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व्लादिमीर पुतिन चीन जाकर शी जिनपिंग से क्या हासिल करना चाहते हैं
- Author, स्टीफ़न मैकडॉनेल
- पदनाम, बीबीसी के चीन संवाददाता
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने देश के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी चीन के अहम दौरे पर हैं.
इस दौरान वह चीन के साथ रिश्तों को मज़बूती देने और पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ एक गठबंधन तैयार करने की कोशिश करेंगे.
रूस के साथ लगती चीनी सीमा पर एक छोटा सा शहर है- हेइह.
लोग यहां आकर पड़ोस के ब्लागोवेशचेंस्क शहर की झलक देखने आते हैं जो नदी के दूसरे छोर पर बसा है. लेकिन यहां आने वाले लोगों की संख्या ज़्यादा नहीं है.
नदी में घुमाने वाली एक नाव काफ़ी देर से ठहरी हुई है. पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए उसमें ख़ुशनुमा चीनी गाने बज रहे हैं लेकिन कोई भी टिकट नहीं ख़रीद रहा. ऐसा लगता है कि यह दिन भर यहीं खड़ी रहेगी.
नदी के दूसरे किनारे पर रूसी तटरक्षकों का जहाज़ खड़ा है, जिसपर अधिकारी गुनगुनी धूप में डेक पर कसरत करके समय बिता रहे हैं.
व्लादिमीर पुतिन जब पिछले साल की शुरुआत में शीतकालीन ओलंपिक खेलों का उद्घाटन करने बीजिंग आए थे तब उन्होंने शी जिनपिंग के साथ मिलकर दोनों देशों के बीच एक ऐसी नई साझेदारी की घोषणा की थी जिसकी कोई सीमा न हो.
अब, जबकि रूसी राष्ट्रपति फिर से चीन की राजधानी में हैं, तब चीन का सरकारी मीडिया इन दोनों देशों के सम्बंधों के फ़ायदे बताने में व्यस्त है.
एक तरह से इस रिश्ते से दोनों देशों की सरकारों का फ़ायदा है. वैश्विक मंच पर अलग-थलग कर दिए जाने पर वे एक-दूसरे का सहारा बन सकती हैं.
और हाथ मिलाते हुए दोनों नेताओं की तस्वीरें लोगों को यह दिखाने में मददगार साबित हो सकती हैं कि सब कुछ सामान्य है. हालांकि, दोनों देशों की सीमाओं पर कारोबारी गतिविधियां राजनीतिक दिखावे से मेल नहीं खातीं.
दिखावा और हक़ीक़त
हेइह से ब्लागोवेशचेंस्क के लिए बने नए पुल को सीमा से होने वाले व्यापार के नए दौर का प्रतीक बताया गया था. मगर आप एक घंटे तक देखेंगे तो भी आपको किसी ओर से कोई गाड़ी आती नहीं दिखेगी.
शहर के बीचोंबीच, नदी के साथ फ़ोटो खिंचवाते पर्यटकों के समूहों के पीछे दो बहुमंज़िला शॉपिंग सेंटर नज़र आते हैं. इन्हें आर्थिक कारणों के चलते बंद करना पड़ा है. एक कुछ महीने पहले बंद हुआ है और दूसरे के बारे में पता चला कि यह सात साल से ख़ाली है.
कुछ लोग जो पहले स्टॉल लगाया करते थे, वे पहली वाली इमारत के सामने अपनी गाड़ी के पिछले हिस्से में रूसी गिफ़्ट और गैजेट्स रखकर बेच रहे हैं.
एक महिला कहती हैं, “काम अच्छा नहीं चल रहा. पर्यटक ज़्यादा नहीं हैं.”
“कोविड के बाद ज़्यादा समय तक बॉर्डर को नहीं खोला गया. बहुत कम रूसी यहां आ रहे हैं. वे ग़रीब हैं और जंग में उलझे हुए हैं.”
जब वह ये सब बता रही थीं, बाक़ी लोग सिर हिलाते हुए सहमति जता रहे थे.
पास ही एक गली में एक महिला एक छोटी सी दुकान में रूसी फ़र इस्तेमाल करके चीन में ही बनाए गए हैट बेच रही थीं. वह बताती हैं कि ये हैट रूस और चीन के ग्राहकों को बहुत पसंद थे लेकिन अब उनका कारोबार ठंडा पड़ा है.
वह कहती हैं, “अब आप पहले के दौर के साथ तुलना नहीं कर सकते. आप गलियों पर नज़र दौड़ाइए, ये ख़ाली पड़ी हैं. पहले ये ख़रीददारों से भरी रहती थीं.”
हालांकि, वहां एक ऐसा समूह भी मिला जो रूस-चीन व्यापार को लेकर ज़्यादा उत्साहित था. ये ट्रक चलाने वाले ड्राइवर थे जो नदी पर चलने वाली नावों के पोर्ट में दाख़िल होने का इंतज़ार कर रहे थे.
एक ड्राइवर ने कहा, “मैं रूस से आए सोयाबीन, गेहूं और जौ की ढुलाई कर रहा हूं. हम पहले से ज़्यादा व्यस्त हैं.”
एक अन्य ने कहा, “मैं रूस से लाए गए रेत और कोयले को ढो रहा हूं. बाक़ी लोग खाने के कंटेलर ला रहे हैं.”
