ब्राज़ील के मूल निवासी ही अमेज़न को बचा सकते हैं? - दुनिया जहान

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इस वर्ष अप्रैल में अमेज़न के 6,000 से अधिक मूल निवासी ब्राज़ील की राजधानी ब्राज़ीलिया में इकठ्ठा हुए.
उनकी मांग थी की देश के नए राष्ट्रपति लूइज़ इनासियो लूला डिसिल्वा ऊर्फ़ लूला, अमेज़न वनों और मूल निवासियों की भूमि को बचाने के अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए कदम उठाएं.
आपको याद होगा इससे पहले ब्राज़ील के पूर्व राष्ट्रपति ज़ाएर बोल्सेनारो ने अमेज़न की भूमि पर खेती, खनन और वनों की कटाई को मंज़ूरी दे दी थी.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रपति लूला के कार्यकाल के पहले छ: महीनों में ही वनों की कटाई में 33% की कमी आई थी. मगर मूल निवासियों के कई नेता चाहते हैं कि लूला और व्यापक कदम उठाएं ताकि वनों की कटाई पर पूरी तरह से रोक लगे.
वो चाहते हैं कि सरकार उनके वनों और भूमि की रक्षा करने के लिए उनके साथ मिल कर काम करे.
इस सप्ताह दुनिया जहान में हम जानेंगे कि क्या ब्राज़ील के मूल निवासी अमेज़न को बचा सकते हैं?

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ब्राज़ील के मूल निवासी
पेड्रो सेज़ारिनो साओ पावलो यूनिवर्सिटी में एंथ्रोपोलॉजी के प्रोफ़ेसर हैं और अमेज़न के मूल निवासियों के इतिहास के बारे में जानकार हैं.
वो कहते हैं कि जब पहली बार 16वीं सदी की शुरुआत में यूरोपीय उपनिवेशवादी लातिन अमेरिका पहुंचे तब ब्राज़ील में मूल निवासियों की आबादी लगभग एक करोड़ 10 लाख के करीब थी. आज वहां मूल निवासियों की आबादी केवल 16 लाख रह गई है जो कि ब्राज़ील की आबादी का एक छोटा सा हिस्सा है.
पेड्रो सेज़ारिनो कहते हैं, “अब मूल निवासियों की आबादी ब्राज़ील की कुल आबादी में 1% से भी कम है. हालांकि वो पूरे देश में फैले हुए हैं लेकिन उनमें से अधिकांश अमेज़न बेसिन क्षेत्र में रहते हैं. मूल निवासियों के लगभग 300 जातीय गुट हैं और वहां 270 से अधिक भाषाएं बोली जाती हैं.”
पेड्रो सेज़ारिनो का मानना है कि यूरोपीय लोगों के आने के तुरंत बाद से ही यहां के मूल निवासियों की आबादी घटने लगी.
उनका कहना है कि कोलोनाइज़ेशन की शुरुआत से ही मूल निवासियों का शोषण शुरू हो गया था. उनकी ज़मीनें हड़प ली गईं और उन्हें ग़ुलाम बना कर रखा जाने लगा.
और जैसे जैसे पुर्तगालियों ने देश के अधिकाधिक क्षेत्र पर कब्ज़ा जमाया, मूल निवासियों की स्थिति बिगड़ती गई. औद्योगीकरण के बाद यह और बदतर हो गई.
इसका एक कारण था मोटर गाड़ियों के आविष्कार के बाद दुनिया में रबर की मांग में हुई वृद्धि.
वो कहते हैं, “रबर उद्योग के कारण मनाउस और दूसरे कई शहर अमीर हो गए क्योंकि यहां से रबर का निर्यात होने लगा. रबर उत्पादन के लिए मूल निवासियों को गुलाम बना कर काम करवाया जाता था. उनकी स्थिति बहुत ही मुश्किल थी.”
लेकिन रबर की मांग घटने के बाद एक दूसरी समस्या आ खड़ी हुई. खनन कंपनियां सोने की तलाश में अमेज़न बेसिन में आने लगीं. ब्राज़ील में एक के बाद दूसरी कई सरकारों से उन्हें प्रोत्साहन मिला.

