ओम बिरला: संविधान और दीपेंद्र हुड्डा से बर्ताव पर विवाद के बीच दूसरी पारी की शुरुआत

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लोकसभा का लगातार दूसरी बार स्पीकर बनने के बाद से ओम बिरला चर्चा में बने हुए हैं.
संसद में शुक्रवार यानी 28 जून को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जब नीट परीक्षाओं के मुद्दे पर बोलने को खड़े हुए तो वो स्पीकर ओम बिरला से माइक देने (ऑन करने) की बात कहते सुनाई दिए.
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ज़रूरी मुद्दों पर माइक छीनकर युवाओं की आवाज़ को दबाया जा रहा है.
हालांकि ओम बिरला राहुल गांधी से लोकसभा में ''माइक बंद नहीं करता हूं, यहां कोई बटन नहीं होता है'' कहते हुए भी सुने गए.
ये पहली बार नहीं है, जब ओम बिरला संसद से जुड़ी चर्चाओं के केंद्र में आए हैं.
18वीं लोकसभा में ओम बिरला के नाम पर एनडीए सरकार ने विपक्ष से सहमति बनाने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी.
इतिहास में इससे पहले ऐसे तीन ही मौके आए हैं जब लोकसभा स्पीकर पद के लिए मतदान हुआ था.
1952, 1967 और 1976 के बाद 2024 में यानी 18वीं लोकसभा में विपक्ष ने कहा कि वह अपना उम्मीदवार उतारेगा.
ओम बिरला के विरोध में इंडिया गठबंधन ने केरल से सांसद के सुरेश को उतारा.
हालांकि विपक्ष ने स्पीकर चुनाव के लिए वोटिंग की मांग नहीं की और ध्वनि मत से ओम बिरला को चुन लिया गया.
स्पीकर पद पर चुने जाने के बाद पीएम मोदी से लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उन्हें बधाई देते हुए नजर आए, लेकिन कुछ ही देर में संसद का माहौल बदल गया.

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दीपेंद्र हुड्डा से बर्ताव
हाल ही में ओम बिरला कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा से सख़्त लहज़े में बात करते हुए दिखाई दिए.
इस वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर किए जा रहा है और विपक्ष के नेता भी ओम बिरला के इस व्यवहार पर आपत्ति जता रहे हैं.
दरअसल, संसद में सदस्यता की शपथ लेने के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ‘जय हिंद, जय संविधान’ का नारा लगाया था.
उनकी बात सुनकर विपक्ष के सांसदों ने भी ‘जय संविधान’ का नारा लगाया. इसके बाद जब शशि थरूर स्पीकर से हाथ मिलाकर नीचे उतरने लगे तो सदन को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा, “संविधान की शपथ तो ले ही रहे हैं. ये संविधान की शपथ है”
उनकी इस टिप्पणी का कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने विरोध किया और कहा, “सर इस पर आपको आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी.”
इसके जवाब में ओम बिरला ने कहा, “किस पर आपत्ति और किस पर आपत्ति नहीं, इस पर सलाह मत दिया करो. चलो बैठो.”

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हुड्डा और प्रियंका गांधी क्या बोलीं
स्पीकर की इस टिप्पणी पर दीपेंद्र हुड्डा ने नाराजगी जाहिर की है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “क्या अब देश की संसद में भी ‘जय संविधान’ बोलना गलत हो गया है? देश की जनता फैसला करेगी कि संसद में जय संविधान बोलना गलत है या ‘जय संविधान’ बोलने वाले को टोकना गलत है.”
दीपेंद्र हुड्डा पर ओम बिरला की टिप्पणी को कांग्रेस पार्टी ने मुद्दा बना दिया है.
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “क्या भारत की संसद में 'जय संविधान' नहीं बोला जा सकता? संसद में सत्ता पक्ष के लोगों को असंसदीय और असंवैधानिक नारे लगाने से नहीं रोका गया, लेकिन विपक्षी सांसद के 'जय संविधान' बोलने पर आपत्ति जताई गई. चुनावों के दौरान सामने आया संविधान विरोध अब नए रूप में सामने है जो हमारे संविधान को कमजोर करना चाहता है.”
उन्होंने लिखा, “जिस संविधान से संसद चलती है, जिस संविधान की हर सदस्य शपथ लेता है, जिस संविधान से हर नागरिक को जीवन की सुरक्षा मिलती है, क्या अब विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए उसी संविधान का विरोध किया जाएगा?”
आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने लिखा, “जय संविधान सुनकर संघी बुरी तरह चिढ़ जा रहे हैं. जहां जाएं इन्हें संविधान कहें. याद रखो संघियों तुमको देश का संविधान खत्म नहीं करने देंगे.”

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ओम बिरला को सलाह
इससे अलग सदन में शपथ लेते वक्त कई विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने ओम बिरला से बातों ही बातों में पक्षपात ना करने की अपील की.
बुधवार को स्पीकर चुने जाने पर अखिलेश यादव ने ओम बिरला को बधाई दी और उन्होंने उम्मीद जताई की स्पीकर का अंकुश विपक्ष के साथ-साथ सत्तापक्ष पर भी रहेगा.
अखिलेश यादव ने कहा, “जिस पद पर आप बैठे हैं, उससे बहुत गौरवशाली परंपराएं जुड़ी हुई हैं. हम सब यही मानते हैं कि यह बिना भेदभाव के आगे बढ़ेगा और लोकसभा अध्यक्ष के रूप में आप हर सांसद और हर दल को बराबरी का मौका देंगे.”
उन्होंने कहा कि सदन में जनप्रतिनिधि की आवाज ना दबाई जाए और निष्कासन जैसी कार्रवाई दोबारा न हो, क्योंकि इससे संसद की गरिमा को ठेस पहुंचती है.
वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी ऐसी ही बातें दोहराई.
उन्होंने कहा, “सरकार के पास पॉलिटिकल पावर है, लेकिन विपक्ष भी भारत के लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है. पिछली बार की तुलना में इस बार विपक्ष ज्यादा बड़ी आवाज़ का प्रतिनिधित्व करता है. हम आपको आपके काम में मदद करना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि सदन अच्छे से चले.”
उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी बात कहने का मौका सदन में दिया जाए. राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि स्पीकर उन्हें बोलने, जनता का प्रतिनिधित्व करने देंगे.