पोर्ट का प्रवेश द्वार व्यस्त नज़र आता है. यहां कई तरह का सामान लाया, ले जाया जा रहा था. जहाज़ों पर लदे स्टील के फ्रेम, कोयले और रेत को क्रेन की मदद से उठाकर ट्रकों पर लादा जा रहा था.
ड्राइवरों का कहना था कि दोनों देशों के बीच नदी का रास्ता इसलिए ज़्यादा इस्तेमाल होता है क्योंकि नए पुल की तुलना में नाव ज़्यादा सस्ती पड़ती है.
पुतिन के मुरीद चीनी नागरिक
हेइह के अन्य कारोबारियों का कहना है कि चीनी सामान पर रूस द्वारा लगाए गए नए आयात शुल्क के कारण कारोबार का माहौल सुस्त पड़ा है.
चीन इसके बावजूद यूक्रेन पर हमला करने के कारण प्रतिबंधों का सामना कर रहे अपने साथी रूस की मदद कर रहा है. वह अपने उत्तर-पूर्वी प्रांत हेइलोंगजियांग के लिए रूस से और ज़्यादा प्राकृतिक गैस की सप्लाई ले रहा है.
यही नहीं, शी जिनपिंग के प्रशासन ने चीनी जनता को व्लादिमीर पुतिन के जंगी अभियान के पक्ष में लाकर खड़ा कर दिया है.
ऐसा सरकारी नियंत्रण वाले मीडिया के माध्यम से किया गया है जो यूक्रेन में किसी ‘आक्रमण’ या ‘युद्ध’ का ज़िक्र नहीं करता. बल्कि इस युद्ध को नेटो, ख़ासकर अमेरिका के विस्तारवादी रवैये के ख़िलाफ़ चलाया जा रहा रूसी अभियान बताया जाता है.
हेइलोंगजियांग की राजधानी हार्बिन के लोगों से बात करके आपको पता चल जाएगा कि प्रचार के लिए अपनाई गई यह रणनीति कितनी कामयाब है.
एक सदी पहले यहां रूसी लोगों और रूसी संस्कृति का बहुत प्रभाव था. मगर अब उन लोगों के वंशज भी यहां से जा चुके हैं. अब यह पूरी तरह चीनी शहर है और रूसी इतिहास की कुछ ही निशानियां बाक़ी हैं.
चीन के दूसरे प्रांतों से आए पर्यटक यहां ख़ूबसूरत रूसी ऑर्थडॉक्स गिरजाघर के सामने तस्वीरें खिंचवा रहे हैं.
एक महिला ने कहा, “रूस और चीन के बीच अच्छी दोस्ती है.”
बगल में खड़े दूसरे शख़्स ने कहा, “पुतिन एक ज़िम्मेदार नेता हैं. ऐसी व्यक्ति जिन्हें न्याय की समझ है.”
अपने दोस्त के साथ आए एक अन्य पर्यटक ने कहा, “पुतिन एक दबंग शख़्स हैं. वह सख़्त हैं और सख़्त होना अच्छा होता है.”
लेकिन क्या इन्हें पता है कि पुतिन ने यूक्रेन के साथ जंग क्यों छेड़ी हुई है?
इसके बारे में वह कहते हैं, “हम जैसे आम लोगों को इस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए.”
यूक्रेन युद्ध से चीन को फ़ायदा?
हो सकता है कि रूस की जंग के कारण चीन के रणनीतिक लक्ष्य पूरे हो रहे हैं क्योंकि इस जंग में नेटो के संसाधन खर्च होकर घट रहे हैं.
कुछ लोगों का मानना है कि इस जंग के कारण इस विचार को भी बढ़ावा मिल रहा है कि अमेरिका के क़रीब जाने का मतलब है ख़तरे और यहां तक कि अव्यवस्था को न्योता देना.
हालांकि, इसका दूसरा पहलू यह भी है कि यूक्रेन युद्ध के कारण नैटो की ताक़त बढ़ सकती है जबकि पहले से ही जूझ रही रूसी अर्थव्यवस्था की हालत ख़राब हो सकती है.
यही नहीं, इससे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को यह संदेश भी मिला है कि अगर उसने ताक़त से ताइवान पर कब्ज़े की कोशिश की तो उसे किन दिक्कतों और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा.
आधिकारिक तौर पर व्लादिमीर पुतिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड अभियान (बीआरआई) की दसवीं वर्षगांठ पर हो रहे सम्मेलन में भाग लेने आए हैं.
बीआरआई के तहत चीन एक वैश्विक परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करके देशों को अपने पश्चिमी हिस्से से जोड़ना चाहता है. लेकिन उसे ग़रीब देशों को अपने कर्ज़ के जाल में फंसाने को लेकर आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ता है.
जब चीन और रूस के नेता इस सम्मेलन के इतर मुलाक़ात करेंगे तो उनकी कोशिश होगी कि वे अपने सम्बंधों को मज़बूत करें ताकि पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ अपनी तरह सोच वाली सरकारों के साथ एक गठबंधन बना सकें. और ज़ाहिर है, इससे उन्हें फ़ायदा होगा.
हालांकि, चीन को रूस से साथ व्यापार को अभी भी उस स्तर तक ले जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी होगी, जितना व्यापार वह उन पश्चिमी देशों के साथ करता है, जो उसके वैचारिक दुश्मन बताए जाते हैं.
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