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पेड्रो सेज़ारिनो के अनुसार, खनन की वजह से नॉर्थे अमेज़ोनिया के यानोनामी समुदाय की संस्कृति और वजूद को ख़तरा पैदा हो गया था. पिछली सरकारों ने इसे रोकने की कोशिश नहीं की.
मगर राष्ट्रपति लूला की सरकार ने खनिकों को वहां से हटाने के लिए कदम उठाए हैं. इसलिए फ़िलहाल वहां स्थिति बेहतर है.
सेज़ारिनो कहते हैं कि यह एक सामाजिक समस्या है. अगर खनिकों को एक जगह से हटाया जाए तो वो दूसरी जगह जाकर अपना काम शुरू कर देते हैं.
ब्राज़ील के मूल निवासियों ने सदियों से अपने परंपरागत प्राकृतिक तरीकों से अमेज़न के वर्षावनों को सुरक्षित रखा था. लेकिन ब्राज़ील सरकार की नीतियों की वजह से मूल निवासियों के अस्तित्व और संस्कृति को ख़तरा पैदा हो गया है और यह आशंका भी बढ़ गई है कि मूल निवासियों के साथ ही वर्षावनों के संरक्षण के प्राकृतिक तरीके और उसकी जानकारी भी लुप्त हो जाएगी.
पेड्रो सेज़ारिनो ने कहा, “मूल निवासियों के पास प्राचीन काल से ही इन वनों का संरक्षण करने की जानकारी रही है. वो वनों को नुकसान पहुंचाए बिना उसका लाभ लेना जानते हैं.”
वो कहते हैं, “आप अगर अमेज़न में मूल निवासियों के गांव जाएंगे तो वहां आपको कई ऐसी खाद्य सामग्री मिलेगी जो ब्राज़ील के शहरी इलाकों में नहीं पाई जाती. मिसाल के तौर पर अलग किस्म के आलू और केले मिल जाएंगे.”
“इन लोगों ने खान पान की सामग्री की कई किस्में बना ली थीं और वो वनों से जुड़ने और संरक्षण के ऐसे तरीके जानते हैं जिससे जैव विविधता बनी रहती है. पश्चिमी विज्ञान के पास यह जानकारी नहीं है.”
पेड्रो सेज़ारिनो का कहना है, “आज जब दुनिया में जलवायु परिवर्तन से पर्यावरण पर ख़तरा मंडरा रहा है, ऐसे में अमेज़न जैसे वर्षावनों और वहां के मूल निवासियों के वन संरक्षण के प्राकृतिक तरीकों और जानकारी को बचाने की ज़रूरत और अधिक है.”
अमेज़न में 400 अरब पेड़, 16,000 प्रजातियां
ब्रिटेन की ईस्ट एंग्लिया यूनिवर्सिटी में कंजरवेशन बायोलॉजी के प्रोफ़ेसर कार्लोस पेरेस की परवरिश ब्राज़ील के अमेज़न क्षेत्र में हुई थी और आज भी वो काफ़ी समय अमेज़न के वर्षावनों के संरक्षण से जुड़े काम में लगाते हैं.
वो बताते हैं कि अमेज़न वर्षा वन क्षेत्र के 60% हिस्से में फैले हुए हैं. और यह इलाका यूके के कुल क्षेत्रफल से 23 गुना बड़ा है.
उसकी विशेषता है वहां की जैव विविधता. वहां 400 अरब पेड़ हैं और पेड़ों की 16,000 प्रजातियां मौजूद हैं. साथ ही वहां पक्षियों की 1300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं.
“विश्व में सबसे अधिक जैव विविधता अमेज़न में पाई जाती है. अगर अमेज़न जंगलों की कटाई रोकी नहीं गई तो वहां की अधिकांश जैव विविधता लुप्त हो जाएगी.”
अमेज़न की जैव विविधता को सबसे बड़ा ख़तरा मांस उत्पादन के लिए व्यावसायिक पशुपालन और सोयाबीन की खेती से है.
कार्लोस पेरेस ने बताया कि, “पहले अमेज़न में जंगल कटाई करके साफ़ की गई ज़मीन पर पशुपालन होता था लेकिन पिछले कुछ सालों में यह इतना फ़ायदेमंद नहीं रहा है इसलिए लोग अब उस ज़मीन का इस्तेमाल सोयाबीन की खेती के लिए कर रहे हैं, क्योंकि उसमें मुनाफ़ा ज़्यादा है.”
“पिछले एक साल में ही 1 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर सोयाबीन की खेती शुरू कर दी गई. दूसरी समस्या है वहां सोने की खदानों से सोना निकालने के लिए पारे का इस्तेमाल. वहां की ज़मीन और पानी में अब पारे का स्तर काफ़ी बढ़ गया है. इस प्रदूषण से पर्यावरण को ही नहीं बल्कि लोगों को भी ख़तरा पैदा हो रहा है.”
पृथ्वी पर पानी और बारिश के स्तर को बरकरार रखने में अमज़ेन के वर्षा वनों की बड़ी भूमिका है.
कार्लोस पेरेस कहते हैं कि अमेज़न क्षेत्र में होने वाली बारिश का एक मुख्य स्रोत वहां के वर्षा वन हैं. वहां के बड़े पेड़ों की वजह से प्रतिदिन लगभग 1 लाख लीटर पानी हवा में घुलता है.
और इसकी वजह से होने वाली बारिश दक्षिणी ब्राज़ील से अर्जेंटीना तक पहुचंती है जहां बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री का उत्पादन होता है जो इस बारिश पर निर्भर है. अगर यह बारिश कम हो जाए तो अमेरिका के टेक्सस जैसे राज्य तक गर्मी की मार पड़ेगी.
कार्लोस पेरेस कहते हैं कि यह अनुमान है कि केवल अमेज़न के जंगल ही लगभग 90 अरब मीट्रिक टन कार्बन सोखतें हैं. इसलिए अमेज़न के वर्षा वनों की कटाई रोकना बहुत ज़रूरी है.

