पहले कोलकाता में एक फ़्लाईओवर गिरने के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि उस वक़्त मोदी जी ने कहा कि यह ‘यह एक्ट ऑफ़ गॉड नहीं, एक्ट ऑफ़ फ़्रॉड है.'

अभिषेक ने कहा, “जब गुजरात के मोरबी में पुल गिरा था तो यह क्या था एक्ट ऑफ़ गॉड या एक्ट ऑफ़ फ़्रॉड? जब एयरपोर्ट की छत गिरी तो वह क्या था ‘एक्ट ऑफ़ गॉड या एक्ट ऑफ़ फ़्रॉड’, जब पहली बारिश में अयोध्या में राम मंदिर की छत चूने लगी तो यह ‘एक्ट ऑफ़ गॉड या एक्ट ऑफ़ फ़्रॉड’ था?”
अभिषेक बनर्जी ने रेल समेत कई हादसों का ज़िक्र करते हुए सवाल उठाया कि ये सब क्या थे, एक्ट ऑफ़ गॉड या एक्ट ऑफ़ फ़्रॉड? इसपर विपक्षी सांसदों ने जमकर तालियाँ बजाईं.
लेकिन जब अभिषेक बनर्जी ने आम बजट बोलते हुए साल 2016 में हुई नोटबंदी का ज़िक्र किया और उसे असफल बताया, तब उनके और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बीच बहस देखने को मिली.

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अभिषेक बनर्जी ने क्या बोला
नोटबंदी के मुद्दे पर बोल रहे अभिषेक बनर्जी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने टोकते हुए कहा, “साल 2016 के बाद तो 2019 के लोकसभा चुनाव हो गए. आप वर्तमान बजट पर बोलें.”
अभिषेक बनर्जी ने इसका विरोध किया और कहा, “कोई 60 साल पहले के जवाहरलाल नेहरू की बात करेगा तो आप कुछ नहीं बोलेंगे. मैं 5 साल पहले हुई नोटबंदी की बात करूंगा तो आप कहेंगे कि अभी की बात करो. यह नहीं चलेगा. बिप्लब देव 50 साल पहले के आपातकाल की बात करेंगे लेकिन मैं बोलूंगा तो आपको चुभ रहा है.”
अभिषेक बनर्जी ने अपनी पार्टी की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर संसद में की गई टिप्पणी पर भी सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि आपने पहले कहा था कि जो लोग इस सदन के सदस्य नहीं है उसपर टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए.
अभिषेक बनर्जी ने सत्ताधारी सांसदों से ममता बनर्जी पर की गई टिप्पणी के लिए माफ़ी की मांग की. इसपर टीएमसी के कई सांसदों ने खड़े होकर उनका समर्थन किया.
इस बात पर ओम बिरला ने तीखे शब्दों में कहा, “आपको बोलना है तो बोलिए, मैंने उस टिप्पणी को रिकॉर्ड से निकलवा दिया है, आप मुझे किसी से माफ़ी मंगवाने का निर्देश नहीं दे सकते.”
अभिषेक बनर्जी बुधवार को लोकसभा में अपने भाषण में साल 2020 में लागू किए गए किसान कानूनों का ज़िक्र कर रहे थे.
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी बहस के सरकार ने किसानों के लिए तीन विधेयक पारित किए थे. इसके लिए किसानों, किसान संगठनों या विपक्षी दलों के साथ चर्चा नहीं की गई थी.
इसपर ओम बिरला ने उन्हें रोकते हुए कहा, “इस रिकॉर्ड को स्पष्ट कर लें, इस सदन में किसान विधेयक पर साढ़े 5 घंटे चर्चा हुई थी.”
इसपर अभिषेक बनर्जी समेत कई विपक्षी सांसदों ने कहा कि बिल पर कोई चर्चा नहीं हुई थी.
ओम बिरला ने फिर से कहा, “जब स्पीकर बोलता है, तो बोलता है और वह सही बोलता है.”

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बांसुरी स्वराज पर चर्चा तेज़
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज के लोकसभा में अपनाए रुख को लेकर भी काफ़ी चर्चा हो रही है.
बांसुरी स्वराज पहली बार लोकसभा की सदस्य बनी हैं.
अभिषेक बनर्जी ने कहा, ''जो लोग इस सदन में ताली बजा रहे हैं. 700 किसान मारे गए, उनको मौत के घाट उतारा गया, एक आदमी ने एक मिनट के लिए खड़ा होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी?''
इसपर सत्ता पक्ष के कई सांसदों ने विरोध किया तो अभिषेक बनर्जी ने उनकी तरफ इशारा करते हुए आक्रोश में कहा कि ‘आपके हाथ खून से सने’ हुए हैं.
अभिषेक बनर्जी के इस आरोप पर बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने आपत्ति जताते हुए कहा, “इन्होंने हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत टिप्पणी की और जिन शब्दों का इस्तेमाल किया उसके लिए इन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए और ये शब्द रिकॉर्ड से हटा देना चाहिए.”
बांसुरी स्वराज के बोलने के तरीके को सोशल मीडिया पर कई लोग पूर्व बीजेपी सांसद स्मृति इरानी से जोड़ रहे हैं.
हालांकि ओम बिरला और अभिषेक बनर्जी के बीच हुई बहस ही ज़्यादा चर्चा में है.
ये पहली बार नहीं है जब दोबारा स्पीकर बनने के बाद से ओम बिरला चर्चा में आए हैं.
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ओम बिरला मोदी सरकार 3.0 में रहे हैं निशाने पर
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी संसद में लोकसभा अध्यक्ष पर अपना माइक बंद करने का आरोप लगा चुके हैं.
हालांकि ओम बिरला इसके बाद ''मैं माइक बंद नहीं करता हूं, यहाँ कोई बटन नहीं होता है'' कहते हुए भी सुने गए थे.
संसद में शपथ लेने के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ‘जय हिंद, जय संविधान’ का नारा लगाया था.
उनकी बात सुनकर विपक्ष के सांसदों ने भी ‘जय संविधान’ का नारा लगाया. सदन को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा, “संविधान की शपथ तो ले ही रहे हैं. ये संविधान की शपथ है”
उनकी इस टिप्पणी का कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने विरोध किया और कहा, “सर इस पर आपको आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी.”
इसके जवाब में ओम बिरला ने कहा, “किस पर आपत्ति और किस पर आपत्ति नहीं, इस पर सलाह मत दिया करो. चलो बैठो.”
दीपेंद्र हुड्डा पर टिप्पणी के ख़िलाफ़ कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर लिखा था, “क्या भारत की संसद में 'जय संविधान' नहीं बोला जा सकता?
मोदी सरकारी के तीसरे कार्यकाल में समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव भी ओम बिरला पर निशाना साथ चुके हैं.
इसके अलावा भी कई सांसदों और ओम बिरला के बीच बहस देखने को मिली है. इससे पहले भी 17 वीं लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला काफ़ी चर्चा में रहे थे.
संसद के शीतकालीन सत्र 2023 के दौरान 141 सांसदों को निलंबित किया गया था. इनमें 95 लोकसभा और 46 राज्यसभा सांसद शामिल थे.
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