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सांसद रुहुल्लाह मेहदी को नसीहत
श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने पहले ही दिन जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और सदन में ''एक मुस्लिम सांसद को आतंकवादी'' कहने का मुद्दा उठाया.
रुहुल्लाह की टिप्पणी से ओम बिरला काफी नाराज दिखाई दिए.
ओम बिरला ने उन्हें सदन की कार्यवाही को समझने और फिर इस तरह की टिप्पणी करने की नसीहत दी.
ओम बिरला ने कहा, “एक मिनट बैठिए, माननीय सदस्य ये सदन का पहला दिन है. आप बोलते समय क्या टिप्पणी कर रहे हैं, उसका ध्यान रखें. अभी कार्यकाल को देखो, फिर टिप्पणी करो.”
जब रुहुल्लाह ने दावा किया कि अनुच्छेद 370 का बिल एक मिनट में लाया गया और आधे घंटे में पास किया गया.
उन्हें बीच में रोकते हुए ओम बिरला ने कहा, “इन्हें ज्ञान नहीं है. उस पर साढ़े नौ घंटे तक डिबेट हुई थी. चलो बैठें.”

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हरसिमरत कौर से क्या कहा
शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर ने फिर से स्पीकर चुने जाने पर ओम बिरला को बधाई दी.
बधाई देने के बाद उन्होंने कहा कि एक छोटे से राज्य की छोटी सी पार्टी की वे इकलौती सदस्य हैं जो चौथी बार संसद में पहुंची हैं.
हरसिमरत कौर ने कहा- आपसे अपील है कि हमें पहले से ज़्यादा बोलने का मौक़ा मिलेगा.
उसके बाद उन्होंने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर हमला करना शुरू किया, लेकिन ओम बिरला ने उन्हें बीच में ही रोक दिया.
ओम बिरला ने कहा, “आप भाषण बाद में देना, प्लीज. नहीं…क्या पहले मौका नहीं दिया है क्या?”

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पिछली सरकार में किन कारणों से चर्चा में रहे
17 वीं लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला काफी चर्चाओं में रहे थे.
संसद के शीतकालीन सत्र 2023 के दौरान 141 सांसदों को निलंबित किया गया था. इनमें 95 लोकसभा और 46 राज्यसभा सांसद शामिल थे.
इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में सांसदों का निलंबन नहीं हुआ था. इस निलंबन को अभूतपूर्व कहा गया था.
इनमें मनोज झा, जयराम रमेश, रणदीप सिंह सुरजेवाला, प्रमोद तिवारी, फ़ारूक़ अब्दुल्लाह, शशि थरूर, मनीष तिवारी, डिंपल यादव जैसे पुराने और दिग्गज सांसद शामिल थे.
संसद में 'सुरक्षा चूक' को लेकर सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे थे, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई थी.
इससे पहले 15 मार्च, 1989 को लोकसभा से 63 सांसदों को निकाला गया था.
ये सांसद इंदिरा गांधी हत्याकांड की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट सदन में पेश करने की मांग को लेकर हंगामा कर रहे थे.

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ओम बिरला की यात्रा
ओम बिरला ने कभी राजस्थान के कोटा में स्कूली संसद से अपना सफ़र शुरू किया और फिर यह यात्रा उन्हें भारत की संसद के स्पीकर पद तक ले गई.
शुरू में वे कोटा में गुमानपुरा सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्र संसद के प्रमुख बने थे. फिर बिरला ने अपनी सक्रियता जारी रखी और एक स्थानीय कॉलेज में छात्र संघ अध्यक्ष पद के लिए दांव लगाया. मगर एक वोट से शिकस्त खा गए.
बिरला ने इस पराजय को भूला दिया और अपने काम में लग गए. वे कोटा में सहकारी उपभोक्ता भंडार संघ के अध्यक्ष चुने गए और यह सार्वजनिक क्षेत्र में उनकी पहली हाजिरी थी.
जानकर कहते हैं, ''वे अवसर हासिल करने और उस मौक़े को अपने हक़ में ढालने की काबिलियत रखते हैं. बिरला ने कॉमर्स विषय में स्नातकोत्तर तक की तालीम हासिल की है. लेकिन इस पढ़ाई के बावजूद वे सियासत के अच्छे विद्यार्थियों में गिने जाते हैं. वे एक ऐसा नेता हैं जो बीजेपी में ज़िला स्तर तक सक्रिय रह कर विधानसभा होते हुए लोकसभा तक पहुंचे है.''
वे तीन बार कोटा से विधायक रहे हैं. उनके विरुद्ध चुनाव लड़ चुके एक नेता ने कहा- 'वे प्रबंध कौशल में निपुण हैं. यह उनकी बड़ी खूबी है.'
पार्टी के भीतर चुनाव प्रबंधन और बूथ स्तर तक कुशल तालमेल के लिए ओम बिरला की बानगी दी जाती है.
वे बीजेपी में युवा मोर्चा के राजस्थान के अध्यक्ष और बाद में मोर्चे के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं.
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