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राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा से उम्मीद
ऐना कैरोलीना अल्फ़िनीटो अमेज़न को बचाने के लिए काम करने वाले एनजीओ अमेज़न वॉच की कानूनी सलाहकार हैं.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि राष्ट्रपति चुनाव में लूला को अमेज़न बचाने के मुद्दे पर ही ब्राज़ील के मूल निवासियों की ओर से भारी समर्थन मिला था और बोल्सेनारो को सत्ता से बाहर करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी.
इस साल अप्रैल में तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद लूला ने सबसे पहले यह काम किया कि मूल निवासियों के मामलों के लिए एक नया मंत्रालय बनाया और इसका भार सोनिया ग्वाटेज़ारो को सौंपा जो ख़ुद एक मूल निवासी हैं.
राष्ट्रपति लूला के सामने अब इन नीतियों को अमल में लाकर चुनावी वादे पूरे करने की चुनौती है.
ऐना कैरोलीना अल्फ़िनीटो ने कहा कि, “यह तो साफ़ है कि अमेज़न वनों को लेकर मूल निवासियों की मांग और सरकार की नीतियों में कोई मतभेद नहीं है. मूल निवासियों की प्रमुख मांग है कि अमेज़न भूमि के हिस्सों का डिमार्केशन हो यानि उसे आरक्षित किया जाए.”
डिमार्केशन का अर्थ अमेज़न की भूमि के हिस्सों को रेखांकित करके आरक्षित किया जाए और मूल निवासियों को आरक्षित इलाकों में रहने का अधिकार दिया जाए और वहां व्यावसायिक खेती और खनन की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाए.
ऐना कैरोलीना अल्फ़िनीटो ने कहा कि, “मूल निवासियों की भूमि की मिल्कियत केंद्र सरकार को सौंपी जानी चाहिए ताकि यह ज़मीन कभी भी किसी और को बेची ना जा सके.”
“इसका इस्तेमाल करने की अनुमति केवल मूल निवासियों को मिले जिन्हें पारंपरिक तौर पर इस ज़मीन का मालिक समझा गया है.”
राष्ट्रपति लूला के लिए समस्या यह है कि उनके डीमार्केशन प्रस्ताव का ब्राज़ील की संसद में तीखा विरोध हो रहा है.
ऐना कैरोलीना अल्फ़िनीटो कहती हैं कि मौजूदा गठबंधन सरकार में कई विरोधाभास हैं और संसद में कई लोग ऐसे क़ानून बनाना चाहते हैं जिससे मूल निवासियों के हितों को नुकसान पहुंचेगा.

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ऐना कैरोलीना अल्फ़िनीटो ने कहा, “मूल निवासी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सरकार पर दबाव डालना है और राष्ट्रपति लूला से मांग करना है कि वो मूल निवासियों के भूमि अधिकार सुरक्षित करने के चुनावी वादे को पूरा करें, ज़मीन के डीमार्केशन की प्रक्रिया शुरू करें ताकि मूल निवासी वहां अपना जीवन बसर कर सकें.”
वहीं मूल निवासियों की मांग का विरोध करने वाले गुट ने एक क़ानूनी तर्क सामने रखा है.
उनका कहना है कि मूल निवासियों को उसी भूमि पर अधिकार मिलना चाहिए जो 1988 में उनके कब्ज़े में थी जब ब्राजील का मौजूदा संविधान बना था. इस मापदंड को लागू करने के लिए नए क़ानून पर विचार हो रहा है.
मगर मूल निवासियों का कहना है कि 1970 तक ज़मीन उनके कब्ज़े में थी और बाद में उन्हें वहां से खदेड़ दिया गया था. इसलिए उन्हें उस ज़मीन पर अधिकार मिलना चाहिए.
वो कहते हैं उस ज़मीन से उनका रूहानी रिश्ता है. मूल निवासियों ने नए प्रस्तावित क़ानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और इस दौरान अपनी ज़मीन की रक्षा के लिए वो कई कदम भी उठा रहे हैं.
ऐना कैरोलीना अल्फ़िनीटो ने कहा कि वो ज़मीन हथियाने वाले घुसपैठियों को रोक रहे हैं. जंगलों की कटाई पर नज़र रख रहे हैं.
वो यह जानकारी केंद्रीय पुलिस और सरकारी संस्थाओं को भेज रहे हैं. मूल निवासियों ने अपनी ज़मीन पर अधिकार जमाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला सितंबर में आने की संभावना है.
अल्फ़िनीटो कहती हैं अगर यह फ़ैसला मूल निवासियों के ख़िलाफ़ गया तो ये उनके लिए ही नहीं बल्कि पर्यावरण के संतुलन के लिए भी हानिकारक होगा क्योंकि जंगल की कटाई पर अंकुश नहीं रहेगा और अमेज़न वर्षा वनों को भारी नुकसान होगा.

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मूल निवासियों का दुनिया को संदेश
मूल निवासियों की दलील है कि अमेज़न के वर्षा वनों का भविष्य केवल उनका मुद्दा नहीं है बल्कि पूरे विश्व के भविष्य का मुद्दा है.
और यह संदेश दुनिया को दे रहे हैं कावा हूनी क्विन, जो मूल निवासियों के हूनी क्विन समुदाय के एक युवा नेता हैं. वो चाहते हैं कि दुनिया मूल निवासियों के जीने के तौर तरीके के बारे में जाने.
उन्होंने कहा, “मेरा समुदाय ब्राज़ील के आक्रे राज्य में रहता है. हमारे यहां दो नदियां हैं और कई गांव हैं. हम सामुदायिक जीवन जीते हैं. घर बनाना, पेड़ लगाना, मछलियां पकड़ना और दूसरे कई काम, हम मिल कर करते हैं. हम केले, तरबूज और कई अन्य फल उगाते हैं.”
ब्राजील के मूल निवासी सदियों से इस तरह जीते रहे हैं. लेकिन कावा हूनी कहते हैं कि ग़ैर मूल निवासियों के आने से उनकी जीवनशैली और संस्कृति अब ख़तरे में है.
“हम अपने समुदाय को वन संरक्षण के प्रति जागरूक रखते हैं. लेकिन शहर से आने वाले लोग मेरे समुदाय के लोगों पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं. वो पेड़ काट रहे हैं. हमारे इलाक़े को नष्ट कर रहे हैं जबकि हम अपने जंगलों और जानवरों और संस्कृति को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.”

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कावा हूनी क्विन कहते हैं कि मूल निवासियों के पास पर्यावरण को सुरक्षित रखने की गहरी जानकारी और समझ है और दुनिया को इस बारे में मूल निवासियों से सीखना चाहिए.
“हर वर्ष मौसम बिगड़ रहा है, गर्मी बढ़ रही है. मूल निवासी सदियों से प्रकृति के साथ मेल रख कर जीते आए हैं. दुनिया को हमसे सीखना चाहिए. अगली पीढ़ी के बारे में सोचना चाहिए. लेकिन मुझे लगता है बड़ी कंपनियां और बाहर से आए किसान अगली पीढ़ी के बारे में नहीं सोचते. वो सिर्फ नुकसान करते हैं और समस्याएं खड़ी करते हैं.”
मगर कावा हूनी मूल निवासियों के अधिकारों के बारे में राष्ट्रपति लूला की नई प्रतिबद्धता के बारे में क्या सोचते हैं?
कावा हूनी क्विन चेतावनी देते हैं, “मुझे लगता है कि लूला हमारी बात सुन रहे हैं. लेकिन अगर वो हमारी बात नहीं सुनेंगे तो मूल निवासी और अधिक सहन नहीं करेंगे. इससे पूरी दुनिया के लिए समस्या खड़ी हो जाएगी.”
ऐसा लगता है कि ब्राज़ील के मूल निवासियों की बात पर अब ध्यान दिया जा रहा है. इस महीने की शुरुआत में आठ अमेज़न देशों के नेताओं ने ब्राज़ील के बेलेम शहर में मुलाक़ात करके वर्षा वनों की कटाई को कम करने की प्रतिबद्धता जताई है.
मगर कई लोग चाहते हैं कि वर्षा वनों की कटाई पर पूरी तरह रोक लगे.
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